समसामयिकी जनवरी : CURRENT AFFAIRS JANUARY :1-7

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भारत और कजाखस्तान ने दोहरा कराधान निवारण संधि (डीटीएसी) में संशोधन के लिए प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर

    भारत और कजाखस्तान ने दोनों देशों के बीच मौजूदा दोहरा कराधान निवारण संधि (डीटीएसी) में संशोधन के लिए एक प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर किए। आय पर लगने वाले करों के संदर्भ में दोहरे कराधान को टालने और वित्तीय अपवंचन की रोकथाम के उद्देश्य से इस पर हस्ताक्षर किए गए थे।

प्रोटोकॉल की विशेष बातें निम्नलिखित हैं :

  • प्रोटोकॉल में कर संबंधी मसलों की जानकारी के कारगर आदान-प्रदान के लिए अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मान्य मानकों का उल्लेख है। इसके अलावा, कर संबंधी उद्देश्यों से कजाखस्तान से प्राप्त होने वाली सूचनाओं को कजाखस्तान के सक्षम प्राधिकरण की अधिकृत अनुमति से अन्य विधि प्रवर्तन एजेंसियों से साझा किया जा सकता है। इसी तरह कर संबंधी उद्देश्यों से भारत से प्राप्त होने वाली सूचनाओं को भारत के सक्षम प्राधिकरण की अधिकृत अनुमति से अन्य विधि प्रवर्तन एजेंसियों से साझा किया जा सकता है।
  • प्रोटोकॉल में ‘लाभ की सीमा’ से जुड़ा अनुच्छेद है, ताकि डीटीएसी का दुरुपयोग रोका जा सके और इसके साथ ही कर अदायगी से बचने अथवा इसकी चोरी के विरुद्ध बनाए गए घरेलू कानून और संबंधित उपायों को लागू किए जाने की अनुमति दी जा सके।
  • ट्रांसफर प्राइसिंग मामलों में आर्थिक दोहरे कराधान से राहत देने के उद्देश्य से भी इस प्रोटोकॉल में कुछ अन्य विशिष्ट प्रावधान किए गए हैं। यह करदाताओं के अनुकूल कदम है।
  • प्रोटोकॉल में एक तय सीमा के साथ सर्विस संबंधी पीई (स्थायी प्रतिष्ठान) के लिए भी प्रावधान हैं। इसमें इस बात का भी उल्लेख किया गया है कि पीई के खाते में जाने वाले लाभ का निर्धारण संबंधित उद्यम के कुल लाभ के संविभाजन के आधार पर किया जाएगा।

भारत ने सिंगापुर के साथ दोहरे कराधान से बचाव की संधि (डीटीएए) में संशोधन के लिए समझौते पर हस्ताक्षर

    भारत ने सिंगापुर के साथ दोहरे कराधान से बचाव की संधि (डीटीएए) में संशोधन के लिए इस दक्षिण पूर्व एशियायी देश के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए जिसके तहत वहां के रास्ते आने वाले निवेश पर अगले अप्रैल से पूंजी लाभ पर कर लागू होगा। इसका उद्देश्य निवेश के नाम पर काले धन की हेराफेरी पर अंकुश लगाना है।

समझौते की विशेष बातें निम्नलिखित हैं

  • सिंगापुर के साथ किये गये संशोधित संधि के तहत एक अप्रैल 2017 से दो साल के लिये पूंजी लाभ कर मौजूदा घरेलू दर का 50 प्रतिशत के हिसाब से लगाया जाएगा। पूर्ण दर एक अप्रैल 2019 से लागू होगी।
  • संधि में संशोधन के जरिये अस्तित्व में रहे कालाधन बनाने के नियम को खत्म कर दिया है। पूंजी लाभ देनदारी को आधा-आधा साझा किया जाएगा तथा उसके बाद पूरी पूंजी भारत आएगी।

दोहरा कराधान बचाव समझौता (डीटीएए):

    दोहरा कराधान बचाव समझौता (डीटीएए) मूल रूप से दो देशों के बीच होने वाला द्विपक्षीय समझौता है। डीटीएए के प्रावधान किसी देश विशेष के कर नियमों के सामान्य प्रावधानों के अतिरिक्त हैं।

वित्तीय डेटा प्रबंधन केन्द्र की स्थापना का प्रस्ताव

    केंद्र सरकार ने आर्थिक मामलों के विभाग (डीईसी) के अंतर्गत स्थापित की गयी एक समिति की सिफारिशों के आधार पर वित्तीय डेटा प्रबंधन केंद्र (FDMC) की स्थापना का प्रस्ताव किया है। समिति केंद्रीय वित्त मंत्रालय में अपर सचिव अजय त्यागी, की अध्यक्षता में गठित की गई थी। इसने समिति ने अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी और एक मसौदा विधेयक, वित्तीय डेटा प्रबंधन केंद्र विधेयक, 2016 के शीर्षक से भी तैयार किया।

वित्तीय डेटा प्रबंधन केंद्र के कार्य:

  • सभी वित्तीय क्षेत्र के नियामकों से डेटा मानकीकृत कर एक एकल डाटाबेस में करना और आंकड़ों के आधार पर अर्थव्यवस्था में स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए विश्लेषणात्मक अंतर्दृष्टि प्रदान करना।
  • नियामकों से डेटा के मानकीकरण के लिए कदम उठाने, एक मानकीकृत इलेक्ट्रॉनिक स्वरूप में डेटा प्रस्तुत करने के लिए वित्तीय सेवा प्रदाताओं को सक्षम बनाना और एक वित्तीय प्रणाली डेटाबेस को बनाए रखना।
  • वित्तीय नियामक डेटा इकट्ठा करना और इस तक पहुँच प्रदान करने के साथ ही वित्तीय प्रणाली के डेटाबेस को स्थापित करना, संचालित करना और बनाए रखना।
  • वित्तीय स्थिरता से संबंधित मुद्दों पर वित्तीय स्थिरता और विकास परिषद (एफएसडीसी) के लिए विश्लेषणात्मक समर्थन प्रदान करना।

धर्म , जाति के आधार पर नहीं मांग सकते वोट: सुप्रीम कोर्ट

  • सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक फैसले में कहा कि धर्म के आधार पर वोट देने की कोई भी अपील चुनावी कानूनों के तहत भ्रष्ट आचरण के बराबर है। अब चुनाव के दौरान धर्म के आधार पर वोट नहीं मांगा जा सकता।
  • सुप्रीम कोर्ट की सात जजों की संवैधानिक पीठ ने 2 जनवरी 2017 को दिए ऐतिहासिक फैसले में कहा कि प्रत्याशी या उसके समर्थकों के धर्म, जाति, समुदाय, भाषा के नाम पर वोट माँगना गैर कानूनी है। चुनाव एक धर्मनिरपेक्ष पद्धति है। धर्म के आधार पर वोट माँगना संविधान की भावना के खिलाफ है। जनप्रतिनिधियों को अपने कामकाज भी धर्मनिरपेक्ष आधार पर ही करने चाहिए।
  • सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा कि प्रत्याशी और उसके विरोधी एजेंट की धर्म, जाति और भाषा का प्रयोग वोट माँगने के लिए कदापि नहीं किया जा सकता।
  • सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि अगर कोई उम्मीदवार ऐसा करता है तो ये जनप्रतिनिधित्व कानून के तहत भ्रष्ट आचरण माना जाएगा। यह जनप्रतिनिधित्व कानून 123 (3) के अंतर्गत संबद्ध होगा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि न केवल प्रत्याशी बल्कि उसके विरोधी उम्मीदवार के धर्म, भाषा, समुदाय और जाति का प्रयोग भी चुनाव में वोट माँगने के लिए नहीं किया जा सकेगा।
  • सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि भगवान और मनुष्य के बीच का रिश्ता व्यक्तिगत मामला है। कोई भी सरकार किसी एक धर्म के साथ विशेष व्यवहार नहीं कर सकती तथा एक धर्म विशेष के साथ खुद को नहीं जोड़ सकती।

