वर्ष 2016 में क्षय रोग से होने वाली मौतों के मामले में भारत पहले स्थान पर: डब्ल्यूएचओ

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प्रस्तावना

    विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा जारी एक रिपोर्ट में इस तथ्य का खुलासा हुआ है कि वर्ष 2015 की तुलना में वर्ष 2016 में भारत में क्षय रोग से होने वाली मौतों की संख्या में 12% की कमी आई है।

प्रमुख बिंदु

  • वर्ष 2016 में 1.7 मिलियन नए मामलों के साथ ही भारत विश्व में क्षय रोग के नए मामलों का सबसे बड़ा योगदानकर्त्ता था।
  • इस वर्ष भारत में क्षय रोग से होने वाली मौतों के मामलों में आई गिरावट के बावजूद भी भारत में इस रोग से पीड़ित लोगों की संख्या विश्व के कुल रोगियों की संख्या का 32% है।
  • वर्ष 2016 में क्षय रोग संक्रमण की जाँच के लिये आणविक उपचार परीक्षण किये गए थे जिससे ड्रग प्रतिरोधी क्षय रोग (drug-resistant TB) का पता लगाने में मदद मिली।
  • भारत सरकार ने वर्ष 2035 तक 90-90-90 लक्ष्य को प्राप्त करने की प्रतिबद्धता ज़ाहिर की है। इसका तात्पर्य है कि क्षय रोग के कारण होने वाली घटनाओं, मृत्यु दर और स्वास्थ्य व्यय में 90% कमी लाई जाएगी।
  • भारत में पंजीकृत एमडीआर-टीबी के मामलों में वृद्धि हुई है। जहाँ वर्ष 2015 में इनकी संख्या 79,000 थी वहीं 2016 में यह बढ़कर 84,000 हो गई थी।
  • इस लक्ष्य की पूर्ति निदान के तरीकों में सुधार करके, उपचार के लिये छोटे कोर्स उपलब्ध कराकर, एक अच्छा टीकाकरण उपलब्ध कराकर तथा व्यापक निवारक रणनीतियों का उपयोग करके की जा सकती है।
  • हालाँकि पहले यह अनुमान लगाया गया था कि भारत में इस रोग के कारण होने वाली मौतों की संख्या में वृद्धि दर्ज़ की जाएगी।

क्षय रोग क्या है

  • क्षय रोग मायकोबैक्टीरियम ट्यूबरक्लोसिस नामक जीवाणु के कारण होता है, जो कि मुख्यतः फेफड़ों को प्रभावित करता है। इससे बचाव अथवा इसकी रोकथाम संभव है। यह हवा के माध्यम से व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलता है।
  • विश्व की एक चौथाई जनसंख्या लेटेंट टीबी (latent TB) से ग्रस्त है। लेटेंट टीबी का अर्थ यह कि लोग टीबी के जीवाणु से संक्रमित तो हो जाते हैं परन्तु उन्हें यह रोग नहीं होता है और वे इसका संचरण अन्य व्यक्तियों तक नहीं कर सकते हैं।

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