समसामयिकी मार्च : CURRENT AFFAIRS MARCH:1-8

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ट्रेड मार्क नियम 2017 अधिसूचित:

    केंद्र सरकार ने कारोबार सुगमता (ईज ऑफ डूइंग बिजनेस) को बढ़ावा देने के लिए ट्रेड मार्क फॉर्म की संख्या को 74 से घटाकर 8 कर दिया है। वहीं ई-फाइलिंग आवेदन का शुल्क करीब आधा घटाकर 4,500 रुपए कर दिए है। सरकार ने इस संबंध में ट्रेडमार्क नियम 2017 अधिसूचित किए हैं।
    यह नियम 06 मार्च 2017 से प्रभावी होंगे। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि यह नियम ट्रेडमार्क नियम 2002 का स्थान लेंगे।

अन्य प्रमुख विशेषताएं:

  • ट्रेड मार्क अनुप्रयोगों के ई-फाइलिंग को बढ़ावा देने के लिए, ऑनलाइन फाइलिंग के शुल्क को शारीरिक फाइलिंग की तुलना में 10% कम रखा गया है।
  • प्रसिद्ध ट्रेडमार्क के निर्धारण के लिए रूपरेखाएं पहली बार रखी गई हैं।
  • अनुसूची 1 में प्रविष्टियों की संख्या को 88 से घटाकर केवल 23 कर दिया गया है।
  • वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सुनवाई शुरू की गई है।
  • ट्रेडमार्क के पंजीकृत उपयोगकर्ता के रूप में पंजीकरण से संबंधित प्रक्रियाओं को भी सरल किया गया है।
  • नए नियमों से भारत में बौद्धिक संपदा व्यवस्था को बढ़ावा मिलना चाहिए।

व्यापार सुगमता के मामले में भारत की वर्तमान स्थिति:

    व्यापार सुगमता के मामले में वर्ल्ड बैंक (World Bank) की तरफ से जारी लिस्ट में इस साल भी भारत को झटका लगा। भारत इस साल लिस्ट में 130वें नंबर पर है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत ने निर्माण परमिट, कर्ज हासिल करने और अन्य मानदंडों के संदर्भ में नाममात्र या कोई सुधार नहीं किया है। इस लिस्ट में न्यू जीलैंड पहले नंबर पर है जबकि पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान 144वें नंबर पर है।

पंचायतों में लिंग समानता के सहमति पत्र को कैबिनेट की मंजूरी:

  • कैबिनेट ने भारत और संयुक्त राष्ट्र की महिला के बीच एक सहमतिपत्र पर हस्ताक्षर को मंजूरी दे दी। इस सहमति पत्र के अनुसार जमीनी स्तर से लेकर शासकीय संस्थानों में लिंग समानता का समर्थन किया जाएगा। यह पंचायती राज संस्थाओं को उनके कार्यक्रमों में लैंगिक समानता बनाये रखने में भी सहयोग करेगा।
  • भारत और संयुक्त राष्ट्र-महिला के बीच यह सहमतिपत्र कानून, नीतियों और कार्यक्रमों के जरिए लिंग समानता लाने के लिए बेहतर अवसर पैदा करने हेतु शासकीय संस्थाओं की क्षमताओं को बढ़ाने में पंचायती राज मंत्रालय का सहयोग करेगा।
  • इस सहमतिपत्र के तहत छह राज्यों जिनमें आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, ओडिशा, कर्नाटक, राजस्थान और मध्यप्रदेश है, वहां जिला और उपजिला स्तरों पर लिंग समानता के साथ गतिविधियां चलेंगी।

50 हवाई अड्डों के पुनुरुद्धार के प्रस्ताव को मंत्रिमंडल की मंजूरी:

  • सरकार ने देश में ऐसे 50 हवाई अड्डों और हवाई पट्टियों के पुनरोद्धार करने का फैसला किया है जिनसे अभी कोई उड़ान संचालित नहीं हो रही है। ये हवाईअड्डे एवं पट्टियां राज्य सरकारों तथा भारतीय विमान पत्तन प्राधिकरण के अधीन है। पुनुरुद्धार का कार्य 4500 करोड़ रूपए की लागत से वित्त वर्ष 2017-18 से तीन वित्त वर्षों के दौरान पूरा किया जाएगा।
  • पहले दो वर्ष के दौरान 15-15 हवाईअड्डों एवं पट्टियों का तथा 2019-20 के दौरान 20 हवाईअड्डों एवं पट्टियों का पुनुरुद्धार किया जाएगा। एक सरकारी विज्ञप्ति के अनुसार इन हवाईअड्डो पर उड़ाने शुरू होने से छोटे शहरों को हवाई सेवा से जुड़ जाएंगे। इससे इन क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियां भी तथा रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।

कैबिनेट ने उत्तराखंड के कोटेश्वर हाइड्रो इलेक्ट्रिक प्रॉजेक्ट के रिवाइज्ड कॉस्ट एस्टिमेट को मंजूरी दी:

  • केन्द्र सरकार ने उत्तराखंड में 400 मेगावाट की कोटेश्वर जल विद्युत परियोजना के संशोधित लागत अनुमान-एक को मंजूरी दे दी। केन्द्रीय मंत्रिमंडल के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में यहां हुई बैठक में इस आशय के प्रस्ताव का अनुमोदन किया। इस जल विद्युत परियोजना पर अब कुल 2717.35 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
  • इस परियोजना का क्रियान्वयन टिहरी हाइड्रो डेवलपमेंट कारपोरेशन इंडिया लिमिटेड कर रहा है। एक सरकारी विज्ञप्ति के अनुसार इस परियोजना से विद्युत उत्पादन मार्च 2012 से शुरू हो चुका है और सिर्फ संयत्र की सुरक्षा तथा कुछ अन्य कार्य पूरे किए जाने हैं।

खाद्य खरीद प्रचालन के लिए पंजाब को फूड कैश क्रेडिट:

  • प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने पंजाब सरकार की खाद्य खरीद प्रक्रियाओं के लिए लीगेसी फूड कैश क्रेडिट अकाउंट्स (फसल सीजन 2014-15 तक) के निपटान के लिए पूर्व पदों (एक्स पोस्ट फेक्टो) की स्वीकृति दी है।
  • व्यय विभाग का यह प्रस्ताव 02 जनवरी 2017 को प्रधान मंत्री द्वारा नियम 12 के तहत (व्यापार का लेनदेन) नियम, 1961 के तहत अनुमोदित किया गया था। लीगेसी समस्याओं के जल्द समाधान से बैंकों को किसानों के बड़े हित में खाद्य ऋण के वितरण में मदद मिलेगी।

भारत का माल के अंतर्राष्ट्रीय परिवहन पर सीमा शुल्क सम्मेलन में प्रवेश:

  • प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने टीआईआर केर्नेट्स (टीआईआर कन्वेंशन) के कवरेज के तहत माल के अंतर्राष्ट्रीय परिवहन पर सीमा शुल्क कन्वेंशन के लिए भारत की स्वीकृति और इसकी पुष्टि के अनुसमर्थन के लिए आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी करने के लिए अपनी मंजूरी दे दी है।
  • यह कन्वेंशन भारतीय व्यापारियों को अन्य अनुबंध करने वालों को सड़क या बहुआयामी साधनों द्वारा माल की आवाजाही के लिए तेज़, आसान, विश्वसनीय और परेशानी मुक्त अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था तक पहुंच पाने में मदद करेगा। इस कन्वेंशन में शामिल होने के बाद, सीमा शुल्क नियंत्रणों की पारस्परिक मान्यता के कारण मध्यवर्ती सीमाओं पर सामानों के निरीक्षण के साथ-साथ मार्ग पर भौतिक एस्कॉर्ट्स की आवश्यकता नहीं होगी।