पृष्ठभूमि

  • सुप्रीम कोर्ट में इस संदर्भ में एक याचिका दायर की गई थी, जिसमें यह प्रश्न उठाया गया था कि धर्म और जाति के नाम वोट माँगना जन प्रतिनिधित्व कानून के तहत भ्रष्ट आचरण है या नहीं। जनप्रतिनिधित्व कानून की धारा 123(3) के तहत ‘उसके’ धर्म की बात है और इस मामले में सुप्रीम कोर्ट को व्याख्या करनी थी कि ‘उसके’ धर्म का दायरा क्या है? प्रत्याशी का या उसके एजेंट का भी।
  • विभिन्न राजनीतिक दल धार्मिक ध्रुवीकरण कर वोट लेने के अनुचित प्रयासों में संलग्न रहते हैं। सुप्रीम कोर्ट के 2 जनवरी 2017 के इस निर्णय से तुष्टिकरण, धार्मिक ध्रुवीकरण इत्यादि से राजनीति को मुक्त करने में मदद मिलेगी। दक्षिण भारत में विशेषकर तमिलनाडु में डीएमके जैसे राजनीतिक दल भाषायी आधार पर वोट माँगते हैं तथा अतीत में भाषायी ध्रुवीकरण का सहारा चुनाव में लेते रहे है। सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय ने भाषा के आधार पर वोट माँगने को भी असंवैधानिक घोषित किया है।
  • इसी तरह भारतीय राजनीति के प्रमुख तत्व जाति के आधार पर वोट मांगने की विशिष्ट परंपरा रही है, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने इस ऐतिहासिक निर्णय से स्वच्छ करने का प्रयत्न किया। वास्तव में सुप्रीम कोर्ट ने 21वीं शताब्दी के भारत में चुनाव सुधारों को एक नई गति प्रदान की है जिसमें धर्म, संप्रदाय, जाति, भाषा इत्यादि का वोट माँगने में अवश्य ही कोई आधार नहीं होना चाहिए।

‘स्वच्छ भारत सर्वेक्षण-2017’:

    केंद्र सरकार ने 04 जनवरी 2017 से एक सर्वेक्षण शुरू किया है जिससे स्वच्छता के मानक पर देश के 500 शहरों की रैंकिंग तय की जा सके। स्वच्छता के मानकों में सुधार के लिए प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने की कवायद के तहत सरकार यह सर्वेक्षण शुरू करने जा रही है ।

मुख्य बिंदु

  • ‘स्वच्छ सर्वेक्षण-2017’ भारताय गुणवत्ता परिषद (क्यूसीआई) की ओर से कराया जाएगा। नगर निकायों की ओर से मुहैया कराए गए आंकड़ों के आधार पर शहरों को आंका जाएगा।
  • 4इसकी टीम सर्वेक्षण में शामिल शहरों में दो दिवस तक विभिन्न स्थानों का आकस्मिक निरीक्षण करेगी। वहां के मेयर और आयुक्त से भी मिलेगी। आम जनता से भी फीडबैक लेगी।
  • स्वच्छ सर्वेक्षण वेबसाइट पर प्रतिक्रिया फॉर्म पर भी लोग अपनी राय दे सकते हैं।
  • 2017 में हो रहे स्वच्छता सर्वेक्षण के पैमानों को इस बार सरकार ने काफी बदल दिया है। इस बार 40 प्रतिशत अंक कूड़े की कलैक्शन, स्वीपिंग तथा ट्रांसपोर्टेशन को दिए जाएंगे जबकि 30 प्रतिशत अंक शौचालयों पर फोकस किए गए हैं जिनमें निजी घरों, सामुदायिक शौचालयों व मोबाइल टायलैट वैन शामिल हैं।
  • ज्यादा जोर खुले में शौच-मुक्त शहर पर दिया गया है। 20 प्रतिशत अंक कूड़े की प्रोसैसिंग हेतु रखे गए हैं जबकि बाकी बचते 10 प्रतिशत अंक एजुकेशन, अवेयरनैस व अन्य विषयों के होंगे।
  • स्वच्छ सर्वेक्षण 2016 में देश भर के 73 शहरों में मैसूर पहले स्थान पर था और चंडीगढ़ दूसरे। इस सर्वे में 1 लाख लोगों ने भाग लिया था और अपनी महत्वपूर्ण राय प्रदान की थी।

प्रधानमंत्री के द्वारा नए साल में गरीबों के हित में योजनाओं की घोषणा

    नव वर्ष की पूर्व संध्या पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 31 दिसम्बर 2016 को देशवासियों को संबोधित किया है। इस खास मौके पर उन्होंने गरीब, वरिष्ठ नागरिक, महिलाओं, निम्न व मध्यम वर्ग के साथ ही छोटे कारोबारियों के लिए कई विशेष योजनाओं की घोषणा की। इसके साथ कालाधन न रखने और भ्रष्टाचार को बढ़ावा न देने की भी अपील की है।

प्रधानमंत्री की मुख्य योजनाएं निम्नलिखित हैं:

