समसामयिकी नवम्बर : CURRENT AFFAIRS NOVEMBER:14-16

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एपीसीईआरटी सम्‍मेलन का आयोजन

  • इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के तत्‍वावधान में सीईआरटी-इन (Indian Computer Emergency Response Team) द्वारा नई दिल्‍ली में एशिया पैसिफिक कम्‍प्‍यूटर इमरजेंसी रिस्‍पॉन्‍स टीम (Asia Pacific Computer Emergency Response Team) सम्‍मेलन का आयोजन किया गया।
  • ए.पी.सी.ई.आर.टी. का यह 15वां सम्‍मेलन (भारत एवं दक्षिण एशिया में पहला) है।
  • इस सम्‍मेलन का शीर्षक है ‘‘डिजिटल अर्थव्‍यवस्‍था में विश्‍वास निर्मित करना’’।
  • इस सम्‍मेलन में एशिया प्रशांत क्षेत्र, अमेरिका, यूरोप, उद्योग, शिक्षा, सरकार और मीडिया से जुड़े 300 साइबर सुरक्षा पेशेवरों ने भाग लिया।
  • इस सम्‍मेलन में सी.ई.आर.टी. की रणनीतियों से संबद्ध सामयिक विषयों, प्रौद्योगिकी और डिजिटल रूप से विकसित अर्थव्‍यवस्‍थाओं में विश्‍वास निर्मित करने तथा मोबाइल और सोशल मीडिया के संबंध में साइबर सुरक्षा से निपटने हेतु आवश्यक सर्वश्रेष्‍ठ उपायों के संदर्भ में चर्चा की गई।

राष्ट्रीय विद्युत पोर्टल (National Power Portal – NPP)

  • नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय द्वारा भारतीय बिजली क्षेत्र में सूचना एकत्रीकरण और प्रसार के लिये एक राष्ट्रीय पावर पोर्टल (National Power Portal-NPP) लॉन्च किया गया।
  • एन.पी.पी. भारतीय विद्युत क्षेत्र के लिये एक केंद्रीयकृत प्रणाली है जो देश में बिजली उत्पादन से लेकर संप्रेषण और वितरण से संबंधित दैनिक, मासिक और वार्षिक ऑनलाइन डाटा कैपचर/इनपुट में सहायता प्रदान करती है।
  • यह केंद्रीयकृत प्रणाली विश्लेषित विभिन्न रिपोर्टों, ग्राफ, उत्पादन, संप्रेषण और वितरण के लिये अखिल भारतीय, क्षेत्रीय और केंद्रीय राज्य तथा निजी क्षेत्र के लिये राज्य स्तरीय आँकड़ों के माध्यम से बिजली क्षेत्र से संबंधित (संचालन, क्षमता, मांग, आपूर्ति, खपत आदि) सूचनाएँ प्रसारित करती है।
  • एन.पी.पी. डैश बोर्ड को इस तरह से डिज़ाइन और विकसित किया गया है कि यह जी.आई.एस. सक्षम नेविगेशन एवं राष्ट्रीय, राज्य, डिस्कॉम, शहर, फीडर स्तर और राज्यों को योजना आधारित धन पोषण पर क्षमता, उत्पादन, वितरण संबंधी विजुअल चार्ट के माध्यम से विश्लेषित सूचना का प्रसार करता है।
  • इस प्रणाली से नियमित रूप से प्रकाशित होने वाली विभिन्न वैधानिक रिपोर्टों को भी देखा जा सकता है।
  • मंत्रालय द्वारा पहले बिजली क्षेत्र से संबंधित लॉन्च किये गए एप तरंग, उजाला, विद्युत प्रवाह, गर्व, ऊर्जा, मेरिट अब एकीकृत रूप में इस डैश बोर्ड पर उपलब्ध होंगे।
  • एन.पी.पी. को केंद्रीय बिजली प्राधिकरण, बिजली वित्त निगम, ग्रामीण बिजलीकरण निगम तथा अन्य बड़ी कंपनियों के साथ एकीकृत किया गया है।

