समसामयिकी जनवरी : CURRENT AFFAIRS JANUARY :8-15

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माइक्रोबीड्स या माइक्रो प्लास्टिक

    राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने (NGT) ने सौंदर्य प्रसाधनों और शारीरिक देखभाल के उत्पादों में इस्तेमाल किए जाने वाले माइक्रो प्लास्टिक के प्रयोग पर प्रतिबन्ध की मांग करने वाली याचिका पर केंद्र से जवाब माँगा है | याचिका में कहा गया है कि माइक्रो प्लास्टिक का इस्तेमाल जलीय जीवन और पर्यावरण के लिए खतरनाक है |
    १. सौंदर्य प्रसाधनों में माइक्रो प्लास्टिक का जमकर इस्तेमाल हो रहा है |
    २. साबुन , टूथपेस्ट ,फेसवाश ,हैंडवाश , बॉडीवाश और स्क्रब जैसे उत्पादों में इनका उपयोग हो रहा है |
    ३. कई कंपनियां अपने उत्पादों के बारे में दावा करती है कि वे जौ,अंजीर व अखरोट का उपयोग कर रही है , मगर इनसे ज्यादा मात्रा में प्लास्टिक का इस्तेमाल करती है |

  • माइक्रोप्लास्टिक दरअसल प्लास्टिक या फाइबर के वे टुकड़े है ,जो आकर में बहुत छोटे होते है |
  • संयुक्त राष्ट्र के हालिया रिपोर्टों के मुताबिक ,ये जलीय जीवन व पर्यावरण के लिए खतरनाक है |
  • माइक्रोप्लास्टिक 5 mm से भी कम आकर के प्लास्टिक या फाइबर के टुकड़े होते हैं| निजी देखभाल के उत्पादों में पाए जाने वाले माइक्रोप्लास्टिक हमेशा 1 mm से भी छोटे होते हैं |
  • प्लास्टिक के बेहद छोटे टुकड़े होने की वजह से ये नाली से होते हुए जल से मिल जाते हैं और पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंचाते हैं| दुनिया भर में इन पर प्रतिबन्ध की मांग की जा रही हैं |

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को सभी ngo के ऑडिट रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया —

  • सुप्रीम कोर्ट ने 31 मार्च 2017 तक केंद्र सरकार से सभी ngo के ऑडिट रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है | सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि जो ngo फंड के दुरूपयोग में दोषी पाया जाए उनके खिलाफ आपराधिक एवं दीवानी कार्यवाही कि जाए | देश भर में लगभग 32 लाख 97 हज़ार ngo है जिसमे से केवल 3 लाख 70 हज़ार ने ही अपने खर्च का लेखा जोखा सरकार को दिया है |
  • कोर्ट ने कहा है कि केंद्र सरकार और उनके विभागों के बीच ngo और ऑडिटिंग को लेकर तथा वित्त मंत्रालय द्वारा जारी जनरल फाइनेंसिंग नियम 2005 को लागु करने में भ्रम है |
  • कोर्ट ने ग्रामीण विकास मंत्रालय एवं कपार्ट तथा कुछ अन्य जिम्मेदार एजेंसियों को आदेश दिया है कि वे 31 मार्च 2017 तक नियमों के अनुसार सभी ngo का ऑडिट पूरा करे के सुप्रीम कोर्ट में रिपोर्ट दाखिल किया जाए |
  • कोर्ट ने सरकार से कहा है कि वो ngo को नियमित करने उनकी मान्यता व उनके फंड जारी करने से लेकर हिसाब किताब लेने तक के लिए दिशा निर्देश तय करे | सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि जो ngo बैलेंस शीट देकर अपना लेखा जोखा नही दे रही है उनके खिलाफ वसूली के लिए सिविल और दीवानी करवाई हो |
  • पीठ ने इस बारे में केंद्र सरकार को हलफनामा दाखिल करने का दिशा निर्देश दिया है साथ ही यह भी कहा है कि हलफनामा दाखिल करने वाले अधिकारी आईएएस अधिकारी होना चाहिए जो कीसंयुक्त सचिव स्तर से निचे का नही होगा |

इसरो एवं सीएनईएस ने सेटेलाइट प्रक्षेपण तकनीक हेतु समझौता किया–

  • भारतीय अंतरिक्ष अनुसन्धान संसथान (इसरो) एवं फ्रेंच स्पेस एजेंसी (सीएनईएस) ने उपग्रह प्रक्षेपण प्रौद्योगिकी के लिए भागीदारी हेतु समझौते पर हस्ताक्षर किए |
  • इस समझौते से फ्रांस अंतरिक्ष कार्यक्रमों में भारत की सहायता ले सकेगा |
  • सीएनईएस के द्वारा नासा के बाद इसरो का सहयोगी बनाया गया है . दोनों देशों के अंतरिक्ष कार्यक्रम एवं उद्देश्य लगभग सामान है |

भारत में प्रदूषण से प्रतिवर्ष 12 लाख लोगों की मृत्यु : ग्रीनपीस

  • भारत में प्रदूषण की स्थिति पर गैर सरकारी संस्था ग्रीनपीस द्वारा कराए गए सर्वेक्षण में 10 जनवरी 2017 को दिए गए आंकड़ों में बताया गया है कि प्रतिवर्ष 12 लाख लोगों की मृत्यु प्रदूषण की वजह से होती है |
  • ग्रीनपीस की इस रिपोर्ट में यह भी बतया गया है कि प्रदूषण स्तर के मामले में दिल्ली देश में सबसे अधिक प्रदूषित शहर है | हालाँकि इस रिपोर्ट में बताया गया है कि राजधानी में ही नही बल्कि देश के अन्य शहरों में भी प्रदूषण का स्तर काफी बढ़ा है |
  • वायु प्रदूषण का फैलता जहर नामक इस रिपोर्ट में 24 राज्यों के 168 शहरों के बारे में बताया गया है |

मुख्य बिंदु

  • ग्रीनपीस इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार who तथा दक्षिण भारत के कुछ शहरों के अतिरिक्त किसी भी शहर में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (cpcb) द्वारा बनाए गए मनको का पालन नही किया गया |
  • प्रदूषण का मुख्य कारण जीवाश्म ईंधन जैसे कोयला , पेट्रोल ,डीजल का अनियंत्रित उपयोग है |
  • रिपोर्ट के अनुसार सबसे अधिक उत्तर भारत के शहर प्रदूषण से प्रभावित है |
  • इन शहरों का दायराराजस्थान से लेकर गंगा के मैदानी इलाको तक फैला हुआ है |
  • इस रिपोर्ट के अनुसार देश के 20 सबसे अधिक प्रदूषित शहरों का वायु प्रदूषण का स्तर PM 10 , 268 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से 168 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर तक है |

अदरक की एक नई प्रजाति खोजी गई

  • भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण ने अंदमान एवं निकोबार द्वीप में अदरक की एक नई प्रजाति की खोज की |
  • इस नई प्रजाति को जिंजिबर स्यूडोस्कवेयरसम नाम दिया गया है | यह जिंजिबर प्रजाति से सम्बन्ध रखती है |

मुख्य विशेषताएं

  • इसे इसके औषधीय गुणों के कारण जाना जाता है जिसे जनजातीय समुदाय के लोग अक्सर प्रयोग करते है |
  • इस प्रजाति का स्टेम लाल रंग का होता है |
  • इसका फूल कमल के आकर का होता है तथा इस पर लगने वाले फल सिंदूरी होते है इसकी जड़े नलिका आकर की होती है |
  • इसकी रूपात्मक तथा इसकी बनावट इसे एक अलग प्रजाति बनाती है |
  • अदरक अन्य प्रजातियों की भांति ही यह भी खाद्य है तथा इसे वनस्पति की भांति उपयोग किया जा सकता है |
  • इसके एथनो औषधीय गुण उदर सम्बंधित विकार दूर करते है |