  • शहरी क्षेत्रों में नौ लाख रुपये तक के आवास ऋण पर चार प्रतिशत तथा 12 लाख रुपये तक के कर्ज पर तीन प्रतिशत ब्याज सब्सिडी मिलेगी। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में दो लाख रुपये तक के आवास ऋण पर तीन प्रतिशत ब्याज सब्सिडी मिलेगी।
  • प्रधानमंत्री आवासीय योजना का लाभ भी लोगों को दिया जाएगा। इसके तहत गांवों में 33 प्रतिशत ज्यादा घरों का निर्माण कराया जाएगा। जिससे बड़े स्तर पर लोगों को आवास का लाभ मिल सकेगा।
  • किसानों के लिए सस्ते कर्ज का भी ऐलान किया है। नाबार्ड और कोऑपरेटिव बैंक से किसानों को सस्ता कर्ज मिलेगा। वहीं अगले तीन महीने में तीन करोड़ किसान क्रेडिट कार्ड को रूपे कार्ड में बदला दिया जाएगा।
  • कोऑपरेटिव बैंक से कर्ज लेने वाले किसानों को ब्याज में बड़ी राहत मिली है। जिन किसानों ने कर्ज लिया था उस कर्ज से साठ दिन का ब्याज सरकार वहन करेगी और किसानों के खाते में ट्रांसफर करेगी।
  • महिलाओं के हित में भी बड़ा ऐलान किया है। उनका कहना है कि अब देश के सभी 650 से ज्यादा जिलों में सरकार गर्भवती महिलाओं को विशेष लाभ देगी। अस्पताल में पंजीकरण, डिलीवरी, टीकाकरण और पौष्टिक आहार के लिए 6000 की आर्थिक मदद सीधे उनके खाते में जाएगी। अबतक 53 जिलों में गर्भवती महिलाओं को प्रायोगिक परियोजना के तहत 4000 रुपये की सहायता मिल रही है।
  • इसके साथ ही बुजुर्गों यानी की वरिष्ठ नागरिकों के लिए भी एक जबरदस्त ऐलान किया है। उनका कहना है जिन वरिष्ठ नागरिकों के खाते में साढ़े सात लाख रुपये तक हैं। उन पर सरकार करीब 8 प्रतिशत तक का ब्याज का लाभ देगी।
  • व्यापारियों के हित में भी घोषणा की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुताबिक देश में लघु उद्योगों को बढ़ाने के लिए भी सरकार पूरी कोशिश कर रही है। जिससे अब सरकार छोटे व्यापारियों को लोन गारंटी का लाभ दिया जाएगा।
  • पीएम का कहना है कि देश की अर्थव्यस्था में कृषि का महत्व है। इसमें लघु और मध्यम उद्योग का भी महत्वपूर्ण योगदान है। इसीलिए अब छोटे उद्योगों की कैश क्रेडिट लिमिट को बढ़ाकर 20 प्रतिशत से 25 प्रतिशत करने का ऐलान किया है।
  • पीएम का कहना है कि सरकार अभी तक एक करोड़ तक का लोन कवर देती है, लेकिन अब दो करोड़ तक का लोन कवर करेगी। इस कदम से देश में छोटे दूकानदारों छोटे उद्योगों को कम ब्याज दर पर ज्यादा कर्ज मिल सकेगा।

संयुक्त राष्ट्र ने 2017 को विकास के लिए स्थायी पर्यटन का अंतरराष्ट्रीय वर्ष के रूप में घोषित किया:

    संयुक्त राष्ट्र की 70 वीं महासभा ने 2017 को विकास के लिए स्थायी पर्यटन के अंतरराष्ट्रीय वर्ष के रूप में मान्यता प्रदान की है। यह मान्यता अंतरराष्ट्रीय पर्यटन के विकास और विशेष रूप से स्थायी पर्यटन के महत्व को दर्शाता है।

  • यह लोगों के बीच बेहतर समझ को बढ़ावा देने के लिए तथा विभिन्न सभ्यताओं की समृद्ध विरासत के प्रति जागरूकता लाने के लिए और विभिन्न संस्कृतियों के निहित मूल्यों की बेहतर सराहना करने के लिए तथा सबसे महत्वपूर्ण विश्व में शांति को मजबूत बनाने में योगदान करने के लिए किया गया है।
  • स्थायी पर्यटन के विकास के योगदान पर जागरूकता बढ़ाने को विषय बनाया गया है। अंतर्राष्ट्रीय वर्ष का उद्देश्य नीतियों, उपभोक्ता व्यवहार और व्यापार व्यवहार में बदलाव लाने के लिए और अधिक स्थायी पर्यटन क्षेत्र को बनाने के लिए करना है। यह विषय पूरी तरह से वर्ष 2030 के यूनिवर्सल एजेंडा फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट और सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स (एसडीजी) के अनुसार है।

अंतर्राष्ट्रीय वर्ष निम्नलिखित क्षेत्रों में पर्यटन की भूमिका को बढ़ावा देगा:

  • समावेशी और सतत आर्थिक विकास
  • सामाजिक समग्रता, रोजगार और गरीबी में कमी
  • सांस्कृतिक मूल्य, विविधता और विरासत
  • संसाधन दक्षता, पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन
  • आपसी समझ, शांति और सुरक्षा

अंतरराष्ट्रीय वर्ष के निष्पादन की जिम्मेदारी पर्यटन के लिए संयुक्त राष्ट्र की विशेष एजेंसी विश्व पर्यटन संगठन (UNWTO) को दी गयी है। वर्ष 2016 को दलहन के अंतरराष्ट्रीय वर्ष के रूप में नामित किया गया था।

नीति आयोग के पास आया हायपरलूप ट्रांसपोर्टेशन का प्रपोजल
सरकार ने देश में हायपरलूप ट्रांसपोर्टेशन सिस्टम बनाने का प्रस्ताव नीति आयोग के पास भेज दिया है। कुछ छोटे इलाकों में इस टेक्नोलॉजी के लिए ट्रायल रन करने के उपरांत इस प्रपोजल पर आयोग फैसला करेगा।’
हायपरलूप परिवहन प्रणाली क्या है?
यह एक परिवहन प्रणाली है जहाँ पॉड जैसे व्हीकल को वैक्यूम ट्यूब के माध्यम से आगे ढकेला जाता है |इस प्रणाली की गति हवाई जहाज के सामान होती है |
हायपरलूप कनेक्ट टेस्ला के फाउंडर एलॉन मस्क के दिमाग की उपज है। HTT का कहना है कि हायपरलूप बनाने में प्रति किलोमीटर 4 करोड़ डॉलर (लगभग 300 करोड़ रुपये) की लागत आएगी जबकि हाई स्पीड ट्रेन लाइन बनाने की लागत इससे दोगुना होगी। हायपरलूप सिस्टम को यात्री और माल ढुलाई के लिए डिजाइन किया जा रहा है।

यह कैसे संचालित होता है ?

आईएलओ ने प्रवासी श्रमिक रिपोर्ट पर वैश्विक आकलन की विज्ञप्ति जारी की:

    जिनेवा स्थित अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) ने प्रवासी श्रमिक की रिपोर्ट पर सांख्यिकीय अनुमान जारी किया है। यह सांख्यिकीय अध्ययन दुनिया भर में प्रवासियों की कुल संख्या के बीच में श्रम प्रवासी मजदूरों के अनुपात के बारे में अनुमान प्रदान करता है।

  • यह उन क्षेत्रों और उद्योगों को दर्शाता है जहां अंतरराष्ट्रीय प्रवासी मजदूर स्थापित हो रहे हैं और अद्यतन संख्या के साथ घरेलू काम में प्रवासियों पर विशेष ध्यान देता है।

रिपोर्ट के प्रमुख तथ्य:

