समसामयिकी फरवरी : CURRENT AFFAIRS FEBRUARY:1-8

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न्यूरोकैलिक्स कैलीसिनस पौधा में औषधीय गुण :

  • जवाहर लाल नेहरू ट्रॉपिकल बोटेनिक गार्डन एंड रिसर्च इंस्टिट्यूट (जेएनटीबीजीआरआई) के वैज्ञानिकों ने न्यूरोकैलिक्स कैलीसिनस पौधे में कई चिकित्सीय गुणों की पुष्टि की है।
  • न्यूरोकैलिक्स कैलीसिनस एक औषधीय पौधा है जो पश्चिमी घाट और श्रीलंका के दक्षिणी भागों में पाया जाता है।
  • इस पौधे के चिकित्सीय गुणों की खोज चोलानाइकन जनजाति (केरल में अतिसंवेदनशील समूहों में से एक) के पारंपरिक ज्ञान के आधार पर हुई है, जोकि सूजन और घाव का इलाज करने के लिए इस पौधे का उपयोग करती है।

मुख्य तथ्य:

  • न्यूरोकैलिक्स कैलीसिनस से प्राप्त हर्बल दवा जलने की चिकित्सा में सहायक, घाव की चिकित्सा में सहायक, कैंसर विरोधी, एनाल्जेसिक, प्रतिरोधी क्षमता बढ़ाने वाली, सूजन कम करने वाली, प्लेटलेट वृद्धि करने वाली और एंटी ऑक्सीडेंट प्रभाव रखने वाली होती है।
  • पशु परीक्षणों ने साबित कर दिया है कि सूजन के प्रारंभिक चरण में मानक दवा पॉवीडान / आयोडीन के साथ तुलनात्मक रूप में इस औषधीय पौधे की पत्तियाँ घाव को ठीक करने का गुण रखती हैं।
  • पत्तियों की एंटी-इन्फ्लेमैटेरी गतिविधि दवा डिक्लोफेनाक सोडियम के समान ही थी। प्री-क्लिनिकल परीक्षणों ने भी घाव और दर्द के खिलाफ न्यूरोकैलिक्स कैलीसिनस के उपचारात्मक प्रभाव की पुष्टि की है।
  • उच्च विटामिन ई सामग्री की उपस्थिति और सेल लाइनों में शक्तिशाली सायटोप्रोटेक्टिव गतिविधि ने एक इसके कैंसर विरोधी दवा के विकास की संभावनाओं को और बढ़ाया है।

जवाहर लाल नेहरू ट्रॉपिकल बोटेनिक गार्डन एंड रिसर्च इंस्टिट्यूट (जेएनटीबीजीआरआई):

    जेएनटीबीजीआरआई का पूर्व नाम ट्रॉपिकल बोटेनिक गार्डन एंड रिसर्च इंस्टिट्यूट था। इसका नाम दूरदर्शी प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू की याद में बदला गया था। इसे केरल सरकार द्वारा 17 नवंबर 1979 को केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम में बनाया गया था। यह विज्ञान, प्रौद्योगिकी और पर्यावरण के लिए केरल राज्य परिषद (KSCSTE), केरल सरकार की अम्ब्रेला स्कीम के तहत कार्य करता है।

चोलानाइकन जनजाति:

    चोलानाइकन भारत का एक संजातीय समूह हैं। वे मुख्य रूप से दक्षिणी केरल, विशेष रूप से साइलेंट वैली नेशनल पार्क में निवास करते हैं और इस क्षेत्र की अंतिम शेष शिकारी जनजातियों में से एक हैं। चोलानाइकन लोग चोलानाइकन भाषा बोलते हैं जोकि द्रविड़ परिवार के अंतर्गत आती है।

हिंद महासागर के नीचे मिला प्राचीन खोया हुआ द्वीप

  • हिंद महासागरीय द्वीप मारीशस के नीचे एक ‘खोये हुए महाद्वीप’ की मौजूदगी की वैज्ञानिकों ने पुष्टि की है जो सुपर महाद्वीप गोंडवाना के टूटने के बाद संभवत वहां बचा रह गया था। टूटने की यह प्रक्रिया करीब 20 करोड़ साल पहले शुरू हुई थी।
  • इस द्वीपीय टुकड़े को बाद में द्वीप पर हुए ज्वालामुखी विस्फोटों से निकले लावा ने ढक लिया और जान पड़ता है कि यह उस प्राचीन महाद्वीप का छोटा हिस्सा है जो मैडागास्कर द्वीप से टूट कर बना होगा।
  • यह घटना उस समय की बताई जाती है जब अफ्रीका, भारत, आस्ट्रेलिया और अंटार्कटिका अलग हुए और हिंद महासागर बना। दक्षिण अफ्रीका में यूनिवर्सिटी आफ विटवाटर्सरेंड के प्रोफेसर लेविस ऐशवाल ने बताया कि हम महाद्वीपों के टूटने की प्रक्रिया का अध्ययन कर रहे हैं ताकि ग्रह के भूगर्भीय इतिहास को समझ सके।
  • ज्वालामुखी विस्फोटों से निकले लावे से बनी चट्टानों में मिले खनिज जिरकन का अध्ययन करते हुए ऐशवाल और उनके सहयोगियों ने पाया कि इस खनिज के अवशेष मारीशस के द्वीप से भी पुराने हैं।
  • उन्होंने बताया कि धरती 2 हिस्सों से बनी है महाद्वीप जो कि पुराने हैं और महासागर जो कि ‘नए’ हैं। महाद्वीपों पर आज ऐसी चट्टानें पाते हैं जो चार अरब साल से अधिक पुरानी हैं लेकिन आपको महासागरों में ऐसा कुछ नहीं मिलता क्योंकि यह ऐसी जगह है जहां नई चट्टानें बनीं। उन्होंने बताया कि मारीशस एक द्वीप है और इस पर कोई भी चट्टान 90 लाख साल से अधिक पुरानी नहीं है।
  • लेकिन द्वीप की चट्टानों के अध्ययन से हमने पाया कि जिरकन तीन अरब साल पुराना है। जिरकन ऐसे खनिज हैं जो महाद्वीपों में ग्रेनाइट में मिलते हैं। इनमें यूरेनियम, थोरियम और सीसा के कण पाए जाते हैं और इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कि वे भूगर्भीय प्रक्रियाओं में अपना अस्तित्व बनाए रख सकें इससे पता चलता है कि वे अपने भीतर भूगर्भीय प्रक्रियाओं का समृद्ध रिकार्ड समेटे हुए हैं और बेहद सटीक तरीके से इनके समय का पता लगाया जा सकता है।