नार्वे एफएम रेडियो बंद करने वाला विश्व का पहला देश बना

  • नार्वे एफएम रेडियो बंद करने वाला विश्व का पहला देश बना | नार्वे 11 जनवरी 2017 से अपना एफएम रेडियो नेटवर्क बंद कर रहा है | अपने डिजिटल रेडियो को सपोर्ट करने के लिए उसने ऐसा किया |
  • नार्वे एफएम रेडियो की बजाए डिजिटल ऑडियो ब्रॉडकास्टिंग (dab) तकनीक को अपनाने जा रहे है | नार्वे के अनुसार डिजिटल रेडियो की साउंड क़्वालिटी एफएम रेडियो से ज्यादा अच्छी है और इसकी लगत भी 8 गुना कम है |
  • स्विट्ज़रलैंड ने एफएम रेडियो को खत्म करने के लिए वर्ष 2020 की समय सीमा तय की है | भारत में एफएम रेडियो की शुरुआत चेन्नई में वर्ष 1977 में हुई थी |

डिजिटल ऑडियो ब्रॉडकास्टिंग (dab) तकनीक के बारे में

  • डिजिटल ऑडियो ब्रॉडकास्टिंग (dab) एक ऐसी तकनीक है जिसमे एनालॉग ऑडियो सिग्नल को डिजिटल सिग्नल में बदला जाता है | इसे ऑडियो की अब तक की बहुत ही अच्छी तकनीक माना जाता है|
  • इस तकनीक को अपनाने में 2.35 करोड़ डॉलर की सालाना बचत होगी |नार्वे में 20 % निजी कारे ऐसी है जिनमे पहले से ही डैब रेडियो सिस्टम मौजूद है |

इक्वाडोर को जी-77 की अध्यक्षता मिली:

    जी-77 की अध्यक्षता थाईलैंड से इक्वाडोर को मिल गई है। जी-77 संयुक्त राष्ट्र संघ में चीन सहित 134 विकासशील देशों के हितों को बढ़ावा देता है। इक्वाडोर के राष्ट्रपति रफायेल कोरेया ने 13 जनवरी 2017 को हस्तांतरण समारोह में कहा कि समूह ‘‘सामाजिक और आर्थिक समानता” को बढ़ावा देना जारी रखेगा। उन्होंने कहा कि यह केवल तभी हो सकता है जब ‘‘गरीबी, असमानता और बहिष्कार” को समाप्त किया जाए और लोग ‘‘संप्रभुता, गरिमा और शांति” के साथ साथ रहें।

जी77:

  • जी77 समूह विकासशील देशों का एक समूह है। विकासशील देशों के हितों को आगे रखने वाला संयुक्त राष्ट्र में यह सबसे बड़ा समूह है। इसके कार्यालय विश्व के कई शहरों में हैं जिनमें जेनेवा, नैरोबी, रोम, वियना औरवाशिंगटन डी.सी. प्रमुख हैं।
  • जी-77 समूह की मूल स्थापना 77 देशों ने मिलकर की थी। बाद में बहुत से अन्य देश भी इसके सदस्य बनते गये, और वर्तमान में इसकी कुल सदस्य संख्या 134 हो गई है। अभी सूडान इस संगठन का नेतृत्व कर रहा है। भारत भी इसका सदस्य है।
  • जी-77 समूह की स्थापना जेनेवा में संयुक्त राष्ट्र व्यापार और विकास सम्मेलन (यूएनसीटीएडी) के सम्मेलन के पहले सत्र के बाद हुई थी। इस स्थापना की घोषणा सभी मूल संस्थापक 77 देशों के संयुक्त घोषणा पत्र यानि ज्वाइंट डिक्लेरेशन ऑफ द सेवेंटी-सेवन कंट्रीज के तहत 15 जून, 1968 को संयुक्त घोषणा के बाद हुई थी।
  • जी-77 की पहली मंत्रीस्तरीय बैठक अल्जीरिया की राजधानी अल्जियर्स में 10-25अक्तूबर, 1967 को हुई थी। जी-77के अध्यक्ष पद के लिए एशिया,अफ्रीका और कैरीबियन देशों से पारीवार रूप में व्यक्ति का चुनाव होता है। दक्षिणी सम्मेलन यानि साउथ समिट जी-77 समूह की सर्वोच्च निर्णायक इकाई है। इसकी बैठक प्रत्येक पांच वर्ष में एक बार होती है। विश्व के दक्षिणी गोलार्ध के देशों के हितों की देखरेख करने वाले इस समूह का व्यय सभी सदस्य देश मिलकर उठाता है।

दत्तक ग्रहण विनियमन, 2017:

  • किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम, 2015 की धारा 68 (सी) के तहत अधिदेशित ‘केन्द्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण’ (सीएआरए) द्वारा तैयार किया गया दत्तक ग्रहण विनियमन, 2017 को अधिसूचित कर दिया गया है और ये विनियमन 16 जनवरी, 2017 से प्रभावी होंगे। दत्तक ग्रहण विनियमन, 2017 दत्तक ग्रहण दिशा निर्देश की जगह लेंगे।
  • दत्तक ग्रहण विनियमन की रूप रेखा दत्तक ग्रहण एजेंसियों और भावी दत्तक माता पिता (पीएपी) सहित सीएआरए और अन्य हितधारकों के सामने आ रहे मुद्दों और चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए बनायी गयी है। यह भविष्य में गोद लेने की प्रक्रिया को व्यवस्थित बनाने के द्वारा देश में गोद लेने के कार्यक्रम को और मजबूत बनाएगा। पारदर्शिता, बच्चों के प्रारंभिक विसंस्थागतकरण, माता-पिता के लिए सुविज्ञ विकल्प, नैतिक प्रथाओं और गोद लेने की प्रक्रिया में सख्ती से परिभाषित समयसीमा दत्तक ग्रहण विनियमन के प्रमुख पहलू हैं।

दत्तक ग्रहण के विनियमन 2017 की मुख्य विशेषताएं:

  • विनियमनों में देश के भीतर और विदेशों में रिश्तेदारों द्वारा गोद लेने की प्रक्रिया से संबंधित प्रक्रियाओं को परिभाषित किया गया है।
  • गृह अध्ययन रिपोर्ट की वैधता दो साल से बढ़ाकर तीन साल कर दी गई है।
  • निर्दिष्ट बच्चे को आरक्षित करने के बाद मिलान और स्वीकृति के लिए घरेलू पीएपी को उपलब्ध समयसीमा को वर्तमान पंद्रह दिनों से बढ़ाकर बीस दिन कर दिया गया है।
  • जिला बाल संरक्षण इकाई (डीसीपीयू) के पास व्यावसायिक रूप से योग्य या प्रशिक्षित सामाजिक कार्यकर्ताओं का एक पैनल होगा।
  • न्यायालय में दायर किए जाने वाले मॉडल दत्तक ग्रहण आवेदनों समेत विनियमनों से संलग्न 32 अनुसूचियां हैं और यह न्यायालय के आदेश प्राप्त करने में वर्तमान में लगने वाली देरी में काफी हद तक कमी लाएंगी।

केन्द्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (कारा):

    केन्द्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (कारा) महिला और बाल विकास मंत्रालय के अधीन एक स्वायत्त निकाय है। यह भारतीय बच्चों को गोद लेने और अनिवार्य निगरानी तथा देश और अंतरदेशीय में गोद देने को विनियमित करने के लिए नोडल निकाय के रूप में कार्य करता है। प्रयोक्ता गोद लेने की प्रक्रिया, माता पिता, एजेंसियों, संसाधन और नेटवर्क आदि पर विस्तृत जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

इंफ्रा परियोजनाओं के लिए क्रिसिल का नया रेटिंग सिस्टम:

  • घरेलू साख निर्धारक एजेंसी क्रिसिल ने इंफ्रा परियोजनाओं के लिए नयी साख निर्धारण प्रणाली अपनाने की घोषणा की है जिसमें परियोजनाओं को बेहतर साख मिल सकेगी। एजेंसी ने बताया कि उसके अनुमान के मुताबिक अगले पाँच साल में इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में 43 लाख करोड़ रुपये के निवेश की जरूरत है।
  • सरकारी बैंकों पर एनपीए के बोझ को देखते हुये इसमें कम से 11 लाख करोड़ रुपये कॉर्पोरेट बांडों के जरिये जुटाने होगें। उसने कहा कि इस समय देश में इंफ्रास्ट्रक्चर डेट फंड जैसे नये उत्पादों की जरूरत है जिनका फोकस खास तौर पर इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर पर हो। इससे क्षेत्र के लिए धन की कमी पूरी हो सकेगी।
  • क्रिसिल ने बताया कि इन जरूरतों को ध्यान में रखते हुये वित्त मंत्रालय तथा अन्य संबद्ध पक्षों से मशविरे के बाद उसने इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं के लिए नयी क्रेडिट रेटिंग प्रणाली बनायी है। इससे दीर्घावधि निवेशक तथा ऋणदाताओं की इन परियोजनाओं में भागीदारी बढ़ेगी।
  • यह पूर्वानुमानित नुकसान मॉडल पर आधारित है जिसमें साख देते समय देनदारी में संभावित चूक तथा चूक के बाद वसूली की उम्मीदों दोनों का आकलन किया जायेगा। मौजूदा मॉडल में साख की गणना के समय सिर्फ चूक की संभावना पर विचार किया जाता है। इस प्रकार नयी प्रणाली से परियोजनाओं को पहले के मुकाबले बेहतर साख मिलने की उम्मीद है।

क्रेडिट रेटिंग एजेंसी:

  • क्रेडिट रेटिंग एजेंसी (सीआरए) एक कंपनी है जो निश्चित प्रकार के ऋण भार निर्गमित करने वाली संस्थाओं की और स्वयं ऋण उपकरणों की साख योग्यता का निर्धारण करती है। कुछ मामलों में, अंतर्निहित ऋण की सुविधाओं को भी श्रेणी दी जाती है।
  • अधिकतर मामलों में प्रतिभूतियों को निर्गमित करने वालों में, कम्पनियां, विशिष्ट लक्ष्य रखने वाली संस्थाएं, राज्य व स्थानीय सरकारें, लाभ-निरपेक्ष संस्थाएं या राष्ट्रीय सरकारें होती हैं जो ऋण जैसी प्रतिभूतियों (जैसे, ऋणपत्र) आदि का निर्गमन करती हैं, जिनका सौदा द्वितीयक बाज़ारों में किया जा सकता है।
    किसी ऋण का निर्गमन करने वाली संस्था हेतु साख योग्यता के निर्धारण के दौरान उस संस्था की ऋण पात्रता (अर्थात् ऋण के भुगतान की क्षमता) पर ध्यान दिया जाता है और इससे निर्गमित, विशेष प्रतिभूति, पर लगायी गयी ब्याज दर भी प्रभावित होती है।

स्वास्थ्य मंत्रालय खसरा-रूबेला वैक्सीन को लांच करेगा:

    स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय फरवरी 2017 में यूनिवर्सल इम्म्यूनाइजेशन प्रोग्राम (यूआईपी) में खसरा-रूबेला (एमआर) की वैक्सीन (टीका) लॉन्च करेगा। इसके अलावा, न्यूमोकोकल कंजुगेट (न्यूमोकोकल निमोनिया) वैक्सीन भी मार्च 2017 से तीन अन्य राज्यों में यूआईपी टोकरी का एक हिस्सा बन जायेगी।

प्रमुख तथ्य:

  • एमआर टीका पांच राज्यों और संघ शासित प्रदेशों में पेश किया जाएगा जोकि गोवा, कर्नाटक, लक्षद्वीप, पुडुचेरी और तमिलनाडु हैं।
  • यूआईपी टोकरी में पहले से ही दस बीमारियों के लिए टीके हैं जिनमें से खसरा एक है। एक बार एमआर टीका शुरू होने के बाद वर्तमान मोनोवैलेन्ट खसरा बंद हो जाएगा।
  • राष्ट्रीय वैक्सीन सलाहकार समिति (NVAC) द्वारा एमआर टीके की यूआईपी में शुरुआत के लिए सिफारिश दिए जाने के 3 साल बाद यह वैक्सीन लांच होगी।
  • न्यूमोकोकल कंजुगेट (न्यूमोकोकल निमोनिया) टीका हिमाचल प्रदेश और उत्तर प्रदेश और बिहार के कुछ हिस्सों में पेश किया जाएगा।

रुबेला (एमआर):

  • रुबेला, इसे “जर्मन खसरा” के नाम से भी जाना जाता है और रुबेला वायरस के कारण होता है। यह संक्रमित व्यक्ति के नाक और ग्रसनी के स्राव की बूंदों से या सीधे रोगी व्यक्ति के संपर्क में आने पर फैलता है।
  • आमतौर पर इसके लक्षण हल्के होते हैं। बच्चों में बुखार, सिरदर्द, फैलने वाले चकत्ते और कान के पीछे या गर्दन की लसीका ग्रंथियों में वृद्धि पाए जाते हैं। कभी कभी कोई भी लक्षण नहीं पाए जाते हैं। जटिलताओं में गठिया रोग, थ्रोम्बोसाइटोपेनिया ( रक्त में प्लेटलेट्स की कमी) और मस्तीष्क की सूजन शामिल है।
  • रुबेला विकसित हो रहे भ्रूण में असंगतियां पैदा करता है। जन्मजात रुबेला सिंड्रोम (CRS) उन महिलाओं के बच्चों में होने की संभावना ज्यादा होती है जो गर्भावस्था के पहले 3 महीनों सें इससे संक्रमित हुई हों। CRS के लक्षणों में बहरापन, अधांपन, दिल की विकृतियां और मानसिक विकास में कमी शामिल है।

सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम (यूआईपी):

  • भारत का सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम (यूआईपी) गुणवत्तापूर्ण वैक्सीन का उपयोग करने, लाभार्थियों की संख्या, टीकाकरण सत्रों के आयोजन और भौगोलिक प्रसार एवं क्षेत्रों की विविधता को कवर करने के संदर्भ में विश्व का सबसे बड़ा अभियान है।
  • राष्ट्रीय टीकाकाकरण नीति को वर्ष 1978 में अपनाया गया था, जिसका शुभारंभ ईपीआई द्वारा प्रारंभिक अवस्था के अस्सी प्रतिशत टीकाकरण कवरेज को बढ़ावा दिया जाना था, जिसके अंतर्गत राष्ट्रीय टीकाकाकरण नीति के दौरान सभी बच्चों को उनके जन्म के प्रथम वर्ष में प्राथमिक टीकाकाकरण समय सारणी के अंतर्गत डीपीटी, ओपीवी और बीसीजी का टीकाकरण किया जाता है।
  • सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम (यूआईपी) का शुभारंभ चरणबद्ध तरीके से वर्ष 1985 में किया गया था। इस कार्यक्रम के तहत वर्ष 1985 में खसरे के टीके और वर्ष 1990 में विटामिन-ए के पूरकता कार्यक्रम को जोड़ा गया।

भारत, पुुर्तगाल के बीच रक्षा सहित 7 समझौतों पर हस्ताक्षर:
भारत और पुर्तगाल के बीच रक्षा सहयोग समेत सात समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। इन समझौतों में रक्षा सहयोग तथा अक्षय ऊर्जा समझौते प्रमुख है।
मुख्य बिंदु

    सूचना प्रौद्योगिकी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स में एमओयू : इसका उद्देश्य दोनों देशों के मध्य सूचना प्रौद्योगिकी तथा इलेक्ट्रॉनिक्स पर विभिन्न परियोजनाओं में सहयोगी भूमिका निभाना है।
    कृषि एवं सम्बंधित क्षेत्रों में एमओयू : इसका उद्देश्य वैज्ञानिक तथा तकनिकी सूचनाओं का अदन प्रदान करना है। इसके तहत दोनों देशों के मध्य कृषि उत्पादों को बढ़ावा दिया जाएगा।
    नवीकरणीय रहा पर एमओयू : इसका उद्देश्य दोनों देशों द्वारा नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में नई तकनीक को बढ़ावा देना है। प्रशिक्षण कार्यक्रमों में एक दूसरे देश की सहभागिता सुनिश्चित करना है तथा रोजगारपरक कार्यक्रम चलना है।
    समुद्री अनुसन्धान और संसाधनों पर समझौता ज्ञापन : समुद्री विज्ञान, समुद्री पारिस्थितिकी , जलिए कृषि और जैव भूरासायन विज्ञान और समुद्री अम्लीकरण के तकनीकी और वैज्ञानिक विकास नामक विषयों पर आपसी सहयोग के साथ साथ जानकारी बढ़ाना।
    रक्षा सहयोग पर समझौता ज्ञापन