  • दुनिया के लगभग 232 मिलियन अंतरराष्ट्रीय प्रवासियों में 150.3 मिलियन प्रवासी श्रमिक हैं। इनमें से 11.5 मिलियन प्रवासी घरेलू श्रमिक हैं।
  • प्रवासी श्रमिक 206.6 मिलियन कामकाजी उम्र वाली प्रवासी आबादी (15 साल और इससे अधिक) में 72.7 प्रतिशत हिस्सा रखते हैं। इसके विपरीत गैर-प्रवासी 63.9 प्रतिशत का हिस्सा रखते हैं। 83.7 मिलियन पुरुष 66.6 मिलियन महिला प्रवासी श्रमिक हैं।
  • प्रवासी कुल वैश्विक आबादी (15 साल और इससे अधिक) में 3.9 प्रतिशत का हिस्सा रखते हैं। हालांकि, प्रवासी श्रमिक सभी कार्यकर्ताओं में एक उच्च अनुपात (4.4 प्रतिशत) रखते हैं। यह प्रवासियों की श्रम शक्ति में भागीदारी (72.7 प्रतिशत) और गैर- प्रवासियों श्रम शक्ति में भागीदारी (63.9 प्रतिशत) के तुलनात्मक अध्ययन को दर्शाता है।
  • लगभग आधे प्रवासी श्रमिक (48.5 फीसदी), दो व्यापक उपक्षेत्रों में केंद्रित हो रहे हैं, उत्तरी अमेरिका और उत्तरी, दक्षिणी और पश्चिमी यूरोप।
  • इस उपक्षेत्र में सभी महिला प्रवासी मजदूरों का 52.9 प्रतिशत और सभी पुरुष प्रवासी मजदूरों का 45.1 प्रतिशत है।
  • अरब देशों में, इसके विपरीत, लिंग भेद काफी उलट है।
  • अरब देशों में सभी कार्यकर्ताओं के हिस्से के रूप में प्रवासी मजदूरों का अनुपात उच्चतम (35.6 फीसदी) के स्तर पर है। यही अनुपात उत्तरी अमेरिका में 20.2 प्रतिशत है।
  • अरब देशों में 50.8 प्रतिशत पुरुष प्रवासी घरेलू श्रमिक हैं।

अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन:

  • आईएलओ एक ऐसा अंतराष्ट्रीय संगठन है जो अंतराष्ट्रीय श्रमिक मानक तैयार करने और सिहांवलोकन के लिए उत्तरदायी है। यह एकमात्र ऐसी ‘त्रिपक्षीय’ संयुक्त राष्ट्र संस्था है जो सभी के उपयुक्त कार्य को बढ़ावा देकर एक साथ मिलकर नीतियों और कार्यक्रमों को मूर्त रूप देने हेतु सरकारों के प्रतिनिधियों, कर्मचारियों और कामगारों को एक साथ मिलाती है।
  • यह विलक्षण व्यवस्था आईएलओ को रोजगार और कार्य के बारे में ‘वास्तविक जगत’ संबंधी जानकारी शामिल करने के लिए प्रोत्साहित करती है। 1969 में इसे विश्व शांति के लिए नोबेल पुरस्कार से सम्मानि किया गया। इस संगठन की स्थापना 1919 ई. में हुई।

वैज्ञानिकों ने मानव शरीर में एक नया अंग खोजा:

    आयरलैंड के वैज्ञानिकों ने मानव शरीर में एक नए अंग की खोज की है, जोकि इंसान के पाचन तंत्र में स्थित है। अब तक इसे आंत और पेट को जोड़ने वाले अंश के तौर पर देखा जाता था। लेकिन आयरलैंड के शोधकर्ताओं की टीम ने पाया कि ये एक अलग अंग है। इस अंग का नाम मेसेंट्री (mesentery)है ।

मुख्य बिंदु

  • इस खोज के बाद मेडिकल स्टूडेंट्स और रिसर्चर्स इस बात की जांच कर सकते हैं कि पेट की बीमारियों में मेसेंट्री क्या भूमिका निभाती है, जिससे इलाज के नए तरीके मिलने की संभावना बढ़ेगी। मेसेंट्री के बारे में और जानकारी और इससे जुड़ी वैज्ञानिक खोज से पेट से जुड़ी बीमारियों में सर्जरी की कम जरूरत, कम परेशानियां और कम खर्च में मरीज के ज्यादा ठीत होने की संभावनाएं बढ़ेंगी।
  • आयरलैण्ड की लाइमरिक यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिक प्रोफेसर जे. केविन कॉफरी को इस अंग की खोज का श्रेय जाता है। कॉफरी के मुताबिक मेसेन्टरी को अब तक एक फ्रेगमेंटेड (विभाजित) भाग माना जाता था। कॉफरी ने अपने अध्ययन में पाया कि यह एक निरंतर और संपूर्ण अंग है।
  • शरीर में दिल, दिमाग, लीवर, फेफड़े और किडनी जैसे 5 प्रमुख अंगों के अलावा कुछ 74 अन्य अंग सहित कुल 78 अंग होते है। लेकिन मेसेंट्री की खोज के बाद अब शरीर के कुल अंगों की संख्या बढ़कर 79 हो गई है।

उच्च न्यायालय का केंद्र को सुरक्षा सीलिंग पर 6 महीने में निर्णय लेने का निर्देश

    बंबई उच्च न्यायलय ने केंद्र सरकार को स्वास्थ्य सुरक्षा एवं स्वच्छता उत्पादों में अनिवार्य सील बनाने के लिए 6 महीने का समय दिया है |
    एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने यह निर्देश दिया है | यह जनहित याचिका सौंदर्य प्रसाधन कि चोरी , बच्चों के देखभाल , स्वास्थ्य और स्वच्छता उत्पादों के बारे में हैं |

चिंता का विषय क्या हैं ?

    जनहित याचिका में कहा गया हैं कि निर्माता से उपभोक्ता के लिए पारगमन में मोहर के अभाव के कारन प्रदूषण और उत्पादों में मिलावट की संभावना रहती हैं | यहाँ इस पर भी प्रकाश डाला गया हैं कि वर्तमान में मुहर के अनिवार्यता पर कोई प्रावधान नही हैं |

पृष्ठभूमि

    इससे पहले राज्य ने कहा कि लीगल मेट्रोलॉजि अधिनियम 2009 के तहत कोई अनिवार्य प्रावधान नहीं है और इसीलिए उत्पादों का सील नही किया जा सकता | अक्टूबर 2014 में केंद्र सरकार ने कहा कि इस मामले पर गौड़ करने के लिए बने समिति कि सिफारिशों का इंतज़ार किया जा रहा है | सरकार ने यह भी कहा कि सभी क्रीम और लोशन संशोधित औषधि और प्रसाधन सामग्री अधिनियम 2013 के तहत अनिवार्य रूप से सील्ड है |

मातृत्व लाभ कार्यक्रम (एमबीपी) :

    महिला और बाल विकास मंत्रालय ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम की धारा 4 (बी) के प्रावधानों के अनुसार गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं के लाभ हेतु सशर्त नकद हस्तांतरण योजना मातृत्व लाभ कार्यक्रम का गठन किया गया था।

  • इस योजना के अंतर्गत गर्भवती और स्तनपान कराने वाली माताओं को नकद प्रोत्साहन प्रदान किया जाता है। इस योजना में प्रसव से पूर्व और पश्चात आराम, गर्भधारण और स्तनपान की अवधि में स्वास्थ्य और पोषण स्थिति में सुधार एवं जन्म के छह महीनों के दौरान बच्चे को स्तनपान कराना बच्चे के विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
  • इस योजना के अंतर्गत, केंद्र सरकार अथवा राज्य सरकार अथवा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में नियमित रूप से रोजगार करने वाली अथवा इसी प्रकार की किसी योजना की पात्र महिलाओं को छोड़कर सभी गर्भवती और स्तनपान कराने वाली माताओं को पहले दो जीवित शिशुओं के जन्म के लिए तीन किस्तों में 6000 रुपये का नकद प्रोत्साहन देय है।
  • नकद हस्तांतरण को डीबीटी मोड में व्यक्तिगत बैंक/डाकघर खाते से जुड़े आधार के माध्यम से किया जायेगा। माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 31 दिसम्बर, 2016 को राष्ट्र को दिये गये अपने संबोधन में सभी जिलों में मातृत्व लाभ कार्यक्रम के अखिल भारतीय विस्तार की घोषणा की थी और यह 1 जनवरी 2017 से लागू है। इससे करीब 51.70 लाख लाभार्थियों को प्रतिवर्ष लाभ मिलने की उम्मीद है।

मातृत्व लाभ कार्यक्रम की आवश्यकता क्यों ?

