ऊर्जा,भारत में ऊर्जा के इस्तेमाल की वर्तमान स्थिति,ऊर्जा के स्रोत,भारत सरकार द्वारा चलाई गई योजनाएं,ऊर्जा और महिलाओं का सशक्तीकरण

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ऊर्जा,भारत में ऊर्जा के इस्तेमाल की वर्तमान स्थिति,ऊर्जा के स्रोत,भारत सरकार द्वारा चलाई गई योजनाएं,ऊर्जा और महिलाओं का सशक्तीकरण

  • admin
  • September 28, 2016

ऊर्जा क्या है?

    कार्य करने की क्षमता को हम ऊर्जा के रूप में परिभाषित करते है |हमें अपने शरीर के अंदर के कार्य व शरीर द्वारा किए गए सभी कार्य के लिए ऊर्जा की आवश्यकता होती है |

भारत में ऊर्जा के इस्तेमाल की वर्तमान स्थिति—

  • भारत की लगभग 70 प्रतिशत आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करती है। अब तक हमारे देश के 21 प्रतिशत गाँवों तथा 50 प्रतिशत ग्रामीण परिवारों तक बिजली नहीं पहुँच पाई है। वर्तमान विकास की गति को बरकरार रखने के लिए ग्रामीण ऊर्जा की उपलब्धता को सुनिश्चित करना हमारी सबसे महत्वपूर्ण चुनौती है।
  • ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच प्रति व्यक्ति ऊर्जा की खपत में काफी अंतर है। उदाहरण के लिए 75 प्रतिशत ग्रामीण परिवार रसोई के ईंधन के लिए लकड़ी पर, 10 प्रतिशत गोबर की उपालियों पर और लगभग 5 प्रतिशत रसोई गैस पर निर्भर हैं। जबकि इसके विपरीत, शहरी क्षेत्रों में खाना पकाने के लिए 22 प्रतिशत परिवार लकड़ी पर, अन्य 22 प्रतिशत केरोसिन पर तथा लगभग 44 प्रतिशत परिवार रसोई गैस पर निर्भर हैं। घर में प्रकाश के लिए 50 प्रतिशत ग्रामीण परिवार केरोसिन पर तथा अन्य 48 प्रतिशत बिजली पर निर्भर हैं। जबकि शहरी क्षेत्रों में इसी कार्य के लिए 89 प्रतिशत परिवार बिजली पर तथा अन्य 10 प्रतिशत परिवार केरोसिन पर निर्भर हैं। ग्रामीण महिलाएँ अपने उत्पादक समय में से लगभग चार घंटे का समय रसोई के लिए लकड़ी चुनने और खाना बनाने में व्यतीत करती हैं लेकिन उनके इस श्रम के आर्थिक मूल्य को मान्यता नहीं दी जाती।
  • देश के विकास के लिए ऊर्जा की उपलब्धता एक आवश्यक पूर्व शर्त्त है। खाना पकाने, पानी की सफाई, कृषि, शिक्षा, परिवहन, रोज़गार सृजन एवं पर्यावरण को बचाये रखने जैसे दैनिक गतिविधियों में ऊर्जा महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
  • ग्रामीण क्षेत्रों में उपयोग होने वाले लगभग 80 प्रतिशत ऊर्जा बायोमास से उत्पन्न होता है। इससे गाँव में पहले से बिगड़ रही वनस्पति की स्थिति पर और दबाव बढ़ता जा रहा है। गैर उन्नत चूल्हा, लकड़ी इकट्ठा करने वाली महिलाएँ एवं बच्चों की कठिनाई को और अधिक बढ़ा देती है। सबसे अधिक, खाना पकाते समय इन घरेलू चूल्हों से निकलने वाला धुंआँ महिलाओं और बच्चों के श्वसन तंत्र को काफी हद तक प्रभावित करता है।

ऊर्जा के स्रोत

नवीनीकृत ऊर्जा

    ऐसी ऊर्जा जिसकी एक लघु अवधि के बाद पुनः पूर्ति की जा सकती है उसे नवीनीकृत ऊर्जा कहते है | नवीनीकृत ऊर्जा प्राकृतिक प्रक्रिया के तहत सौर, पवन, सागर, पनबिजली, बायोमास, भूतापीय संसाधनों और जैव ईंधन और हाइड्रोजन से लगातार अंतरनिहित प्राप्त होती रहती है।

सौर ऊर्जा

    सूर्य ऊर्जा का प्राथमिक स्रोत है। यह दिन में हमारे घरों में रोशनी प्रदान करता है हमें गर्म रखता है इसकी क्षमता इसके आकार से बहुत अधिक है।