भारतीय सीमा से सटे तिब्बत में चीन ने दुनिया का सबसे ऊंचा दूरबीन लगाया:

  • चीन ने भारत से सटे वास्तविक नियंत्रण रेखा के निकट तिब्बत प्रांत में दुनिया की सबसे अधिक ऊंचाई वाला गुरुत्वाकर्षण तरंग दूरबीन लगाया है। इसे लगाने में 18.8 मिलियन डॉलर की लागत आई है। इस दूरबीन के जरिये ब्रह्मांड से निस्तेज गुंजायमान प्रतिध्वनि का पता लगाएगा, जिससे बिग बैंग सिद्धांत के बारे में और ज्यादा पता लगाया जा सकता है।
  • चाइनिज एकेडमी ऑफ साइंस के राष्ट्रीय खगोलीय वेधशालाओं के मुख्य शोधकर्ता याओ योंगक्विआंग ने कहा कि कोड नेम नगारी नंबर वन नाम से पहले दूरबीन का निर्माण कार्य नगारी प्रांत में शिक्वैनही शहर के 30 किलोमीटर दक्षिण शुरू हो चुका है।
  • नागरी तिब्बत का अंतिम प्रांत है और यह चीन सीमा पर भारत से सटा है। सामरिक दृष्टि से यह स्थान भारत के लिए बहुत महत्वपूर्ण है तथा इस स्थान पर चीन के दूरबीन लगाने से भारत को चिंता होना स्वाभाविक है।
  • इस दूरबीन को समुद्र तल से 5250 मीटर की ऊंचाई पर लगाया गया है और उत्तरी गोलार्द्ध में मौलिक गुरुत्वाकर्षण तरंगों पर सटीक आंकड़े का पता लगाएगा और एकत्रित करेगा। इसके 2021 तक चालू हो जाने की संभावना जताई जा रही है। याओ ने कहा कि इस दूरबीन के दूसरा चरण कोड नेम नगारी नंबर 2 को समुद्र तल से 6000 मीटर की ऊंचाई पर लगाया जाएगा।
  • उम्मीद है कि दूरबीन के जरिए अरबों प्रकाश वर्ष दूर रेडियो संकेतों को पकड़ा जा सकेगा। इसके निर्माण से अंतरिक्ष के अन्वेषण में चीन की क्षमता का विस्तार होगा।

दुनिया के सबसे बड़े स्ट्रीट लाइट रिप्लेसमेंट कार्यक्रम को राष्ट्र को समर्पित किया

    केन्द्रीय बिजली,कोयला, नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा और खान राज्य मंत्री पीयूष गोयल राष्ट्रीय स्ट्रीट लाइट कार्यक्रम (एसएलएनपी) को 9 जनवरी, 2017 को देश को समर्पित किया । यह काय्रक्रम अभी दक्षिणी दिल्ली नगर निगम क्षेत्र में चल रहा है। यह दुनिया का सबसे बड़ा स्ट्रीट लाइट प्रतिस्थापन कार्यक्रम है। इसका क्रियान्वयन ऊर्जा दक्षता सेवा लिमिटेड (ईईएसएल) द्वारा किया जा रहा है। ईईएसएल भारत सरकार का बिजली मंत्रालय के तहत काम करने वाला एक संयुक्त उपक्रम है।

  • इस समय एसएलएनपी कार्यक्रम पंजाब, हिमाचल प्रदेश, असम, त्रिपुरा,झारखंड,छत्तीसगढ़, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, केरल,गोवा महाराष्ट्र ,गुजरात और राज्स्थान में चल रहा है। अब तक पूरे देश में 15.36 लाख स्ट्रीट लाइटस एलईडी बल्बों द्वारा प्रतिस्थापित किए जा चुके हैं। परिणाम स्वरूप 20.35 करोड़ मेगावाट बिजली की बचत हुई है।
  • इस कारण 50.71 मेगावाट क्षमता को टाले जाने से प्रति वर्ष 1.68 लाख टन ग्रीन हाउस गैस के उत्सर्जन में कमी आई है। भारत में 12 अरब अमेरिकी डॉलर के ऊर्जा दक्षता बाजार के होने का अनुमान है। इससे वर्तमान उपभोग में अभिनव व्यापार और क्रियान्वयन के माध्यम से 20 प्रतिशत ऊर्जा की बचत होने की संभावना है।
  • एसएलएनपी के तहत दक्षिणी दिल्ली नगर निगम क्षेत्र में अकेले दो लाख से अधिक स्ट्रीट लाइट प्रतिस्थापित किए गए हैं। इस कार्यक्रम के माध्यम से दक्षिणी दिल्ली नगर निगम क्षेत्र में प्रतिवर्ष 2.65 करोड़ मेगावाट बिजली की बचत होती है। इससे 6.6 मेगावाट क्षमता को टालने में मदद मिली है जिस कारण प्रति दिन 22,000 टन ग्रीन हाउस गैस को कम करने में मदद मिली है।
  • इसके साथ ही दिल्ली में इस र्काक्रम के अगले चरण-II में पार्कों को ध्यान में ध्यान में रखते हुए 75,000 और स्ट्रीट लाइट लगाने के लिए ईईएसएल ने बीएसईएस और दक्षिणी दिल्ली नगर निगम के साथ एक त्रिपक्षीय समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं।
  • ईईएसएल के पास दूर- दराज के स्ट्रीट लाइटस के संचालन और निगरानी के लिए ईईएसएल सख्त शिकायत निवारण प्रणाली और केन्द्रीकृत नियंत्रण एंव निगरानी प्रणाली(सीसीएमएस) भी है।
  • इस मौके पर गोयल दक्षिणी दिल्ली नगर निगम क्षेत्र में मोबाइल एप ईईएसएल एल कंम्पलेंट एप का भी शुभारंभ करेंगे। इसके जरिये लोग दोषपूर्ण स्ट्रीट लाइट की शिकायत कर सकेंगे। इन शिकायतों को 48 घंटों के भीतर हल किया जाएगा।

मनरेगा के तहत काम के लिए अप्रैल 2017 से आधार अनिवार्य होगा:

  • महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत काम हासिल करने के लिए अब आधार कार्ड का होना जरूरी है। मनरेगा के तहत प्रत्येक परिवार के एक सदस्य 100 दिन का रोजगार अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराया जाता है। योजना के तहत जो लोग पंजीकरण कराते हैं, उन्हें आधार की प्रति देनी होगी या उन्हें 31 मार्च 2017 तक पंजीकरण प्रक्रिया से गुजरना होगा।
  • जबतक संबंधित व्यक्ति के पास आधार नहीं आ जाता तबतक राशन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, मतदाता पहचान पत्र, तस्वीर के साथ किसान पासबुक, मनरेगा के तहत जारी रोजगार कार्ड तथा राजपत्रित या तहसीलदार द्वारा जारी प्रमाणपत्र पहचान के रूप में स्वीकार होगा। जिन लोगों ने आधार के लिए आवेदन किया है, वे पंजीकरण का परचा या आवेदन की प्रति संबंधित अधिकारियों को दे सकते हैं।
  • केंद्र जम्मू कश्मीर और कुछ अन्य राज्यों के लिए आधार का पंजीकरण को अनिवार्य किए जाने के लिए जरूरी आदेश जारी कर रहा है। लोगों को आधार संख्या हासिल करने में किसी प्रकार की कठिनाई नहीं हो, इसके लिये पर्याप्त कदम उठाये जा रहे हैं।
  • सरकार ने इसके लिए आधार (वित्तीय एवं अन्य सब्सिडी, लाभ एवं सेवाओं की लक्षित डिलीवरी) कानून 2016 की धारा सात का उपयोग किया है। इस धारा के तहत यह अनिवार्य है कि जहां सरकार भारत के संचित निधि से सब्सिडी, लाभ या सेवा देती है, वहां संबंधित व्यक्ति से सत्यापन या आधार संख्या होने के बारे में साक्ष्य मांगे जा सकते हैं।

महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा):

  • यह भारत में लागू एक रोजगार गारंटी योजना है, जिसे 25 अगस्त 2005 को विधान द्वारा अधिनियमित किया गया। यह योजना प्रत्येक वित्तीय वर्ष में किसी भी ग्रामीण परिवार के उन वयस्क सदस्यों को 100 दिन का रोजगार उपलब्ध कराती है। 2010-11 वित्तीय वर्ष में इस योजना के लिए केंद्र सरकार का परिव्यय 40,100 करोड़ रुपए था।
  • इस अधिनियम को ग्रामीण लोगों की क्रय शक्ति को बढ़ाने के उद्देश्य से शुरू किया गया था, मुख्य रूप से ग्रामीण भारत में रहने वाले लोगों के लिए अर्ध-कौशलपूर्ण या बिना कौशलपूर्ण कार्य, चाहे वे गरीबी रेखा से नीचे हों या ना हों। नियत कार्य बल का करीब एक तिहाई महिलाओं से निर्मित है। शुरू में इसे राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (NREGA) कहा जाता था, लेकिन 2 अक्टूबर 2009 को इसका पुनः नामकरण किया गया।
  • यह अधिनियम, राज्य सरकारों को “मनरेगा योजनाओं” को लागू करने के निर्देश देता है। मनरेगा के तहत, केन्द्र सरकार मजदूरी की लागत, माल की लागत का 3/4 और प्रशासनिक लागत का कुछ प्रतिशत वहन करती है। राज्य सरकारें बेरोजगारी भत्ता, माल की लागत का 1/4 और राज्य परिषद की प्रशासनिक लागत को वहन करती है। चूंकि राज्य सरकारें बेरोजगारी भत्ता देती हैं, उन्हें श्रमिकों को रोजगार प्रदान करने के लिए भारी प्रोत्साहन दिया जाता है।
  • हालांकि, बेरोजगारी भत्ते की राशि को निश्चित करना राज्य सरकार पर निर्भर है, जो इस शर्त के अधीन है कि यह पहले 30 दिनों के लिए न्यूनतम मजदूरी के 1/4 भाग से कम ना हो और उसके बाद न्यूनतम मजदूरी का 1/2 से कम ना हो। प्रति परिवार 100 दिनों का रोजगार (या बेरोजगारी भत्ता) सक्षम और इच्छुक श्रमिकों को हर वित्तीय वर्ष में प्रदान किया जाना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से तपेदिक (टीबी) के नए प्रोटोकॉल को लागू करने को कहा:

    सुप्रीम कोर्ट ने 09 जनवरी 2017 को केंद्र से तपेदिक (टीबी) के नए प्रोटोकॉल को लागू करने को कहा है। मुख्य न्यायाधीश जेएस खेहर की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि अगर दवा का कंबिनेशन वही है तो फिर इसे सप्ताह में तीन दिन के बजाय रोजाना क्यों नहीं दिया जा सकता।

  • याचिका में दावा किया है कि दवा की तीन खुराक हर हफ्ते देने के वर्तमान अभ्यास को पारंपरिक और समय की कसौटी पर उपयुक्त दैनिक खुराक को आहार के साथ प्रतिस्थापित किया जाना चाहिए।

न्यू टीबी प्रोटोकॉल क्या कहता है?

    राष्ट्रीय कार्यक्रमों के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के द्वारा सुझाये गए महत्वपूर्ण और अद्यतन क्षय रोग उपचार दिशा निर्देश निम्नलिखित हैं:

  • दृष्टिकोण संबंधी बातें: नकारात्मक दबाव के साथ क्षय रोग (टीबी) के संक्रमण वाले रोगियों को अलग करके एक निजी कमरे में रखना। रोगी का अलगाव जारी रखें जब तक थूक स्मीयर लगातार 3 निर्धारणों के लिए नकारात्मक न हो जाए।
  • दवाई से उपचार: टीबी के प्रारंभिक अनुभवसिद्ध उपचार के लिए, रोगियों को 4 दवाइयां दी जानी चाहिए, आइसोनियाज़िड, रिफामीन, पैराजीनामाइड (केवल तक 2 महीने), एथेमब्युटोल या स्ट्रेप्टोमाइसिन।
  • यदि तपेदिक फिर से होता है तो, उपचार का निर्धारण करने के पहले इस बात का परीक्षण करके निर्धारण कर लेना चाहिये कि यह किस एंटीबायोटिक के प्रति संवेदनशील है। यदि एक से अधिक दवा प्रतिरोधी टीबी (एमडीआर – टीबी) का पता चला है तो 18 से 24 महीनों के लिए कम से कम चार प्रभावी एंटीबायोटिक दवाओं के साथ उपचार की सिफारिश की जाती है।

रोग का कारक:

    क्षय रोग विभिन्न प्रकार के माइकोबैक्टीरियम सामान्यतः माइकोबैक्टीरियम क्षय रोग (तपेदिक) के कारण होता है। आमतौर पर, यह रोग फेफड़ों पर आक्रमण करता है तथा फेफड़ों में फैल जाता है, लेकिन यह शरीर के अन्य भागों को भी प्रभावित कर सकता हैं। यह रोग संक्रमित व्यक्ति की खांसी, छींकने या हवा में प्रसारित श्वसन के तरल पदार्थों के माध्यम से भी संचारित हो सकता है। यह स्थिति गंभीर हो सकती है, जिसे सही उपचार के साथ उपचारित किया जा सकता है।

भारत में टीबी की स्थिति:

  • विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने वर्ष 2014 में टीबी के 63 लाख मामले सामने आने की बात कही थी। इनमें से एक-तिहाई मामले भारत में थे. यानी इस मामले में यह पहले नंबर पर था। उसके बाद सरकार के तमाम दावों के बावजूद हालात सुधरने की बजाय बदतर ही हुए हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने हाल में अपनी एक रिपोर्ट में कहा था कि इस मद में धन की कमी की वजह से इस जानलेवा बीमारी के खिलाफ वैश्विक लड़ाई भी कमजोर पड़ रही है।
  • मोटे अनुमान के मुताबिक, भारत में हर साल कोई सवा दो लाख लोग इस बीमारी के चलते मौत के मुंह में समा रहे हैं। टीबी पर नियंत्रण के लिए चलाई गई विभिन्न परियोजनाओं की वजह से वर्ष 1990 से 2013 के दौरान इस पर अंकुश लगाने में कुछ हद तक कामयाबी जरूर मिली थी। लेकिन दो साल पहले केंद्र में नई सरकार के सत्ता में आने के बाद इस मद में धन की कटौती का इन योजनाओं पर प्रतिकूल असर पड़ा और अब यह बेअसर साबित हो रही है।

यूनिसेफ ने #EarlyMomentsMatter (अर्लीमोमेंट्समैटर) अभियान की शुरुआत की:

    यूनिसेफ ने लेगो फाउंडेशन द्वारा समर्थित अभियान #EarlyMomentsMatter की 10 जनवरी 2017 को शुरुआत की है। इस अभियान का उद्देश्य एक बच्चे के जीवन के पहले 1000 दिनों के महत्व और उसके विकासशील मस्तिष्क पर होने वाले प्रारम्भिक अनुभवों के प्रभाव के बारे में जागरूकता फैलाना है

