14वें वित्त आयोग FOURTEENTH FINANCE COMMISSION

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वित्त आयोग (अनुच्छेद-280)

वित्त आयोग का गठन राष्ट्रपति के द्वारा सामान्यतः हर 5वें वर्ष किया जाता है। यह एक संवैधानिक निकाय हैं। ऐसे निकाय जिनका गठन स्वयं संविधान द्वारा या जिनके गठन के लिए राष्ट्रपति को सक्षम बनाया जाता है, संवैधानिक संस्था कहा जाता है। इन निकायों के सदस्यों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है। इन्हें पर्याप्त पद सुरक्षा प्रदान की गई है, और इन्हें संविधान में निर्दिष्ट विधियों के अतिरिक्त किसी अन्य तरीके से अपने पद से नहीं हटाया जा सकता है। इनकी रिपोर्टों को संसद के दोनों सदनों में रखा जाता है।

संरचना

वित्त आयोग में एक अध्यक्ष और चार अन्य सदस्य होते हैं। इनका कार्यकाल राष्ट्रपति के आदेश के तहत तय होता हैं एवं उनकी पुनर्नियुक्ति भी हो सकती हैं। संविधान ने इन सदस्यों की योग्यता और चयन विधि का निर्धारण करने का अधिकार दिया हैं। वित्त आयोग का अध्यक्ष सार्वजनिक मामलों का अनुभवी होना चाहिए और अन्य चार सदस्यों को निम्नलिखित में से चुना जाना चाहिए।

  • किसी उच्च न्यायालय का न्यायाधीश या इस पद के लिए योग्य व्यक्ति।
  • ऐसा व्यक्ति जिसे भारत के लेखा एवं वित्त मामलों का विशेष ज्ञान हो।
  • ऐसा व्यक्ति जिसे प्रशासन एवं वित्तीय मामलों का व्यापक अनुभव हो।
  • ऐसा व्यक्ति जो अर्थशास्त्र का विशेष ज्ञाता हो।

कार्य

वित्त आयोग भारत के राष्ट्रपति को निम्नांकित मामलों में सिफारिशें करता हैं–

  • संघ और राज्यों के बीच करों के शुद्ध आगामों का वितरण और राज्यों के बिच ऐसे आगामों का आवंटन।
  • भारत के संचित निधि में राज्यों के राजस्व में सहयता अनुदान को शासित करने वाले सिद्धांत।
  • राज्य वित्त आयोग द्वारा की गई सिफारिशों के आधार पर राज्य में नगरपालिकाओं और पंचायतों के संसाधनों की अनुपूर्ति के लिए राज्य की संचित निधि के संवर्धन के लिए आवश्यक उपाए।
  • राष्ट्रपति द्वारा आयोग को सुदृढ़ वित्त के हित में निर्दिष्ट कोई अन्य विषय
  • अन्य विषय हो सकते है —

    • सार्वजनिक उपयोगिता मूल्य निर्धारण
    • राजकोषीय घाटे की समीक्षा
    • विनिवेश
    • आपदा प्रबंधन
    • जलवायु परिवर्तन
    • सतत विकास आदि

आयोग अपनी रिपोर्ट राष्ट्रपति को सौंपता हैं, जो इसे संसद के दोनों सदनों में रखता हैं। रिपोर्ट के साथ उसका आकलन सम्बन्धी ज्ञापन एवं इस सम्बन्ध में उठाए जा सकने वाले कदमों के बारे में विवरण भी रखा जाता हैं।
वित्त आयोग की सिफारिशों की प्रकृति सलाहकारी होती हैं और इनको मानने के लिए सरकार बाध्य नहीं होती हैं।

14वें वित्त आयोग Fourtheenth Finance Commission FFC

FFC 2015 -20 Y V Reddy की अध्यक्षता में बनाया गया। आयोग ने ऊपर दिए गए चारों मामलों में अपनी सिफारिशें राष्ट्रपति को दी…
संघ एवं राज्यों के बीच करों के शुद्ध आगमों का वितरण एवं राज्यों के बीच ऐसे आगमों का आवंटन —