सौर ऊर्जा के उत्पादक उपयोग हेतु प्रौद्योगिकी

    सौर्य ऊर्जा का उपयोग बिजली उत्पादन के लिए किया जा सकता है। सोलर फोटोवोल्टेइक सेल के माध्यम से सौर विकिरण सीधे डीसी करेन्ट में परिवर्तित हो जाता है। इस प्रकार, उत्पादित बिजली का उसी रूप में इस्तेमाल किया जा सकता या उसे बैटरी में स्टोर/जमा कर रखा जा सकता है। संग्रह किये गये सौर ऊर्जा का उपयोग रात में या वैसे समय किया जा सकता जब सौर्य ऊर्जा उपलब्ध नहीं हो। आजकल सोलर फोटोवोल्टेइक सेल का, गाँवों में घरों में प्रकाश कार्य, सड़कों पर रोशनी एवं पानी निकालने के कार्य में सफलतापूर्वक उपयोग किया जा रहा है। पहाड़ी क्षेत्रों में सौर ऊर्जा का उपयोग पानी गर्म करने में भी किया जा रहा है।

पवन ऊर्जा

    पवन स्थल या समुद्र में बहने वाली हवा की एक गति है। पवन चक्की के ब्लेड जिससे जुड़े होते है उनके घुमाने से पवन चक्की घुमने लगती है जिससे पवन ऊर्जा उत्पन्न होती है । शाफ्ट का यह घुमाव पंप या जनरेटर के माध्यम से होता है तो बिजली उत्पन्न होती है। यह अनुमान है कि भारत में 49,132 मेगावॉट पवन ऊर्जा का उत्पादन करने की क्षमता है।
    लाभ
    • यह पर्यावरण के अनुकूल है ।
    • इसकी स्वतंत्र रूप और बहुतायत से उपलब्ध।
    नुकसान
    • उच्च निवेश की आवश्यकता।
    • हवा की गति जो हर समय एक समान नहीं होने से बिजली उत्पादन की क्षमता प्रभावित होती है।

जैव भार और जैव ईंधन

जैव भार क्या है?

  • पौधों प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया के माध्यम से सौर ऊर्जा का उपयोग बायोमास उत्पादन के लिए करते हैं। इस बायोमास का उत्पादन ऊर्जा स्रोतों के विभिन्न रूपों के चक्रों से होकर गुजरता है। एक अनुमान के अनुसार भारत में बायोमास की वर्तमान उपलब्धता 150 मिलियन मीट्रिक टन है।
  • बायोमास के उत्पादन के लिए उपयोग की जाने वाली प्रौद्योगिकी
  • बायोमास सक्षम प्रौद्योगिकियों के कुशल उपयोग द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में प्रचलित हो रहा है। इससे ईंधन के उपयोग की दक्षता में वृद्धि हुई है। जैव ईंधन ऊर्जा का एक महत्वपूर्ण स्रोत है जिसका देश के कुल ईंधन उपयोग में एक-तिहाई का योगदान है और ग्रामीण परिवारों में इसकी खपत लगभग 90 प्रतिशत है। जैव ईंधन का व्यापक उपयोग खाना बनाने और उष्णता प्राप्त करने में किया जाता है। उपयोग किये जाने वाले जैव ईंधन में शामिल है- कृषि अवशेष, लकड़ी, कोयला और सूखे गोबर।

जैव ईंधन के उत्पादक प्रयोग हेतु प्रौद्योगिकी

    जैव ईंधन के प्रभावी उपयोग को सुरक्षित करती प्रौद्योगिकियाँ ग्रामीण क्षेत्रों में फैल रहीं हैं।
    ईंधन उपयोग की क्षमता निम्नलिखित कारणों से बढ़ाई जा सकती है –

  • विकसित डिज़ाइन के स्टोवों का उपयोग, जो क्षमता को दोगुणा करता है जैसे धुँआ रहित ऊर्जा चूल्हा।
  • जैव ईंधन को सम्पीड़ित/सिकोड़कर (कम्प्रेस) ब्रिकेट के रूप में बनाये रखना ताकि वह कम स्थान ले सके और अधिक प्रभावी ढंग से कार्य कर सके।
  • जैव वस्तुओं को एनारोबिक डायजेशन के माध्यम से बायोगैस में रूपांतरित करना जो न केवल ईंधन की आवश्यक्ताओं को पूरा करता है बल्कि खेतों को घुलनशील खाद भी उपलब्ध कराता है।
  • नियंत्रित वायु आपूर्ति के अंतर्गत जैव ईंधन के आंशिक दहन के माध्यम से उसे उत्पादक गैस में रूपांतरित करना।