  • भारत सरकार मानव विकास के लिए पोषण के रूप में विशेष तौर पर सर्वाधिक कमजोर समुदायों में प्रत्येक महिला की इष्टतम पोषण स्थिति को सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। यह गर्भावस्था और स्तनपान दोनों की अवधि के दौरान अधिक महत्वपूर्ण है। एक महिला के पोषण की स्थिति और उसके स्वास्थ्य प्रभावों के साथ-साथ उसके शिशु के स्वास्थ्य और विकास के लिए भी महत्वपूर्ण है।
  • एक कुपोषित महिला अधिकांश तौर पर एक कम वजन वाले बच्चे को जन्म देती है। जब इस कुपोषण का प्रारंभ गर्भाशय से होता है तो विशेष रूप से इसका प्रभाव महिला के सम्पूर्ण जीवन चक्र पर पड़ता है। आर्थिक और सामाजिक दवाब के कारण बहुत सी महिलाओं को अपनी गर्भावस्था के अंतिम दिनों तक परिवार के लिए आजीविका कमानी पड़ती है।

जीपीसीआर संकेतन के लिए दवाओं की खोज को आईआईटी कानपुर के द्वारा आसान बनाया गया:

    शोधकर्ताओं ने यह दिखाया है कि नई दवाओं द्वारा जी प्रोटीन कपल्ड रिसेप्टर्स (GPCRs) का विनियमन आम तौर पर सोचे जाने वाले तरीकों से काफी सरल हो गया है। यह केवल रिसेप्टर के अंतिम भाग को लगाकर ही उपयोग में लाया जा सकता है, जिसे कि रिसेप्टर की पूंछ (अंतिम भाग) कहा जाता है।

इन निष्कर्षों का महत्व:

    इसके साथ ही, जी प्रोटीन कपल्ड रिसेप्टर्स (GPCRs) के लिए बाध्यकारी नई दवाओं की खोज, जोकि हमारे शरीर में लगभग हर शारीरिक प्रक्रिया के लिए केंद्रीय है जैसे कि दृष्टि, स्वाद, प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया और हृदय विनियमन को आसान बना देता है।

पृष्ठभूमि:

    वर्तमान में रक्तचाप, दिल की विफलता, मधुमेह, मोटापा, कैंसर और कई अन्य मानव रोगों के उपचार के लिए बाजार में उपलब्ध दवाओं का लगभग 50% GPCR रिसेप्टर्स की ओर लक्षित होता है। यह सभी दवाएं उनसे संबंधित रिसेप्टर्स से बाध्य होती है और या तो उन्हें सक्रिय कर देती हैं या उनके सिगनल बंद कर देती हैं।

जी प्रोटीन कपल्ड रिसेप्टर्स:

    जी प्रोटीन कपल्ड रिसेप्टर्स यूकेरियोट्स में मेम्ब्रेन रिसेप्टर्स के सबसे बड़े और सबसे विविध समूह हैं। ये सेल सरफेस रिसेप्टर्स प्रकाश ऊर्जा, पेप्टाइड्स, लिपिड, शर्करा और प्रोटीन के रूप में संदेशों के लिए एक इनबॉक्स की तरह कार्य करती है।

GPCRs कैसे काम करता है?

  • कोशिका की सतह पर पाए जाने वाले रिसेप्टर्स संकेतों को प्राप्त करते हैं और कोशिकाओं के अंदर उन्हें संचारित (ट्रांसमिट) कर देते हैं। रिसेप्टर का एक हिस्सा कोशिका झिल्ली में सन्निहित होता है। और रिसेप्टर का दूसरा भाग झिल्ली के बाहर और भीतर उभर जाता है।
  • रिसेप्टर्स का भाग जो झिल्ली के बहार उभरा रहता है ,झिल्ली के आकर में परिवर्तन करता है | रिसेप्टर के बहरी भाग में इस परिवर्तन के जवाब में रिसेप्टर के आकर में एक दूरगामी परिवर्तन होता है जो कोशिका के अंदर अवस्थित होता है |
  • रिसेप्टर के आकर में यह परिवर्तन जो कोशिका के अंदर तैनात है अन्य प्रोटीन को बांधता है जिसे प्रभावोत्पादक कहा जाता है | यह प्रभावोत्पादक कोशिका में विशेष प्रभाव को उत्पन्न करता है , व अन्य कोशिका को सिग्नल भेजता है जो हमारे शरीर के शारीरिक परिवर्तन को संचालित करता है |

नए विधि के बारे में

    सामान्य समझ यह है कि प्रभावोत्पादक प्रोटीन को दो स्थानों पर एक साथ काम करना पड़ता है , एक रिसेप्टर के पिछले भाग में व दूसरा रिसेप्टर के केंद्र में | यह कार्य दवा को कोशिका के अंदर रिसेप्टर को अधिक सक्षम बनाने हेतु किया जाता है |
    रिसेप्टर शोधकर्ताओं के विशेष इंजीनियरिंग के माध्यम से मूल रूप से दो बाध्यकारी साइटों में एक जिसका नाम रिसेप्टर का केंद्र है जो इसमें बाधा डालता है |उन्होंने पाया कि दूसरे साइट के बिना भी प्रोटीन रिसेप्टर को कोशिका के अंदर रिसेप्टर के पृष्ठभाग को बांध कर खींचने में समर्थ है |
    कोर में एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है जिसे शोधकर्ताओं ने अनुवांशिक रूप से नष्ट कर दिया है जिसके कारन रिसेप्टर का कोर अप्रभावी बन गया है |

मध्यप्रदेश में 1100 जलवायु-स्मार्ट ग्राम विकसित किये जाएंगे:

    किसानों को जलवायु परिवर्तन के खतरों से समय पर निपटने एवं अच्छी पैदावार सुनिश्चित करने के मकसद से मध्यप्रदेश सरकार 1100 जलवायु-स्मार्ट गांव विकसित करेगी। प्रदेश के किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग के प्रमुख सचिव डॉ. राजेश राजौरा के अनुसार, सरकार अगले छह साल की समयावधि में 1100 गांवों को जलवायु-स्मार्ट गांवों के रूप में विकसित करने की योजना बना रही है।

