सरकार की एक पहल : किसानों की आय में बढ़ावा

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प्रस्तावना

प्रधानमंत्री की अध्यक्षयता वाली आर्थिक मामलों की केंद्रीय समिति ने 2016-17 के लिए रबी की सभी फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य(एमएसपी) में वृद्धि को मंजूरी दी। इसके अलावा दलहन और तिलहन की खेती को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार ने उपर्युक्त और निम्नलिखित फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में बढोतरी को अनुमति प्रदान की।

न्यूनतम समर्थन मूल्य की सिफारिश के आधार
कृषि लागत के लिए गठित आयोग(सीएसीपी) की सिफारिशों पर एमएसपी में बढ़ोतरी को मंजूरी दी गई है। आयोग ने उत्पादन की लागत, मांग-पूर्ति, घरेलू एवं अंतरराष्ट्रीय मूल्यों, अंतर-फसल कीमत में समानता, कृषि एवं गैर कृषि क्षेत्र के बीच व्यापार के आधार पर एमएसपी की यह सिफारिश की है। इसका भूमि और पानी की तरह उत्पादन संसाधनों के तर्कसंगत उपयोग सुनिश्चित करने के अलावा अर्थव्यवस्था के बाकी हिस्सों पर प्रभाव की संभावना है।

न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाने के लाभ

  • दलहन और तिलहन की मांग व आपूर्ति के बीच बढ़ती खाई के चलते आयात पर निर्भरता बढ़ती जा रही है जिसे कम किया जा सकेगा |
  • किसानों के लिए एक मजबूत कीमत संकेत देने के वास्ते रकबा बढ़ाने के लिए और इन फसलों की उत्पादकता में वृद्धि के लिए निवेश करने के लिए दलहन और तिलहन पर सरकार ने इस बोनस की घोषणा की है।
  • दलहन और तिलहन की खेती में वृद्धि से अतिरिक्त पर्यावरणीय लाभ भी होगा। इससे इन फसलों के लिए कम पानी की आवश्यकता होती है और इससे मिट्टी में नाइट्रोजन स्थिरीकरण में भी मदद मिलती है।
  • दलहन और तिलहन की खेती को प्रोत्साहित करने के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल ने चना के लिए प्रति क्विंटल 200 रुपये, मसूर के लिए प्रति क्विंटल 150 रुपये और दलहन की प्रत्येक फसलों के लिए 100 प्रति क्विंटल के हिसाब से बोनस देने का फैसला किया है।
  • पृष्टभूमिः
    भारतीय खाद्य निगम(एफसीआई) अनाज, दलहन और तिलहन के मूल्य समर्थन के संचालन के लिए केंद्रीय नोडल एजेंसी बनाया गया है । एफसीआई के पूरक प्रयासों के लिए राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ ऑफ इंडिया लिमिटेड (नाफेड), राष्ट्रीय सहकारी उपभोक्ता संघ (एनसीसीएफ), केंद्रीय भंडारण निगम (सीडब्ल्यूसी), लघु कृषि – बिजनेस कंसोर्टियम (एसएफएसी) भी अपनी क्षमता के अनुसार दलहन और तिलहन की खरीदारी करेंगे।

    रबी फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्यों में वृद्धि के अलावा सरकार ने किसानों के लिए कई उपयोगी कदम उठाए हैं। ये निम्नलिखित हैं-

