प्रत्यक्ष नकद हस्तांतरण

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प्रत्यक्ष नकद हस्तांतरण

    प्रत्यक्ष नकद हस्तांतरण एक ऐसी व्यवस्था है जिसके द्वारा सरकारी सब्सिडी और अन्य लाभ सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में जमा होते है.

प्रत्यक्ष नकद हस्तांतरण के लाभ

  • सब्सिडी के प्रत्यक्ष नकद हस्तांतरण के माध्यम से बाजार विकृतियां कम हो रही है. अन्यथा बाजार में दोहरी मूल्य प्रणाली का निर्माण हो गया था, जहां पर एक ही वस्तु की एक ही समय में दो कीमतें मौजूद रहती थी.
  • रिसाव, भ्रष्टाचार और कालाबाजारी को नकदी के सीधे हस्तांतरण से समाप्त किया जा सकता है. पीडीएस प्रणाली, जहां वस्तुएं भौतिक रूप से पहुंचाई जाती है में बहुत ज्यादा रिसाव होता है.
  • नकद हस्तांतरण लागत कम कर देता है और इसका प्रबंधन भी आसान है. सरकार सब्सिडी वितरण के लिए प्रशासनिक तंत्र में एक बड़ी राशि खर्च करती है.

JAM की भूमिका

प्रत्यक्ष नकद हस्तांतरण को प्रभावी बनाने के लिए सरकार को लाभार्थियों को नकद अंतरण हेतु उनकी पहचान करने में सक्षम होना चाहिए, और साथ ही ऐसा तंत्र विद्यमान होना चाहिए जिससे उक्त राशि तक लाभार्थियों की आसान पहुंच हो.

  • आधार लाभार्थी की पहचान में मदद करता है.
  • जन – धन योजना से लोगों के बैंक खाते में वृद्धि हुई है. यह लक्षित लाभार्थियों तक नकद हस्तांतरण को सक्षम बनाता है.
  • मोबाइल मनी भुगतान प्रौद्योगिकियां लाभार्थियों को अपने पैसे तक पहुंच बनाने में सक्षम बनाती है.

क्रियान्वयन में चुनौतियां

क्रियान्वयन चुनौतियों को पहला चरण मध्य चरण और अंतिम चरण के रूप में वर्गीकृत किया जा सकता है.
पहला चरण

  • लक्ष्य निर्धारण : लक्षित सब्सिडी में लाभार्थियों के बारे में विस्तृत जानकारी की आवश्यकता होती है.
  • लाभार्थी डेटाबेस :डेटाबेस को लगातार आधार, बैंक खाते की जानकारी और मोबाइल नंबर के साथ अद्यतन किया जाना चाहिए.
  • पात्रता: कुछ लाभ परिवारों के लिए है जबकि कुछ अन्य एकल व्यक्तियों के लिए है.

मध्य चरण

  • सरकार के भीतर समन्वय : सब्सिडी को प्रभावी बनाने और उनके हस्तांतरण के अधिकार को केंद्रीय मंत्रालयों और राज्य सरकारों के विभाग साझा करते हैं.
  • आपूर्ति श्रृंखला हित समूह: अगर उनके हितों को खतरा हुआ तो वस्तु की आपूर्ति श्रृंखला के एजेंट JAM के प्रसार में बाधा डाल सकते हैं.

आखिरी चरण

  • लाभार्थी वित्तीय समावेशन : ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग प्रणाली से भौतिक संपर्क अभी भी सीमित है.
  • लाभार्थी असुरक्षा: अगर लाभार्थी आबादी ज्यादा गरीब है तब अपवर्जन त्रुटि में वृद्धि का जोखिम हो सकता है.

आगे की राह

सरकार को मंत्रालयों और राज्यों को निम्नलिखित के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए–

  • पहले चरण की क्षमता में निवेश (लाभार्थी डाटा बेस में सुधार के द्वारा)
  • मध्य चरण की चुनौतियों से निपट कर (DBT के समर्थन के लिए आपूर्ति श्रृंखला हित समूहों के लिए प्रोत्साहन द्वारा)
  • अंतिम चरण के वित्तीय कनेक्टिविटी में सुधार लाना (बैंकिंग कॉरेस्पोंडेंस और मोबाइल मनी क्षेत्र विकसित करके)

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