मुख्य बिंदु

  • इस योजना के तहत राज्य के 11 कृषि जलवायु क्षेत्र में हरेक क्षेत्र से 100 गांवों को विकसित किया जाएगा तथा इस पर प्रति वर्ष तकरीबन 150 करोड़ रुपये खर्च होंगे। यह काम राष्ट्रीय कृषि विकास योजना एवं स्थायी कृषि के लिए राष्ट्रीय मिशन (एनएमएसए) के तहत किया जा रहा है।
  • इन गांवों में किसानों को कम अवधि में तैयार होने वाली फसलों के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। इसके साथ-साथ इन गांवों में ऐसी बीजों का उपयोग किया जाएगा, जो सूखे जैसी हालत पर भी अच्छी पैदावर दे सकें।
  • एकीकृत खेती पर फोकस दिया जाएगा, जिसमें परंपरागत खेती के अलावा पशुपालन, रेशम पालन एवं मत्सय पालन शामिल होंगे। इन गांवों में कृषि-वानिकी को भी अपनाया जाएगा। इन क्षेत्रों में दुनिया में उपयोग की जाने वाली सर्वोाम तकनीक एवं विधि को प्रदेश में अपनाया जाएगा।

जलवायु-स्मार्ट विलेज:

  • जलवायु परिवर्तन के बाद भी फसलों की तबाही को आधुनिक तकनीकि अपना कर रोका जाना ही क्लाइमेट स्मार्ट विलेज की मुख्य अवधारणा है। इन गांवों में जलवायु परिवर्तन की चुनौती का किसान नई तकनीक से मुकाबला करेंगे। इनमें प्रोजेक्ट के तहत बीज, खाद्यान्न-फसल, खेती के साथ वानिकी-उद्यानिकी को बढ़ावा देने पर काम होगा, ताकि जलवायु के लिए आदर्श स्थिति बनाई जा सके।
  • जल, ऊर्जा के अलावा मिट्टी में पोषक तत्वों का प्रबंधन, मौसम की जानकारी आदि इसके मुख्य बिंदु हैं। चयनित गांवों की आजीविका कृषि आधारित है, इसलिए खेती में इस्तेमाल उर्वरक आदि जलवायु को किस तरह प्रभावित करते हैं, इस बारे में लोगों को जागरुक किया जाएगा।

राष्ट्रीय सतत कृषि मिशन (एनएमएसए):

  • भारतीय कृषि में मुख्य रूप से देश के विशुद्ध बुआई क्षेत्र का लगभग 60 प्रतिशत वर्षा सिंचित क्षेत्र शामिल है और यह कुल खाद्यान्न उत्पादन में लगभग 40 प्रतिशत का योगदान देती है। इस प्रकार वर्षा सिंचित कृषि जोतों के विकास के साथ-साथ प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण देश में खाद्यान्नों की बढ़ती हुई मांग को पूरा करने की कुंजी है।
  • इस दिशा में राष्ट्रीय सतत कृषि मिशन (एनएमएसए) तैयार किया गया है जिससे कि एकीकृत खेती, जल प्रयोग कोशल, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन और संसाधन संरक्षण को बढ़ाने पर ध्यान केन्द्रित करते हुए विशेष रूप से वर्षा सिंचित क्षेत्रों में कृषि उत्पादकता बढ़ाई जा सके।
  • एनएमएसए सतत कृषि मिशन से अपना अधिदेश प्राप्त करता है जो कि राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन कार्य योजना (एनएपीसीसी) के अंतर्गत रेखांकित 8 मिशनों में से एक है।
  • मिशन दस्तावेज में रेखांकित कार्यनीतियां और कार्रवाई कार्यक्रम (पीओए) जिसे 2.9.2010 को जलवायु परिवर्तन पर प्रधानमंत्री परिषद (पीएमसीसीसी) दवारा सिद्धांत रूप में अनुमोदन प्रदान किया गया था, का उद्देश्य भारतीय कृषि के 10 मुख्य आयाम नामत: उन्नत फसल बीज, पशुधन और मत्स्य पालन, जल प्रयोग दक्षता, नाशीजीव प्रबंधन, उन्नत फार्म आजीविका विविधीकरण शामिल हैं, पर फोकस करते हुए अनुकूलन उपायों के अंगीकरण की श्रृंखला के माध्यम से सतत कृषि को बढ़ावा देना है।
  • 12वीं पंचवर्षीय योजना के दौरान इन उपायों को पुनर्गठन और समरूपता की प्रक्रिया के माध्यम से कृषि एवं सहकारिता विभाग (डीएसी) की चालूप्रस्तावित मिशनों/ कार्यक्रमों/स्कीमों में अंतःस्थापित और तथा उन्हें सरल बनाया जा रहा है।

बिटकॉइन अभी तक के अपने उच्च स्तर पर

    बिटकॉइन अभी तक के अपने उच्च स्तर पर है |यह इस दौड़ में एक सुरक्षित परिसंपत्ति बनने के लिए तैयार है जब पूरी दुनिया में आर्थिक अनिश्चितता बढ़ रही है |बिटकॉइन को 2009 में बेहद उत्तर चढ़ाव के दौड़ में बनाया गया था |

  • हल ही में बिटकॉइन ने बिटकॉइन सूचकांक इंडेक्स पर $ 1100 की एक बड़ी वृद्धि हासिल की है , जिसने इसे 2016 का सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाला मुद्रा बना दिया |

बिटकॉइन मूल्य सूचकांक

    यह XBP के द्वारा निर्दिष्ट मानदंडों को पूरा करने वाले अग्रणी वैश्विक एक्सचेंजों ,के बिटकॉइन के कीमत की औसत का प्रतिनिधित्व करता है |बिटकॉइन का , उद्योग प्रतिभागियों और लेख पेशेवरो के लिए एक मानक खुदरा मूल्य सन्दर्भ के रूप में सेवा करने का इरादा है |

बिटकॉइन क्या है ?

    यह सुपर कंप्यूटर द्वारा कूट किए गए (encrypted) डिजिटल सिक्के है , जिनका प्रयोग ऑनलाइन कारोबार या वस्तुओं व सेवाओं के सेवाओं के विनिमयन के लिए करते है |बिटकॉइन किसी भी देश की सरकार या केंद्रीय बैंक के द्वारा समर्थित नही है |

LNG पर आयात कर में छूट की मांग

    भारत के ऊर्जा एवम पर्यावरण मंत्रालय ने सरकार से कहा है कि वे तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) पर आयात कर में छूट दे व स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा देने के लिए पेट कोक और फर्नेस तेल के उपयोग पर एक लेवी लागू करे |

इस कदम कि आवश्यकता क्यों है ?