स्वास्थ्य मंत्रालय ने मीज़ल्स रूबेल (एमआर) टीकाकरण अभियान का शुभारंभ किया

    स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने फरवरी 5, 2017 को बेंगलूरू में आयोजित एक समारोह में देश में मीज़ल्स रूबेल (एमआर) टीकाकरण अभियान का शुभारंभ किया।
    इस अभियान के बाद मीज़ल्स रूबेल (एमआर) टीका नियमित रोग-प्रतिरक्षण कार्यक्रम (Universal Immunisation Programme) में शामिल किया जायेगा, जो वर्तमान में दी जा रही मीज़ल्स की खुराक का स्थान लेगा। वर्तमान में यह खुराक दो बार यानी 9-12 महीने और 16-24 महीने की आयु के बच्चों को दी जाती है।

अभियान के मुख्य बिंदु

  • इस अभियान के तहत चेचक (मीज़ल्स) और हलका खसरा (रूबेल) जैसी बीमारियों से दोहरे प्रतिरक्षण के लिए टीका दिया जाएगा।
  • इन दो बीमारियों के खिलाफ अभियान पांच राज्यों/संघशासित प्रदेशों (कर्नाटक, तमिलनाडू, पुदुच्चेरी, गोवा और लक्षद्वीप) से शुरू किया जायेगा।
  • इस अभियान के अंतर्गत करीब 3.6 करोड़ बच्चों को टीके लगाए जाएंगे।
  • एमआर अभियान का लक्ष्य देशभर में करीब 41 करोड़ बच्चों को लाभ पहुंचाना है। इन सभी की आयु 9 महीने से 15 वर्ष के बीच है।
  • सभी बच्चों, जिनकी आयु 9 महीने से 15 वर्ष के बीच है और जिन्होंने पहले यह टीका लगवा रखा है, को इस टीके का सिंगल शॉट दिया जाएगा।
  • इस अवसर पर केन्द्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्य मंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते ने कहा कि सरकार देश को चेचक (मीज़ल्स) और हलका खसरा (रूबेल) से मुक्त करने के प्रति वचनबद्ध है। उन्होंने कहा कि इस काम में राज्य सरकारों, गैर सरकारी संगठनों और विश्व स्वास्थ्य संगठन, यूनिसेफ, गेट्स फाउंडेशन, लायन्स क्लब, आईपीए, आईएमए आदि विकास भागीदारों को शामिल करेगी।

खसरा और रूबेला के बारें में

  • खसरा एक जानलेवा बीमारी है और देश में बाल मृत्यु दर का एक मुख्य कारण है। एक अनुमान के अनुसार, विश्व स्तर पर, 2015 में, खसरा 1,34,200 बच्चों (ज्यादातर पांच साल से कम) की मृत्यु का कारण बनी और भारत में इस बीमारी से 49,200 बच्चों की मृत्यु हुई।
  • रूबेला आम तौर पर एक हल्का संक्रमण है, लेकिन अगर संक्रमण गर्भवती महिलाओं में होता है तो यह जन्मजात रूबेला सिंड्रोम (सीआरएस) का कारण बनती है, जो सार्वजनिक स्वास्थ्य चिंता का कारण है।

अंतरिक्ष यान जूनो ने चौथी बार बृहस्पति ग्रह के उड़ान को पूरा किया:

  • नासा के सौर ऊर्जा संचालित अंतरिक्ष यान जूनो ने चौथी बार बृहस्पति ग्रह के रहस्यमय बादलों के सबसे ऊपर से करीबी उड़ान को पूरा किया। जूनो के सभी 8 विज्ञान उपकरण उड़ान के दौरान खुले हुए (ऑन) थे। अपने निकटतम प्रयास के दौरान, यह बृहस्पति के बादल में सबसे ऊपर से 4,300 किलोमीटर ऊंचाई पर था और 208000 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से यात्रा कर रहा था।
  • वर्तमान में, जूनो बृहस्पति के चारों ओर एक 53 दिन की कक्षा में घूम रहा है। इसके द्वारा अगले डेढ़ वर्षों में तीन दर्जन उड़ान प्रदर्शन करने की उम्मीद है। अपनी उड़ानों के दौरान, जूनो बृहस्पति के बादलों के नीचे की जांच करता है और बृहस्पति के अस्र्णोदय का अध्ययन कर इसके उद्भव, संरचना, वातावरण और मैग्नेटोस्फेयर के बारे में जानकारी खोजता है।

पृष्ठभूमि:

  • ‘न्यू फ्रंटियर्स कार्यक्रम’ (New Frontiers Program) नासा द्वारा संचालित अंतरिक्ष अन्वेषण मिशनों की एक शृंखला है, जिसका उद्देश्य बौने ग्रह प्लूटो सहित सौर मंडलीय ग्रहों से संबंधित अनुसंधान करना है।
  • वर्तमान में इस कार्यक्रम के तहत दो मिशनों का संचालन किया जा रहा है-पहला ‘न्यू होराइजंस’ (New Horizons) और दूसरा ‘जूनो’ (Juno)। न्यू होराइजंस मिशन मुख्य रूप से प्लूटो जबकि जूनो मिशन बृहस्पति ग्रह के अनुसंधान से संबंधित है।
  • लगभग 5 वर्षों की लंबी अंतरिक्ष यात्रा के पश्चात नासा का जूनो अंतरिक्षयान 4 जुलाई, 2016 को सौर मंडल के सबसे बड़े ग्रह बृहस्पति तक पहुंच कर उसकी कक्षा में स्थापित हो गया।
  • प्रक्षेपण के पश्चात जूनो अंतरिक्षयान लगभग 2.8 बिलियन किमी. की दूरी तय कर बृहस्पति तक पहुंच गया। जूनो, बृहस्पति की कक्षा में स्थापित होने वाला दूसरा अंतरिक्षयान है। इसके पूर्व दिसंबर, 1995 में नासा का ‘गैलीलियो’ (Galileo) अंतरिक्षयान बृहस्पति की कक्षा में प्रविष्ट होने वाला पहला अंतरिक्षयान बना था।

ज़ीका वैक्सीन की एकल खुराक पशुओं पर असर करती है

    हाल के एक अध्ययन के अनुसार, आनुवंशिक सामग्री से बनायी गई वैक्सीन ने प्रयोगशाला में रखे जानवरों को ज़ीका वायरस से बचाकर रखा। एक एकल, कम खुराक वाले टीका परिरक्षित चूहे को पांच महीने बाद ज़ीका के सम्पर्क में लाने के बावजूद भी सुरक्षित रखा।

  • यहाँ तक कि बंदर वैक्सीन लेने के पांच सप्ताह के बाद भी वायरस से प्रभावित नहीं थे। नया टीका आनुवंशिक सामग्री के एक संशोधित संस्करण मैसेंजर आरएनए (mRNA) पर आधारित है। इसे प्रतिरक्षा प्रणाली के रडार के अंतर्गत जाने के लिए बनाया गया है और यह मानव कोशिकाओं में सीधे प्रवेश करती है।
  • एक बार वहां पहुँचने पर, आरएनए टीका, सेल की प्रोटीन बनाने वाली मशीनरी में शामिल हो जाती है, और यह जीवित वायरस की भांति ही कार्य करती है। यह वसा आधारित नैनोकणों से रक्त प्रवाह में दिया जा सकता है।
  • यह सिर्फ त्वचा के नीचे इंजेक्शन लगाकर पहुँचाया जा सकता है, और इस तरह यह सुचारू रूप से कार्य कर सकता है। आरएनए आधारित टीके, नॉन-रेप्लेकेटिंग होते हैं, अर्थात वे मेजबान की आनुवंशिक ब्लूप्रिंट में एकीकृत नहीं हो सकते। यह उस सुरक्षा चिंता पर काबू करती है जोकि जीवित-वायरस के टीके के साथ आती है।

ज़ीका वायरस क्या है?

