मौद्रिक नीति(MONETARY POLICY) : मात्रात्मक व गुणात्मक उपकरण 2

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RBI मुद्रा के प्रवाह को नियंत्रित करने के लिए दो तरह के उपकरण का इस्तेमाल करती हैं|
-> मात्रात्मक उपकरण (Quantitative tools) क्लिक करे…और गुणात्मक उपकरण (Qualitative tools)

गुणात्मक उपकरण(Qualitative tools)—

(1) सीमांत अनुरोध (Marginal Requirement)-

    सीमांत अनुरोध क्या होता है इसे एक उदाहरण से समझते है –
    मान लेते है कि बाजार में मुद्रास्फीति की स्थिति है और मैं एक नए व्यवसाय के लिए बैंक से 1 करोड़ रुपए ऋण लेने जाता हूँ |और बैंक के पास गिरवी रखने के लिए मेरे पास 1 करोड़ मूल्य के भूमि के पेपर है |
    बाजार में मुद्रा स्फीति की स्थिति है और RBI ने सीमांत अनुरोध 55% निर्धारित किया है | इस परिस्थिति में क्या होगा ?
    इस परिस्थिति में 1 करोड़ का 55 % काटकर सिर्फ 45 % अर्थात 45 लाख रुपए ही बैंक ऋण में देगी | ताकि बाजार में मुद्रा का प्रवाह कम रहे और मुद्रा स्फीति पर नियंत्रण किया जा सके |
    RBI के द्वारा अपनाए गए गुणात्मक उपकरण बैंकों पर बाध्यकारी है|



(2) उपभोक्ता ऋण विनियमन (Consumer credit regulation)

हम मान लेते है कि बाजार में मुद्रा स्फीति की स्थिति है | ऐसे में RBI बैंकों से लोन लेकर खरीदने वाले वस्तुओं पर दिए जा रहे अग्रिम भुगतान(down payment) की राशि को बढ़ा देती है | और ऋण लौटाने के किस्तो (EMI) को घटा देती है | परिणामस्वरूम किसी वस्तु को खरीदने के लिए शुरुआत में अधिक पैसे खर्च करने होंगे और हरेक महीने ज्यादा रुपया EMI के रूम में देना होगा (EMI को घटा देने के वजह से ) इससे कुछ ऐसे ग्राहक होंगे जो नए अग्रिम भुगतान और EMI की दर को देखते हुए अपनी खरीदारी को स्थगित कर देंगे |
इसके परिणामस्वरूप मांग में कमी आएगी व धीरे धीरे मूल्य में कमीं आएगी |

(3)चयनात्मक ऋण नियंत्रण (selective credit control) ——

    चयनात्मक ऋण नियंत्रण के द्वारा RBI बैंकों को निर्देश देती है कि वो कुछ विशेष क्षेत्र के व्यवसायी को ऋण न दे |( ऐसे व्यवसायी जो काला बाज़ारी करते है और वस्तुओं के मूल्यों को बढ़ाते हैं)

4)नैतिक सलाह(moral susation) —

    इसके द्वारा RBI बैंकों को कुछ सलाह देती हैं |

  • जैसे – RBI के द्वारा रेपो रेट घटाने पर बैंक भी अपना ब्याज दर घटाए |
  • बैंक सरकारी प्रतिभूतियों में ज्यादा पैसा निवेश न करके ज्यादा पैसा ऋण में दे ताकि व्यवसाय को बढ़ावा मिले |

(5).सजा —

    यदि बैंक अपने CRR व SLR को मेन्टेन नही रखती हैं तो RBI बैंकों पर पेनल्टी लगाती हैं —
    पहली बार पेनाल्टी = बैंक दर + 3%
    दूसरी बार पेनाल्टी = बैंक दर + 5%

मौद्रिक नीति की सीमाएं—–

भारत जैसे विकासशील देश में मौद्रिक नीति तुरंत परिणाम देने में असफल रही हैं | इसके निम्न कारण हैं —

  • लोगों के पास निवेश के ज्यादा विकल्प नही होते और बैंकों के लिए मुद्रा का मुख्या स्रोत RBI न होकर जनता के द्वारा जमा किए गए पैसे होते हैं | इसी कारण RBI के द्वारा अपने दर में कमीं का प्रभाव बाजार में तुरंत नही दीखता हैं |
  • आज भी ग्रामीण क्षेत्र में बहुत सरे लेन देन वस्तु विनिमय (बार्टर सिस्टम) के द्वारा होता हैं |
  • वित्तीय समावेशन का अभाव |
  • राजकोषीय घाट व बहुत से राजनीति से प्रभावित योजनाए | जैसे मनरेगा , जिससे जनता के पास पैसे आ जाते हैं परिणामस्वरूप मांग बढ़ती हैं और अंततः मुद्रा स्फीति में व्रिद्धि होती हैं |
  • मानसून में अनियमितता , सुख ,बाढ़,चक्रवात ….परिणाम –खाद्य मुद्रा स्फीति | इन सब चीज़ों पर RBI का कोई नियंत्रण नही हैं |सब्सिडी , कला धन आदि => परिणाम मुद्रा स्फीति |

मात्रात्मक व गुणात्मक उपकरण में अंतर —–

मात्रात्मक उपकरण गुणात्मक उपकरण
आरक्षित अनुपात (Reserve Ratio)
खुला बाजार परिचालन (OMO)
नीतिगत दर(Policy Rate)
सीमांत अनुरोध (Marginal Requirement)
उपभोक्ता ऋण विनिमय(Consumer credit regulation)
चनयनात्मक ऋण नियंत्रण (selective credit control)
नैतिक सलाह(moral susation)
डायरेक्ट एक्शन
अप्रत्यक्ष प्रभाव – RBI अपने दर में कटौती करेगी तो ज़रूरी नही है की बैंक भी अपनी दर में कटौती करे| प्रत्यक्ष प्रभाव
बैंकों के लिए अबाध्यकारी बैंकों के लिए बाध्यकारी



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  1. मौद्रिक नीति(MONETARY POLICY) : मात्रात्मक व गुणात्मक उपकरण (आरक्षित अनुपात , OMO , नीतिगत दर ) – हिंदी – आईएएस

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