  • भारत ग्रीन हाउस गैसों का दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा उत्सर्जक देश है , और यह अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने व अर्थी विकास को विस्तार देने के लिए कोयला ,गैस व तेल पर काफी निर्भर है |अपने आर्थिक विकास के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए भारत ऊर्जा कि खपत करने पर बाध्य है |
  • इसीलिए , देश के कार्बन फुटप्रिंट में कटौती करने के लिए मंत्रालय ऊर्जा मिश्रण में गैस (LNG) का उपयोग 6 .5 % से बढाकर 15 % करना चाहती है |इसीलिए वे LNG पर सुनय आयात कि मांग कर रहे है |

मीडिया में प्रायोजित विज्ञापन उम्मीदवार के खर्च का हिस्सा – चुनाव आयोग

    चुनाव आयोग ने कहा है कि फेसबुक आउट ट्विटर जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रायोजित विज्ञापन के लिए किए गए खर्च को उम्मीदवार के कुल खर्च में शामिल किया जाएगा |

मुख्य तथ्य

  • उम्मीदवारों का सन्देश भले ही वह किसी अन्य राज्यों से प्राप्त हुए हो ,उम्मीदवार के व्यय में जोड़ा जाएगा |
  • चुनाव आयोग ने प्रिंटिंग प्रेस मालिकों से कहा है कि चुनाव पर्चे ,पोस्टर और इस तरह कि अन्य सामग्री पर प्रिंटर व प्रकाशक के नाम व पते मुद्रित करे | इसमें किसी तरह के उल्लंघन करने पर करवाई की जाएगी | करवाई में प्रिंटिंग प्रेस के लाइसेंसे के निरस्तीकरण भी शामिल है |
  • चुनाव में रिश्वत लेने व देने के खिलाफ मामला दर्ज करने के लिए व मतदाताओं को धमकी देने वालो के खिलाफ करवाई करने के लिए एक उड़न दस्ता (flying squad) को गठित किया गया है |

उत्तर प्रदेश में आदर्श अचार संहिता (model code of conduct MCC) लागू

  • चुनाव के तारीखों की घोषणा के साथ ही उत्तर प्रदेश में आदर्श अचार संहिता अस्तित्व में आ गया है |
  • MCC के अस्तित्व में आते ही चुनाव आयोग ने , राज्य सरकार को किसी भी नौकरशाह के स्थानांतरण ,किसी भी नए योजन की घोषणा या पूर्ण की गई योजनाओं के लोकार्पण न करने का निर्देश दिया है |

आदर्श अचार संहिता क्या है ?

    यह निर्वाचन आयोग के द्वारा राजनितिक पार्टियों व उम्मीदवारों को दिया गया निर्देश है |यह मुख्य रूप से भाषण , चुनाव घोषणा पत्र ,मतदान बूथ ,जुलुस व सामान्य आचरण के सम्बन्ध में दिशा निर्देश देती है | इसका उद्देश्य स्वतंत्र व निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करना है |
    MCC चुनाव कार्यक्रम के घोषणा के तुरंत बाद अस्तित्व में आता है व चुनावी प्रक्रिया के अंत तक लागू रहता है |

हरियाणा में लिंगानुपात में सुधार

    नागरिक पंजीकरण प्रणाली (CRS) के आंकड़ों का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने कहा है कि 2016 में हरियाणा में लिंगानुपात में सुधार हुआ है ,और अब यह 900 लड़कियां / 1000 लड़के हो गया है , जो कि 2011 कि जनगणना में 834 लड़कियां/1000 लड़के थे | राज्य सरकार लिंग अनुपात में सुधार के लिए ठोस प्रयास कर रही है | और जन्म लिंग अनुपात में सुधार इस दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है |

मुख्य तथ्य

  • लिंग अनुपात के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार मुख्यमंत्री ने कहा है कि 2016 में राज्य में पैदा हुए 525278 बच्चों में 276414 लड़के व 248864 लड़कियां है |
  • उन्होंने कहा कि किसी भी जिले में लिंगानुपात 850 से काम नही है |व 12 जिलों में लिंगानुपात 900 या उससे अधिक है |
  • उन्होंने कहा कि लिंग चयन ,चयनात्मक गर्भपात व कन्या भ्रूण हत्या के खिलाफ एक बड़े पैमाने पर अभियान शुरू किया गया है

अमेरिका में H -1B वीजा के नियम सख्त

    H -1B वीजा, जिसपर भारतीय IT क्षेत्र विशेष रूप से निर्भर है के उपयोग पर अंकुश लगाने के लिए एक विधयेक अमेरिकी कांग्रेस में प्रस्तुत किया गया है |

H -1B वीजा क्या है ?

    H -1B वीजा संयुक्त राज्य अमेरिका के द्वारा दिया गया एक गैर अप्रवासी वीजा है जो अन्य देशों से आए कुशल श्रमिकों को अमेरिका में रोजगार करने के लिए एक एक निश्चित अवधी के लिए दिया जाता है |

बिल कि मुख्य विशेषताएं

  • नए बिल के अनुसार H -1B वीजा के लिए न्यूनतम राशि को $ 60000 से बढाकर $ 100000 कर दिया गया है |
  • नए बिल में मास्टर डिग्री पर छूट को ख़त्म कर दिया गया है |
  • नया बिल कंपनियों को भी H -1B वीजा धरी कर्मचारियों को भर्ती से रोकती है | यदि किसी कंपनी में पहले से ही 50 कर्मचारी या कुल कर्मचारी का 50 % H -1B वीजा धारक है तो कंपनी ऐसे नए कर्मचारी कि भर्ती नही कर सकते |
  • यह बिल अमेरिकी श्रमिकों कि भर्ती के लिए कंपनियों को प्रोत्साहित करती है |
  • यह बिल स्पष्ट रूप से H -1B वीजा धारकों द्वारा अमेरिकी श्रमिकों के प्रतिस्थापन पर प्रतिबन्ध लगता है |

काले चावल ने लोकप्रियता पायी:

  • काले चावल या बैंगनी रंग के चावल की एक विदेशी किस्म ने हाल ही में असम में लोकप्रियता हासिल की है।
  • इसे हाल ही में बराक घाटी में पहली बार स्थानीय किसानों द्वारा बोया गया था।
  • काले चावल के उच्च पोषण मूल्यों, अनूठी बनावट और अखरोट के जैसे स्वाद की वजह से विश्व के सुपर भोजन के रूप में भी जाना जाता है।
  • यह अपने शक्तिशाली रोग से लड़ने वाले एंटीऑक्सीडेंट के लिए जाना जाता है और इसमें अत्यधिक मात्रा में फाइबर भी होता है।
  • इसमें मधुमेह, कैंसर, हृदय रोग और यहां तक कि वजन बढ़ाने के विकास को रोकने में मदद करने की क्षमता है।

सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ई-चालान और एम-परिवहन मोबाइल एप लांच करेगा:

    बढ़ते सड़क हादसों पर काबू पाने के लिए सरकार शीघ्र ही कुछ मोबाइल एप लांच करने वाली है। इनमें ई-चालान और एम-परिवहन प्रमुख हैं। ई-चालान का नेटवर्क तो 13 राज्यों में तैयार हो चुका है। इनमें उत्तर प्रदेश सबसे आगे है जहां इसे पूरी तरह लागू किया जा चुका है। 9 से 15 जनवरी के बीच देशभर में मनाए जाने वाले सड़क सुरक्षा सप्ताह के दौरान सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी इन एप को विधिवत लांच करेंगे।