    ज़ीका एक उभरता रोग है। यह एक संक्रमित मादा मच्छर के काटने से मनुष्यों में फैलता है। दुनिया में मच्छरों की लगभग 3,500 प्रजातियाँ हैं। केवल एडीस एजिप्टी मच्छर प्रजातियाँ ज़ीका वायरस संचारित करने के लिए जानी जाती हैं। विशेषज्ञों को संदेह है कि मच्छरों की एडीस जीनस वाली अन्य प्रजातियाँ, विशेष रूप से एडीस एल्बोपिक्टस मच्छर भी वायरस संचारित करने में सक्षम हैं।
    विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने फरवरी 2016 में इसे एक वैश्विक स्वास्थ्य आपात स्थिति घोषित कर दिया था और नवंबर 2016 में इसे इस स्थिति से मुक्त घोषित कर दिया था।

विश्व कैंसर दिवस: 4 फरवरी

    विश्व कैंसर दिवस प्रत्येक वर्ष 4 फ़रवरी को मनाया जाता है। आधुनिक विश्व में कैंसर एक ऐसी बीमारी है जिससे सबसे ज़्यादा लोगों की मृत्यु होती है। विश्व में इस बीमारी की चपेट में सबसे अधिक मरीज़ हैं। तमाम प्रयासों के बावजूद कैंसर के मरीजों की संख्या में कोई कमी नहीं आ रही है। इसी कारण विश्व स्वास्थ्य संगठन ने हर साल 4 फरवरी को विश्व कैंसर दिवस की तरह मनाने का निर्णय लिया ताकि लोगों को इस भयानक बीमारी कैंसर से होने वाले नुकसान के बारे में बताया जा सकें और लोगों को अधिक से अधिक जागरूक किया जा सकें।

विश्व कैंसर दिवस 2016-2018:
2016, 2017 और 2018 में विश्व कैंसर दिवस के लिए एक विशेष तीन साल का अभियान शुरू किया गया है जिसकी टैगलाइन “वी कैन, आई कैन” है।
भारत में कैंसर की स्थिति:

  • इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) के आंकड़ों के मुताबिक प्रति वर्ष देश में 14 लाख से अधिक कैंसर मरीज सामने आ रहे हैं। इसमें से करीब 45 फीसदी पुरुष मरीजों में कैंसर की वजह धूम्रपान और तंबाकू को बताया जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि धूम्रपान और तंबाकू के सेवन पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया जाए तो देश में कुल पुरुष कैंसर मरीजों की आधी संख्या इस खतरनाक बीमारी की चपेट में आने से बच जाएगी।
  • धूम्रपान और तंबाकू की वजह से सिर्फ मुंह और गले के अलावा गर्भाशय, लिवर, किडनी, मलाशय, ब्लड, पेट, भोजन नली, थैली, अग्नाशय सहित कुछ अन्य तरह के कैंसर हो रहे हैं। पुरुषों में होने वाले 45 फीसदी कैंसर की वजह धूम्रपान को बताया जा रहा है, जबकि 17 फीसदी महिलाओं में कैंसर की वजह धूम्रपान बन रहा है। 80 फीसदी मुंह के कैंसर के लिए सीधे तौर पर तंबाकू और धूम्रपान जिम्मेदार है।

चेन्नई तेल रिसाव: एक पारिस्थितिकीय आपदा

    28 जनवरी 2017 को चेन्नई से 20 किमी० की दूरी पर एन्नोर बंदरगाह के निकट तेल के टैंकर और एलपीजी वाहक की टक्कर के फलस्वरूप हुआ तेल का रिसाव समुद्र तट और इसके जीव-जंतुओं को नष्ट कर चुका है। इस तेल में कई कछुए और अनेक मृत मछलियाँ भी पाए गये थे। हादसे और बाद में तेल रिसाव होने के कारण समुद्र में तेल फैल गया जिससे पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंचा। तमिलनाडु प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तेल के समुद्र में मिलने से हुई क्षति् की जांच कर रहा है।

तेल रिसाव क्या है ?

  • तेल रिसाव एक प्रकार का प्रदूषण है जिसमें मानवीय गतिविधियों के कारण तरल पेट्रोलियम हाईड्रोकार्बन पर्यावरण में मुक्त हो जाता है | इस शब्द का प्रयोग अक्सर समुद्री तेल रिसाव के लिए किया जाता है जहाँ तेल समुद्र में अथवा तटीय जल में मुक्त हो जाता है। तेल रिसाव में कच्चे तेल, परिष्कृत पेट्रोलियम उत्पादों, उनके उप-उत्पादों का रिसाव और बड़े में प्रयुक्त होने वाले भारी ईंधन जैसे बंकर ईंधन का रिसाव या किसी तैलीय अवशिष्ट का या अपशिष्ट तेल का रिसाव शामिल है |
  • इनका रिसाव टैंकर से, अपतटीय प्लेटफार्म से, खुदाई उपकरणों से तथा कुओं से रिसाव इत्यादि से भी हो सकता है | प्राकृतिक तेल रिसाव से भी तेल समुद्री पर्यावरण में प्रवेश करता है। यह तेल जलीय जीवों को प्रभावित करने के साथ ही, इससे सम्बंधित पक्षियों के पंखों की संरचना में प्रवेश कर, उनकी उत्प्लावकता और भोजन की तलाश में तथा शिकारियों से बचने के लिए उनकी उड़ान क्षमताओं को भी कम करता है।
  • जब पक्षी चोंच से अपने परों को खुजाते हैं तो परों पर लगा हुआ तेल निगल जाते हैं, जिसके कारण उनके अंगों में नकारात्मक प्रभाव उत्पन्न होता है तथा पाचन तंत्र में जलन होती है।

तकनीकी शिक्षा में सुधार के लिए भारत ने विश्व बैंक के साथ समझौता किया:

  • देश में तीसरी तकनीकी शिक्षा गुणवत्ता सुधार कार्यक्रम के लिए भारत ने विश्व बैंक के साथ एक 201.50 लाख वित्तपोषण समझौते पर हस्ताक्षर किया है। इस परियोजना का उद्देश्य आठ पूर्वोत्तर राज्यों हिमाचल प्रदेश, बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, उत्तराखंड और अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह में इंजीनियरिंग की शिक्षा प्रणाली की दक्षता में सुधार लाना है।
  • सरकार ने अब शिक्षा के क्षेत्र में गुणवत्ता और स्वायत्तता पर जोर देने की पहल की है। स्कूलों में हर साल इस बात का अलग से आकलन किया जाएगा कि अंक हासिल करने से इतर छात्र वास्तव में कितना कुछ सीख पा रहे हैं। इसी तरह उच्च शिक्षा के क्षेत्र में सभी तरह की प्रवेश परीक्षाओं को पारदर्शी और पेशेवर तरीके से आयोजित करने के लिए अलग से एक एजेंसी शुरू की जाएगी।
  • वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बजट के दौरान कहा था कि उच्च शिक्षा के क्षेत्र में सरकार तेजी से सुधार करेगी। केंद्र सरकार नई शिक्षा नीति घोषित करने जा रही है। इसमें भी प्रस्ताव किया गया है कि विश्वविद्यालय शिक्षा में आमूल बदलाव के लिए मौजूदा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया जाए।
  • गुणवत्ता वाले उच्च शैक्षणिक संस्थानों की प्रशासनिक और अकादमिक दोनों ही तरह की स्वायत्तता में बढ़ोतरी की जाएगी। पहली बार देश में इंजीनियरिंग, मेडिकल जैसे उच्च शिक्षा के सभी पाठ्यक्रमों में दाखिले के लिए एक अलग एजेंसी का गठन किया जाएगा। यह राष्ट्रीय टेस्टिंग एजेंसी स्वायत्त संस्थान के तौर पर तो काम करेगी ही, अपना खर्च खुद वहन करेगी।
  • इस परियोजना के दो प्रमुख उद्देश्य हैं – (i) उक्त राज्यों में इंजीनियरी संस्थानों में गुणवत्ता और इक्विटी में सुधार; (ii) क्षेत्रगत शासन और कार्य निष्पादन को सुदृढ़ बनाने के लिए प्रणालीस्तरीय सुधार करना।
  • तृतीय तकनीकी शिक्षा गुणवत्ता सुधार कार्यक्रम (टीईक्यूआईपी III) की अवधि तारीख 31 मार्च, 2022 तक है।

नई क्रेडिट लिंक्ड सब्सिडी योजना (सीएलएसएस) मध्य आय वर्ग के लिए शुरू की गयी:

  • केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 01 फरवरी 2017 को प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) (पीएमएवाई) के समान ‘क्रेडिट लिंक्ड सब्सिडी स्कीम’ (सीएलएसएस) के तहत ऋण अवधि को 15 साल से बढ़कर 20 साल करने को मंजूरी दे दी है और मध्य आय वर्ग (एमआईजी) के लोगों के लिए एक नई योजना शुरू की है।
  • मध्य आय वर्ग के लिए प्रस्तावित सीएलएसएस हेतु शुरुआत में साल 2017-18 के बजट में बजटीय अनुमानस्तर पर 1000 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। एक अधिकारिक बयान में कहा गया है कि सीएलएसएस के रूप में नामित योजना समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों/कम आय वर्ग के लोगों के लिए है।
  • मंत्रिमंडल ने पीएमएलएवाई के समान सीएलएसएस के तहत केंद्रीय नोडल एजेंसियों के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर करने वाले प्राथमिक ऋण संस्थाओं को उनके एमओयू के प्रावधान को लागू करने योग्य बदलावों के साथ विस्तार की भी मंजूरी दे दी है।
  • सरकार ने 2019 तक एक करोड़ मकान बनाने का प्रस्ताव किया है। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आबंटन 15,000 करोड़ रुपए से बढ़ाकर 23,000 करोड़ रुपए किया गया है।
  • प्राथमिक सहकारी समितियों के जांच-पड़ताल के बाद योग्यता मानदंड की जांच पूरी होने के बाद लाभार्थियों के खाते में ब्याज सब्सिडी डाली जाएगी। मध्यम आय वर्ग समूह के लिए प्रस्तावित ब्याज सब्सिडी एक अनूठी पहल है जिससे इस श्रेणी में आवास की जरूरतों को पूरा किया जा सकेगा।
  • इसी के साथ एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि साल 2022 तक सभी को घर उपलब्ध कराने हेतु योजना की पहुंच समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग, कम आय वर्ग और मध्य आय वर्ग के लोगों की बड़े पैमाने पर भागीदारी सुनिश्चित करेगी। इससे समता और समावेशिता सुनिश्चित होगी।

पृष्ठभूमि:

    पूर्ववर्ती योजना जून, 2015 में पेश की गई थी। इसके तहत आर्थिक रूप से कमजोर (ईडब्ल्यूएस) तथा निम्न आय वर्ग (एलआईजी) के ऐसे व्यक्ति जो कि पहली बार घर या फ्लैट खरीदने जा रहे हैं और जिनकी सालाना आय 3 लाख रुपये और 6 लाख रुपये वार्षिक है, को सब्सिडी मिलनी थी।
    सीएलएसएस कार्यक्रम एनएचबी और हुडको द्वारा चलाया जा रहा है। अब सीएलएसएस कार्यक्रम के क्रियान्वयन की प्रगति की निगरानी राज्य स्तर की बैंकर समिति (एसएलबीसी) द्वारा की जाएगी।

केंद्र ने किसानों की आय मार्च 2022 तक दोगुनी करने के लिए समिति बनायी:

  • कृषि और किसान कल्याण राज्य मंत्री पुरुषोत्तम रुपाला ने बताया कि केंद्र सरकार ने मार्च 2022 तक किसानों की आय को दोगुना करने का लक्ष्य प्राप्त करने के लिए एक समिति गठित की है। यह समिति कृषि, सहकारिता और किसान कल्याण विभाग के अंतर्गत गठित की गयी है तथा इस समिति की अध्यक्षता इस विभाग के एडिशनल सेक्रेटरी करेंगे।
  • समिति का मुख्य कार्य किसानों और खेतिहर मजदूरों की वर्तमान आय के स्तर का अध्ययन करके वर्तमान आय की ऐतिहासिक विकास को मापने के लिए किया जाएगा। यह कार्यान्वयन की समीक्षा और निगरानी के लिए एक संस्थागत तंत्र की सिफारिश करेगी जोकि लक्ष्य का एहसास करने और किसी भी अन्य संबंधित मुद्दों की जांच करने के लिए उपलब्ध होगी।

कर विभाग ने करदाताओं के साथ 4 अग्रिम मूल्य निर्धारण समझौते किए:

  • कर विभाग ने करदाताओं के साथ चार अग्रिम मूल्य निर्धारण समझौतों (एपीए) पर हस्ताक्षर किए हैं। इसका मकसद ट्रांसफर प्राइसिंग मामले में सुनिश्चितता रखते हुए विवादों को कम करना है। विनिर्माण, वित्त और सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्रों से संबंधित एकतरफा एपीए पर 07 फरवरी 2017 को हस्ताक्षर किए गए। इन समझौतों में जो अंतरराष्ट्रीय लेन-देन आते हैं, उसमें अनुबंध पर विनिर्माण, आईटी-युक्त सेवाएं तथा साफ्टवेयर विकास सेवाएं शामिल हैं।
  • इसके साथ केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) अब तक कुल मिलाकर 130 एपीए पर हस्ताक्षर कर चुका है। इसमें आठ द्विपक्षीय तथा 122 एकतरफा है। चालू वित्त वर्ष में कुल 66 एपीए (पांच द्विपक्षीय और 61 एकतरफा) पर हस्ताक्षर किए जा चुके हैं। योजना का मकसद ट्रांसफर प्राइसिंग मामले में करदाताओं को निश्चितता उपलब्ध कराना है।
  • एपीए योजना का शुभारंभ वर्ष 2012 में आयकर अधिनियम के अंतर्गत हुआ था। इसी तरह वर्ष 2014 में ‘रोलबैक’ प्रावधानों की शुरुआत हुई थी। इस योजना का उद्देश्‍य मूल्‍य निर्धारण के तौर-तरीकों को निर्दिष्ट करने के साथ-साथ अंतर्राष्‍ट्रीय सौदों के मूल्‍यों के अग्रिम निर्धारण के जरिये ट्रांसफर प्राइसिंग के क्षेत्र में करदाताओं को निश्चितता प्रदान करना है।
  • एपीए योजना की शुरुआत से ही करदाता इसमें काफी दिलचस्‍पी दिखा रहे हैं और इसके परिणामस्‍वरूप तकरीबन पांच वर्षों में अब तक 700 से भी ज्‍यादा आवेदन (एकपक्षीय एवं द्विपक्षीय दोनों ही) पेश किये जा चुके हैं।

भारत परमाणु आतंकवाद के खिलाफ सम्मेलन की मेजबानी करेगा:

    विनाशकारी परमाणु हथियारों और उससे जुड़ी सामग्री आतंकवादियों की पहुंच में होने की आशंका केवल सैद्धांतिक खतरा नहीं रही है। भारत इसे देखते हुए परमाणु सुरक्षा पर अगले हफ्ते एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन की मेजबानी करेगा। इसमें सौ से अधिक देशों के शामिल होने की संभावना है। यह सम्मेलन भारत के लिए एक बार फिर 48 सदस्यीय परमाणु आपूर्ति समूह (एनएसजी) में बतौर सदस्य शामिल होने के ठोस प्रयास का जरिया बन सकता है।

  • विदेश मंत्रालय के अनुसार 8 फरवरी से 10 फरवरी तक चलने वाले इस तीन दिवसीय सम्मेलन में परमाणु आतंकवाद के खतरे से निपटने के उपायों पर गहन मंथन होगा। विदेश मंत्रालय यह सम्मेलन परमाणु ऊर्जा विभाग के साथ मिलकर आयोजित करेगा।
  • परमाणु आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक पहल (जीआइसीएनटी) के इस कार्यक्रम में प्रतिनिधि देशों के 150 प्रतिनिधि होंगे। मंत्रालय के अनुसार इस सम्मेलन का आयोजन पिछले साल अमेरिका में हुआ था। तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस सम्मेलन की मेजबानी का ऐलान किया था।
  • जीआइसीएनटी रूस और अमेरिका द्वारा संयुक्त रूप से 2006 में शुरू किया गया था। पिछले 10 वर्षों में, इसमें 86 साथी देश और पांच सरकारी पर्यवेक्षक संगठन शामिल हो गए हैं।

हरियाणा सरकार ने महिलाओं की डिलीवरी से पहले थैलेसीमिया की जांच करने के निर्देश दिए:

  • गर्भवती महिलाओं और बच्चे की सुरक्षा के लिए हरियाणा सरकार ने सभी अस्पताल प्रमुखों को निर्देश दिए हैं कि अब अस्पतालों में गर्भवती महिलाओं का डिलीवरी से पहले थैलेसीमिया का टेस्ट अनिवार्य कर दिया गया है। ताकि थैलेसीमिया से पीड़ित महिला के बच्चे को इससे बचाया जा सके। विभाग इसके लिए लैब टैक्निशियन को एक दिन की ट्रेनिंग भी देगा। यह योजना इसी माह से शुरू होगी।
  • अब एड्स के बाद थैलेसीमिया जैसी गंभीर बीमारी के प्रति भी स्वास्थ्य विभाग सजग दिख रहा है। गर्भवती महिलाओं के एड्स टेस्ट के बाद अब डिलीवरी से पहले थेलीसिमिया की जांच भी होगी। स्वास्थ्य विभाग ने इसका नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार थैलेसीमिया से पीड़ित माता-पिता से यह बीमारी नवजात में भी सकती है। इसकी आशंका बनी रह रहती है।
  • अगर डिलीवरी से पहले की पुष्टि हो जाए तो डॉक्टर महिला के लिए खून की कोशिकाओं (बॉन मेरो) बदलने का इंतजाम जरूरी इलाज शुरू कर सकते है। ताकि बच्चे में खून की कमी ना हो। थैलेसीमिया से नवजातों को सुरक्षित रखने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने इसके टेस्ट की पहल की है। अब सभी अस्पताल प्रमुखों को थैलेसीमिया के टेस्ट शुरू कर इसकी जांच रिपोर्ट मुख्यालय को सौंपनी है।

उच्‍चतम न्‍यायालय ने मोबाइल फोन उपभोक्‍ताओं की पहचान सत्‍यापित करने के लिए केन्‍द्र सरकार को निर्देश दिए:

  • फर्जी मोबाइल फोन उपभोक्ताओं को समाप्त करने के कदम के तहत उच्चतम न्यायालय ने 06 फरवरी 2017 को केंद्र से कहा कि एक वर्ष के अंदर सौ करोड़ से ज्यादा वर्तमान और आगामी मोबाइल टेलीफोन उपभोक्ताओं की पहचान स्थापित करने की व्यवस्था करें। पीठ ने उम्मीद जताई कि प्रक्रिया निकट भविष्य में पूरी हो जाएगी और अधिकतम एक वर्ष पूरा होने से पहले इसे पूरा कर लिया जाएगा।
  • सुनवाई के दौरान पीठ ने सुझाव दिया कि वर्तमान प्रीपेड उपभोक्ताओं को रिचार्ज के वक्त ब्यौरा देने के लिए कहा जा सकता है जैसा कि नया सिम कार्ड जारी करने के समय होता है। प्रीपेड मोबाइल उपभोक्ताओं की संख्या कुल मोबाइल उपभोक्ताओं का 90 फीसदी है। रोहतगी ने कहा कि यह कठिन है क्योंकि देश भर में छोटी दुकानों से भी प्रीपेड मोबाइल फोन रिचार्ज होते हैं।
  • इससे पहले अदालत ने केंद्र और दूरसंचार विभाग से कहा कि देश में वर्तमान और आगामी मोबाइल फोन उपभोक्ताओं के सत्यापन के लिए उठाए जा सकने वाले कदमों से अवगत कराएं।

