न्यूनतम समर्थन मूल्य

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प्रस्तावना

न्यूनतम समर्थन मूल्य भारत सरकार द्वारा कृषि उत्पादकों को कृषि उत्पादों के मूल्यों में किसी तीव्र गिरावट के विरुद्ध सुरक्षित किए जाने वाले बाजार हस्तक्षेप का एक रूप है |भारत सरकार द्वारा कृषि लागत और मूल्य आयोग (CACP ) की अनुशंसाओं के आधार पर कुछ फसलों के बुवाई सत्र के आरम्भ में
न्यूनतम समर्थन मूल्य की घोषणा की जाती है | MSP भारत सरकार द्वारा उत्पादकों -किसानों को अत्यधिक उत्पादन वर्षों में मूल्यों में अत्यधिक गिरावट के विरुद्ध सुरक्षित करने के लिए नियत किआ गया मूल्य है | न्यूनतम समर्थन मूल्य का मुख्या उद्देश्य किसानों का मजबूरन सस्ते कीमत पर फसल बिक्री करने से बचाना और सार्वजनिक वितरण के लिए खाद्दान्न की अधिप्राप्ति करना है |यदि किसी फसल के लिए बाजार मूल्य ,बम्पर उत्पादन होने या बाजार में अधिकता होने के कारण घोषित मूल्य की तुलना में अत्यधिक गिर जाते है तो सरकारी एजेंसियां किसानों द्वारा प्रस्तुत की गई संपूर्ण मात्रा को घोषित किए गए न्यूनतम मूल्य पर खरीद लेती है |
वर्तमान में 25 फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य की घोषणा की जाती है जिनमे सात अनाज (धान,गेहूं ,जौ, ज्वार,बाजरा ,मक्का और रागी ) ;पांच दाले (चना ,अरहर ,मूंग,उडद ,और मसूर );आठ तिलहन (मूंगफली ,सरसों ,तोरिया ,सोयाबीन के बीज ,कुसुम्भी (safflower)और खुरसाणी(nigerseed)); नारियल , कच्चा कपास ,कच्चा जूट , गन्ना और वर्जीनिया फ्लू उपचारित (BFC)तम्बाकू सम्म्लित है |

न्यूनतम समर्थन मूल्य और अन्य गैर मूल्य उपायों के स्तर के सम्बन्ध में अनुशंसाएँ निर्मित करने के सम्बन्ध में CACP किसी विशिष्ट जिंस या जिंसों के समूह की अर्थव्यवस्था के पुरे ढांचे के व्यपक दृश्यों को ध्यान में रखता है |अन्य कारक में उत्पादक की लागत ,इनपुट मूल्यों में परिवर्तन ,इनपुट आउटपुट मूल्य समता ,बाजार कीमतों की प्रवृतियाँ, मांग और आपूर्ति ,अंतर फसल मूल्य समता ,औद्योगिक लागत संरचना पर प्रभाव ,जीवन यापन ई लागत पर प्रभाव ,सामान्य मूल्य स्तर पर प्रभाव , अंतरराष्ट्रीय मूल्य स्थिति ,किसानों द्वारा भुगतान किए गए और प्राप्त किए गए मूल्यों के बीच समता और निर्गम मूल्यों पर प्रभाव पर ध्यान दिया जाता है |आयोग जिले ,राज्य और देश के स्तर पर लघु – स्तरीय आंकड़ो एवम समग्र आंकड़ो ,दोनों का ही उपयोग करता है |

वर्ष 2016-17 ऋतु के लिए खरीफ फसलों का न्‍यूनतम समर्थन मूल्‍य


न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के घनात्मक प्रभाव

  • न्यूनतम समर्थन मूल्य(MSP) नई तकनीकी को किसानों में लोकप्रिय बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका रहती है |
  • न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) एक सामाजिक कदम के रूप में भी महत्वपूर्ण भूमिका निव्हट है क्योंकि इसके माध्यम से निर्धन लोगो के बीच आय का हस्तांतरण होता है |
  • न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से कृषि के व्यपार शर्तो को उचित स्तर पर बनाए रखा जा सकता है |इसके माध्यम से क्रॉपिंग पैटर्न को ऐच्छिक दिशा में ले जाया जा सकता है |eg भारत में खाद्द्य सुरक्षा से निपटने के लिए गेहूं , चावल ,आदि की दिशा में क्रॉपिंग पैटर्न में बदलाव आया है |
  • इसके माध्यम से भारत में खाद्द्यान उत्पादन में आत्मपूर्णता की स्थिति बन पाई है |
  • न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के माध्यम से खाद्द्यान और अन्य फसलों के बाजार में कीमत स्थिरता को लागू किया जा सकता है |
  • न्यूनतम समर्थन मूल्य(MSP) के ऋणात्मक प्रभाव

  • न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के कारण मोटे अनाज और कुछ दालों पर विपरीत असर पड़ा है |
  • न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) का लाभ कुछ विशेष क्षेत्र और कुछ विशेष लोगों को अधिक मिला है |भारत सरकार द्वारा कुछ विशेष राज्यों जैसे की पंजाब,हरियाणा , गुजरात ,उत्तर प्रदेश , महाराष्ट्र आदिमे अधिग्रहण के कार्यक्रम को विशेष वरियता दी गई है ,इससे प्रादेशिक असंतुलन के बढ़ने के साथ साथ आय की विषमताओं में बढ़ोतरी हुई है |
  • न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) का लाभ उठाने के लिए आवश्यक है कि सार्वजनिक संस्थाओं कि पर्याप्त मात्रा देश भर में विधमान हो| लेकिन यह देखा गया है कि सार्वजनिक संस्थाओं कि एमी के कारन अधिग्रहण का कार्य मंडी स्तर पर आढ़तियों को दे दिया जाता है इससे छोटे किसानों का शोषण होता है |
  • न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से जुडी भारतीय नीति में इस बात कि अवहेलना कि गई है खाद्दानो से जुड़ा हुआ मांग पक्ष किस प्रकार का है इसका यह परिणाम होता है कि निर्धनों के लिए खाद्द्य सुरक्षा को प्राप्त करना कठिन हो जाता है |
  • भारतीय खाद्य निगम द्वारा किए जाने वाले अधिग्रहण, वितरण,भण्डारण के कारन भारत के खाद्दान के निजी व्यपार पर विपरीत असर पड़ा है |विश्व बैंक के अनुसार यह दीर्घकालिक दृष्टि से खाद्द्य सुरक्षा को सुनिश्चित करने में एक बढ़ के रूप में कार्य कर सकता है |
  • न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) कि सरकारी नीति के कारन पर्यावरण पर भी ऋणात्मक प्रभाव पड़ा है |गेहूं चावल आदि के निरंतर MSP बढ़ने से रासायनिक उर्वरक आदि के अत्यधिक उपयोग का बढ़ावा मिला है |


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