जैव ईंधन

    जैव ईंधन मुख्यत: सम्मिलित बायोमास से उत्पन्न होता है अथवा कृषि या खाद्य उत्पाद या खाना बनाने और वनस्पति तेलों के उत्पादन की प्रक्रिया से उत्पन्न अवशेष और औद्योगिक संसाधन के उप उत्पाद से उत्पन्न होता है। जैव ईंधन में किसी प्रकार का पेट्रोलियम पदार्थ नहीं होता है किन्तु इसे किसी भी स्तर पर पेट्रोलियम ईंधन के साथ जैव ईंधन का रूप भी दिया जा सकता है। इसका उपयोग परंपरागत निवारक उपकरण या डीजल इंजन में बिना प्रमुख संशोधनों के साथ उपयोग किया जा सकता है। जैव ईंधन का प्रयोग सरल है। यह प्राकृतिक तौर से नष्ट होने वाला सल्फर तथा गंध से पूर्णतया मुक्त है।

पानी और भूतापीय ऊर्जा

पानी

    बहता पानी और समुद्र ज्वार ऊर्जा के स्रोत हैं। जनवरी 2012 में लघु पन बिजली के संयत्रों ने ग्रिड इंटरेक्टिव क्षमता में 14% योगदान दिया । हाल के वर्षों में, पनबिजली ऊर्जा (मध्यम और छोटे पनबिजली संयंत्र) का उपयोग दूरदराज के अविद्युतीकृत गांवों तक बिजली पहुंचने के लिए प्रयोग किया जाता है। लघु जल विद्युत की अनुमानित क्षमता देश में लगभग 15,000 मेगावाट है।

भूतापीय ऊर्जा

    भूतापीय ऊर्जा पृथ्वी से उत्पन्न गर्मी है। प्रकृति में प्रचलित गर्म जल के फव्वारे हैं जो भूतापीय ऊर्जा स्रोतों की उपस्थिति के लिए निदेशक का काम रूप में काम करते हैं।

नाभिकीय ऊर्जा

  • नाभिकीय ऊर्जा ऐसी ऊर्जा है जो प्रत्येक परमाणु में अंतर्निहित होती है। नाभिकीय ऊर्जा संयोजन (परमाणुओं के संयोजन से) अथवा विखंडन (परमाणु-विखंडन) प्रक्रिया द्वारा उत्पन्न की जा सकती है। इनमें विखंडन की प्रक्रिया व्यापक रूप से प्रयोग में लाई जाती है।
  • नाभिकीय विखंडन प्रक्रिया के लिए यूरेनियम एक प्रमुख कच्चा पदार्थ है। परमाणु ऊर्जा इकाई के रिएक्टर के अंदर यूरेनियम परमाणु नियंत्रित श्रृंखला अभिक्रिया (कंट्रोल्ड चेन रिएक्शन) द्वारा विखंडित किये जाते हैं। विखंडित होकर बनने वाले अन्य पदार्थों में प्लूटोनियम तथा थोरियम शामिल हैं।
  • किसी श्रृंखला अभिक्रिया में परमाणु के टूटने से बने कण अन्य यूरेनियम परमाणुओं पर प्रहार करते हैं तथा उन्हें विखंडित करते हैं। इस प्रक्रिया में निर्मित कण एक श्रृंखला अभिक्रिया द्वारा पुनः अन्य परमाणुओं को विखंडित करते हैं। यह प्रक्रिया बड़ी तीव्र गति से न हो इसके लिए नाभिकीय ऊर्जा प्लांट में विखंडन को नियंत्रित करने के लिए नियंत्रक रॉड का प्रयोग किया जाता है। इन्हें मंदक (मॉडरेटर) कहते हैं।
  • श्रृंखला अभिक्रिया द्वारा ऊष्मा ऊर्जा मुक्त होती है। इस ऊष्मा का प्रयोग रिएक्टर के कोर में स्थित भारी जल को गर्म करने में किया जाता है। इसलिए नाभिकीय ऊर्जा प्लांट परमाण्विक ऊर्जा को ऊष्मा ऊर्जा में बदलने के लिए किसी अन्य इंधन को जलाने की बजाय, श्रृंखला अभिक्रिया द्वारा उत्पन्न ऊर्जा का प्रयोग करता है। नाभिकीय कोर के चारों तरफ फैले भारी जल को ऊर्जा प्लांट के अन्य खंड में भेजा जाता है। यहां यह जल से भरे पाइपों के दूसरे सेट को गर्म कर भाप पैदा करता है। पाइपों के इस दूसरे सेट से उत्पन्न वाष्प का प्रयोग टर्बाइन चलाने में किया जाता है, जिससे बिजली पैदा होती है।

