राष्ट्रीय पवन-सौर हाइब्रिड नीति

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राष्ट्रीय पवन-सौर हाइब्रिड नीति

    नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के द्वारा राष्ट्रीय पवन-सौर हाइब्रिड नीति जारी की है।

उद्देश्य:

  • इस नयी नीति का उद्देश्य ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर और भूमि के कुशल उपयोग के लिए बड़े ग्रिड से जुड़े पवन-सौर पीवी हाइब्रिड सिस्टम को बढ़ावा देने के लिए एक बेहतर ढांचा प्रदान करना है।
  • इसका उद्देश्य अक्षय ऊर्जा उत्पादन में परिवर्तनशीलता को कम करना और बेहतर ग्रिड स्थिरता प्राप्त करना भी है।

प्रमुख तथ्य:

  • तकनीक के मोर्चे पर यह नीति एसी (AC) के साथ ही डीसी (DC) स्तर पर ऊर्जा स्रोतों जैसे पवन ऊर्जा और सौर ऊर्जा दोनों के एकीकरण के लिए दिशा प्रदान करती है।
  • नीति हाइब्रिड परियोजना में हवा और सौर घटकों के हिस्से में लचीलापन भी प्रदान करती है। लेकिन शर्त यह है कि, हाइब्रिड प्रोजेक्ट को मान्यता प्राप्त करने के लिए एक संसाधन की रेटेड पावर क्षमता अन्य संसाधनों की रेटेड पावर क्षमता का कम से कम 25 प्रतिशत होना चाहिए।
  • यह नीति नई हाइब्रिड परियोजनाओं के साथ-साथ मौजूदा पवन / सौर परियोजनाओं के हाइब्रिडाइजेशन को बढ़ावा देने की कोशिश करती है। मौजूदा पवन – सौर परियोजनाओं को स्वीकृत परियोजनों की तुलना में अधिक संचरण क्षमता के साथ हाइब्रिड किया जा सकता है।
  • यह नीति हाइब्रिड परियोजना से बिजली की खरीद के लिए टैरिफ आधारित पारदर्शी बोली प्रक्रिया प्रदान करती है, जिसके लिए सरकारी संस्थाएं बोलियां आमंत्रित कर सकती हैं।
  • नीति आउटपुट को अनुकूलित करने और परिवर्तनशीलता को कम करने के लिए हाइब्रिड प्रोजेक्ट में बैटरी स्टोरेज के उपयोग की भी अनुमति देती है।

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