बाघों की निगरानी के लिए ड्रोन का प्रयोग शुरू होगा:

  • बाघों की सुरक्षा अब ड्रोन कैमरे से भी होगी। बाघ संरक्षण परियोजना वाले जंगलों के ऊपर जल्द ही ड्रोन कैमरों से निगरानी की जाएगी। ताकि कोई शिकारी या तस्कर बाघों को मार या क्षति न पहुंचा सके। ड्रोन बाघों के निवास और प्रजातियों के प्रबंधन के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।
  • इस तकनीक का इस्तेमाल राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) और भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआईआई), देहरादून के द्वारा प्रस्तावित है। ड्रोन का उपयोग पश्चिमी देशों में बड़े पैमाने पर किया जा रहा है और इसके अच्छे परिणाम भी सामने आये हैं।
  • ड्रोन असम और मध्य प्रदेश के जंगलों में संरक्षण कार्यक्रमों के लिए इस्तेमाल किये गए थे। ड्रोन्स का पन्ना टाइगर रिजर्व में भी इस्तेमाल किया गया। एनटीसीए और डब्ल्यूआईआई देश भर में 10 बाघ अभयारण्यों में इस परियोजना के स्केलिंग की प्रक्रिया में हैं।

बाघों की देश में वर्तमान स्थिति:

  • वन्यजीवों के सरंक्षण के लिए बनी सरकार की बड़ी- बड़ी नीतियों और उसके इन दावों के बीच कि दुनिया में सबसे ज्यादा 70 फीसदी बाघ भारत में है, पिछले दो महीने में देश के विभिन्न अभयारण्यों में 20 बाघों की मौत हो चुकी है जबकि बीते वर्ष कुल 98 बाघ मृत पाए गए थे।
  • यह आंकड़ा किसी निजी सर्वेक्षण का नहीं बल्कि खुद वन और पर्यावरण मंत्रालय के अंतर्गत काम करने वाले’राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण’का है। सरकार की ओर से संसद में पेश आंकड़ों के अनुसार भी साल 2015 की तुलना में 2016 में बाघों की मौत की घटनाएं 25 फीसदी बढ़ गयी।

बाघ परियोजना:

  • बाघ परियोजना की शुरुआत 7 अप्रैल 1973 को हुई थी। इसके तहत शुरू में 9 बाघ अभयारण्य बनाए गए थे। आज इनकी संख्या बढ़कर 32 से अधिक हो गई है।
  • वैज्ञानिक, आर्थिक, सौंदर्यपरक, सांस्कृतिक और पारिस्थितिकीय दृष्टिकोण से भारत में बाघों की वास्तविक आबादी को बरकारर रखने के लिए तथा हमेशा के लिए लोगों की शिक्षा व मनोरंजन के हेतु राष्ट्रीय धरोहर के रूप में इसके जैविक महत्व के क्षेत्रों को परिरक्षित रखने के उद्देश्य से केंद्र द्वारा प्रायोजित बाघ परियोजना वर्ष 1973 में शुरू की गई थी।
  • राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण तथा बाघ व अन्य संकटग्रस्त प्रजाति अपराध नियंत्रण ब्यूरो के गठन संबंधी प्रावधानों की व्यवस्था करने के लिए वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम 1972 में संशोधन किया गया। बाघ अभयारण्य के भीतर अपराध के मामलों में सजा को और कड़ा किया गया। वन्यजीव अपराध में प्रयुक्त किसी भी उपकरण, वाहन अथवा शस्त्र को जब्त करने की व्यवस्था भी अधिनियम में की गई है।

जीएसटी परिषद ने केंद्रीय जीएसटी विधेयक और एकीकृत आईजीएसटी विधेयक को मंजूरी दी:

  • देश में सबसे बड़े कर सुधार माने जा रहे वस्तु व सेवा कर (गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स, जीएसटी) के पहली जुलाई से लागू होने की संभावना बनी है।
  • जीएसटी परिषद की 04 मार्च 2017 को दिल्ली के विज्ञान भवन में हुई 11वीं बैठक में इस नई अप्रत्यक्ष कर प्रणाली के लिए प्रस्तावित दो प्रमुख विधेयकों – केंद्रीय जीएसटी (सीजीएसटी) और एकीकृत जीएसटी (आइजीएसटी) कानून के अंतिम मसौदे को मंजूरी दी गई।
  • बैठक के बाद वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि राज्य जीएसटी (एसजीएसटी) के मसौदे को भी जल्द मंजूरी मिल जाएगी। यह विधेयक राज्यों की विधानसभाओं से अनुमोदित किया जाएगा। राज्यों ने 26 तरह के बदलाव के सुझाव दिए थे, जिन्हें केंद्र ने मान लिया है। एसजीएसटी के साथ केंद्र शासित प्रदेशों के लिए मसौदे पर भी चर्चा होनी है। ये मसौदे भी केंद्रीय जीएसटी की तर्ज पर होंगे।
  • इन मसौदों पर जीएसटी परिषद की 16 मार्च को होने वाली बैठक में विचार किया जाएगा। जेटली के अनुसार सीजीएसटी, आइजीएसटी (अंतरराज्यीय) और यूटी-जीएसटी कानून को नौ मार्च से शुरू होने वाले बजट सत्र के दूसरे चरण में संसद में रखा जाएगा। जीएसटी लागू करने के लिए जुलाई की तारीख संभावित है।
  • जेटली ने कहा कि मॉडल जीएसटी कानून में जीएसटी की शिखर दर को 40 फीसद तक (20 फीसद केंद्र और उतना ही राज्यों द्वारा) किया जाएगा। लेकिन जीएसटी की प्रभावी दरों को पहले से मंजूर 5, 12, 18 और 28 फीसद पर ही रखा जाएगा।
  • सीजीएसटी के जरिए केंद्र को वस्तुओं व सेवाओं पर जीएसटी लगाने का अधिकार मिलेगा। आइजीएसटी अंतरराज्यीय बिक्री पर लागू होगा। एसजीएसटी विधेयक को सभी राज्यों की विधानसभा में पारित कराना होगा। यूटी-जीएसटी मंजूरी के लिए संसद में रखा जाएगा।
  • वैट और राज्य में लगने वाले अन्य करों के जीएसटी में शामिल होने के बाद एसजीएसटी के तहत राज्यों को कर लगाने की अनुमति होगी। बैठक में शामिल बंगाल के वित्त मंत्री अमित मित्रा ने कहा कि राज्यों ने 26 तरह के बदलावों की मांग की थी, जिसे केंद्र ने स्वीकार कर लिया है।
  • यह भारत की संघीय व्यवस्था के अनुरूप है। मित्रा ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारें ढाबा और छोटे रेस्तरां कारोबारियों के लिए एक निपटान योजना रखने पर सहमत हुए हैं। राज्य यह मांग कर रहे थे कि ढाबा और छोटे रेस्तरां निपटारा योजना अपना सकते हैं।
  • मित्रा ने कहा कि आइजीएसटी कानून राज्य व केंद्र के अधिकारियों को एक-दूसरे के वर्ग में आने वाली इकाइयों की जांच का अधिकार देगा। राज्यों के पास केंद्र के अधिकार क्षेत्र में आने वाली इकाइयों की जांच का अधिकार होगा।

पश्चिम बंगाल क्लीनिकल प्रतिष्ठान विधेयक विधान सभा में पारित:

  • पश्चिम बंगाल में ऐतिहासिक पश्चिम बंगाल क्लिनिकल प्रतिष्ठानों (पंजीकरण, नियमन और पारदर्शिता) विधेयक 2017 को पारित कर दिया गया। इस विधेयक में निजी अस्पतालों के नियमन और उनके संचालन पर पूरी पारदर्शिता लाने का प्रयास किया गया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस विधेयक को ऐतिहासिक और पूरे देश के लिए एक मॉडल बताया।
  • मुख्यमंत्राी ममता बनर्जी ने स्वयं इस विधेयक का मसौदा तैयार किया है। इस विधेयक में उल्लंघन होने की स्थिति में चिकित्सा सुविधा पर दण्ड लगाने का भी प्रावधान है। प्रमुख निजी अस्पताल श्रृंखला नारायणा हेल्थ ने इस विधेयक का स्वागत किया है।
  • अगर अस्पताल व नर्सिंग होम इस नए विधेयक के मुताबिक काम नहीं करेंगे तो उन्हें लाइसेंस गंवाना पड़ सकता है। नए विधेयक में 24 शर्तें रखी गई हैं, जिनका अनुपालन न होने पर अस्पतालों के लाइसेंस रद्द किए जा सकते हैं। इसमें सड़क दुर्घटना के शिकार, आकस्मिक समस्या होने, बलात्कार और एसिड हमले जैसे मामलों में प्राथमिक उपचार न करने जैसे मामले शामिल हैं।
  • ममता बनर्जी ने कहा, हमने अस्पतालों में बिस्तरों की संख्या बढ़ाकर 27 हजार कर दी है। हम बंगाल के सरकारी अस्पतालों में नि:शुल्क स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध करा रहे हैं। बिहार, झारखंड, ओडि़शा, पूर्वोत्तर, भूटान, नेपाल, बांग्लादेश से लोग इलाज कराने कोलकाता आते हैं। एमआरआई, स्कैन, एक्सरे, रक्त की जांच और यहां तक कि डायलिसिस की सुविधा कम कीमत पर उपलब्ध है।
  • मुख्यमंत्री ने कहा, सभी 112 उचित दर दवा दुकानों पर 70 प्रतिशत छूट पर दवाई दी जाती है। 16 माता और बच्चा हब, 70 विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाइयां, 303 एसएनएसयू स्थापित की गई हैं जिससे पिछले पांच वर्षों में संस्थानिक प्रसव की दर 65 प्रतिशत से बढ़कर 90 प्रतिशत हो गया है।
  • शिशु मृत्यु दर 32 से गिरकर 26 पर आ गई है। सरकार द्वारा संचालित सुविधाओं में फेयर प्राइस डायग्नोस्टिक सेंटर और डायलिसिस सेवा भी शुरू की गई है।

बंगाल सरकार ने लुप्तप्राय ‘कुरुख’ भाषा को आधिकारिक दर्जा दिया:

  • राज्य सरकार ने अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस पर ‘कुरुख’ भाषा को आधिकारिक दर्जा प्रदान किया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने देशप्रिय पार्क में अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के उपलक्ष में आयोजित कार्यक्रम में इसकी घोषणा की। इसके साथ ही उन्होंने उत्तर बंगाल के विभिन्न इलाकों में बोली जाने वाली राजवंशी/कामतापुरी भाषा को भी जल्द आधिकारिक दर्जा दिए जाने की बात कही।
  • इस बाबत एक कमेटी गठित की गई है, जो इसकी स्क्रिप्ट तैयार करेगी। गौरतलब है कि कुरुख भाषा बोलने वाले करीब 16 लाख उरांव लोग बंगाल में रहते हैं। यूनेस्को की सूची में इसे लुप्तप्राय: भाषा के तौर पर सूचीबद्ध किया गया है।

कुरुख भाषा:

  • कुड़ुख़ या ‘कुरुख’ एक भाषा है जो भारत, नेपाल, भूटान तथा बांग्लादेश में बोली जाती है। भारत में यह बिहार, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखण्ड एवं पश्चिम बंगाल के उराँव जनजातियों द्वारा बोली जाती है। यह द्रविण परिवार से संबन्धित है। इसको ‘उराँव भाषा’ भी कहते हैं। छत्तीसगढ़ में बसने वाली उरांव जाति की बोली को कुरुख कहते हैं। इस भाषा में तमिल और कनारी भाषा के शब्दों की बहुतायत है।
  • लिखित परंपरा के अभाव में इस भाषा का प्रलेखन भारत के यूरोपीय उपनिवेशीकण के बाद ही शुरू हुआ था। कई क्षेत्रों में हिन्दी भाषा ने कुरुख भाषा को विस्थापित कर दिया है।

डीआरडीओ ने हथियारों का पता लगाने वाले रडार स्वाति को भारतीय सेना को सौंपा:

    रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने 02 मार्च 2017 को डीआरडीओ की तरफ से तैयार वेपन लोकेटिंग रेडार (WLR) ‘स्वाति’ को भारतीय सेना को सौंप दिया। यह दुश्मन के हथियारों की मौजूदगी तलाश कर उन्हें तबाह करने के लिए भारतीय सेना को गाईड करने का काम करेगा। LoC पर स्वाति का सफल फील्ड ट्रायल हो चुका है। भारतीय सेना ने डीआरडीओ से 30 ऐसे रडारों की मांग की है जिनकी तैनाती पाकिस्तान से सटी सीमा और LoC पर की जाएगी।

यह किस प्रकार लाभप्रद है?

    इस रडार के जरिए भारतीय सेना के जवान ये आसानी से पता लगा लेंगे की फायरिंग कहां से हो रही है, रॉकेट लॉन्चर कहां से दागे जा रहे हैं और उनकी दूरी और ट्रेजेक्टरी क्या है। स्वाति रडार के जरिए यह सब जानकारी चंद मिनटों में मिल जाएगी। इन सब जानकारियों से लैस भारतीय सेना जवाबी कार्रवाई में उस पाकिस्तानी पोस्ट या गोलीबारी की जगह को निशाना बना कर तबाह कर सकेगी।

रडार की क्षमता:

  • स्वाति रडार सिस्टम दुश्मन की तरफ से हो रही फायरिंग की लोकेशन या ठिकाने का सटीक पता लगाता है, दुश्मन के मोर्टार रॉकेट लॉन्चर और आर्टिलरी गन को सिर्फ एक से दो मिनट में तबाह करने की ताकत रखता है। स्वाति रडार सिस्टम की रेंज 30 से 50 किलोमीटर तक है। इस रडार सिस्टम को फायर सिस्टम से जोड़ देने पर सीमा पर होने वाली फायरिंग की जानकारी के साथ ऑटोमैटिक मुहतोड़ जवाब भी दिया जा सकता है।
  • यह 16,000 फीट तक की ऊंचाई वाले इलाकों में भी कारगर है। तापमान चाहे -30 हो या 55 डिग्री सेल्सियस। सेना की ओर से 30 ‘स्वाति’ रेडार बनाने का ऑर्डर मिला है, जिनमें 6 तैयार हो गए हैं और 3 पर काम चल रहा है।
  • पहले यह सुविधा सेना के पास नहीं थी। इस राडार सिस्टम को पाकिस्तान के बॉर्डर वाले इलाके और एलओसी पर लगाया गया है और इसके नतीजे भी काफी चौकाने वाले मिले हैं। पाकिस्तान की तरफ से पहले जो भारी गोलीबारी होती थी वह इस राडार के आने से अब नहीं हो रही है।
  • इसकी वजह यह है कि भारतीय सेना को इस रडार से पाकिस्तान की चौकी और पोस्ट की सटीक लोकेशन मिल जा रही है जिससे भारतीय सेना भी मुंहतोड़ जवाब दे रही है। यह रडार वहां भी काफी कारगर है जहां क्रॉस बॉर्डर फायरिंग होती है और दुश्मन रात में चुपके से दुश्मन घात लगाकर हमला करता है। इर रडार के आने के बाद यह नामुमकिन हो गया है।

