रक्त कणिकाएं Blood Corpuscles

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रक्त कणिकाएं Blood Corpuscles

रक्त कणिकाएं (जिसे रक्त कणिका भी कहा जाता है) रक्त मे पायी जाने वाली कोई एक कणिका (कोशिका) है। स्तनधारियों में इन कोशिकाओं की मुख्यतः तीन श्रेणियां होती हैं:

  • लाल रक्त कणिकाएं (RBC),
  • श्वेत रक्त कणिकाएं (WBC) एवं
  • रक्त विम्बाणु या प्लेटलेट्स।

लाल रक्त कणिकाएं Red blood cells or Red Blood Corpuscles (RBCs), Erythrocytes

  • लाल रक्त कोशिकायें रूधिरवर्णिका (हीमोग्लोबिन) के माध्यम से ऑक्सीजन शरीर के विभिन्न अवयवों को पहुंचाती है।
  • लाल रक्त कोशिकाएं कार्बन डाइऑक्साइड को फेफड़ों तक पहुंचा कर उसे शरीर से निकालने का भी काम करती हैं।
  • लाल रक्त कोशिकाओं का निर्माण अस्थि मज्जा (bone marrow) में होता है। इनका जीवनकल 120 दिनों का होता है, इसके बाद वे नष्ट हो जाती हैं। आयरन युक्त भोजन लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण में सहायक होते हैं, विटामिन भी स्वस्थ लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण के लिए आवश्यक हैं। विटामिन ई, विटामिन बी 2, बी 12, और बी 3 इन कोशिकाओं के निर्माण में सहायक हैं।
  • आहार में लोहे या विटामिन की कमी से कई लाल रक्त कोशिकाओं से सम्बंधित कई बिमारिय हो सकती हैं। लाल रक्त कोशिकाओं से सम्बंधित कई बीमारियाँ आनुवांशिक हो सकती हैं।
  • लाल रक्त कोशिकाओं से सम्बंधित प्रमुख रोग एनीमिया है, जिसमे लाल रक्त कोशिकाओं का उत्पादन सामान्य रूप से नहीं हो पाता है, जिससे शरीर को ऑक्सीजन की पर्याप्त आपूर्ति नहीं हो पाती है। एनीमिया से पीड़ित व्यक्ति की लाल रक्त कोशिकाएं असामान्य आकार की हो जाती हैं। एनीमिया के प्रमुख लक्षणों में, थकान, अनियमित दिल की धड़कन, पीली त्वचा, ठंड लगना गंभीर मामलों में दिल की विफलता, आदि शामिल हैं।
  • लाल रक्त कोशिकाओं की कमी से पीड़ित बच्चों में अन्य बच्चों की तुलना में धीरे धीरे विकास होता है। ये लक्षण ये प्रदर्शित करते हैं, कि लाल रक्त कोशिकाएं हमारे जीवन में कितनी महत्वपूर्ण हैं। कुछ सामान्य प्रकार के एनीमिया इस प्रकार होते हैं-
  • श्वेत रक्त कणिकाएं White blood cells (WBCs), Leukocytes or Leucocytes

    श्वेत रक्त कोशिकाएं हमारी रक्त प्रणाली के एक महत्वपूर्ण घटक हैं। यद्यपि यह हमारे शरीर की केवल 1% होती हैं परन्तु हमारे स्वास्थ्य पर इनका प्रभाव महत्वपूर्ण है। ल्यूकोसाइट्स या सफेद रक्त कोशिकायें, बीमारी और बीमारी के खिलाफ अच्छे स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए आवश्यक हैं। 500 RBCs के बीच में एक WBC होती है।
    श्वेत रक्त कोशिकाएं का अस्थि मज्जा के अंदर ही उत्पादन होता है, और ये रक्त और लसीका ऊतकों (lymphatic tissues) में जमा रहती है। श्वेत रक्त कोशिकाओं का जीवन छोटा है, इसलिए इनका उत्पादन लगातार होता रहता है। ये दो प्रकार की होती हैं-

    • कणिकामय श्वेत रक्त कणिकाएं Granulocytes
    • कणिकारहित श्वेत रक्त कणिकाएं Agranulocytes