ई-चालानः सड़क सुरक्षा को चाकचौबंद करने के लिए सरकार ने बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रानिक प्लेटफार्म का उपयोग करने का निर्णय लिया है। इसके तहत कई मोबाइल एप तैयार किए जा रहे हैं। इनमें यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों का इलेक्ट्रानिक चालान करने वाला ई-चालान एप प्रमुख है।
एम-परिवहनः इस एप के जरिये कोई भी रजिस्टर्ड व्यक्ति किसी भी वाहन के रजिस्ट्रेशन का संक्षिप्त ब्योरा जबकि आरटीओ, पुलिस या परिवहन विभाग के कर्मी पूरा ब्योरा प्राप्त कर सकते हैं।

चेन्नई, अहमदाबाद और वाराणसी को स्मार्ट सिटी बनाने में सहायता करेगा जापान:

  • जापान ने स्मार्ट सिटी के रूप में चेन्नई, अहमदाबाद और वाराणसी के विकास कार्यों से जुड़ने का निर्णय लिया है। इस आशय की जानकारी भारत में जापान के राजदूत केंजी हीरामत्सु ने शहरी विकास मंत्री एम. वेंकैया नायडू के साथ अपनी बैठक के दौरान दी।
  • हीरामत्सु ने यह भी कहा कि जापान भारत सरकार के शहरी विकास से जुड़े कदमों में काफी दिलचस्पी रखता है और उसने इसमें एक भागीदार बनने का फैसला किया है। ब्रिटेन के उच्चायुक्त श्री डोमिनिक एसक्विथ ने भी वेंकैया नायडू से मुलाकात की और उन्होंने ब्रिटेन की प्रधानमंत्री थेरेसा मे की हालिया भारत यात्रा के दौरान शहरी विकास के क्षेत्र में सहयोग पर दोनों देशों के बीच हस्ताक्षरित सहमति-पत्र (एमओयू) को मूर्त रूप देने के मुद्दे पर विचार-विमर्श किया।
  • अब तक कई प्रमुख देश 15 स्मार्ट शहरों के विकास से जुड़ने के लिए आगे आ चुके हैं। इनमें ये शामिल हैं: अमेरिकी व्यापार विकास एजेंसी (यूएसटीडीए)- विशाखापत्तनम, अजमेर एवं इलाहाबाद, ब्रिटेन- पुणे, अमरावती (आंध्र प्रदेश) एवं इंदौर, फ्रांस- चंडीगढ़, पुडुचेरी एवं नागपुर और जर्मनी – भुवनेश्वर, कोयंबटूर एवं कोच्चि।

द्वीप पर्यटन महोत्सव 2017

  • द्वीप पर्यटन महोत्सव 2017 06 जनवरी 2017 को अंडमान निकोबार द्वीप समूह में पोर्टब्लेयर में शुरू हुआ। उपराज्यपाल जगदीश मुखी ने आईटीएफ मैदान पर इस महोत्सव का उद्घाटन किया।
  • 15 जनवरी तक चलने वाले उत्सव में पूर्वी क्षेत्र और दक्षिण क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्रों के अलावा गीत और नाटक प्रभाग के कलाकार भी द्वीपों के विभिन्न क्षेत्रों में अपना कार्यक्रम प्रस्तुत करेंगे।
  • अंडमान निकोबार प्रशासन और भारत सरकार के भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद के बीच पिछले वर्ष हुए समझौते के तहत इस बार कजाकिस्तान से दस सदस्यीय दल 7 जनवरी को पोर्ट ब्लेयर पहुंचकर अपना कार्यक्रम प्रस्तुत करेंगे। पर्यटन उत्सव के दौरान मुख्य भूमि के कलाकारों के साथ-साथ स्थानीय कलाकार भी भाग लेंगे।

भारत और केन्या के बीच कृषि और इससे संबंधित क्षेत्रों में समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्तक्षार को मंजूरी:

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारत और केन्या के बीच कृषि और इससे संबंधित क्षेत्रों में समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्तक्षार को मंजूरी दे दी।

मुख्य बिंदु

  • इसमें बताया गया है कि इस संबंध में एक संयुक्त कार्यकारी समूह का गठन किया जाएगा, जिसमें दोनों देशों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। वे समझौता ज्ञापन के निष्पादन के लिए कार्यक्रमों को विकसित करेंगे तथा उसकी निगरानी करेंगे।
  • इस समझौता ज्ञापन में कृषि अनुसंधान, पशुपालन और डेयरी, मत्स्य पालन, बागवानी, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, मृदा एवं संरक्षण, जल प्रबंधन, सिंचाई व खेती प्रणाली के विकास और संबद्ध क्षेत्रों में विभिन्न गतिविधियों को शामिल किया जाएगा।
  • समझौता ज्ञापन पर जिस दिन हस्ताक्षर किया जाएगा, उसी दिन से यह लागू हो जाएगा और पांच सालों के लिए वैध रहेगा। वैधता अवधि की समाप्ति के बाद यह अगले पांच सालों के लिए स्वचालित रूप से वैध हो जाएगा, जब तक कि दोनों में से कोई भी पक्ष दूसरे पक्ष को वैधता से छह महीने पहले लिखित रूप से इसे रद्द करने की जानकारी नहीं देता है।

यूरोपीय संघ ने भारत से कुछ सब्जियों के आयात पर लगा प्रतिबंध हटाया:

  • यूरोपीय संघ ने भारत से कुछ सब्जियों के आयात पर लगा तीन साल का प्रतिबंध हटा लिया है।
  • कृषि मंत्रालय के हवाले से कोचीन अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा लिमिटेड की एक विज्ञप्ति में कहा गया है कि केन्द्र सरकार को यूरोपीय संघ से मिली सूचना के अनुसार करेला, चिचिंडा और बैंगन सहित कुछ सब्जियों के आयात पर लगा प्रतिबंध समाप्त कर दिया गया है।

मानव स्टेम कोशिकाओं का उपयोग करके जैविक पेसमेकर विकसित किया:

    कनाडा के वैज्ञानिकों ने मानव स्टेम कोशिकाओं का उपयोग कर पहली बार कार्यात्मक पेसमेकर कोशिकाओं को विकसित किया है। कोशिकाएं दिल की धड़कन को विद्युत् के संवेग से नियंत्रित कर सकती हैं। यह विधि वैकल्पिक जैविक पेसमेकर उपचार के लिए मार्ग प्रशस्त करती है।

स्टेम कोशिका:

  • स्टेम कोशिका या मूल कोशिका ऐसी कोशिकाएं होती हैं, जिनमें शरीर के किसी भी अंग को कोशिका के रूप में विकसित करने की क्षमता मिलती है। इसके साथ ही ये अन्य किसी भी प्रकार की कोशिकाओं में बदल सकती है।
    वै
  • ज्ञानिकों के अनुसार इन कोशिकाओं को शरीर की किसी भी कोशिका की मरम्मत के लिए प्रयोग किया जा सकता है। इस प्रकार यदि हृदय की कोशिकाएं खराब हो गईं, तो इनकी मरम्मत स्टेम कोशिका द्वारा की जा सकती है।

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