विश्व वन्यजीव दिवस: 03 मार्च

  • विश्व वन्यजीव दिवस का आयोजन वैश्विक स्तर पर वन्यजीवों के संरक्षण की दिशा में जागरूकता, सहयोग और समन्वय का लक्ष्य दर्शाता है। उल्लेखनीय है कि वन्यजीवों एवं वनस्पतियों की संकटापन्न प्रजातियों में अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पर हुए अभिसमय (CITES Convention, 1973) की कांफ्रेंस ऑफ पार्टीज की 16वीं बैठक (बैंकाक, 2013) में थाईलैंड ने 3 मार्च को विश्व वन्यजीव दिवस के रूप में मनाने संबंधी एक प्रस्ताव रखा था।
  • 3 मार्च को इस दिवस हेतु चुनने के पीछे कारण यह था कि इसी दिन CITES अभिसमय को अपनाया गया था। थाईलैंड के इस प्रस्ताव के उपरान्त संयुक्त राष्ट्र महासभा ने अपने 68वें अधिवेशन में 20 दिसंबर 2013 को यह निर्णय किया कि 3 मार्च को प्रतिवर्ष विश्व वन्यजीव दिवस के रूप में मनाया जाएगा। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने CITES सचिवालय से इस दिवस के क्रियान्वयन संबंधी व्यवस्थाएं देखने का आग्रह किया था।

वर्ष 2017 का विषय (थीम):

  • विश्व वन्यजीव दिवस (डब्ल्यूडब्ल्यूडी) की इस बार की थीम है ‘युवा आवाजों को सुनो’। यह थीम इसलिए निर्धारित की गई है क्योंकि इस बार विश्व वन्यजीव दिवस की थीम में युवा आवाजों को तरजीह देने का फैसला किया गया है। दुनिया की कुल आबादी में से तकरीबन एक चौथाई की उम्र महज 10-24 साल है।
  • इसीलिए इस तबके को भविष्य का नेता और नीति-निर्धारक मानते हुए वन्यजीवों को बचाने के लिए इनके विचारों को सुनने और अपनाने पर ज़ोर दिया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि संकटग्रस्त जीवों के प्रति जागरुकता बढाने और उनको विलुप्त होने से बचाने की पहल के तहत संयुक्त राष्ट्र हर साल 3 मार्च को विश्व वन्यजीव दिवस मनाता है।
  • द इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर के मुताबिक जीवों की 2,599 प्रजातियां, उप-प्रजातियां अत्यधिक संकटग्रस्त हैं. इसी तरह 1975 पौधे, पादक और अन्य सूक्ष्म जीवों की प्रजातियों का अस्तित्व खतरे में है।
    विश्व स्वास्थ्य संगठन ने पहली बार सुपरबग्स की सूची जारी की:

  • विश्व स्वास्थ्य संगठन ने पहली बार ऐसे बैक्टीरिया की सूची तैयार की है जिन पर एंटीबायोटिक दवाएं बेअसर (सुपरबग) हैं। विशेषज्ञों का दावा है कि यह 12 बैक्टीरिया मानव स्वास्थ्य के लिए बहुत बड़ा खतरा हैं और इनके कारण हर साल लाखों लोगों की जान जाती है।
  • इस सूची को तीन श्रेणियों में विभाजित किया गया है, ताकि इनसे मुकाबले के लिए नई एंटीबायोटिक दवाएं तैयार की जा सकें। इस सूची में शामिल कुछ बैक्टीरिया ऐसे हैं जो अस्पताल में भर्ती कमजोर मरीजों के खून में जानलेवा संक्रमण फैला सकते हैं। विशेषज्ञ कई बार चेतावनी दे चुके हैं कि कुछ संक्रमणों का इलाज मौजूदा एंटीबॉयोटिक से संभव नहीं होगा। ऐसे में सामान्य संक्रमण भी जानलेवा हो जाएंगे।
  • डब्ल्यूएचओ ने चेतावनी दी है कि दवा कंपनियां ऐसी ही दवाइयां विकसित करें जिन्हें बनाना सस्ता है और जिनमें मुनाफा ज्यादा है। विशेषज्ञों ने दवाइयों की प्रतिरोधात्मक क्षमता को ध्यान में रखकर नई सूची तैयार की है।
  • दवारोधी संक्रमण के कारण 7 लाख लोग हर साल दुनिया में मारे जाते हैं। अगर यही स्थिति रही तो 2050 तक 10 लोगों की मौत हो सकती है। अमेरिका में इस समय 40 एंटीबायोटिक चिकित्सकीय परीक्षण के दौर में हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि इनमें से आधी दवाएं भी सुपरबग से मुकाबले में सक्षम नहीं हैं।
  • यह मामला इतना गंभीर क्यों?

    • क्योंकि पहले समूह के रोगाणु आमतौर पर आईसीयू जैसे बेहद संवेदशील स्थानों पर होते हैं और गंभीर रूप से बीमार मरीजों को अपना निशाना बनाते हैं।
    • दूसरी श्रेणी के बैक्टीरिया स्वास्थ्य कर्मियों के हाथों पर या उनके उपकरणों पर पाए जाते हैं, जो सही से साफ नहीं किए जाते या संक्रमित हो जाते हैं।
    • तीसरी श्रेणी के बैक्टीरिया खाद्य विषाक्तता जैसे सामान्य संक्रमणों के लिए जिम्मेदार हैं, जो कम विकसित देशों में पाए जाते हैं। रोगाणुओं से मुकाबले को दवाएं समय रहते विकसित नहीं हुईं तो परेशानी होगी। सूची में शीर्ष पर एक क्लेबसीला नाम का बैक्टीरिया भी शामिल है।

    WHO की लिस्ट में ड्रग प्रतिरोधी बैक्टीरिया को 3 श्रेणियों में बांटा गया है। सबसे खतरनाक ग्रुप में मल्टीड्रग प्रतिरोधी बैक्टीरिया है जो अस्पतालों, नर्सिंग होम्स और मरीजों में हो सकता है जो वेंटीलेटर्स या अन्य डिवाइसेज का प्रयोग करना पड़ रहा होता है।

    देश भर में दूसरे राज्यों से आए लोगों के हितों की रक्षा के लिए कानूनी रूपरेखा तैयार करने की सिफारिश:

    • सरकार द्वारा गठित किये गये एक पैनल ने यह कहते हुए देश भर में दूसरे राज्यों से आए लोगों (माइग्रेंट) के हितों की रक्षा के लिए आवश्यक कानूनी एवं नीतिगत रूपरेखा तैयार करने की सिफारिश की है कि इस तरह के लोग आर्थिक विकास में व्यापक योगदान करते हैं। पैनल का कहना है कि इसके मद्देनजर दूसरे राज्यों से आए लोगों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करने की जरूरत है।
    • आवास एवं शहरी गरीबी उन्मूलन मंत्रालय द्वारा वर्ष 2015 में गठित ‘उत्प्रवासन (माइग्रेशन) पर कार्यदल’ ने आवास एवं शहरी गरीबी उन्मूलन मंत्री एम. वेंकैया नायडू के साथ विस्तृत चर्चाएं कीं। इस कार्यदल ने 01 मार्च 2017 को सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंप दी।
    • कार्यदल ने अपनी सिफारिश में कहा है कि दूसरे राज्यों से आए लोगों की जाति आधारित गणना के लिए भारत के महापंजीयक प्रोटोकॉल में संशोधन करने की जरूरत है ताकि जिस राज्य में वे अब निवास कर रहे हैं वहां उन्हें परिचारक (अटेंडेंट) संबंधी लाभ मिल सकें।
    • कार्यदल ने यह भी सिफारिश की है कि दूसरे राज्यों से आए लोगों को पीडीएस के अंतर-राज्य परिचालन की सुविधा प्रदान करते हुए उन राज्यों में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) का लाभ हासिल करने में सक्षम बनाया जाना चाहिए जहां अब वे निवास कर रहे हैं।
    • आवाजाही की आजादी और देश के किसी भी हिस्से में निवास करने के संवैधानिक अधिकार का उल्लेख करते हुए कार्यदल ने सुझाव दिया है कि राज्यों को स्थायी निवास की आवश्यकता समाप्त करने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए, ताकि कामकाज और रोजगार के मामले में उनके साथ कोई भेदभाव नहीं हो।
    • राज्यों से यह भी कहा जायेगा कि वे सर्व शिक्षा अभियान (एसएसए) के तहत वार्षिक कार्य योजनाओं में दूसरों राज्यों से आए लोगों के बच्चों को शामिल करें, ताकि शिक्षा का अधिकार उन्हें लगातार मिलता रहे।
    • दूसरों राज्यों से आए लोगों द्वारा वर्ष 2007-08 के दौरान अपने-अपने राज्यों में भेजे गये 50,000 करोड़ रुपये की बड़ी राशि का उल्लेख करते हुए कार्यदल ने सुझाव दिया है कि धन हस्तांतरण की लागत को कम करते हुए डाकघरों के विशाल नेटवर्क का कारगर उपयोग करने की जरूरत है, ताकि उन्हें अपने राज्य में धन भेजने के लिए अनौपचारिक उपायों का इस्तेमाल न करना पड़े।