टिशु कल्चर (Tissue Culture) के लिये राष्ट्रीय प्रमाणीकरण व्यवस्था

  • भारत सरकार द्वारा “सीड्स एक्ट, 1966” के तहत एक प्रमाणन एजेंसी के रूप में एन.सी.एस.-टी.सी.पी. (National Certification System for Tissue Culture-Raised Plants – NCS-TCP) की स्थापना की गई है।
  • जैव प्रौद्योगिकी विभाग (विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय) इसका अधिकृत निकाय होगा।
  • इस प्रणाली के अंतर्गत गुणवत्तापूर्ण टिशू कल्चर रोपण सामग्री के उत्पादन और वितरण को सुनिश्चित करने का कार्य किया जाएगा।
  • पिछले दो दशकों में कृषि, वानिकी, वृक्षारोपण और बागवानी फसलों की बढ़ती मांग के साथ-साथ उच्च गुणवत्तायुक्त पैदावार एवं रोग – मुक्त रोपण की मांग में भी ज़बरदस्त वृद्धि हुई है।
  • परंपरागत प्रचार पद्धति (इसके अंतर्गत बीज की बुवाई, कटाई, लेयरिंग आदि को शामिल किया जाता है) बहुत सी अंतर्निहित सीमाओं से ग्रस्त है, जिसके कारण गुणवत्ता की गैर-एकरूपता और बीमारियों की घटनाओं में वृद्धि होती है।
  • तेज़ी से उच्च गुणवत्तायुक्त, रोग मुक्त और उच्च उपज देने वाले पौधों की कुलीन किस्मों को बढ़ाने हेतु यह व्यवस्था एक महत्त्वपूर्ण जैव प्रौद्योगिकी तथा व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य उपकरण के रूप में उभरी है।
  • भारत में टिशु कल्चर उद्योग में प्रतिवर्ष 15% की दर से वृद्धि हो रही है।
  • एनसीएस-टीसीपी का उद्देश्य गुणवत्तापूर्ण टिशू कल्चर रोपण सामग्री का उत्पादन और वितरण सुनिश्चित करना है।

हौसला 2017

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा 16 से 20 नवंबर, 2017 तक बाल अधिकार सप्ताह (हौसला 2017) मनाया गया। भारत द्वारा 14 नवंबर को बाल दिवस और 20 नवंबर को अन्तर्राष्ट्रीय बाल अधिकार दिवस के रूप में मनाया जाता है।

इस प्रोजेक्ट की विशेषताएँ :

यह देश के विभिन्न बाल देखभाल संस्थाओं के बच्चों द्वारा प्रतिभा को प्रदर्शित करने का एक अवसर प्रदान करता है।
इस अवसर पर निम्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगाः
बाल संसदः

  • राष्ट्रीय बाल नीति 2013 और किशोर न्याय (बाल देखभाल और संरक्षण) अधिनियम 2015 बच्चों को उन सभी विषयों में भाग लेने का अधिकार प्रदान करता है जो उन्हें प्रभावित करते हैं।
  • इस कार्यक्रम में सभी राज्यों/केन्द्र-शासित प्रदेशों से 14 से 18 आयु वर्ग के कुल 36 बच्चे भाग लेगें।
  • बच्चों द्वारा दिये गए सुझावों और विचारों के सारांश को बाद में संबंधित मंत्रालय और भारत सरकार के विभागों को भेजा जा सकता है।

चित्रकला प्रतियोगिताः

  • चित्रकला और चित्रकारी दो सशक्त उपकरण हैं जो बच्चों के संचार कौशल को बढ़ाने के लिए प्रयोग किये जाते हैं।
  • एथलेटिक्स मीट, शतंरज प्रतियोगिता और फुटबाल मैचः

  • इस अवसर पर मंत्रालय द्वारा एथलेटिक्स मीट का आयोजन (100 मीटर दौड़,100*4 मीटर रीले दौड़, लम्बी कूद, ऊँची कूद), शतरंज प्रतियोगिता और सीसीआई के बालक एवं बालिकाओं के फुटबाल मैच का आयोजन किया जाएगा।

वाक लेखनः

  • सभी राज्यों/केन्द्र शासित प्रदेशों से अनुरोध किया गया है कि वे सीसीआई के बच्चों के लिये वाक लेखन प्रतियोगिताओं का आयोजन करे।
  • पहले तीन लेखनों को मंत्रालय में भेजा जाएगा और लेखनों का संकलन यूनीसेफ के सहयोग से, मंत्रालय द्वारा एक पुस्तिका के रूप में प्रकाशित किया जाएगा।

