ब्रम्होस मिसाइल का सफल परीक्षण

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ब्रम्होस मिसाइल का सफल परीक्षण

सन्दर्भ

    रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) तथा रूस के वैज्ञानिकों के संयुक्त प्रयास से निर्मित सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रम्होस का ओडिशा के चांदीपुर आइटीआर (एकीकृत परीक्षण रेंज) के एलसी (लांच कॉम्प्लेक्स)-3 से परीक्षण किया गया।

ब्रम्होस मिसाइल के बारे में

  • यह मिसाइल 8.4 मीटर लंबी है। इसका वजन तीन हजार किलोग्राम है।
  • यह 300 किलोग्राम तक विस्फोटक ढोने तथा 350 किलोमीटर तक मार करने की क्षमता रखती है।
  • यह सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल, आवाज की गति से भी 2.8 गुना तेज जाने में सक्षम है।
  • इस मिसाइल को पानी के जहाज, विमान, जमीन एवं मोबाइल लांचर से छोड़ा जा सकता है। इसे किसी भी दिशा में लक्ष्य की तरफ मनचाहे तरीके से छोड़ा जा सकता है।
  • यह हवा में मार्ग बदल सकती है और घनी शहरी आबादी में भी छोटे लक्ष्यों को सटीक रूप से भेदने में सक्षम है।
  • यह रडार की पकड़ में नहीं आती, इसको मार गिराना लगभग असंभव है।

पृष्ठभूमि

  • ब्रह्मोस एक कम दूरी की सुपरसॉनिक क्रूज मिसाइल है। इसे पनडुब्बी से, पानी के जहाज से, विमान से या जमीन से भी छोड़ा जा सकता है। यह कम ऊंचाई पर तेजी से उड़ान भरती है और इस तरह से रेडार की आंख से बच जाती है। ब्रह्मोस का पहल सफल लॉन्च 12 जून, 2001 को ओडिशा के चांदीपुर तट हुआ था। इसका नाम भारत की ब्रह्मपुत्र नदी और रूस की मस्कवा नदी पर रखा गया है।
  • इस सफल परीक्षण के नतीजतन भारतीय सशस्त्र बलों के भंडार में रखी मिसाइलों की जगह दूसरी मिसाइलें लाने पर आने वाली लागत में भारी बचत होगी।
  • डीआरडीओ के वैज्ञानिकों ने कहा कि दो चरणों वाली मिसाइल को पहले ही थल सेना और नौसेना में शामिल किया जा चुका है। इसके साथ ही वायु सेना के संस्करण का भी सफलतापूर्वक परीक्षण किया जा चुका है। इन दो चरणों वाली मिसाइलों में पहली ठोस है जबकि दूसरी रैमजेट तरल प्रणोदक है। ब्रह्मोस के संस्करणों को भूमि, वायु, समुद्र और जल के अंदर से दागा जा सकता है।

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