नाभिकीय ऊर्जा के लाभ

  • नाभिकीय ऊर्जा के निर्माण में कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) की अपेक्षाकृत कम मात्रा निकलती है। इसलिए वैश्विक तापन (ग्लोबल वार्मिंग) में नाभिकीय ऊर्जा के निर्माण का अपेक्षाकृत कम योगदान रहता है।
  • मात्र एक इकाई द्वारा ही बड़े पैमाने पर बिजली पैदा की जा सकती है।

नाभिकीय ऊर्जा के दोष

  • रेडियो सक्रिय अपशिष्ट पदार्थों के सुरक्षित निबटान की समस्या।
  • दुर्घटना होने पर बड़े खतरे तथा उसके गहरे हानिकारक प्रभाव की संभावना।
  • इसमें प्रयुक्त कच्चा पदार्थ यूरेनियम एक दुर्लभ संसाधन है। एक आकलन के मुताबिक वास्तविक मांग के अनुसार यह 30 से 60 वर्षों में ही खत्म हो जाएगा।

अनवीनीकृत ऊर्जा

    ऐसी ऊर्जा जिसकी एक लघु अवधि के बाद पुनः पूर्ति नही की जा सकती है उसे अनवीकरणीय ऊर्जा कहते है | कोयला, तेल और प्राकृतिक गैस ऊर्जा के अनवीकरणीय स्रोतों हैं। पौधों के उत्पाद हजारों साल दबे रहे थे जिन्हें धीरे-धीरे पृथ्वी से निकाला जाता है जो जीवाश्म ईंधन कहलाते हैं। जीवाश्म ईंधन आज मुख्य रूप से इस्तेमाल ऊर्जा के स्रोत हैं। भारत लगभग 286 अरब टन (मार्च 2011) के अनुमानित भंडार के साथ दुनिया में कोयले का तीसरा सबसे बड़ा उत्पादक है। कोयला देश के कुल ऊर्जा जरूरतों का 50% से अधिक की पूर्ति करता है। भारत में सालाना 210 लाख टन के बराबर कच्चे तेल की खपत होती है।

ऊर्जा के प्रकार

    प्रकृति में ऊर्जा कई अलग अलग रूपों में मौजूद है। इन के उदाहरण हैं: प्रकाश ऊर्जा, यांत्रिक ऊर्जा, गुरुत्वाकर्षण ऊर्जा, विद्युत ऊर्जा, ध्वनि ऊर्जा, रासायनिक ऊर्जा और परमाणु ऊर्जा। प्रत्येक ऊर्जा को एक अन्य रूप में परिवर्तित या बदला जा सकता है।
    ऊर्जा के कई विशिष्ट प्रकारों में प्रमुख रूप गतिज ऊर्जा और स्थितिज ऊर्जा है।

  • गतिज ऊर्जा वस्तुओं या पिंड के घूमने से उत्पन्न होने वाली ऊर्जा है जिसमें यांत्रिक ऊर्जा, विद्युत ऊर्जा आदि शामिल हैं।
  • स्थितिज ऊर्जा को भविष्य में उपयोग के रखा या संग्रहीत रखा जा सकता है जो कि ऊर्जा का कोई भी रूप हो सकता है। इसमें परमाणु ऊर्जा, रासायनिक ऊर्जा, आदि शामिल हैं।

ऊर्जा के सामान्य रूपों का संक्षिप्त विवरण इस प्रकार है।

रासायनिक ऊर्जा

    परमाणु बंधनों के बीच संग्रहित ऊर्जा रासायनिक ऊर्जा है. उदाहरण के लिए, हम लकड़ी, कोयले को जलाने से ईंधनों से उत्पन्न होने वाली रासायनिक ऊर्जा का उपयोग करते हैं।

विद्युत ऊर्जा

    बिजली के कंडक्टर में इलेक्ट्रॉनों द्वारा वहन की जाने वाली ऊर्जा विद्युत ऊर्जा है। यह ऊर्जा के सबसे आम और उपयोगी रूपों में से एक है। उदाहरण के लिए बिजली भी ऊर्जा का रूप है। ऊर्जा के अन्य रूप भी विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित किये जा सकते हैं। उदाहरण के लिए, ऊर्जा संयंत्र कोयले जैसे ईंधन में संग्रहीत रासायनिक ऊर्जा को उसके विभिन्न रूपों में परिवर्तित कर विद्युत ऊर्जा में बदल देते हैं।