वित्त मंत्रालय ने विशेष बैंकिंग व्यवस्था के तहत उर्वरक मंत्रालय को 10,000 करोड़ रुपए प्रदान किए:

  • वित्त मंत्रालय ने विशेष बैंकिंग व्यवस्था के तहत उर्वरक मंत्रालय को 10,000 करोड़ रुपए प्रदान किए हैं। इससे नकदी संकट से जूझ रही उर्वरक कंपनियों को उचित दरों पर ऋण उपलब्ध कराया जा सकेगा।
  • उर्वरक मंत्री अनंत कुमार ने कहा, ‘बजट पेश करने से पहले वित्त मंत्रालय ने विशेष बैंकिंग व्यवस्था (एसबीए) के तहत 10,000 करोड़ रुपए प्रदान किए हैं। इसे मंजूर कर लिया गया है और इससे काफी समस्याओं को हल करने में मदद मिलेगी।’ एसबीए के तहत उर्वरक कंपनियों उन्हें मिलने वाली सब्सिडी पर ऋण ले सकती हैं। ऐसे में उद्योग वित्त मंत्रालय द्वारा नकद सब्सिडी जारी करने तक अपनी कोष की जरूरत को पूरा कर सकता है।
  • बकाया उर्वरक सब्सिडी के बारे में पूछे जाने पर कुमार ने कहा कि यह घटकर 20,000 करोड़ रुपए पर आ गई है। 2009 में यह 40,000 करोड़ रुपए के स्तर पर थी। उन्होंने कहा, ‘हम सब्सिडी जारी करने के मुद्दे को वित्त मंत्रालय के साथ उठाएंगे और ऐसा दिन आएगा जब पिछला बकाया नहीं बचेगा।’
  • इस वित्त वर्ष के अंत तक सब्सिडी का बकाया करीब 35,000 करोड़ रुपए रहने का अनुमान है। सरकार की ओर से सब्सिडी भुगतान में देरी से उद्योग को सालाना 4,000 करोड़ रुपए के ऋण का बोझ उठाना पड़ता है। पिछले साल नवंबर में मंत्री ने उद्योग को भरोसा दिलाया था कि सब्सिडी के बकाये को जल्द से जल्द पूरा कर दिया जाएगा।

केन्‍द्रीय मानव संसाधन मंत्रालय उच्‍च और माध्‍यमिक शिक्षा की परीक्षाएं हेतु राष्‍ट्रीय परीक्षा एजेंसी गठित करेगा

  • केन्‍द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय मंत्री प्रकाश जावडेकर ने कहा कि मंत्रालय उच्‍च और माध्‍यमिक शिक्षा की परीक्षाएं कराने हेतु राष्‍ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) का गठन करेगा।
  • एनटीए का गठन यह ध्‍यान में रखकर किया जा रहा है कि मौजूदा परिपेक्ष्य में लगभग 10 लाख से ज्यादा विद्यार्थियों के लिए इन परीक्षाओं का आयोजन केन्‍द्रीय माध्‍यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) करता है, जबकि इसका मुख्‍य उद्देश्‍य शिक्षा प्रणाली में सुधार लाना होना चाहिए।
  • शुरू में एनटीए आईआईटी (IIT), एनआईटी (NIT) और विश्‍वविद्यालय परीक्षाएं आयोजित करेगी। बाद में, इसे माध्‍यमिक स्‍तर की परीक्षाएं भी सौंप दिया जाएगा।

भारत और संयुक्‍त अरब अमीरात के तटरक्षक बलों के मध्य संयुक्त अभ्यास शुरू

  • भारतीय तटरक्षक बल और संयुक्‍त अरब अमीरात का तटरक्षक बल फरवरी 6, 2017 से संयुक्‍त अभ्‍यास में भाग लेगा और संचालन विशेषज्ञता साझा करेगा। भारतीय तटरक्षक पोत समुद्र पावक सदभावना यात्रा पर दुबई पहुंच गया है और राशिद बंदरगाह पर खड़ा है।
  • समुद्र पावक को देश के समुद्री हितों की रक्षा के लिए उत्‍तर-पश्चिम समुद्री सीमा पर व्‍यापक रूप से तैनात किया जाता रहा है। यह भारतीय पोत बाद में ओमान, कतर और सऊदी अरब जायेगा।
  • समुद्र पावक पोत भारतीय तटरक्षक बल के प्रदुषण नियंत्रण पोत सृंखला का तीसरा पोत है, जिसे स्वदेश में ही बनाया गया है और इसे जनवरी 2016 में कमीशन किया गया था।

सुप्रीम कोर्ट का एसबीसी आरक्षण पर यथास्थिति बनाए रखने के दिए आदेश:

  • राजस्थान में गुर्जरों समेत पांच जातियों को विशेष पिछड़ा वर्ग (एसबीसी) आरक्षण के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को बड़ी राहत प्रदान की है। इस मामले में राजस्थान हाई कोर्ट के स्टे को लेकर राज्य सरकार की अपील पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने यथास्थिति बनाए रखने के आदेश दिए हैं। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार, वर्तमान में चल रही भर्तियों और प्रवेश में दिए गए आरक्षण पर रोक लगाने से इंकार किया गया है। वहीं भविष्य में होने वाली भर्तियों और प्रवेश में एसबीसी के तहत गुर्जर सहित दूसरी जातियों को पांच फीसदी आरक्षण देने पर रोक जारी रहेगी।
  • गौरतलब है कि राजस्थान हाईकोर्ट ने 10 दिसंबर को गुर्जर सहित पांच जातियों गाडिया लुहार, बंजारा, रेबारी राइका को एसबीसी में पांच फीसदी आरक्षण देने वाले अधिनियम-2015 और इसकी 16 अक्टूबर 2015 को जारी अधिसूचना को शुक्रवार को रद्द कर दिया था।
  • अदालत ने ओबीसी कमीशन की रिपोर्ट को गलत बताते हुए कहा कि राज्य सरकार ने संविधान और सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के विपरीत जाकर एसबीसी को आरक्षण दिया है। ऐसे में आरक्षण की पचास फीसदी सीमा का उल्लंघन नहीं हो सकता और न ही राज्य सरकार द्वारा पचास प्रतिशत से ज्यादा आरक्षण की सीमा का उल्लंघन किया जा सकता है।

टाटा मोटर्स ने नया उप-ब्रांड ‘टैमो’ लॉन्‍च किया:

  • देश की प्रमुख यात्री वाहन निर्माता कंपनी टाटा मोटर्स ने अपनी नयी यात्री वाहन रणनीति तैयार की है जो भविष्योन्मुखी है और इसके लिए वह ‘टैमो’ उप ब्रांड के तहत मार्च 2017 तक आने वाले दौर के हिसाब से कारें पेश करेगी। यह नया प्रभाग नए विचारों को मूर्त रूप देने वाले इंक्यूबेशन सेंटर के तौर पर काम करेगा। इसमें वह नये डिजाइन, भविष्य की जरूरतों के लिए नवोन्मेष और समाधान को पेश करेगा। साथ ही आने वाले समय के अनुरूप ही उत्पादों और सेवाओं का सृजन करेगी।
  • टाटा मोटर्स के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं प्रबंध निदेशक ग्यूंटर बटशेक ने नयी यात्री वाहन रणनीति की घोषणा के बाद कहा कि हमारे रूपांतरण की यात्रा भविष्य के हिसाब से तैयार होने के दृष्टिकोण से प्रेरित है और यह हमारी कारोबार इकाइयों के लिए समग्र रणनीति के हिसाब से प्रदर्शन करने की क्षमता पर आधारित है। हमारी योजना छह प्रमुख क्षेत्रों में काम करने की है. इसमें कारोबार की बेहतरी, लागत प्रबंधन, ढांचागत सुधार, उपभोक्ता केंद्रित, नए भविष्योन्मुखी समाधान और सांगठनिक कार्यकुशलता शामिल है।
  • कंपनी ने बताया कि ‘टैमो’ ब्रांड के तहत वह पहला वाहन सात मार्च, 2017 को आगामी 87वें जिनीवा अंतरराष्ट्रीय मोटर शो में पेश करेगी।

विश्व आपसी सद्भाव सप्ताह:

  • विश्व इंटरफेथ सद्भाव सप्ताह फरवरी माह के पहले सप्ताह के दौरान वर्ष 2011 से मनाया जाना शुरू हुआ था। विश्व इंटरफेथ सद्भाव सप्ताह का प्रस्ताव 20 अक्टूबर 2010 को संयुक्त राष्ट्र महासभा संकल्प दस्तावेज़ में घोषित किया गया।
  • संकल्प में, महासभा विश्व आपसी सद्भाव सप्ताह के माध्यम से लोगों को धार्मिक सद्भाव, आपसी भाईचारा और शांति रखने तथा इसे प्रचारित करने की अपील करती है और दुनिया के चर्चों, मस्जिदों, सभाओं, मंदिरों और पूजा के अन्य स्थानों में सद्भावना को बढ़ावा देने का प्रयास करती है।

राष्‍ट्रपति ने राष्‍ट्रपति भवन का वार्षिक ‘उद्यानोत्‍सव’ आरंभ किया:

  • राष्‍ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने 4 फरवरी, 2017 राष्‍ट्रपति भवन का वार्षिक ‘उद्यानोत्‍सव’ आरंभ किया। मुगल गार्डन आम जनता के लिए 05 फरवरी 2017 से 12 मार्च, 2017 (सोमवार को छोड़कर जोकि रखरखाव दिवस है) तक सुबह साढ़े नौ बजे से शाम चार बजे तक खुला रहेगा। लोग स्प्रिचुअल गार्डन, हर्बल गार्डन, बोनसाई गार्डन एवं म्‍यूजिकल गार्डन का आनन्‍द भी उठा सकेंगे। इस अवधि के दौरान उद्यानों का भ्रमण करने के लिए कोई ऑन लाइन बुकिंग नहीं होगी।
  • आम जनता के लिए प्रवेश तथा निकास नॉर्थ एवन्‍यू के समीप प्रेसिडेंट एस्‍टेट के गेट नम्‍बर 35 से होगा। बहरहाल, गार्डन का भ्रमण करने के लिए आने वाले लोगों के लिए पीने के पानी, शौचालय, प्राथमिक चिकित्‍सा/चिकित्‍सकीय सुविधा ;वरिष्‍ठ नागरिकों, महिलाओं तथा बच्‍चों के लिए विश्राम कक्ष की सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी।
  • मुगल गार्डन विशिष्‍ट रूप से किसानों, दिव्‍यांगों, सैन्‍य/अर्द्धसैन्‍य बलों तथा दिल्‍ली पुलिस के जवानों जैसे विशेष वर्ग के आगंतुकों के लिए 10 मार्च, 2017 को सुबह साढ़े नौ बजे से शाम चार बजे तक खुला रहेगा।

सेकंड होम लोन के ब्याज पर 2 लाख से ज्यादा टैक्स बेनिफिट नहीं:

  • दूसरा घर खरीदने वाले लोगों को सालाना 2 लाख रुपये की टैक्स छूट पर रोक वाले प्रस्ताव को वापस लेने से सरकार ने इनकार किया है। राजस्व सचिव हसमुख अधिया ने कहा कि जिन लोगों के पास सरप्लस फंड है, उनके द्वारा दूसरा घर खरीदे जाने पर टैक्स छूट दिए जाने का कोई सवाल ही नहीं उठता। उन्होंने कहा कि आमतौर पर सेकंड होम लोन पर मिलने वाले टैक्स इन्सेंटिव का कई बार लोग मिसयूज भी करते हैं।
  • संसाधनों के सीमित होने का हवाला देते हुए अधिया ने कहा कि जरूरी यह है कि पहली बार खरीदने वालों को टैक्स छूट में प्राथमिकता पर रखा जाए। इसकी बजाय उन लोगों को छूट देना सही नहीं है, जो अपने घर में रहते हैं और दूसरी प्रॉपर्टी खरीदकर उससे कमाई कर रहे हैं।
  • मौजूदा प्रावधानों के मुताबिक, मकान मालिक किराए पर दी गई प्रॉपर्टी के ब्याज पर पूरा डिडक्शन क्लेम कर सकता था, जबकि अपने मकान में खुद रहने वाले 2 लाख रुपये तक ही क्लेम करने का हकदार होते थे।
  • लेकिन वित्त मंत्री के हालिया प्रस्ताव के बाद अब मकान किराए पर दिए जाने पर भी 2 लाख रुपये तक का डिडक्शन ही क्लेम किया जा सकेगा। यानी, जिसने लोन लेकर मकान बनाया, वह अब हर सूरत में (चाहे वह मकान को किराए पर लगा दे या उसमें खुद रहे) 2 लाख रु. तक का डिडक्शन बेनिफिट ही क्लेम कर सकेगा, इससे ज्यादा नहीं।

महत्वपूर्ण प्रागैतिहासिक रॉक कला साइट अंबुकुथी हिल्स की तलहटी में पायी गयी:

