झारखण्ड का इतिहास (शासन व्यवस्था )

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प्रस्तावना

18 दिसम्बर को झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की प्रारंभिक परीक्षा हैं | इस परीक्षा में पेपर II में झारखण्ड राज्य से सम्बंधित प्रश्न पूछे जाएंगे जो अभ्यर्थी के लिए काफी महत्वपूर्ण हो गया है |इस लेख और आने वाले कुछ लेखों में हम झारखण्ड विशेष से सम्बंधित कुछ विषयों पर चर्चा करेंगे और उम्मीद करेंगे की इससे आपको झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की प्रारंभिक परीक्षा में कुछ सहायता मिलेगी | इस लेख में हम झारखण्ड का इतिहास और शासन व्यवस्था पर चर्चा करेंगे |

मुण्डा शासन व्यवस्था

  • मुण्डा गणतंत्र के पोषक थे , उनकी अपनी पारंपरिक शासन व्यवस्था को पंचायती व्यवस्था कहते हैं |
  • मुंडाओं के ग्राम पंचायत को पडहा पंचायत कहा जाता हैं | पडहा पंचायत में पंच होते हैं जो मुख्यतः गांव के बड़े बूढ़े होते हैं |
  • इन्ही पडहा पंचायत के द्वारा मुण्डा गांव संचालित व नियंत्रित होते हैं | मुख्यतः 5-21 गांव मिलकर पडहा पंचायत बनता हैं |
  • मुण्डा शासन व्यवस्था के प्रमुख पद

  • हातु मुण्डा -यह मुण्डा गांव का प्रधान होता हैं |
  • मुखियाहातु पंचायत या ग्राम पंचायत के प्रमुख को मुखिया कहते हैं |
  • पाहन – मुंडाओं के पुजारी को पाहन कहते हैं |
  • पडहा पंचायत – कुछ हातु पंचायत को मिलकर एक पडहा पंचायत होता हैं |
  • पडहा राजा — पडहा पंचायत के सर्वोच्च अधिकारी को पडहा राजा कहते हैं |पडहा राजा को मानकी भी कहते हैं |यह कार्यपालिका ,विधायिका व न्यायपालिका का प्रमुख होता हैं | इसके द्वारा लिए गया निर्णय अंतिम होता हैं |
  • प्रायः पडहा व्यवस्था गोत्र आधारित होता हैं और पंचायत में महिलाओं का स्थान नही होता हैं |
  • नागवंशी शासन व्यवस्था
    नागवंशी शासन व्यवस्था भी पडहा पंचायत व्यवस्था के तरह ही कार्य करता हैं | इस व्यवस्था में मदरा मुण्डा के द्वारा चलाया गया एक शासन व्यवस्था भी हैं, जिसे मदरा पांजी कहते हैं |
    इस व्यवस्था में ज़मीन पर कोई लगान नही लिया जाता था |

    नागवंशी शासन व्यवस्था के कुछ महत्वपूर्ण पद

  • महतो – गांव के महत्वपूर्ण व्यक्ति को महतो कहते थे |
  • भंडारी – राजा के गांव में भंडारी का पद होता था जो राजा की खेती बारी करता था और अन्न भंडार में रखता था | और भंडारकोष की निगरानी करता था |
  • नागवंशी शासन के कुछ महत्वपूर्ण पद थे -महाराजा , कुंवर ,लाल व ठाकुर (घटते हुए क्रम में )|
  • पडहा शासन व्यवस्था
    इसे उरांवों की पारंपरिक शासन व्यवस्था भी कहते हैं |
    पंचायत में पाहन , महतो व गांव के बड़े बुजुर्ग पंचो के रूप में गांव का संचालन करते हैं |
    यहाँ तीन स्तरीय शासन व्यवस्था थी
    1. ग्राम स्तर 2.पडहा राजा स्तर 3.पडहा दीवान स्तर

  • ग्राम स्तर पर हर गांव का एक प्रधान होता था जिसे महतो कहते हैं |
  • महतो भुइहर कुल का होता था , भुइहर कुल लोगों ने ही गांव को बसाया था |महतो के अधीन प्रशासन, न्याय तथा संपर्क पदधारी के कार्य होते हैं |
  • मांझी महतो का सहयोगी होता हैं जो महतो के हर पंचायती आदेशों को गांव वालो तक पहुचाता हैं |
  • पाहन धार्मिक अनुष्ठान , पर्व त्यौहार , शादी विवाह का कार्य सम्पादित करता हैं |पाहन महतो को पंचायत बैठक में भी सहयोग करता हैं |
  • बैगा पाहन का सहयोगी होता हैं |
  • पडहा राजा -5-21 गांव को मिलकर पडहा पंचायत बनता हैं जिसके प्रमुख को पडहा राजा कहते हैं |
  • पडहा दीवान -पडहा दीवान सर्वोच्च पदधारी होता हैं |उसके द्वारा लिए गए निर्णय अंतिम होते हैं |
  • पडहा शासन व्यवस्था में महिला व पुरुष दोनों पंचायत में उपस्थित हो सकते हैं |
  • मांझी परगना शासन व्यवस्था

