बेरोजगारी

  • Home
  • बेरोजगारी

बेरोजगारी

बेरोजगारी क्या है ?

  • यदि किसी सक्षम व्यक्ति को मांगने पर रोजगार नहीं मिलता है तो इस स्थिति को बेरोजगारी कहा जाता है. इसका यह अर्थ हुआ कि अनैच्छिक बेरोजगारी, बेरोजगारी है.यदि कोई व्यक्ति रोजगार की तलाश में नहीं है तो उसे बेरोजगारों की श्रेणी में सम्मिलित नहीं किया जाएगा.
  • सक्षमता के संदर्भ में न्यूनतम रूप से लोगों की आयु को देखा जाता है उनकी आयु कार्यशील उम्र से संबंधित होना चाहिए, भारत में NSSO और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर UNDP 15 से 59 वर्ष को कार्यशील उम्र मानता है.
  • यदि किसी राष्ट्र की जनसंख्या में कार्यशील उम्र से संबंधित लोगों की प्रधानता होती है तो इस स्थिति को डेमोग्राफिक डिविडेंड कहा जाता है.भारत में यही स्थिति है लेकिन कुशलता विकास पर ध्यान नहीं देना रोजगार में कमी आदि के कारण इसका ठीक से लाभ नहीं मिल पा रहा है.
  • बेरोजगारी के प्रकार
    1. चक्रीय बेरोजगारी

  • यह बेरोजगारी मुख्यतः पूंजीवादी बाजार आधारित अर्थव्यवस्थाओं में आर्थिक चक्रों के कारण उत्पन्न होती रहती है.समग्र मांग में कमी होना इसका मुख्य कारण होता है, इस बेरोजगारी को दूर करना अधिक चुनौतीपूर्ण नहीं होता है. मौद्रिक और राजकोषीय नीतियों के बेहतर समन्वय और मिश्रण के माध्यम से इसे दूर किया जा सकता है.
  • 2. घर्षणजनित बेरोजगारी
    ऐसा व्यक्ति जो एक रोजगार को छोड़कर दूसरे रोजगार में जाता है तो दोनों रोजगारों के बीच की अवधि में बेरोजगार हो सकता है या ऐसा हो कि नई टेक्नोलॉजी के प्रयोग के कारण एक व्यक्ति एक रोजगार से निकलकर या निकाल दिए जाने के बाद रोजगार की तलाश कर रहा है तलाश की इस अवधि में अस्थायी बेरोजगार हो सकता है. ऐसी अस्थायी स्वभाव की बेरोजगारी को हम घर्षणजनित बेरोजगारी कहते हैं

    3. संरचनात्मक बेरोजगारी
    इस बेरोजगारी का संबंध मांग से नहीं होता इसका संबंध आपूर्ति पक्ष से होता है. यह आपूर्ति पक्ष के विभिन्न कमजोरियों के कारण उत्पन्न होती है इस संबंध में इस के मुख्य दो कारण माने गए–

  • संबंधित राष्ट्र में पूंजीगत वस्तुओं तथा अन्य संसाधनों की कमी अर्थात लोगों में प्रयाप्त औद्योगीकरण का अभाव.
  • लोगों में कुशलताओं की कमीं.
  • यह बेरोजगारी तुलनात्मक रूप से अधिक चुनौतीपूर्ण है. इसे बचत, निवेश, पूंजी निर्माण, कुशलता विकास आदि को बढ़ावा देने वाली नीतियों को लागू कर धीरे-धीरे दीर्घ काल में कम किया जा सकता है.भारत में बेरोजगारी का मुख्य स्वरूप संरचनात्मक बेरोजगारी है.

    4. प्रच्छन्न बेरोजगारी
    ऐसी स्थिति जिसमें लोग बिना किसी उत्पादकता अथवा नकारात्मक उत्पादकता के साथ किसी कार्य में संलग्न रहते हैं.भारत के ग्रामीण प्रदेशों में कृषि क्षेत्र में यह बेरोजगारी मुख्य रुप से देखने को मिलती है. इसके पीछे दो मुख्य कारण है–

  • जनसंख्या का दबाव
  • वैकल्पिक रोजगार के अवसरों की कमी.
  • पशुपालन, कुटीर उद्योग, ग्रामोद्योग आदि को बढ़ावा देकर इस बेरोजगारी के प्रभाव को कम किया जा सकता है

    5. मौसमी बेरोजगारी
    मौसम आधारित व्यवसाय में मौसम में बदलाव के कारण यह बेरोजगारी अल्पकालिक रुप से उत्पन्न होती है,लेकिन यदि यह बार-बार होता है तो यह एक समस्या बन जाती है. भारतीय कृषि में इस बेरोजगारी को मुख्य रूप से देखा जा सकता है. भारतीय कृषि का एक बड़ा भाग वर्षा पर निर्भर है और इस निर्भरता से मौसमी बेरोजगारी का जन्म होता है.
    इस बेरोजगारी का समाधान करने के लिए सिंचाई सुविधाओं पर ध्यान देना जरूरी है इसके अलावा अन्य कृषि कार्य को बढ़ावा दिया जाना चाहिए.

    6. अल्प रोजगार
    अल्प रोजगार एक ऐसी स्थिति है जिसमें लोगों को योग्यता अनुसार कार्य नहीं मिल पाता है या पर्याप्त समय का कार्य नहीं मिलता.
    भारत में अल्प रोजगार भी एक बड़ी समस्या है

    COMMENTS (4 Comments)

    जगदीश मीना Sep 16, 2018

    बहुत ही शानदार

    Mukesh Kumar Aug 19, 2018

    👌 👌

    Zabir Aug 17, 2018

    .

    superiorafzal Aug 17, 2018

    बहुत अच्छी जानकारी

    LEAVE A COMMENT

    Search


    Exam Name Exam Date
    IBPS PO, 2017 7,8,13,14 OCTOBER
    UPSC MAINS 28 OCTOBER(5 DAYS)
    CDS 19 june - 4 FEB 2018
    NDA 22 APRIL 2018
    UPSC PRE 2018 3 JUNE 2018
    CAPF 12 AUG 2018
    UPSC MAINS 2018 1 OCT 18(5 DAYS)


    Subscribe to Posts via Email

    Enter your email address to subscribe to this blog and receive notifications of new posts by email.