भारत युवा विकास सूचकांक एवं रिपोर्ट, 2017

    हाल ही में तमिलनाडु के श्रीपेरुम्बुदूर (Sriperumbudur) में स्थित राष्ट्रीय महत्व के संस्थान का दर्ज़ा प्राप्त राजीव गांधी राष्ट्रीय युवा विकास संस्थान द्वारा युवा विकास सूचकांक एवं रिपोर्ट (India Youth Development Index and Report), 2017 जारी की गई। इस पहल की शुरुआत वर्ष 2010 में की गई थी।

उद्देश्य :

  • इसका उद्देश्य राज्यों में युवाओं के विकास की स्थिति पर करीबी नज़र रखना है।
  • इस सूचकांक के ज़रिये लचर और बेहतर प्रदर्शन करने वाले राज्यों की पहचान की जाएगी।
  • राज्यों में युवाओं के विकास को प्रभावित करने वाले पहलुओं को चिन्हित किया जाएगा।
  • साथ ही जिन क्षेत्रों पर अधिक ध्यान देने की ज़रूरत है उनके विषय में नीति निर्माताओं को जानकारी दी जाएगी।

प्रमुख बिंदु :

  • सूचकांक को तैयार करते समय राष्ट्रीय युवा नीति 2014 (भारत) के अनुसार युवा की परिभाषा एवं कॉमनवेल्थ की विश्व युवा विकास रिपोर्ट (15-29 वर्ष) के साथ-साथ वैश्विक तुलना हेतु कॉमनवेल्थ सूचकांकों का भी प्रयोग किया गया है।
  • वैश्विक युवा विकास सूचकांक भारत के लिये निर्मित युवा विकास सूचकांक (YDI) से अलग है। भारतीय YDI भारतीय समाज में विद्यमान संरचनात्मक असमानताओं के संबंध में सामाजिक प्रगति की समग्रता का आकलन करने के लिये एक नया डोमेन सामाजिक समावेश को संबद्ध करता है। यह नया प्रयास उन अंतरों की पहचान करने में मदद करता है जिनके संदर्भ में तीव्रता से नीतिगत हस्तक्षेप किये जाने की आवश्यकता है।

भारत की प्रथम ‘एयर डिस्पेंसरी’

  • देश के पूर्वोत्तर क्षेत्र में भारत की प्रथम ‘एयर डिस्पेंसरी’ (जो कि एक हेलीकॉप्‍टर में अवस्थित होगी) को स्‍थापित किया जाएगा। केन्‍द्रीय पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय (Union Ministry of Development of Northeast – DONER) द्वारा इस पहल को शुरू करने के लिये आरंभिक वित्त पोषण के एक हिस्‍से के रूप में 25 करोड़ रुपए का योगदान किया गया है।
  • यह सेवा ऐसे सुदूरवर्ती क्षेत्रों में उपलब्‍ध कराई जाएगी जहाँ न तो कोई भी डॉक्‍टर या चिकित्‍सा सुविधा सुलभ होती है और न ही ज़रूरतमंद मरीजों को समय पर किसी भी तरह की चिकित्‍सा सेवा ही प्राप्त हो पाती है।
  • पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय की पहल पर पूर्वोत्तर क्षेत्र में शुरू की जा रही इस पहल को भविष्य में अन्‍य पहाड़ी राज्‍यों जैसे – हिमाचल प्रदेश और जम्‍मू-कश्‍मीर में भी अपनाया जा सकता है।
  • आरंभ में इस योजना के तहत हेलीकॉप्‍टर को दो स्‍थलों मणिपुर के इम्‍फाल और मेघालय के शिलांग में अवस्थित किया जाएगा। ध्यातव्य है कि इन दोनों ही शहरों में प्रमुख स्नातकोत्तर चिकित्सा संस्थान उपस्थित हैं, जहाँ के विशेषज्ञ डॉक्टर आवश्‍यक उपकरणों एवं सहायक कर्मचारियों के साथ हेलीकॉप्‍टर के ज़रिये पूर्वोत्तर क्षेत्र के सभी आठों राज्‍यों के विभिन्‍न स्‍थानों पर पहुँच कर डिस्‍पेंसरी/ओपीडी सेवा मुहैया करा सकते हैं।
  • इतना ही नहीं वापसी के दौरान उसी हेलीकॉप्‍टर से ज़रूरतमंद मरीज़ को शहर में लाकर संबंधित अस्‍पताल में भर्ती भी कराया जा सकता है।
  • आरंभ में इम्‍फाल, गुवाहाटी और डिब्रुगढ़ के आसपास अवस्थित क्षेत्र में छह मार्गों पर दोहरे इंजन वाले तीन हेलीकॉप्‍टरों का परिचालन सुनिश्चित किया जाएगा।