    ओईसीडी इकनोमिक सर्वे ऑफ़ इंडिया 2017:

    • यूरोप के आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन (ओईसीडी) ने नोटबंदी के कारण चालू वित्त वर्ष के लिए आर्थिक विकास अनुमान को 7.4 फीसदी से कम करके 7.0 फीसदी कर दिया है। हालांकि उसने अगले वित्त वर्ष के लिए 7.3 फीसदी और उसके बाद वित्त वर्ष 2018-19 के लिए 7.7 फीसदी का अनुमान व्यक्त किया है।
    • हालांकि संगठन ने नोटबंदी का समर्थन करते हुए कहा कि इसके कई सारे दीर्घकालिक लाभ होंगे। इसके लिए उसने सरकार को आर्थिक एवं कर सुधारों को जारी रखने की सलाह दी है। ओईसीडी के महासचिव एंजेल गुररिया ने आर्थिक मामलों के सचिव शक्तिकांत दास की मौजूदगी में ‘ओईसीडी आर्थिक सर्वेक्षण भारत’ नाम से रिपोर्ट जारी की।
    • ओईसीडी ने पिछले वर्ष फरवरी में जारी रिपोर्ट में वर्ष 2016-17 के दौरान 7.4 फीसदी का विकास अनुमान जताया था।
    • आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (ओईसीडी) एक अंतर सरकारी आर्थिक संगठन है जिसे 1961 में स्थापित किया गया था। इसके 35 सदस्य देश हैं। इसका मुख्यालय पेरिस में है।

      स्वास्थ्य मंत्रालय ने राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण- 4 का अनावरण किया:

      • सरकार के नवीनतम सर्वेक्षण में 2015-16 के दौरान जन्म के समय लिंगानुपात में सुधार तथा शिशु मृत्यु दर में गिरावट समेत अहम स्वास्थ्य सूचकांकों में सकारात्मक रूझान सामने आया है। वर्ष 2015-16 के लिए राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण- 4 :एनएफएचएस-4: में छह लाख परिवारों से सूचनाएं जुटायी गयीं। उसमे सात लाख महिलाओं और 1.3 लाख पुरूषों पर अध्ययन किया गया।
      • पिछले करीब नौ वर्षों में देश में अस्पताल में जन्म लेने वाले बच्चों की संख्या में 100 फीसदी से ज्यादा की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वहीं लिंगानुपात भी 914 से बढ़कर 919 पर पहुंच गया है। यानी अब देश में एक हजार लड़कों पर 919 लड़कियां हैं।
      • स्वास्थ्य सचिव ने बताया कि सर्वे रिपोर्ट-2015-2016 में देश के सभी राज्यों और केंद्र शासति प्रदेशों को शामिल किया गया है। जिला स्तर पर भी सर्वे किया गया है। एनएफएचएस-3 की रिपोर्ट के मुताबिक, अस्पताल में 38.7 फीसदी बच्चों का जन्म अस्पताल में होता था जबकि एनएफएचएस-4 में 78.9 फीसदी बच्चों का जन्म अस्पताल में हुआ है। सरकारी अस्पतालों में 34 फीसदी से ज्यादा की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
      • एनएफएचएच-3 में जन्म लेने वाले प्रति हजार बच्चों के मुकाबले बच्चियों की संख्या 914 थी जो सर्वे रिपोर्ट चार में 919 पहुंच गई है। केरल में प्रति हजार लड़कों पर लड़कियों की संख्या सबसे ज्यादा 1047 है। मेघालय में प्रति हजार 1009 और छत्तीसगढ़ में प्रति हजार 977 रिकार्ड की गई है।
      • एनएफएचएस-3 में जन्म लेने वाले एक हजार बच्चों में से 57 बच्चों की मौत हो जाती थी, जो एनएफएचएस-4 में घटकर 41 पहुंच गई है। इस दिशा में त्रिपुरा, पश्चिम बंगाल, झारखंड, अरुणाचल प्रदेश, राजस्थान और ओडिशा में 20 फीसदी से ज्यादा बच्चों की मौत में गिरावट दर्ज की गई है। 1992-93 में हुए पहले एनएफएचएस में प्रति हजार जन्म लेने वाले बच्चों में 79 बच्चों की मौत हो जाती थी।

      एनएफएचएस-चार की अन्य प्रमुख बातें:

      • देश में करीब 62 फीसदी बच्चों का संपूर्ण टीकाकरण किया गया है, जो एनएफएचएस-3 में 44 फीसदी रिकार्ड किया गया था। मिशन इंद्रधनुष अभियान के बाद इस दिशा में प्रभावी सुधार होने की उम्मीद है। संपूर्ण टीकाकरण अभियान में यूपी ने 28 और पंजाब ने 29 फीसदी की वृद्धि दर्ज की है।
      • एनएफएचएस-3 में छह माह से 59 माह तक के 69 फीसदी बच्चे एनीमिया से पीड़ित थे जबकि एनएफएचएस-4 में यह प्रतिशत घटकर 58 फीसदी रह गया है। इस दिशा में असम ने सबसे बेहतर काम किया है, इसके बाद छत्तीसगढ़, मिजोरम और ओडिशा का स्थान आता है।
      • परिवार नियोजन के लिए महिलाओं द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले कांट्रासेप्टिव में दो फीसदी की कमी आई है जबकि पुरुषों में कंडोम के इस्तेमाल में वृद्धि दर्ज की गई है।

      इसरो के स्‍टेशन समेत दस एयरपोर्ट की सुरक्षा का जिम्‍मा संभालेगी सीआईएसएफ:

      • देश मेें महत्‍वपूर्ण इसरो के पोर्ट ब्‍लेयर स्थित सेंटर समेत देश के दस बड़े हवाई अड्डों की सुरक्षा का जिम्‍मा अब सीआईएसएफ संभालेगी। सीआईएसएफ इसके लिए स्‍पेशल टेक्टिक विंग का गठन करेगी जिसके तहत कमांडो को विपरीत परिस्थितियों में लड़ने की ट्रेनिंग दी जाएगी। साथ ही न्‍यूक्लियर समेत एयरोस्‍पेस से जुड़े अति महत्‍वपूर्ण ठिकानों को भी सीआईएसएफ के हाथों में सौंपे जाने की कवायद चल रही है।
      • इस बाबत केंद्रीय गृहमंत्रालय ने प्रस्‍ताव को हरी झंडी दे दी है। इसके बाद पोर्ट ब्‍लेयर स्थित इसरो के टेलिमेट्री ट्रेकिंग एंड कमांड नेटवर्क (ISTRAC) की सुरक्षा का जिम्‍मा भी सीआईएसएफ को दिया गया है। इसके अलावा कोलकाता के विक्‍टोरिया मेमोरियल और इंडियन म्‍यूजियम, तमिलनाडु के नवेली लिग्‍नाइट कॉर्पोरेशन, जबलपुर एयरपोर्ट और तूतीकोरिन और जामनगर रिफानरी की सुरक्षा का जिम्‍मा भी सीआईएसएस को दिया जाएगा।
      • जगदलपुर स्थित स्‍टील प्‍लांट, गुरुग्राम स्थित UIDAI ऑफिस समेत कुछ और स्‍थानों पर भी अब सीआईएसएफ के जवान देखने को मिलेंगे। इसके अलावा नवी मुंबई के रिलायंस कॉर्पोरेशन पार्क की सुरक्षा का जिम्‍मा भी सीआईएसएफ के पास होगा।

      तेल उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए भारत ने नई लाइसेंस पॉलिसी की घोषणा की:

      • भारत ने 07 मार्च 2017 को तेल एवं गैस अन्वेषण के लिए ओपन एक्रीएज लाइसेंसिंग पॉलिसी की घोषणा की है जो कि बिडर्स को उन क्षेत्रों का खनन करने की इजाजत देगी जहां वो खनन करना चाहते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि ज्यादा ऊर्जा की मांग वाले देश इसे विदेशी निवेश में इजाफे के तौर पर देखते हैं जिससे कि उत्पादन को बढ़ावा दिया जा सके।
      • पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने एक प्रभावशाली सीईआरएईएक सम्मेलन में कहा, “दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल उपभोक्ता देश ओपन एक्रीएज लाइसेंसिंग पॉलिसी (ओएएलपी) के तहत वर्ष में दो बार तेल और गैस ब्लॉकों की नीलामी आयोजित करेगा, जिसमें से पहला दौर इस साल जुलाई में आयोजित हो रहा है।”
      • OALP नीलामी ओवरहाल अन्वेषण लाइसेंसिंग पॉलिसी के तहत आयोजित की जाएगी, जो कि ऑपरेटरों को मूल्य निर्धारण और विपणन की स्वतंत्रता और राजस्व साझेदारी मॉडल में शिफ्ट होने की अनुमति देता है। जुलाई में आयोजित होने वाली नीलामी साल 2010 के बाद से भारत का पहला प्रमुख अन्वेषण लाइसेंसिंग चरण होगी। हालांकि लिब्रलाइज्ड हाइड्रोकार्बन एक्सप्लोरेशन लाइसेंसिंग पॉलिसी (HELP) के अंतर्गत राज्यों और स्थानीय फर्मों के नियंत्रण वाले करीब 31 स्थानों की खोज की हैं।

      भारत-नेपाल संयुक्त सैन्य अभ्यास सुर्य किरण-इलेवन शुरू हुआ:

      • 11वीं इंडो-नेपाल सूर्य किरण संयुक्त सैन्य अभ्यास की पूर्व संध्या पर सेना ने बैंड सेरेमनी का आयोजन किया। इस दौरान 119 इंडिपेंडेंट ब्रिगेड के कमांडर ब्रिगेडियर राकेश मनोचा (सेना मेडल) के साथ ही भारत-नेपाल सेना के कमांडेंट और अन्य अफसर व जवान मौजूद थे। सैन्य अभ्यास 7 मार्च से 20 मार्च तक चलेगा।
      • दोनों देश के सेनाओं के बीच यह इन्फैंट्री सत्र का 11वां संयुक्त अभियान है। इस संयुक्त अभ्यास का उद्देश्य पर्वतीय क्षेत्रों में आतंकवाद रोधी अभियानों में विशेषज्ञता तथा अनुभव का परस्पर आदान-प्रदान करने के साथ ही दोनों सेनाओं के बीच संबंधों को मजबूत बनाने में भी मदद करना भी है।
      • इसके साथ-साथ दोनों को पर्यावरण संरक्षण और आपदा के समय मानवीय सहायता के अभियानों में एक-दूसरे के अनुभव से भी लाभ मिलेगा। यह अभ्यास सूर्य कमान में पंचशूल ब्रिगेड के तत्वाधान में होगा। इसे भविष्य में दोनों देशों के बीच परंपरागत मित्रता की मजबूती के लिए बड़ा कदम माना जा रहा है।

      योगदा सत्संग मठ के 100 साल पूरे होने पर एक विशेष स्मारक डाक टिकट जारी:

      प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 7 मार्च 2017 को योगदा सत्संग मठ के 100 वर्ष पूरे होने पर विशेष डाक टिकट जारी किया है। स्वामी परमहंस योगानंद ने 1917 में योगा सत्संग सोसायटी ऑफ इंडिया का गठन किया था। स्वामी परमहंस योगानंद जी का जन्म 5 जनवरी 1893 को उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में हुआ।
      योगदा सत्संग मठ के 100 के अवसर पर पीएम मोदी ने विशेष डाक टिकट जारी करने के बाद वहां मौजूद लोगों को संबोधित किया। पीएम मोदी ने कहा, योगी जी ने जो किया है हम उसे प्रसाद रुप में लेकर उसे बांटते जा रहे हैं। हम भीतर एक आध्यात्मिक सुख की अनुभूति कर रहे हैं। योगी जी की पूरी यात्रा को देखें तो मुक्ति के मार्ग का नहीं बल्कि अंतर्रात्मा का चर्चा है। योगी जी हठयोग के सकारात्मक पहलुओं की तर्कबद्ध रुप में व्याख्या करते थे।

      हिंद महासागर रिम एसोसिएशन (आईओआरए) की शिखर स्तर की वार्ता शुरू हुई:

      • उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी इंडोनेशिया के दो दिवसीय दौरे पर 07 मार्च को जकार्ता पहुंच गए जहां वह 21 देशों की सदस्यता वाले `इंडियन ओशन रिम एसोसिएशन’ (आईओआरए) के सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। उम्मीद है कि वह संपर्क, निर्बाध समुदी व्यापार और नौवहन के अधिकार जैसे विषयों पर चर्चा करेंगे।
      • उपराष्टपति अंसारी द्वारा सदस्य देशों के थिंक टैंक संगठनों के बीच सहयोग की वकालत करने की भी उम्मीद है ताकि पारंपरिक और गैर पारंपरिक खतरों से निपटने के लिए साझा रणनीति बनाई जा सके। सम्मेलन का मुख्य विषय शांतिपूर्ण, स्थिर और समृद्ध हिंद महासागर के लिए समुद्री सहयोग है।
      • सम्मेलन में आईओआरए समभुाौता और एक कार्य योजना के साथ हिंसक चरमपंथ से निपटने से जुड़ा एक घोषणापत्रा स्वीकार किए जाने की उम्मीद है। गौरतलब है कि आईओआरए समभुाौता एक रणनीतिक दस्तावेज है जिसमें सदस्य देशों के बीच भविष्य में सहयोग के नियम और दृष्टिकोण निहित है। इस सहयोग का उद्देश्य क्षेत्राीय ढांचे को मजबूत करना है ताकि ये अपने समक्ष आने वाली चुनौतियों का सामना कर सकें।
      • इस संघ में भारत, आॅस्टेलिया, बांग्लादेश, कोमोरोस, इंडोनेशिया, ईरान, केन्या, मलेशिया, मारिशस, ओमान, सोमालिया, सिंगापुर, दक्षिण अफ्रीका, श्रीलंका, तंजानिया, थाईलैंड, यमन सहित कई अन्य देश शामिल हैं।