यांत्रिक ऊर्जा

    यांत्रिक ऊर्जा एक पदार्थ या प्रणाली की गति से उत्पन्न होने वाली ऊर्जा है। उदाहरण के लिए मशीनों में काम करने के लिए यांत्रिक ऊर्जा का उपयोग किया जाता है।

ऊष्मीय ऊर्जा

    ऊष्मीय ऊर्जा एक पदार्थ या प्रणाली के अपने तापमान अणुओं की गति से उत्पन्न होने वाली ऊर्जा है। उदाहरण के लिए, हम खाना पकाने के लिए सौर विकिरण द्वारा उत्पन्न की जाने वाली ऊष्मीय ऊर्जा का उपयोग करते हैं।

परमाणु ऊर्जा के लाभ और हानि
लाभ:

  • परमाणु बिजली के उत्पादन में अपेक्षाकृत कम मात्रा में कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जित होती है। इसलिए परमाणु ऊर्जा संयंत्रों का ग्लोबल वार्मिंग के लिए योगदान अपेक्षाकृत कम है।

हानि:

  • रेडियोधर्मी कचरे के सुरक्षित निपटान की समस्या एक बड़ी समस्या है जिसमें उच्च जोखिम और बड़े नुकसान की संभावना शामिल होती है।
  • इसमें प्रयुक्त होने वाला कच्चा माल यूरेनियम एक दुर्लभ संसाधन है। यूरेनियम के अगले 30 से 60 वर्षों के लिए ही उपलब्ध होना का अनुमान है।

गुरुत्वाकर्षण ऊर्जा

    गुरुत्वाकर्षण ऊर्जा एक गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र में एक वस्तु द्वारा लगने वाली ऊर्जा है। उदाहरण पानी एक बहते झरने से उत्पन्न होने वाली ऊर्जा गुरुत्वाकर्षण ऊर्जा है।

भारत में सौर ऊर्जा

  • सौर ऊर्जा वह उर्जा है जो सीधे सूर्य से प्राप्त की जाती है। सौर ऊर्जा ही मौसम एवं जलवायु का परिवर्तन करती है। यहीं धरती पर सभी प्रकार के जीवन (पेड़-पौधे और जीव-जन्तु) का सहारा है।
  • वैसे तो सौर उर्जा के विविध प्रकार से प्रयोग किया जाता है, किन्तु सूर्य की उर्जा को विद्युत उर्जा में बदलने को ही मुख्य रूप से सौर उर्जा के रूप में जाना जाता है। सूर्य की उर्जा को दो प्रकार से विदुत उर्जा में बदला जा सकता है। पहला प्रकाश-विद्युत सेल की सहायता से और दूसरा किसी तरल पदार्थ को सूर्य की उष्मा से गर्म करने के बाद इससे विद्युत जनित्र चलाकर।
  • भारत में सौर ऊर्जा हेतु विभिन्न कार्यक्रमों का संचालन भारत सरकार के नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय द्वारा किया जाता है। भारत की घनी आबादी और उच्च सौर आतपन सौर ऊर्जा को भारत के लिए एक आदर्श ऊर्जा स्रोत बनाता है। किंतु सौर ऊर्जा निरंतर खर्चीली है और इस पर भारी निवेश की जरूरत पड़ती है। सौर ऊर्जा का स्वोरूप अस्थिर है जिससे इसे ग्रिड में समायोजित करना मुश्किल होता है। लोगों की जागरुकता का अभाव, उच्चउ उत्पा दन लागत तथा वर्तमान ऊर्जा को छोड़ने की सीमाएं एवं पारेषण (ट्रांसमशिन) नेटवर्क को देशभर में सौर ऊर्जा क्षमता के भरपूर दोहन की दि‍शा में मुख्ये बाधा के रूप में माना गया है। देश में 30-50 मेगावाट/ प्रतिवर्ग किलोमीटर छायारहित खुला क्षेत्र होने के बावजूद उपलब्ध‍ क्षमता की तुलना में देश में सौर ऊर्जा का दोहन काफी कम है (जो 31-5-2014 की स्थिति के अनुसार 2647 मेगावाट है)।

सौर ऊर्जा का प्रयोग

सौर ऊर्जा, जो रोशनी व उष्मा दोनों रूपों में प्राप्त होती है, का उपयोग कई प्रकार से हो सकता है।

  • सौर उष्मा का उपयोग अनाज को सुखाने, जल उष्मन, खाना पकाने, प्रशीतलन, जल परिष्करण तथा विद्युत ऊर्जा उत्पादन हेतु किया जा सकता है।
  • फोटो वोल्टायिक प्रणाली द्वारा सौर प्रकाश को बिजली में रूपान्तरित करके रोशनी प्राप्त की जा सकती है, प्रशीतलन का कार्य किया जा सकता है |
  • दूरभाष, टेलीविजन, रेडियो आदि चलाए जा सकते हैं, तथा पंखे व जल-पम्प आदि भी चलाए जा सकते हैं।