    राज्यों के बीच करों का वितरण एवं आवंटन 2 तरीके से होता है —

  • 1 लंबवत वितरण
  • 2 क्षैतिज वितरण

लंबवत वितरण के अंतर्गत केंद्र अपने द्वारा लगाए गए और वसूले जाने वाले करों का 42% राज्यों को हस्तांतरित करेगा।यहाँ सरकार द्वारा वसूले गए कर है —

  • निगम कर
  • आय कर
  • उत्पाद शुल्क
  • सीमा शुल्क
  • सेवा कर
  • STT आदि

यहाँ ध्यान देने योग्य बात यह है कि कुछ ऐसे टैक्स जो केंद्र सरकार द्वारा लगाए जाते है लेकिन राज्य सरकार के द्वारा वसूले जाते है , ऐसे टैक्स में राज्यों की हिस्सेदारी नहीं होगी। ये टैक्स है—-

  • art 268 के अंतर्गत स्टाम्प ड्यूटी नारकोटिक्स एवं एलकोहल पर लगने वाला उत्पाद शुल्क
  • art 268 – A (No Service Tax विथ J & K)
  • art 269 – केंद्रीय बिक्री कर CST
  • art 270 – Cess
  • art 271 – Surcharge



क्षैतिज वितरण के द्वारा केंद्रीय करों में राज्यों के हिस्से को निर्धारित किया जाता है। इसके लिए निम्नलिखित मानकों के प्रतिशत को ध्यान में रखा जाता है।

  • जिस राज्य की जनसंख्या 1971 में जितनी अधिक थी उसे 17.5% के अंतर्गत उतना ही अधिक हिस्सा दिया जाएगा.
  • 1971 के बाद बढ़ी हुई जनसंख्या को समायोजित करने के लिए FFC के द्वारा Demographic change के रूप में एक नए मानक का प्रयोग किया गया है. इसके अंतर्गत 1971 के बाद जिस राज्य की जनसंख्या जितनी अधिक बढ़ी है उसे 10 % में से उतना ही अधिक हिस्सा दिया जाएगा.
  • जिस राज्य की प्रति व्यक्ति आय जितनी कम हो उसे 50 % के अंतर्गत उतना ही अधिक हिस्सा दिया जाएगा.
  • जिस राज्य का क्षेत्रफल जितना अधिक है उसको 15 % के अंतर्गत उतना ही अधिक हिस्सा दिया जाएगा.
  • जिस राज्य का जितना अधिक वन क्षेत्र होगा उन राज्यों को 7.5% के अंतर्गत उतना ही अधिक हिस्सा मिलेगा .
  • राज्य वित्त आयोग द्वारा की गई सिफारिशों के आधार पर राज्य में नगरपालिकाओं और पंचायतों के संसाधनों की अनुपूर्ति के लिए राज्य की संचित निधि के संवर्धन के लिए आवश्यक उपाए .

    • FFC ने यह भी सुनियोजित किया है कि केंद्र सरकार राज्य सरकारों को पंचायती राज संस्थान के लिए अनुदान राशि मुहैया कराएगी।
    • इसके अंतर्गत केंद्र सरकार 2.87 लाख करोड़ रुपए राज्य सरकार को देगी।
    • राज्य सरकारों की हिस्सेदारी 90 % उनकी 2011 के जनसंख्या एवं 10% उनके क्षेत्रफल के अनुसार होगा।
    • कुल दिए गए राशि में से 2 लाख करोड़ ग्रामीण निकाय एवं 87 हज़ार करोड़ शहरी निकाय को दिए जाएगा. ग्रामीण निकाय को कुल राशि की 90 % राशि मुहैया करायी जाएगी ,जबकि शेष 10 % उनके प्रदर्शन के हिसाब से दिया जाएगा।
    • जबकि शहरी निकाय को कुल राशि की 80 % राशि मुहैया करायी जाएगी ,जबकि शेष 20 % उनके प्रदर्शन के हिसाब से दिया जाएगा।



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