  • इस महत्वपूर्ण समय के दौरान, मस्तिष्क की कोशिकायें लगभग 1,000 नए कनेक्शन बना सकती हैं, ये कनेक्शन, बच्चों को मस्तिष्क को चलाने और नयी गतिविधियां सीखने के लिए योगदान करते हैं। यह उनके भविष्य के स्वास्थ्य और खुशी की नींव रखता है।
  • पोषण एवं देखभाल की कमी जिसमे पर्याप्त पोषण, उत्तेजना, प्यार और तनाव और हिंसा से सुरक्षा भी शामिल है के कारण इन महत्वपूर्ण कनेक्शन के विकास में बाधा हो सकती है।
  • यह अभियान #EatPlayLove के साथ शुरू हुआ जोकि एक डिजिटल और प्रिंट पहल है। इस पहल का उदेश्य माता-पिता और देखभाल करने वालों के ऊपर केंद्रित है तथा जोकि तंत्रिका विज्ञान के माध्यम से यह बतलाता है कि बच्चों का दिमाग किस प्रकार विकसित होता है।
  • एक संयुक्त राष्ट्र समर्थित श्रृंखला ‘द लैंसेट’ के अनुमान के अनुसार, कम और मध्यम आय वाले देशों में पांच वर्ष से कम आयु वाले 43 प्रतिशत या लगभग 249 मिलियन बच्चे चरम गरीबी और कम वृद्धि से बुरी तरह प्रभावित हैं।
  • लेकिन अधिक से अधिक निवेश और बचपन के विकास में कार्रवाई की आवश्यकता कम आय वाले देशों तक सीमित नहीं है। मध्यम और उच्च आय वाले देशों में रहने वाले वंचित बच्चे भी जोखिम पर हैं। यह अभियान बचपन विकास पर यूनिसेफ के व्यापक कार्यक्रम का हिस्सा है, एवं यह एच एंड एम फाउंडेशन, कॉनरोड एन हिल्टन फाउंडेशन, एलेक्स और एएनआई, और IKEA फाउंडेशन द्वारा समर्थित है।

तंबाकू नियंत्रण अरबों डॉलर और लाखों लोगों का जीवन बचा सकता है: डब्ल्यूएचओ

  • विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 11 जनवरी 2017 को कहा कि दुनिया भर में धूम्रपान करने वाले करीब 80 फीसदी लोग निम्न और भारत जैसे मध्यम आय वाले देशों में रहते हैं। उसने धूम्रपान पर नियंत्रण के लिए नीतियों पर जोर दिया जिनमें कर लगाना और मूल्य वृद्धि भी शामिल है।
  • इससे स्वास्थ्य सेवाओं और विकास कार्य के लिए राजस्व आ सकता है। यह तरीका ह्रदय रोग और कैंसर जैसी बीमारियों को कम करने में अत्यधिक मददगार साबित होगा।
  • विश्व स्वास्थ्य संगठन और अमेरिका के राष्ट्रीय कैंसर संस्थान के नए ऐतिहासिक वैश्विक रिपोर्ट के मुताबिक तंबाकू के इस्तेमाल से करीब 60 लाख लोग सालाना मरते हैं। ज्यादातर लोग विकासशील देशों में रहते हैं। 700 पन्नों की यह रिपोर्ट ‘ द इकोनॉमिक्स ऑफ टोबैको एंड टोबैको कंट्रोल’ में प्रकाशित हुई है।
  • द इकोनॉमिक्स ऑफ टोबैको एंड टोबैको कंट्रोल के अनुसार, तंबाकू उद्योग और इसके घातक उत्पाद स्वास्थ्य व्यय और उत्पादकता में कमी करने के साथ ही दुनिया की अर्थव्यवस्थाओं को लगभग 1 ट्रिलियन डॉलर का नुकसान पहुंचाते हैं।
  • रिपोर्ट के साथ जारी किये गए मोनोग्राफ में दो व्यापक क्षेत्रों पर जांच की गई है तंबाकू नियंत्रण का अर्थशास्त्र, तंबाकू का इस्तेमाल और इसकी बढ़ोतरी, विनिर्माण और व्यापार, कर और कीमतें, नियंत्रण नीतियाँ और तंबाकू के इस्तेमाल और उसके परिणामों को कम करने के लिए किये गए अन्य उपाय तथा वैश्विक तंबाकू नियंत्रण के प्रयासों के आर्थिक निहितार्थ।
  • मांग में कमी की नीतियां और कार्यक्रम तंबाकू उत्पादों में कमी के लिए अत्यधिक प्रभावी रहे हैं। इस तरह के हस्तक्षेप में तंबाकू टैक्स और उत्पाद शुल्क को बढ़ाना सम्मिलित है। तम्बाकू प्रयोग को कम करने के लिए तंबाकू उद्योग विपणन गतिविधियों पर रोक लगाना भी एक महत्वपूर्ण कदम है; प्रमुख सचित्र स्वास्थ्य चेतावनी के लेबल और धूम्रपान मुक्त नीतियों और नशा मुक्त केंद्र भी अत्यधिक सहायक हैं।
  • मोनोग्राफ 2016 में हुए अध्ययन का हवाला देते हुए कहता है कि अगर सभी देश उत्पाद शुल्क को 0.80 डॉलर (54.54 रुपये) बढ़ा दें तो सिगरेट से वार्षिक आबकारी राजस्व में विश्व स्तर पर 47% या 140 अरब अमेरिकी डॉलर की वृद्धि हो जायेगी।
  • इसके अतिरिक्त, यह सिगरेट की खुदरा कीमतों को औसतन 42 प्रतिशत तक बढ़ा देगा तथा यह स्थिति धूम्रपान की दर में 9 फीसदी की गिरावट करेगी और 66 लाख वयस्कों को धूम्रपान करने से रोकेगी।
  • 2013-2014 में, वैश्विक तंबाकू उत्पाद ने सरकार के राजस्व में लगभग 269 बिलियन डॉलर शुल्क करों के माध्यम से जमा कराये जबकि मात्र 1 अरब डॉलर को तंबाकू नियंत्रण में निवेश किया गया था। रिपोर्ट में कहा गया है कि तंबाकू नियंत्रण अर्थव्यवस्थाओं को नुकसान नहीं पहुंचाता।

मुंबई में पनडुब्बी आईएनएस खंडेरी लॉन्च:

    पानी के भीतर या सतह पर टॉरपीडो के साथ-साथ पोत-रोधी मिसाइलों से वार करने और रडार से बच निकलने की उत्कृष्ट क्षमता से लैस स्कॉर्पीन श्रेणी की दूसरी पनडुब्बी खान्देरी का 12 जनवरी 2017 को मझगाव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड में जलावतरण किया गया।

स्कॉर्पीन-क्लास पनडुब्बी खान्देरी से जुड़े प्रमुख तथ्य:

  • स्कॉर्पीन श्रेणी की यह पनडुब्बी अत्याधुनिक फीचरों से लैस है। इनमें रडार से बच निकलने की इसकी उत्कृष्ट क्षमता और सधा हुए वार कर दुश्मन पर जोरदार हमला करने की योग्यता शामिल है।
  • यह हमला टॉरपीडो से भी किया जा सकता है और ट्यूब-लॉन्च्ड पोत विरोधी मिसाइलों से भी। रडार से बच निकलने की क्षमता इसे अन्य कई पनडुब्बियों की तुलना में अभेद्य बनाएगी।
  • यह पनडुब्बी हर तरह के मौसम और युद्धक्षेत्र में संचालन कर सकती है। नौसैन्य कार्यबल के अन्य घटकों के साथ इसके अंतर्संचालन को संभव बनाने के लिए हर तरह के साधन और संचार उपलब्ध कराए गए हैं। यह किसी भी अन्य आधुनिक पनडुब्बी द्वारा अंजाम दिए जाने वाले विभिन्न प्रकार के अभियानों को अंजाम दे सकती है। इन अभियानों में सतह-रोधी युद्धक क्षमता, पनडुब्बी-रोधी युद्धक क्षमता, खुफिया जानकारी जुटाना, क्षेत्र की निगरानी करना शामिल है।
  • खान्देरी उन छह पनडुब्बियों में से दूसरी पनडुब्बी है, जिसका निर्माण एमडीएल में फ्रांस की मेसर्स डीसीएनएस के साथ मिलकर किया जा रहा है। यह भारतीय नौसेना के ‘प्रोजेक्ट 75’ का हिस्सा है। पहली पनडुब्बी कल्वारी समुद्री परीक्षण पूरे कर रही है और उसे जल्द ही नौसेना में शामिल कर लिया जाएगा।
  • भारतीय नौसेना की पनडुब्बी शाखा को इस साल 8 दिसंबर को 50 साल पूरे हो जाएंगे। भारतीय नौसेना की पनडुब्बी शाखा के स्थापना की याद में हर साल पनडुब्बी दिवस मनाया जाता है। 8 दिसंबर, 1967 को पहली पनडुब्बी – प्राचीन आईएनएस कल्वारी – को भारतीय नौसेना में शामिल किया गया था।
  • पहली भारत-निर्मित पनडुब्बी आईएनएस शाल्की के साथ भारत 7 फरवरी, 1992 को पनडुब्बी बनाने वाले देशों के विशेष समूह में शामिल हुआ था। एमडीएल ने इस पनडुब्बी को बनाया और फिर एक अन्य पनडुब्बी आईएनएस शंकुल के 28 मई, 1994 को हुए जलावतरण के काम में लग गया। ये पनडुब्बियां आज भी सक्रिय हैं।
  • खान्देरी का नाम मराठा बलों के द्वीपीय किले के नाम पर आधारित है। इस किले ने 17वीं सदी के अंत में समुद्र में उनके वर्चस्व को सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभाई थी. खान्देरी टाइगर शार्क का भी नाम है।
  • यह पनडुब्बी दिसंबर तक समुद्र में और पत्तन में, यानी पानी के अंदर और सतह पर परीक्षणों से गुजरेगी। इसमें यह जांचा जाएगा कि इसका प्रत्येक तंत्र पूर्ण क्षमता के साथ काम कर रहा है या नहीं। इसके बाद इसे आईएनएस खान्देरी के रूप में भारतीय नौसेना में शामिल कर लिया जाएगा।