राष्ट्रीय उपलब्धि सर्वेक्षण

  • हाल ही में आयोजित राष्ट्रीय उपलब्धि सर्वेक्षण (National Achievement Survey – NAS) न केवल भारत का सबसे बड़ा राष्ट्रीय मूल्यांकन सर्वेक्षण है, बल्कि यह विश्व के सबसे बड़े मूल्यांकन सर्वेक्षण में से भी एक है। इस सर्वेक्षण को सरकारी और सरकारी अनुदान प्राप्त स्कूलों में कक्षा 3, 5 और 8 के लिये आयोजित किया गया था।
  • इस सर्वेक्षण के अंतर्गत देश के सभी 36 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों के 700 जिलों में 25 लाख से अधिक छात्रों के सीखने के स्तर का मूल्यांकन किया गया।
  • सर्वेक्षण की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिये एक निगरानी दल का गठन किया गया, जिसमें राज्य सरकारों के अंतर-मंत्री विभागों, शिक्षा विभागों के राष्ट्रीय और राज्य पर्यवेक्षकों तथा बहु-पार्श्व संगठनों के पर्यवेक्षक शामिल थे। इस निगरानी दल द्वारा मूल्यांकन के दिन सभी ज़िलों में किये गए सर्वेक्षण के कार्यान्वयन की निगरानी की गई।
  • विशेष रूप से इसी के लिये निर्मित एक सॉफ्टवेर के आधार पर ज़िलेवार अध्यापन रिपोर्ट कार्ड तैयार किये जाएंगे। इसके बाद, विश्लेषणात्मक रिपोर्ट (इसके अंतर्गत शामिल विश्लेषण में अलग-अलग एवं विस्तृत रूप से सीखने के स्तर को प्रतिबिंबित किया जाएगा) तैयार की जाएगी।
  • इस सर्वेक्षण से प्राप्त निष्कर्ष शिक्षा प्रणाली की दक्षता को समझने में भी मददगार साबित होगा। राष्ट्रीय उपलब्धि सर्वेक्षण परिणाम बच्चों के सीखने के स्तर में सुधार लाने तथा उनमें गुणात्मक सुधार करने हेतु राष्ट्रीय, राज्य, जिला और कक्षा स्तरों पर शिक्षा नीति के संबंध में योजना बनाने एवं उनका कार्यान्वयन करने आदि में मार्गदर्शन प्रदान करेगा।

रसगुल्ले को मिला ‘जीआई’ टैग

    हाल ही में चेन्नई स्थित जीआई रजिस्ट्री ने यह घोषणा की है कि रसगुल्ले का उद्भव स्थान पश्चिम बंगाल है न कि उड़ीसा। अतः रसगुल्ले को लेकर उड़ीसा के साथ हुए कई विवादों के पश्चात् पश्चिम बंगाल के रसगुल्ले को जीआई टैग दिया गया है। बंगाल ने ‘बांग्ला रसगुल्ला’ पेटेंट नाम को प्राप्त किया है।
    उल्लेखनीय है कि इससे पहले भी इसी वर्ष आंध्र प्रदेश के प्रसिद्ध बंगनपल्ले आम और पश्चिम बंगाल के तुलापंजी चावल के साथ ही अन्य पाँच उत्पादों को भी ‘भौगोलिक संकेत’ (Geographical Indications- GI ) नामक टैग दिया गया है।