    कणिकामय श्वेत रक्त कणिकाएं Granulocytes
    ये तीन प्रकार की होती हैं-

    1- बेसोफिल्स Basophils- यह लगभग 5% होती हैं। ये संक्रमण के समय अलार्म का कम करती हैं। ये हिस्टामिन (histamine) नाम के एक रसायन का स्रावण करती हैं, जो एलर्जी रोगों का सूचक होता है और शरीर की प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को नियंत्रित करने में मदद करता है।

    2- इओसिनोफिल्स Eosinophils– 3% होती हैं। ये परजीवियों को मारने, कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने और एलर्जी प्रतिक्रियाओं के खिलाफ सहायता प्रदान करती हैं।

    3- न्यूट्रोफिल्स Neutrophils– लगभग 67% होती हैं। ये बैक्टीरिया और कवक आदि को मारकर पचाने का कम करती हैं। शरीर में इनकी संख्या सबसे ज्यादा होती है। संक्रमण हमलों की स्थिति में ये रक्षा की पहली पंक्ति में होती हैं।

    कणिकारहित श्वेत रक्त कणिकाएं Agranulocytes

    ये भी 3 प्रकार की होती हैं

    1- लिम्फोसाइट lymphocytes– ये लगभग 25% होती हैं। वे बैक्टीरिया, वायरस और अन्य संभावित हानिकारक संक्रमणों के खिलाफ की रक्षा के लिए एंटीबॉडी पैदा करती हैं।

    2- मोनोसाइट्स Monocytes– ये लगभग 1.5% तक होती हैं। ये मुख्यतः जीवाणुओं को नष्ट करती हैं।

    3- मेक्रोफेजेस Macrophages– लगभग 3% तक होती हैं।

    रक्त विम्बाणु या प्लेटलेट्स Platelets or Thrombocytes

  • प्लेटलेट्स आकर में प्लेट की तरह, छोटी रक्त कोशिकाए होती है, जो रक्तस्राव (bleeding) को रोकने के लिए रक्त का थक्का ज़माने में मदद करती हैं। साथ ही वे कुछ रसायनों का भी स्राव करती हैं जो अन्य प्लेटलेट्स को रक्तस्राव की जगह पर पहुँचाने के लिए संकेत देते हैं।
  • प्लेटलेट्स का निर्माण भी श्वेत और लाल रक्त कणिकाओं के साथ ही अस्थि मज्जा में होता है। इनका जीवन काल लगभग 10 दिनों का होता है। इनमे केन्द्रक नहीं पाया जाता है।
  • प्लेटलेट की संख्या अधिक और कम होने पर क्या होता है?

    असामान्य प्लेटलेट से निम्न चिकित्सीय प्रभाव हो सकते हैं-

    1- थ्रोम्बोसाइटोपेनिया Thrombocytopenia– इस स्थिति में अस्थि मज्जा में बहुत कम प्लेटलेट का निर्माण होता है, या किसी कारणवश ये नष्ट हो जाती हैं। इस कारन रक्तस्राव या आन्तरिक रक्तस्राव होता रहता है। थ्रोम्बोसाइटोपेनिया कई दवाओं, कैंसर, गुर्दे की बीमारी, गर्भावस्था, संक्रमण, और एक असामान्य प्रतिरक्षा प्रणाली (abnormal immune system) आदि कई कारणों से हो सकता है।

    2- थ्रोम्बोसाइटोथीमिया Thrombocythemia– इस स्थिति में अस्थि मज्जा प्लेटलेट्स का ज्यादा निर्माण करने लगती है (1 माइक्रोलीटर में 10 लाख से ज्यादा)। जिसके कारन मस्तिष्क या दिल की रक्त की आपूर्ति में अवरोध उत्पन्न हो सकता है। थ्रोम्बोसाइटोथीमिया के कारन अभी अज्ञात हैं।

    3- थ्रोम्बोसाइटोसिस Thrombocytosis– यह स्थिति भी अधिक प्लेटलेट निर्माण के कारन ही उत्पन्न होती है, लेकिन इसका कारण असामान्य अस्थि मज्जा (abnormal bone marrow) द्वारा अधिक मात्रा में प्लेटलेट का निर्माण नहीं होता है। शरीर में बीमारी या अन्य किसी परिस्थितियों के कारण अस्थि मज्जा अधिक प्लेटलेट्स बनाने लगता है। थ्रोम्बोसाइटोसिस से पीड़ित एक तिहाई व्यक्ति कैंसर से पीड़ित होते हैं। अन्य कारणों में संक्रमण, सूजन, और दवाओं से होने वाली प्रतिक्रियायें शामिल हैं।

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