आईएलओ ने विश्व रोजगार और सामाजिक दृष्टिकोण 2017 रिपोर्ट जारी की:

    संयुक्त राष्ट्र श्रम संगठन की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2017 और 2018 के बीच भारत में बेरोजगारी में मामूली इजाफा हो सकता है और रोजगार सृजन में बाधा आने के संकेत हैं। संयुक्त राष्ट्र अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) ने ‘2017 में वैश्वितक रोजगार व सामाजिक दृष्टिकोण’ पर अपनी रिपोर्ट जारी की।

  • रिपोर्ट के अनुसार रोजगार जरूरतों के कारण आर्थिक विकास पिछड़ता प्रतीत हो रहा है और इसमें पूरे 2017 के दौरान बेरोजगारी बढ़ने व सामाजिक असामनता की स्थिति के और बिगड़ने की आशंका जताई गई है।
  • वर्ष 2017 और वर्ष 2018 में भारत में रोजगार सृजन की गतिविधियों के गति पकड़ने की संभावना नहीं है क्योंकि इस दौरान धीरे धीरे बेरोजगारी बढ़ेगी और प्रतिशत के संदर्भ में इसमें गतिहीनता दिखाई देगी। रिपोर्ट के अनुसार, आशंका है कि पिछले साल के 1.77 करोड़ बेरोजगारों की तुलना में 2017 में भारत में बेरोजगारों की संख्या 1.78 करोड़ और उसके अगले साल 1.8 करोड़ हो सकती है।
  • प्रतिशत के संदर्भ में 2017-18 में बेरोजगारी दर 3.4 प्रतिशत बनी रहेगी। वर्ष 2016 में रोजगार सृजन के संदर्भ में भारत का प्रदर्शन थोड़ा अच्छा था। रिपोर्ट में यह भी स्वीकार किया गया कि 2016 में भारत की 7.6 प्रतिशत की वृद्धि दर ने पिछले साल दक्षिण एशिया के लिए 6.8 प्रतिशत की वृद्धि दर हासिल करने में मदद की है। रिपोर्ट के अनुसार, विनिर्माण विकास ने भारत के हालिया आर्थिक प्रदर्शन को आधार मुहैया कराया है , जो क्षेत्र के जिंस निर्यातकों के लिए अतिरिक्त मांग बढ़ाने में मदद कर सकता है।
  • रिपोर्ट में कहा गया है कि वैश्विाक बेरोजगारी दर और स्तर अल्पकालिक तौर पर उच्च बने रह सकते हैं क्योंकि वैश्विरक श्रम बल में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। विशेषकर वैश्विकक बेरोजगारी दर में 2016 के 5.7 प्रतिशत की तुलना में 2017 में 5.8 प्रतिशत की मामूली बढ़त की संभावना है।
  • आईएलओ के महानिदेशक गाइ राइडर ने कहा, इस वक्त हम लोग वैश्विाक अर्थव्यवस्था के कारण उत्पन्न क्षति व सामाजिक संकट में सुधार लाने और हर साल श्रम बाजार में आने वाले लाखों नवआगंतुकों के लिए गुणवत्तापूर्ण नौकरियों के निर्माण की दोहरी चुनौती का सामना कर रहे हैं। आईएलओ के वरिष्ठ अर्थशास्त्री और रिपोर्ट के मुख्य लेखक स्टीवेन टॉबिन ने कहा, उभरते देशों में हर दो श्रमिकों में से एक जबकि विकासशील देशों में हर पांच में से चार श्रमिकों को रोजगार की बेहतर स्थितियों की आवश्यकता है।
  • इस आंकड़े में दक्षिण एशिया व उप-सहारा अफ्रीका में और अधिक गिरावट आने का खतरा है। इसके अलावा, विकसित देशों में बेरोजगारी में भी गिरावट आने की संभावना है और यह दर 2016 के 6.3 प्रतिशत से घटकर 6.2 प्रतिशत तक हो जाने की संभावना है।

भारत-सीईआरटी ने अमेरिका-सीईआरटी के साथ एक एमओयू पर हस्ताक्षर किए

    भारत और अमेरिका ने भारत सरकार के इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अधीनस्‍थ इंडियन कंप्यूटर एमरजेंसी रिस्पांस टीम (सीईआरटी-इन) और संयुक्‍त राज्‍य अमेरिका की सरकार के डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्‍योरिटी के बीच एक सहमति पत्र (एमओयू) पर हस्‍ताक्षर सुनिश्‍चित करवाए हैं। यह एमओयू साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में सहयोग के लिए किया गया है।

  • उपर्युक्‍त एमओयू का उद्देश्‍य हर देश के प्रासंगिक कानूनों, नियमों एवं विनियमों के साथ-साथ इस एमओयू के अनुसार भी साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में आपसी सहयोग को बढ़ावा देना और संबंधित सूचनाओं का आदान-प्रदान सुनिश्‍चित करना है। इस कार्य को समानता, पारस्परिकता और पारस्परिक लाभ के आधार पर मूर्त रूप दिया जाएगा।
  • इससे पहले अमेरिका एवं भारत ने आपसी सहयोग को बढ़ावा देने और साइबर सुरक्षा के लिए संबंधित देशों की सरकार के जवाबदेह संगठनों के बीच समय पर सूचनाओं का आदान-प्रदान करने के लिए 19 जुलाई, 2011 को एक एमओयू पर हस्‍ताक्षर किए थे। संबंधित सूचनाओं को साझा करने और साइबर सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर विचार-विमर्श के लिए 19 जुलाई, 2011 से ही सीईआरटी-इन और अमेरिका-सीईआरटी के बीच नियमित रूप से आपसी संवाद जारी हैं।
  • साइबर सुरक्षा से जुड़े क्षेत्रों में सहयोग को जारी रखते हुए ही दोनों देशों ने इस एमओयू का नवीकरण किया है।

विश्व हिंदी दिवस:

  • विदेश मंत्रालय और 160 से अधिक भारतीय दूतावासों ने 10 जनवरी 2017 को दुनियाभर में विश्व हिंदी दिवस मनाया। यह दिवस वर्ष 2006 से हर साल विश्व भर के भारतीय दूतावास द्वारा मनाया जाता है।
  • इस दिवस का उद्देश्य विश्व में हिन्दी के प्रचार-प्रसार के लिए वातावरण निर्मित करना, हिन्दी के प्रति अनुराग पैदा करना, हिन्दी की दशा के लिए जागरूकता पैदा करना तथा हिन्दी को विश्व भाषा के रूप में प्रस्तुत करना है।
  • प्रथम विश्व हिन्दी सम्मेलन जनवरी 10, 1975 को नागपुर में आयोजित हुआ था। अत: 10 जनवरी का दिन ही विश्व हिन्दी दिवस के रूप में मनाया जाता है। विश्व हिंदी दिवस के अलावा हर वर्ष सितम्बर 14 को राष्ट्रीय हिंदी दिवस भी मनाया जाता है क्योकि इसी दिन 1949 में हिंदी को संविधान सभा ने राजभाषा का दर्जा दिया था।