भारत सरकार द्वारा चलाई गई योजनाएं

जवाहर लाल नेहरू राष्ट्रीय सौर मिशन

    जवाहरलाल नेहरू राष्ट्रीय सौर मिशन योजना की शुरुआत 2009 में जलवायु परिवर्तन पर राष्ट्रीजय कार्य योजना के एक हिस्सेन के रूप में की गई। इस मिशन का लक्ष्य 2022 तक 20 हजार मेगावाट क्षमता वाली ग्रिड से जोड़ी जा सकने वाली सौर बिजली की स्थाेपना और 2 हजार मेगावाट के समतुल्या गैर-ग्रिड सौर संचालन के लिए नीतिगत कार्य योजना का विकास करना है। इसमें सौर तापीय तथा प्रकाशवोल्टीय दोनों तकनीकों के प्रयोग का अनुमोदन किया गया। इस मिशन का उद्देश्य सौर ऊर्जा के क्षेत्र में देश को वैश्विक नेता के रूप में स्थामपित करना है।
    मिशन का लक्ष्य
    मिशन के लक्ष्य इस प्रकार हैं –

  • 2022 तक 20 हजार मेगावाट क्षमता वाली-ग्रिड से जुड़ी सौर बिजली पैदा करना,
  • 2022 तक दो करोड़ सौर लाइट सहित 2 हजार मेगावाट क्षमता वाली गैर-ग्रिड सौर संचालन की स्थानपना
  • 2 करोड़ वर्गमीटर की सौर तापीय संग्राहक क्षेत्र की स्थाापना
  • देश में सौर उत्पागदन की क्षमता बढ़ाने वाली का अनुकूल परिस्थितियों का निर्माण और
  • 2022 तक ग्रिड समानता का लक्ष्या हासिल करने के लिए अनुसंधान और विकास के समर्थन और क्षमता विकास क्रियाओं का बढ़ावा शामिल है।

दीन दयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना—

    इस योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि और गैर-कृषि उपभोक्ताओं को विवेकपूर्ण तरीके से विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करना सुलभ बनाने के लिए कृषि और गैर–कृषि फीडर सुविधाओं को अलग–अलग किया जाएगा। इसके साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में वितरण और उप – पारेषण प्रणाली को मजबूत किया जाएगा जिसमें वितरण ट्रांसफार्मर, फीडर और उपभोक्ता्ओं के लिए मीटर लगाना सम्मिलित होगा।

उदय – उज्ज्वल डिस्कॉएम एश्यो्रेंस अथवा यूडीएवाई योजना

    बिजली मंत्रालय द्वारा नई योजना उज्ज्वल डिस्कॉमम एश्योवरेंस योजना या उदय नाम से प्रारंभ की गई है। बिजली, कोयला और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय हर भारतीय का जीवन रोशनी से जगमग करके उज्जवल भारत बनानें पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। उज्जवल भारत का उद्देश्य सभी को 24×7 बिजली प्रदान करना है। ईंधन, बिजली उत्पादन, संचरण, वितरण, बिजली की खपत से संबंधित जानकारी प्रदान की गयी है।
    उदय का लक्ष्या बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉयम) का वित्तीाय सुधार एवं उनका पुनरूत्था न करना और समस्यात का एक टिकाऊ और स्था‍यी समाधान भी सुनिश्चित करना है। उदय सभी लोगों के लिए 24 घंटे किफायती एवं सुविधाजनक बिजली सुनिश्चित करने के स्वीप्न( को साकार करने की दिशा में एक पथप्रदर्शक सुधार है। पिछले डेढ़ वर्षों के दौरान, जब बिजली क्षेत्र ने ईंधन आपूर्ति (दो दशकों में सर्वाधिक कोल उत्पाैदन) से लेकर उत्पाऔदन (अब तक का सबसे अधिक क्षमता संवर्धन) पारेषण (पारेषण लाइनों में अब तक की सबसे अधिक वृद्धि) और उपभोग (2.3 करोड़ से अधिक एलईडी बल्ब् वितरित किए गए) तक समस्तं मूल्यस श्रृंखला में ऐतिहासिक बेहतरी दर्ज कराई है, यह बिजली क्षेत्र की स्थिति को और अधिक बेहतर बनाने की दिशा में एक अन्य निर्णायक कदम है।