  • सरकार ने 2016-17 के मार्केंटिंग वर्षों के लिए 75 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से रबी फसलों में दलहन की खातिर न्यूनतम समर्थन मूल्य तय करने के अलावा खरीफ की फसल के रूप में उत्पादित दलहन-: अरहर, मूंग, उड़द के लिए प्रति क्विंटल 425 रुपये के बोनस की घोषणा की है और तिल के लिए प्रति क्विंटल 200 रुपये का बोनस और मूंगफली, सैफ्लाउअर, सोयाबीन और नाइजर बीज के लिए 100 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से बोनस तय किया है।
  • सरकार ने नई फसल बीमा के तहत प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना शुरू की है। इस योजना के तहत प्रीमियम दरों का किसानों द्वारा भुगतान किया जाना है; वह सभी खरीफ फसलों के लिए बीमा राशि का बहुत ही कम 2%,सभी रबी फसलों के लिए 5% और वाणिज्यिक व बागवानी फसलों के लिए 1.5% भुगतान किया जाना है। नई बीमा योजना में सरल और स्मार्ट प्रौद्योगिकी फोन और रिमोट सेंसिंग को शामिल किया गया है जिससे त्वरित आकलन और दावों के शीघ्र निपटान के लिए के इस्तेमाल किया जा सकेगा। सरकार ने एक मोबाइल एप्प”Crop Insurance” की शुरूआत की है। इससे किसानों को उनके क्षेत्र में उपलब्ध बीमा कवर को लेकर संपूर्ण जानकारी हासिल कर सकेंगे और फसलों के लिए अधिसूचित बीमा प्रीमयमों की गणना कर सकेंगे।
  • सरकार ने पूरे भारत में एक इलेक्ट्रॉनिक व्यापार मंच विकसित करने के लिए ‘National Agriculture Market (NAM)’ योजना की शुरुआत की है। इसका उद्देश्य 585 बाजारों को एकीकृत करना है जिससे एक साझा ई-मार्केट मंच तैयार किया जा सके। प्रत्येक राज्य को तीन प्रमुख सुधारों का कार्य करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इनमें इलेक्ट्रॉनिक विपणन, सभी राज्यों में एक ही लाइसेंस की वैधता और शुल्क के लिए एकल प्रवेश बिंदु बाजार शामिल हैं। इससे किसान अपने उत्पादन की उचित कीमतों के बारे में सूचना हासिल कर सकेंगे। 11 राज्यों के 221 बाजार पहले ही e-NAM मंच से जुड़ चुके हैं।
  • देशभर के किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड जारी किया गया है जिसका हर साल नवीनीकरण होना है। कार्ड मिट्टी के उपजाऊपन की जानकारी देगा और इसका उपयोग फसलों के उत्पादन में किया जाएगा। 30 सितंबर 2016 तक 295.56 लाख मृदा स्वास्थ्य कार्ड वितरित किए गए।
  • परंपरागत कृषि विकास योजना(पीकेवीवाई) के तहत सरकार जैविक खेती और जैविक उत्पादों के विपणन की संभावनाओं को प्रोत्साहित कर रही है।
  • ‘हर खेत को पानी’ के उद्देश्य से प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना को लागू किया गया है ताकि सिंचाई व्यवस्था का विस्तार हो। इससे ‘हर बूंद, अधिक फसल’ की नीयत से जल के अधिकतम उपयोग में सुधार होगा। एक केंद्रित तरीके से पानी के स्रोत निर्माण, उसके वितरण, प्रबंधन, क्षेत्र आवेदन और विस्तार गतिविधियों का समाधान इससे होगा।
  • सरकार राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन के तहत चावल, गेहूं, मोटे अनाज और दलहन फसलों की उत्पादकता में सुधार लाने पर ध्यान केंद्रित कर रही है।
  • दूरदर्शन ने ‘किसान चैनल’ की शुरुआत की है, जिससे किसानों को 24 घंटे कृषि, मौसम और कृषि बाजार मूल्य संबंधी सभी सूचनाएं मिलती हैं।
  • सरकार किसान उत्पादक संगठनों के गठन को प्रोत्साहित कर रही है।
  • दलहन एवं प्याज की कीमतों को स्थिर करने के लिए सरकार ने सुरक्षित भंडार तैयार करने का फैसला किया है। दलहन और प्याज के मूल्य को स्थिर करने के लिए मूल्य स्थिरीकरण कोष बनाया गया है।
  • महिला किसानों के लिए ‘फर्म वूमेन फ्रेंडली हैंड बुक’ तैयार किया गया है। इसमें विशेष प्रावधान एवं सहायता पैकेज की जानकारी है जिससे महिला किसान कृषि विभाग के विभिन्न योजनाओं, मिशन, सब-मिशन, निगम और किसान कल्याण से संबंधित योजनाओं का लाभ ले सकेंगी। महिला किसान/ लाभार्थी जिला एवं ब्लॉक पर स्थित निकटतम परियोजना(आत्मा) निदेशक या (कृषि) उप-निदेशक से संपर्क कर सकते हैं। प्रौद्योगिक/सहायक प्रौद्योगिकी प्रबंधकों से तुरफ फुरत मदद हासिल की जा सकती है।
  • उपर्युक्त कदमों को उठाने के साथ ही सरकार ने 2022 तक किसानों की आय दोगुना करने का लक्ष्य तय किया है।
  • Source-Pib



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