  • एक महत्वपूर्ण प्रागैतिहासिक रॉक कला साइट अंबुकुथी पहाड़ियों की तलहटी में पायी गयी है, यह केरल के वायनाड जिले के सुल्तान बत्तेरि तालुक में एडाक्कल गांव में स्थित है।
  • यह साइट स्वतंत्र शोधकर्ता, लेखक और राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता फिल्म निर्माता ओके जॉनी द्वारा खोजी गयी है। दुनिया भर में मशहूर एडाक्कल गुफाएं ब्रिटिश पुलिस अधिकारी फ्रेड फावसेट द्वारा अचानक से खोजी गयी थीं।

नीति आयोग ने ‘इंडिया इनोवेशन इंडेक्स’ लांच किया:

  • नीति आयोग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अमिताभ कांत ने 02 फरवरी 2017 को देश के पहले इनोवेशन इंडेक्स की वेबसाइट लॉन्च कर दी। इंडिया इनोवेशन इंडेक्स में देश के सभी राज्यों की वहां होने वाले नावाचारों के आधार पर रैंकिंग की जाएगी। यह अपनी तरह की पहली वेबसाइट होगी, जहां ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स (जीआईआई) के संकेतकों और भारत केंद्रित विभिन्न राज्यों के आंकड़ों को साथ-साथ रखा जाएगा। नीति आयोग की वेबसाइट पर इस पोर्टल का लिंक होगा।
  • इस वेबसाइट पर प्रदर्शित आंकड़े न सिर्फ जीआईआई के सापेक्ष आंकड़ों की कमी की पूर्ति करेंगे बल्कि इंडियन इनोवेशन इंडेक्स के प्राथमिक स्रोत भी होंगे।” आद्योगिक नीति एवं संवर्धन विभाग (डीआईपीपी) और देश के अग्रणी उद्योग मंडल सीआईआई के साथ संयुक्त रूप से इंडिया इनोवेशन इंडेक्स लांच किया गया। ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स में भारत बीते वर्ष 128 देशों की सूची में 66वें स्थान पर रहा।
  • देश की पहली इनोवेशन इंडेक्‍स वेबसाइट को वर्ल्‍ड इकॉनॉमिक फोरम, नीति आयोग, विश्व बौद्धिक संपदा संगठन और कोरनेल यूनिवर्सिटी ने बनाया है। यह इंडेक्‍स भारत में राज्‍यों के बीच विकास की प्रतिस्‍पर्धा, इनोवेशंस और विकास की भावना को आगे बढ़ाने में मदद करेगा।
  • ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स एक ऐसा प्‍लेटफॉर्म है, जो दुनिया भर के देशों को उनकी आर्थिक क्षमताओं, ग्रोथ प्रोडक्‍टिविटी, जीडीपी, विकास कार्यक्रमों की रिपोर्ट तैयार करता है। इसे कॉरनेल यूनिवर्सिटी, इनसीड बिजनेस स्‍कूल, वर्ल्‍ड इंटलैक्‍चुल प्रॉपर्टी ऑर्गनाइजेशन और दूसरे संस्‍थान मिलकर प्रकाशित करते हैं. इसमें सभी देशों के सब्‍जेक्‍टिव और ऑब्‍जेक्‍टिव दोनों तरह के डाटा शामिल होते हैं।

सरकार ने छह राज्यों में अटल मिशन योजनाओं को मंजूरी दी:

  • केंद्र सरकार ने हिमाचल प्रदेश, झारखंड और अरुणाचल प्रदेश समेत छह राज्यों के 42 शहरों में बुनियादी ढांचे की बेहतरी के लिए अटल मिशन के तहत 2863 करोड़ रुपए की परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इनमें से 1432 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता मिलेगी।
  • केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय ने अटल कायाकल्प एवं शहरी रूपांतरण मिशन (अमृत) के तहत कर्नाटक में 2070 करोड़ रुपये, झारखंड में 556 करोड़ रुपए , हिमाचल प्रदेश में 115 करोड़ रुपए , अरुणाचल प्रदेश में 53 करोड़ रुपए , नागालैंड में 45 करोड़ रुपए और पुड्डुचेरी में 24 करोड़ रुपये खर्च किए जायेंगे। यह राशि अगले तीन वर्ष में खर्च की जाएगी।
  • इन राज्यों के चयनित शहरों के घरों के नलों के जरिये जलापूर्ति की व्यवस्था करने, जलापूर्ति को बढ़ाकर प्रति व्यक्ति प्रति दिन 135 लीटर के मानक स्तर पर पहुंचाने, सीवरेज एवं निकासी के नेटवर्कों को बेहतर करने, गैर मोटर वाले परिवहन को बढ़ावा देने और पार्कों एवं हरित स्थलों के विकास पर यह राशि खर्च की जाएगी। अटल मिशन के अंतर्गत आने वाले 27 शहरों में यह निवेश किया जाएगा।
  • झारखंड में सात मिशन शहर रांची, आदित्यपुर, चास, देवघर, धनबाद, गिरिडीह और हजारीबाग हैं। हिमाचल प्रदेश में शिमला एवं कुल्लू, अरुणाचल प्रदेश में इटानगर, नागालैंड में कोहिमा एवं दीमापुर और पुड्डुचेरी में कराइकल, ओझुकराई एवं पुड्डुचेरी हैं।

कुष्ठ रोग के खात्मे के लिए उच्चतम न्यायालय ने केंद्र से योजना तैयार करने को कहा:

  • उच्चतम न्यायालय ने केंद्र सरकार से 03 फरवरी 2017 को कहा कि कुष्ठ रोग का खात्मा करने के लिए चार हफ्ते के अंदर विस्तृत योजना तैयार करें। न्यायमूर्ति जे एस खेहर, न्यायमूर्ति एन वी रमन्ना और न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ की पीठ ने कहा कि केंद्र को योजना में यह भी बताना चाहिए कि जमीनी स्तर पर बड़ी संख्या में खाली पदों को कैसे भरा जायेगा।
  • पीठ ने केंद्र सरकार से कहा, जमीनी स्तर पर अपनी नीतियों को लागू करने के लिए आपको लोगों की जरूरत है। केंद्र की तरफ से पेश हुए वकील बाला सुब्रमण्यम ने कहा कि दिल्ली, आंध्रप्रदेश और छत्तीसगढ़ ऐसे राज्य हैं जहां कुष्ठ की बीमारी हैं और रोग के उन्मूलन के प्रयास किए जा रहे हैं।
  • इससे पहले उच्चतम न्यायालय ने केंद्र और राज्य सरकारों से कहा कि कुष्ठ रोग के उन्मूलन और इस पर रोक लगाने के लिए उठाए गए कदमों से अवगत कराएं। अदालत ने कहा कि बीमारी को फैलने से रोकने की उनकी जिम्मेदारी है।

1 Comment

  1. Sir, first of all lots of thanks for your most valuable posts. I read your all posts and i must say these posts are very very helpful…..thak you very much Sir.
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