राष्ट्रीय युवा महोत्सव :

  • केंद्रीय युवा मामले और खेल मंत्रालय प्रतिवर्ष युवाओं के प्ररेणास्त्रोत स्वामी विवेकानंद की जयंती के अवसर पर आयोजित किये जाने वाले राष्ट्रीय युवा महोत्सव का आयोजन इस बार हरियाणा के रोहतक में 12 से 16 जनवरी के बीच कर रहा है। इस महोत्सव का मुख्य विषय ‘डिजिटल इंडिया के लिए युवा’ है।
  • इस वर्ष की थीम का लक्ष्य मेक इन इंडिया और प्रधानमंत्री के युवा नेतृत्व विकास की दृष्टि के लिए घोषित राष्ट्रीय लक्ष्य को साकार करना है।
  • घोषित राष्ट्रीय लक्ष्य को प्राप्त करने के अलावा, यह निर्णय लिया गया है कि कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय, एनएसडीए, एनएसडीसी, डीजीईटी और मध्यम और लघु उद्योग मंत्रालय आदि की विभिन्न पहलों को प्रदर्शित किया जाएगा। महोत्सव में स्थानीय युवाओं और हजारों प्रतिभागियों के लाभ के लिए कौशल विकास प्रदर्शनी, व्याख्यान और कार्यशालाओं का आयोजन किया जाएगा।

भारत, रवांडा सामरिक साझेदारी बनाने के लिए सहमत:

    भारत ने 10 जनवरी 2017 को रवांडा में एक सड़क परियोजना के लिए 8.1 करोड़ डॉलर के ऋण और दवाओं तथा चिकित्सा उपकरणों की खरीद के लिए तीस लाख डॉलर के अनुदान की घोषणा की। दोनों देशों ने सीमापार आतंकवाद का समर्थन करने वाले देशों को अलग-थलग करने की जरूरत पर जोर देते हुए आतंकवाद से मिलकर निपटने का फैसला किया।

  • आतंकवाद को सबसे बड़ा वैश्विक खतरा बताते हुए और सीमापार आतंकवाद का समर्थन करने वाले देशों को अलग-थलग करने की जरूरत बताते हुए दोनों पक्षों ने आतंकवादी गतिविधियों के वित्तपोषण को रोकने, आतंकवादियों के सुरक्षित पनाहगाहों को समाप्त करने और धन शोधन रोकने समेत आतंकवाद निरोधक गतिविधियों पर मिलकर काम करने का फैसला भी किया।

डिफकॉम-2017 :

    नई दिल्ली के इंडिया हैबिटेट सेंटर में 12 जनवरी 2017 को डिफकॉम-2017 के लिए पूर्वालोकन समारोह का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में सिग्नल कोर के वरिष्ठ कर्नल कमांडेंट और सिग्नल आफिसर-इन-चीफ लेफ्टिनेंट जनरल आशीष रंजन प्रसाद ने ‘डिजिटल सेना के लिए बुनियादी ढांचे और कुशल मानव संसाधन’ विषय पर एक विवरण पुस्तिका का विमोचन भी किया।

  • उपस्थित गणमान्य को संबोधित करते हुए लेफ्टिनेंट जनरल आशीष रंजन प्रसाद ने आने वाले समय में नेटवर्क केंद्रित डिजिटल सेना को सूचना जानकारी के माध्यम से अत्याधुनिक युद्धक शक्ति में परिवर्तित करने में सक्षम समन्वित परिकल्पना और डिफकॉम-2017 से मिलने वाले ठोस परिणामों की जानकारी दी।
  • एक वार्षिक सेमिनार के रूप में डिफकॉम-2017 को संयुक्त रूप से भारतीय सेना के सिग्नल कोर और भारतीय उद्योग संघ के द्वारा आयोजित किया जाता है। इस कार्यक्रम का आयोजन 23 और 24 मार्च, 2017 को नई दिल्ली के इंडिया हैबिटेट सेंटर में किया जाएगा। डिफकॉम सशस्त्र बलों, भारतीय उद्योग, शिक्षाविदों और अनुसंधान एवं विकास संगठनों के अधिकारियों के बीच सेना के लिए परिचालन संचार प्रणालियों से संबंधित मुद्दों पर वार्तालाप का सर्वाधिक लाभप्रद मंच है।

केन बेतवा नदी जोड़ो परियोजना को हरित पैनल से मंजूरी मिली:

    मोदी सरकार की महत्त्वाकांक्षी 9,393 करोड़ रुपये की केन बेतवा नदी जोड़ परियोजना को हरित पैनल और आदिवासी मामलों के मंत्रालय की मंजूरी मिल गई है। इससे 6.35 लाख हेक्टेयर भूमि की सिंचाई और बुंदेलखड में पेयजल की समस्या से निपटने में मदद मिलेगी। केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्री उमा भारती ने घोषणा की कि केन बेतवा नदी जोड़ो परियोजना के वित्त पोषण के प्रारूप को अंतिम रूप देने के लिए उनका मंत्रालय नीति आयोग के साथ काम कर रहा है।

  • इसके बाद ही इसका औपचारिक निर्माण कार्य शुरू होगा। हालांकि अभी वन एवं पर्यावरण मंत्रालय से इस परियोजना को अंतिम मंजूरी मिलनी बाकी है जो आमतौर पर हरित पैनल की सिफारिशों को ध्यान में रखती है।
  • पर्यावरण मूल्यांकन समिति ने 30 दिसंबर 2016 की बैठक में पूरी तरह से विचार करने के बाद परियोजना के पहले चरण पर सहमति व्यक्त की।
  • केन-बेतवा नदी जोडो परियोजना इस लिहाज से महत्त्वपूर्ण है कि अगर यह प्रयोग सफल रहा तब देश की विभिन्न नदियों को आपस में जोडऩे की 30 योजनाओं का सपना साकार होने का मार्ग प्रशस्त होगा।

भारतीय काली मिर्च में कैंसर प्रतिरोधी गुण पाया गया:

  • भारतीय लंबी काली मिर्च में कैंसर से मुकाबले का गुण पाया गया है। जल्द ही इसका इस्तेमाल नई दवा में किया जाएगा जिससे कैंसर का उपचार किया जा सकता है। अमेरिकी शोधकर्ताओं के अनुसार, लंबी काली मिर्च की पैदावार मुख्य रूप से दक्षिण भारत में की जाती है।
  • इस काली मिर्च में पाइपरलांगमाइन (पीएल) नामक रासायनिक तत्व पाया जाता है। इसमें हमारे शरीर में एक खास एंजाइम की उत्पत्ति को रोकने की क्षमता पाई गई है। यह एंजाइम ट्यूमरों में बड़ी मात्रा में पाया जाता है। इसके रोकथाम से इस खतरनाक बीमारी पर अंकुश लगाया जा सकता है। यह प्रोस्टेट, स्तन, फेफेड़े और ब्लड कैंसर के इलाज में कारगर हो सकता है।

भारत की पहली सौर ऊर्जा से संचालित नाव ‘आदित्य’ :

  • केरल के मुख्यमंत्री पिनरई विजयन और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा राज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कोच्चि (केरल) की वेम्बनाड झील में भारत की पहली सौर ऊर्चा से संचालित नाव ‘आदित्य’ को हरी झंडी दिखाई।
  • इस नाव की छत पर 78 सौर पैनल लगे हुए हैं और इसमें 75 लोगों के बैठने की जगह है। यह बिना शोर और मामूली कंपन (वाइब्रेशन) के साथ अधिकतम 14 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकती है।

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