      अल नीनो प्रभाव से भारत में कमजोर रह सकता है मानसून: नोमूरा

      • वर्ष 2017 में अल नीनो की स्थिति की वजह से भारत में मानसून को लेकर चिंता जताई जा रही है। नोमूरा की एक रिपोर्ट में यह बात कही गई है। हालांकि, इसके साथ ही रिपोर्ट में कहा गया है कि बारिश और फसल पर इसका प्रभाव सिर्फ इस एक घटनाक्रम पर ही निर्भर नहीं करेगा।
      • ऑस्ट्रेलिया के मौसम ब्यूरो :एबीएम: के अनुसार 2017 में अल नीनो की स्थिति बनने की संभावना बढ़ी है। एबीएम द्वारा आठ मॉडलों पर सर्वे किया गया जिसमें छह से पता चलता है कि जुलाई, 2017 तक अल नीनो सीमा पर पहुंचा जा सकता है। इससे 2017 में अल नीनो बनने की संभावना 50 प्रतिशत हो जाती है।
      • नोमुरा इंडिया की प्रमुख अर्थशास्त्री सोनल वर्मा ने एक शोध पत्र में कहा है, कुल मिलाकर वर्ष 2017 के सामान्य मानसून वर्ष से कमजोर रहने की संभावना इसके सामान्य मानसून वर्ष से बेहतर रहने के मुकाबले ज्यादा लगती है। हालांकि, वर्षा और खाद्य उत्पादन पर इसके ठीक ठीक प्रभाव का मामला कई अन्य कारकों पर भी निर्भर करेगा।
      • अल नीनो मौसम एक की स्थिति है जिसका भारत के मानसून पर गहरा प्रभाव पड़ता है। सामान्य मानसून भारत में खेती के लिये काफी महत्वपूर्ण होता है। देश की खेती का बड़ा हिस्सा मानसून की वर्षा पर निर्भर है।

      अशोक चावला की अध्यक्षता में ऑडिट फर्मों पर विशेषज्ञ समिति ने अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की:

      • सरकार, कंपनियों के लेखा परीक्षा (ऑडिट) से संबंधित विभिन्न मुद्दों पर 3 सदस्यीय विशेषज्ञ पैनल की सिफारिशों की जांच कर रहा है, इन चिंताओं के साथ कि कुछ प्रथाएं नियमों के साथ खिलवाड़ कर रही हैं।
      • विशेषज्ञ पैनल ने टेरी चेयरमैन अशोक चावला की अध्यक्षता में अपनी रिपोर्ट जमा की है। कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय द्वारा स्थापित इस पैनल ने कंपनियों के लेखा परीक्षा से संबंधित विभिन्न मुद्दों की जांच की, जिसमें प्रतिबंधात्मक शेयरधारक समझौतों से संभव प्रतिकूल प्रभाव भी शामिल है।
        यह समिति सितंबर 2016 में स्थापित की गयी थी।

      केंद्र सरकार ने जलचर जीव की संख्या पता लगाने के लिए नदी सर्वेक्षण शुरू किया:

      • केंद्र सरकार ने गंगा की लुप्तप्राय डाल्फिन समेत जलचर जीव की संख्या पता लगाने के लिए पूरी नदी का सर्वेक्षण शुरू किया है। यह सर्वेक्षण नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत किया जाएगा। सर्वेक्षण इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि नदी के जीवों की संख्या से पानी की गुणवत्ता का पता चलता है। इससे मिले वैज्ञानिक डाटा की मदद से सरकार गंगा के पानी की गुणवत्ता सुधारने के लिए उपयुक्त कदम उठाएगी।
      • राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में नरोरा से बिजनौर के बीच सर्वेक्षण का पहला चरण एक मार्च को शुरू किया गया। इस दौरान गंगा में करीब 165 किलोमीटर में राष्ट्रीय जल प्राणी डाल्फिन की संख्या का पता लगाया जाएगा। इलाहाबाद से वाराणसी (करीब 250 किलोमीटर) तक गणना का काम इस सप्ताह शुरू होने की उम्मीद है। उत्तराखंड के हर्षिल से भी नदी में मछली की प्रजातियों का पता लगाने का अध्ययन शुरू किया गया है।
      • यह सर्वेक्षण भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआइआइ) के जरिये कराया जा रहा है। डब्ल्यूआइआइ पर्यावरण और वन मंत्रालय की स्वायत्त संस्था है। एनएमसीजी के सलाहकार और इस मामले के विशेषज्ञ संदीप बेहरा ने नरोरा से कानपुर के बीच प्रदूषण के चलते गंगा में डाल्फिन के विलुप्त होने पर चिंता जताई।

      फतेहाबाद में सरस्वती नदी से जुड़े खुदाई कार्य में हड़प्पा सभ्यता से पहले के अवशेष मिले:

      • फतेहाबाद जिले के गांव कुनाल में हड़प्पाकाल से भी प्राचीन सभ्यता के संकेत मिले हैं। पुरातत्व विभाग ने दावा किया है कि पिछले दिनों गांव कुनाल में शुरू की गई खुदाई में प्री-हड़प्पाकालीन सभ्यता के अवशेष मिले है, जो 6000 साल पुराने हैं। अगर यह बात सच होती है तो यह सभ्यता दुनिया की सबसे पुरानी सभ्यता हो सकती है।
      • हड़प्पाकालीन सभ्यता करीब 3500 साल पुरानी है जबकि प्री-हड़प्पाकालीन सभ्यता तो 5000 से 6000 वर्ष पुरानी है। खुदाई के दौरान टीम को आभूषण, मणके, हड्डियों के मोती मिले हैं। पुरातत्व विभाग का कहना है कि ये वस्तुएं बेशकीमती हैं और विभाग इन्हें अपने संग्रहालय में सहज कर रखेगा।
      • डेप्युटी कमिश्नर एन. के. सोलंकी ने बताया कि गांव कुनाल में हड़प्पाकालीन स्थल पर नदी के प्रवाह क्षेत्र के किनारों की खुदाई आरंभ हो गई है। राष्ट्रीय संग्रहालय के महा निदेशक डॉ. बी. आर. मनी भारतीय पुरातत्व समिति की देखरेख में यह कार्य किया जा रहा है। यहां पर 1985 में भी खुदाई का काम शुरू हुआ था।
      • उस दौरान यहां 24 कैरेट सोने के हार व चांदी के मुकुट भी मिले थे, जो पहले हरियाणा से कहीं नहीं मिले। इससे यह सभ्यता हड़प्पाकालीन सभ्यता से पूर्व की सभ्यता सिद्ध हो रही है। यहां पर आभूषण पिघलाने की भट्ठी भी मिली थी, जिससे यह स्पष्ट लग रहा है कि लोग आभूषण ढालने का काम किसी भट्टी से करते थे।
      • हड़प्पाकालीन सभ्यता के लोग घरों को चौरस बनाते थे। कुनाल में मिट्टी के गोलाकार मकान मिले हैं। कहीं पर भी ईंट और पत्थरों का इस्तेमाल नहीं किया गया है जो दर्शा रहा है कि ये प्री-हड़प्पाकालीन सभ्यता के अवशेष है।

      कलवरी सबमरीन से प्रथम एंटी शिप मिसाइल लांच की गयी:

      • भारतीय नौसेना ने देश में ही बनी स्कोर्पिन श्रेणी की कलवरी सबमरीन से पोत रोधी मिसाइल का अरब सागर में 02 मार्च 2017 को पहली बार सफल परीक्षण किया। यह मिसाइल परीक्षण देश में ही बनाई गई स्कोर्पिन श्रेणी की कलवरी पनडुब्बी के लिए तो महत्वपूर्ण पड़ाव है ही इससे नौसेना की समुद्र के भीतर से मार करने की क्षमता में भी बढ़ोतरी हुई है।
      • देश में बनाई जा रही कलवरी श्रेणी की सभी छह पनडुब्बियों को इस पोत रोधी मिसाइल से लैस किया जाएगा। इस मिसाइल का मारक अभियानों में अच्छा रिकार्ड है। इस मिसाइल की बदौलत अब ये पनडुब्बी विस्तारित रेंज पर स्थित लक्ष्य को आसानी से भेद सकेंगी।
      • कलवरी भारत की उन 6 स्कॉर्पीन श्रेणी की पनडुब्बियों में पहली है, जिनका निर्माण परियोजना 75 (प्रोजेक्ट-75) के तहत किया जा रहा है। मझगांव डॉक लिमिटेड (एमडीएल) फ्रांसीसी कंपनी डीसीएनएस के सहयोग से पनडुब्बियों का निर्माण कर रही है। अक्टूबर 2015 में कलवरी को समुद्र में उतारा गया था।

      स्‍वच्‍छ गंगा के लिए राष्‍ट्रीय मिशन (एनएमसीजी) ने नमामि गंगे की सफलता के लिए रोटरी इंडिया से समझौता किया:

      • अधिक से अधिक स्‍वयंसेवी संगठनों को शामिल करते हुए नमामि गंगे कार्यक्रम को जन आंदोलन बनाने के प्रयास में जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्रालय के अंतर्गत स्‍वच्‍छ गंगा के लिए राष्‍ट्रीय मिशन ने 02 मार्च 2017 को नई दिल्‍ली में रोटरी इंडिया के साथ सहमति ज्ञापन पर हस्‍ताक्षर किया।
      • रोटरी इंडिया विभिन्‍न विद्यालयों में ‘स्‍कूलों में धुलाई’ कार्यक्रम के माध्‍यम से स्‍वच्‍छ गंगा मिशन का समर्थन करेगा। कार्यक्रम में लक्षित सरकारी विद्यालयों में जल, स्‍वच्‍छता और साफ-सफाई सेवाओं को लागू करना और स्‍कूली बच्‍चों, शिक्षकों, स्‍कूल प्रबंधन समुदाय का समितियों तथा सभी हितधारकों को स्‍वच्‍छता पर जागरूकता में सुधार के लिए सार्थक स्‍वास्‍थ्य व्‍यवहारों को अपनाने में संवेदी बनाना है।
      • यह लक्ष्‍य सीखने के एकीकृत माहौल तथा बच्‍चों को परिवर्तन के एजेंट के रूप में सक्षम बनाने से प्राप्‍त किया जा सकता है। रोटरी इंडिया की योजना 20,000 सरकारी स्‍कूलों में सफाई कार्यक्रम चलाने की है।
      • इस सहमति ज्ञापन से गंगा संरक्षण विषय को रोटरी के ‘स्‍कूलों में धुलाई’ कार्यक्रम से जोड़ने का मार्ग प्रशस्‍त होगा। रोटरी का यह कार्यक्रम बिहार, झारखंड तथा पश्‍चिम बंगाल के नाडियाड जिले में गंगा नदी से लगे स्‍थानों के सरकारी स्‍कूलों में चलाया जाएगा। यह कार्यक्रम अन्‍य राज्‍यों में भी चलाया जाएगा जहां रोटरी इंडिया की मजबूत उपस्‍थिति है। रोटरी इंडिया गंगा संरक्षण के बारे में स्‍कूलों और समुदायों में जागरूकता गतिविधियां और अभियान चलाएगा और इससे नदी में बहते प्रदूषण में कमी आएगी। अधिक से अधिक लोगों तथा समुदाय तक पहुंचने पर बल दिया जाएगा।
      • यह सहमति ज्ञापन दो वर्षों के लिए है। एनएमसीजी तथा रोटरी के बीच यह सहयोग गंगा संरक्षण में हितधारकों और समुदायों को शामिल करने की दिशा में महत्‍वपूर्ण कदम है। इस सहयोग से रोटरी इंटरनेशनल की शक्‍ति बढ़ेगी और एनएमसीजी की ओर से कोई अतिरिक्‍त वित्‍तीय वचनबद्धता नहीं निभानी होगी।

      डीएमआरएल, जेएसएचएल ने उच्च नाइट्रोजन स्टील की प्रौद्योगिकी के हस्तांतरण के लिए लाइसेंस समझौते पर हस्ताक्षर किये:

      • देश की सबसे बडी स्टेनलेस स्टील कंपनी जिंदल स्टेनलेस (हिसार) (जेएसएचएल) ने 01 मार्च 2017 को रक्षा क्षेत्र में उतरने की घोषणा की और शस्त्ररोधी कवच बनाने इस्तेमाल होने वाले हाई-नाइट्रोजन स्टील (एचएनएस) प्रौद्योगिकी के लिए रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के साथ करार किया।
      • इस करार पर राजधानी में एक समारोह में रक्षा राज्यमंत्री सुभाष भामरे की उपस्थिति में हस्ताक्षर किए गए। भामरे ने कहा कि देश के अंदर ही हाई-नाइट्रोजन इस्पात तैयार होने से इस समय आयात किए जाने वाले रोल्ड होमोजीनियस आर्मर (आरएचए) की जरूरत कम होगी और कवच बनाने के लिए धातु खरीदने की लागत 50 प्रतिशत कम होगी।
      • भामरे ने इस अवसर पर कहा कि यह आर्मर एप्लिकेशंस (कवच निर्माण में नए प्रयोग) की दिशा में एक बडी उपलब्धि है और इससे घरेलू प्रौद्योगिकियों को प्रोत्साहन मिलेगा। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘मेक इन इंडिया’ पहल के अनुरूप है। जेएसएचएल ने कहा कि हाई नाइट्रोजन इस्पात को विकसित करने में जेएचएचएल और डिफेंस मेटलर्जिकल रिसर्च लैबोरेटरी (डीएमआरएल) को मिल कर एक दशक का समय लगा।

      स्वदेश निर्मित सुपरसोनिक इंटरसेप्टर मिसाइल का सफल परीक्षण:

      • भारत ने स्वदेश निर्मित सुपरसोनिक इंटरसेप्टर मिसाइल का 01 मार्च 2017 को सफल परीक्षण किया। इस मिसाइल में कम ऊंचाई पर आ रही किसी भी बैलिस्टिक शत्रु मिसाइल को नष्ट करने की क्षमता है। इस मिसाइल का एक महीने से कम समय में यह दूसरी बार परीक्षण किया गया है और यह बहु स्तरीय मिसाइल रक्षा प्रणाली विकसित करने के प्रयासों का एक हिस्सा है।
      • इंटरसेप्टर ने चांदीपुर में एकीकृत परीक्षण रेंज के प्रक्षेपण परिसर 3 से पृथ्वी मिसाइल से प्रक्षेपित किये गये एक लक्ष्य को भेद दिया। यह इंटरसेप्टर 7.5 मीटर लंबी एक चरणीय ठोस रॉकेट प्रणोदक निर्देशित मिसाइल है जिसमें एक नौवहन प्रणाली, एक अत्याधुनिक कंप्यूटर और एक इलेक्ट्रो मैकेनिकल एक्टीवेटर लगा है।
      • इंटरसेप्टर मिसाल का अपना एक सचल प्रक्षेपक, हवा में निशाने को भेदने के लिए एक सुरक्षित डाटा लिंक, स्वतंत्र ट्रैकिंग क्षमता और आधुनिक रडार हैं। इंटरसेप्टर मिसाइल ने 11 फरवरी को पृथ्वी के वायुमंडल से 50 किलोमीटर ऊपर, अधिक ऊंचाई पर एक प्रतिद्वन्द्वी बैलिस्टिक मिसाइल को सफलतापूर्ण भेदा था। इससे पहले कम ऊंचाई पर 15 मई 2016 को एएडी मिसाइल का सफल परीक्षण किया गया था।

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