जीआई टैग

  • भौगोलिक संकेत को बौद्धिक संपदा अधिकारों के व्यापार संबंधी पहलुओं (Trade Related Aspects of Intellectual Property Rights-TRIPS) के अंतर्गत शामिल किया जाता है।
  • भौगोलिक संकेत प्राप्त उत्पाद एक ऐसा कृषि, प्राकृतिक अथवा विनिर्मित उत्पाद (हस्तशिल्प और औद्योगिक वस्तुएँ) होता है, जिसे एक निश्चित भौगोलिक क्षेत्र में ही उगाया जाता है।
  • यह संकेत प्राप्त होने पर उत्पाद की गुणवत्ता और विशिष्टता सुनिश्चित होती है। भौगोलिक संकेत का टैग किसी उत्पाद की उत्पत्ति अथवा किसी विशेष क्षेत्र से उसकी उत्पत्ति को दर्शाता है, क्योंकि उत्पाद की विशेषता और उसके अन्य गुण उसके उत्पत्ति स्थान के कारण ही होते हैं।
  • यह टैग किसानों और विनिर्माताओं को अच्छा बाज़ार मूल्य प्राप्त करने में सहायता करता है।

वैली ऑफ हनी

  • पूर्वी घाट में स्थित अराकु (Araku) घाटी नवंबर के दौरान पीले रंग के नाइजर फूलों से भर जाती है। यहाँ के किसान शहद की खेती करते हैं और इस कारण मधुमक्खियों को अच्छा वातावरण उपलब्ध कराया जाता है।
  • जिस समय मधुमक्खियों का अस्तित्व खतरे में था, अराकु में मधुमक्खी पालनकर्ताओं द्वारा ‘मीठी क्रांति’ (sweet revolution) की गई थी। अराकु विशाखापत्तनम से 120 किलोमीटर की दूरी पर अवस्थित है।
  • पीले नाइजर फूल वाले क्षेत्रों में नीले डिब्बों को पंक्तियों में रख दिया जाता है। इनमें से प्रत्येक बॉक्स में लगभग एक लाख कार्यकारी मधुमक्खियाँ, 100 ड्रोन और एक रानी मक्खी होती है।

महत्त्व

    मधुमक्खियाँ जोकि संगठित समुदायों में रहती हैं, परागण तथा पारिस्थितिक संतुलन को बनाए रखने हेतु किसानों के लिये अत्यधिक महत्त्व रखती हैं। हाल ही में पूर्वी घाट में मधुमक्खियों की संख्या में हुई वृद्धि के कारण फसलोत्पादन में वृद्धि हुई है। अनेक युवा मधुमक्खी पालन का कार्य आजीविका के स्रोत के रूप में कर रहे हैं।

दुधवा नेशनल पार्क

  • हाल ही में दुधवा नेशनल पार्क के अधिकारियों द्वारा यह घोषणा की गई है कि पार्क में बड़ी बिल्लियों की द्विवार्षिक गणना हेतु उन क्षेत्रों में 450 कैमरों को इनस्टॉल किया जाएगा, जहाँ बाघों की गतिविधियों को चिन्हित किया गया है। यह जनगणना कुछ ही दिनों में शुरू हो जाएगी।
  • यह उत्तर प्रदेश का एक संरक्षित क्षेत्र है जिसका विस्तार लखीमपुर-खीरी और बहराइच ज़िले में है।
  • लखीमपुर-खीरी जनपद में स्थित दुधवा नेशनल पार्क नेपाल की सीमा से लगे तराई-भाभर क्षेत्र में स्थित है। इसका उत्तरी किनारा नेपाल की अंतरराष्ट्रीय सीमा से लगा हुआ है और इसके दक्षिण में सुहेली नदी बहती है।
  • इसका क्षेत्रफल 1,284.3 किलोमीटर (490.3 वर्ग किलोमीटर) है, जिसमें 190 वर्ग किलोमीटर का बफर ज़ोन है।
  • यह पार्क आम जनता के लिये प्रतिवर्ष 15 नवंबर को खुलता है और जून 15 को बंद हो जाता है।
  • इस पार्क में दलदल, घास के मैदान और घने वृक्ष हैं यह क्षेत्र मुख्यतः बारहसिंगा और बाघों की प्रजातियों के लिये प्रसिद्ध है। यहाँ पक्षियों की भी विभिन्न प्रजातियाँ पायी जाती है।
  • इस पार्क में विश्व के सबसे अच्छे साल के वृक्ष भी मौजूद हैं।

  1. हिंदी माध्यम वालो के लिए बहुत उपयोगी साइट हैं।
    खासकर गाँव में रहकर तैयारी करने वाले मेरे जैसे प्रतियोगी छात्रो के लिए

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