कार्यक्रम का लक्ष्य

    बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉधम) का वित्तीय सुधार एवं उनका पुनरूत्था न करना और समस्याज का एक टिकाऊ और स्थाियी समाधान भी सुनिश्चित करना है।

मुख्य पहल

    उदय योजना के तहत बिजली वितरण कंपनियों को आगामी दो-तीन वर्षों में उबारने हेतु निम्नलिखित चार पहलें अपनायी जाएंगी।
    1. बिजली वितरण कंपनियों की परिचालन क्षमता में सुधार।
    2. बिजली की लागत में कमी।
    3. वितरण कंपनियों की ब्याज लागत में कमी।
    4. राज्य वित्त के साथ समन्वय के माध्यम से वितरण कंपनियों पर वित्तीय अनुशासन लागू करना।

कार्यक्रम के फायदे

    • 24X7 सब के लिए बिजली
    • सभी गाँवों के लिए विद्युतीकरण
    • सक्षम उर्जा सुरक्षा
    • रोजगार के अवसर पैदा करने के लिए बिजली क्षेत्र में निवेश को पुनर्जीवित करनालगभग सभी दिस्कोम्स को 2-3 साल में लाभदायक स्थिति में लाना|
    • उदय दक्षता में सुधर कर वार्षिक 1.8 लाख करोड़ की बचत करना|

उदय योजना की मुख्य विशेषताएं

    • 30 सितंबर, 2015 की स्थिति के अनुसार वितरण कंपनियों का 75% ऋण राज्यों द्वारा दो वर्षों में अधिग्रहीत किया जाएगा।
    • यह अधिग्रहण वर्ष 2015-16 में 50% और 2016-17 में 25% होगा।
    • भारत सरकार द्वारा 2015-16 और 2016-17 वित्तीय वर्ष में संबंधित राज्यों की राजकोषीय घाटे की गणना में उदय योजना के तहत राज्यों द्वारा अधिग्रहीत ऋण शामिल नहीं किया जाएगा।
    • राज्यों द्वारा उचित सीमा तक वितरण कंपनियों को ऋण प्रदान करने वाले बैंकों/वित्तीय संस्थाओं हेतु एसडीएल बांडों समेत गैर-एसएलआर जारी किया जाएगा।
    • गौरतलब है कि वितरण कंपनियों के जिन ऋणों का अधिग्रहण राज्य द्वारा नहीं किया जाएगा, उन्हें वित्तीय संस्थान/बैंक द्वारा ऋण अथवा बांड में परिवर्तित कर दिया जाएगा।
    • बैंक /वित्तीय संस्थान इस ऋण/बांड पर अपने आधार दर के साथ 0.1% (बेस रेट प्लस 01%) से अधिक ब्याज दर नहीं लगाया जाएगा।
    • वैकल्पिक रूप से उपर्युक्त ऋण वितरण कंपनियों द्वारा बाजार में प्रचलित दरों पर ‘स्टेट गारंटीड डिस्कॉम बांड्स के रूप में पूर्ण या आंशिक रूप से जारी किए जा सकते हैं।
    • ये बाजार प्रचलित दरें बैंक आधार दर के साथ 01% (बैंक बेस रेट प्लस 01%) के बराबर या कम होंगी।
    • उल्लेखनीय है कि राज्यों द्वारा वितरण कंपनियों को भविष्य में होने वाली हानि का श्रेणीबद्ध ढंग से अधिग्रहण किया जाएगा।
    • यह अधिग्रहण इस प्रकार होगा-वर्ष 2017-18 में 2016-17 की हानि का 5%, 2018-19 में 2017-18 की हानि का 10% और 2019-20 में 2018-19 की हानि का 25%।
    • केंद्रीय विद्युत मंत्रालय से विचार विमर्श के बाद निश्चित अवधि के भीतर राज्य वितरण कंपनियां 1 अप्रैल, 2012 के बाद से बकाया ‘नवीकरणीय खरीद बाध्य’ (आर पी ओ) का अनुपालन करेंगी।
    • गौरतलब है कि उदय योजना को स्वीकार करने वाले और परिचालन लक्ष्यों के अनुरूप प्रदर्शन करने वाले राज्यों को विविध योजनाओं के माध्यम से अतिरिक्त/प्राथमिक वित्तीयन प्रदान किया जाएगा।
    • इन योजनाओं में शामिल हैं-दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना, समेकित बिजली विकास योजना, विद्युत क्षेत्र विकास कोष अथवा विद्युत मंत्रालय और नवीन एवं अक्षय ऊर्जा मंत्रालय की इसी तरह की अन्य योजनाएं।
    ऐसे राज्यों को अधिसूचित कीमतों पर कोयला आपूर्ति और उच्च क्षमता उपयोग के माध्यम से उपलब्धता के संबंध में एनटीपीसी और अन्य केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों से कम लागत की बिजली द्वारा सहयोग किया जाएगा।