  • यह संथालों की पारंपरिक शासन व्यवस्था हैं |
  • इसमें प्रत्येक गांव के प्रशासकीय एवं धार्मिक प्रधान होते हैं |
  • प्रमुख पद

  • मांझी गांव का प्रधान होता हैं व गांव के आतंरिक व बाह्य दोनों प्रकार के व्यवस्था हेतु गांव का प्रतिनिधित्व करता हैं |मांझी गांव का प्रशासनिक व न्यायिक मुखिया होता हैं तथा उसे लगन लेने का अधिकार होता हैं |
  • प्रनीक मुखिया सदस्य होता हैं व इसे उपमांझी का दर्जा प्राप्त होता हैं |
  • गोड़ाइत ,माझी का सचिव व खजांची होता हैं |
  • जोग मांझी , मांझी का उप सचिव हैं जो शादी विवाह का हिसाब रखता हैं |
  • नायके धार्मिक पूजा पाठ संपन्न करता हैं और धार्मिक अपराधों के मामले में अपना फैसला सुनाता हैं |
  • जातीय पंचायत

  • सभी आदिवासी जनजातिये सदानो की अपनी जातीय पंचायत अपने अपने नाम से पारंपरिक रूप में होता हैं |
  • जातीय पंचायत ग्राम स्तर , सवडिवीजन , जिला , राज्य तथा राष्ट्रीय स्तर पर बनते हैं ,और अपने क्षेत्राधिकार का प्रयोग मुखिया , प्रमुख , प्रधान आदि करते हैं |
  • हत्या , चोरी , डकैती आदि के मामले जातीय पंचायत नही देखती |
  • जातीय पंचायत में मुख्यतः सामाजिक , जमीन तथा वैवाहिक मामलों का समाधान अधिक होता हैं |आज कल यह लोक अदालत के रूप में अधिक लोकप्रिय हो रहा हैं |
  • मुण्डा मानकी शासन व्यवस्था

  • यह हो लोगों की पारंपरिक शासन व्यवस्था हैं |
  • इस शासन व्यवस्था में ग्राम प्रधान / मुखिया को मुण्डा कहा जाता हैं जिसका कार्य प्रशासन व न्याय को संभालना व लगान वसूलना हैं |
  • डाकुआ , ग्राम प्रधान के सहयोग के लिए होते हैं जिनका कार्य मुण्डा के द्वारा दिए गए सामाजिक व प्रशासन संबंधी सूचना लोगों तक पहुचाना हैं |
  • मानकी – 15-20 गांव के ऊपर एक मानकी का पद होता हैं जो इन सब गांव का प्रमुख होता हैं |
  • तहसीलदार लगान वसूली में मानकी का सहयोगी हैं |
  • ग्राम पुजारी को दिउरी कहते हैं |
  • ढ़ोकलो सोहोर शासन व्यवस्था
    यह खड़िया समाज की पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था हैं | इसमें ग्राम पंचायत के अध्यक्ष को ढ़ोकलो सोहोर कहा जाता हैं |
    खड़िया स्वशासन के प्रमुख पद–
    करटाहा- हरेक गांव में एक करटाहा होता है जिसे गांव के 20-25 अनुभवी लोग मिलकर चुनते है |करटाहा गांव में असामाजिक कार्य करने वाले को दंड देता है |
    रेड – यह करटाहा से बड़ा पद होता है |
    परगना का राजा – यह ग्राम परगना का शासन ,न्याय व अन्य मामला देखता है |यह रेड से बड़ा पद होता है |
    खड़िया राजा – खड़िया महासभा का सर्वोच्च सभापति होता है |इसका निर्णय अंतिम होता है |
    लिखाकड़ (सचिव या मंत्री )– यह राजा के सामाजिक, राजनैतिक व प्रशासनिक कार्यों में मदद करता है |
    तिजाड़कड – ये खाजांची होते है जो राजा के आय व्यय का विवरण रखता है |

    1. आपका यह झारखण्ड सीरीज परीक्षार्थी के लिए बहुत ही उपयोगी है | बहुत बहुत धन्यवाद |

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