ऊर्जा और महिलाओं का सशक्तीकरण
महिलाएँ एवं ऊर्जा

    महिलाएँ ग्रामीण ऊर्जा की प्रक्रिया का एक आवश्यक अंग है क्योंकि वे घरेलू उपयोग के लिए स्वच्छ एवं पर्याप्त जल, जानवरों के लिए चारा, कृषि कार्यों एवं अन्य महत्वपूर्ण सुविधाओं को जुटाने में लगी रहती हैं। महिलाओं का ऊर्जा से गहरा संबंध है।
    मूलभूत ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए महिलाओं एवं बच्चों को जलावन की लकड़ी जुटाने में काफी मेहनत करनी पड़ती है। उन स्थानों मे जहाँ जलावन की लकड़ी की उपलब्धता कम है, वहाँ लोगों के खान-पान की आदतों में भी बदलाव आता है, जिसका अंतिम असर पौष्टिकता पर पड़ता है। महिलाएँ घरेलू कार्यों में लगभग 6 घंटों तक का समय व्यतीत करतीं हैं और इस दौरान उनके बच्चे भी साथ होते हैं। पारंपरिक चूल्हे में जहाँ वायु संचार की उचित व्यवस्था नहीं होती और पर्याप्त मात्रा में बायोमास का प्रयोग नहीं होता, वहाँ उनके स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ता है और इससे सबसे अधिक महिलाएँ एवं कन्या शिशु हीं प्रभावित होती हैं।

क्या इससे बचने का कोई उपाय है?

    ऊर्जा प्रभावी धूँआ रहित चूल्हे एवं सौर ऊर्जा व बायो गैस जैसे स्वच्छ ईंधन का उपयोग इसका संभावित समाधान है जिसका अब प्रचलन बढ़ता जा रहा है।

महिलाओं को विशेष सुविधा

    भारतीय नवीकरणीय ऊर्जा विकास अभिकरण ने महिलाओं को ऊर्जा के नवीन एवं नवीकरणीय स्रोतों के उपयोग एवं प्रसार को बढ़ावा देने में सहायता देने का प्रस्ताव किया है।

नीतिगत सहायता

    महिलाओं को विशेष सुविधा प्रदान करते हुए भारतीय नवीकरणीय ऊर्जा विकास अभिकरण लिमिटेड (इरेडा) ने नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत के उपयोग एवं उसे बढ़ावा देने के लिए महिलाओं को प्रोत्साहन (इंसेंटिव) देने का प्रस्ताव किया है।

बालिका शिशु के फायदे के लिए

    नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने बालिका शिशु को अपनी पढ़ाई जारी रखने के लिए सौर लालटेन मुफ्त में देने का प्रस्ताव किया है। इसके लिए आवश्यक शर्त है –
    • वह गरीबी रेखा से नीचे के परिवार की स्कूल जाने वाली एक बच्ची हो
    • विशेष श्रेणी के राज्य व केन्द्र शासित प्रदेश के वैसे क्षेत्रों में निवास करती हों जहाँ बिजली नहीं पहुँची हो
    • वह कक्षा 9 से 12 के बीच पढ़ने वाली बालिका शिशु हो।

कुछ प्रश्न मेंस 2016 के लिए

1.भारत जैसे देश में ऊर्जा का विकास महिला सशक्तिकरण में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है | समालोचनात्मक विश्लेषण करे |
2.भारत सरकार द्वारा चलाई गई विभिन्न ऊर्जा योजनाएं भारत के समग्र विकास में सहायक है | चर्चा करे |
3.ऊर्जा के उत्पादक उपयोग हेतु विभिन्न प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल किया जाता है |कुछ प्रौद्योगिकी के बारे में चर्चा करे और बताएं कि वो ऊर्जा के उपयोग में कैसे सहायक है |

COMMENTS (1 Comment)

Abhimanyu May 23, 2018

Please transfer to these pdf files on YouTube. It's short and accurate answer.

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Exam Name Exam Date
IBPS PO, 2017 7,8,13,14 OCTOBER
UPSC MAINS 28 OCTOBER(5 DAYS)
CDS 19 june - 4 FEB 2018
NDA 22 APRIL 2018
UPSC PRE 2018 3 JUNE 2018
CAPF 12 AUG 2018
UPSC MAINS 2018 1 OCT 18(5 DAYS)


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