मजदूरी संहिता विधेयक 2017

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मजदूरी संहिता विधेयक 2017

मजदूरी संहिता विधेयक 2017

    श्रम और रोजगार मंत्री द्वारा लोकसभा में द्वितीय राष्ट्रीय श्रम आयोग की अनुशंसाओं के अनुरूप ‘मजदूरी संहिता विधेयक 2017’ प्रस्तुत किया गया.

विधेयक के मुख्य बिंदु

  • यह मजदूरी भुगतान अधिनियम 1936, न्यूनतम मजदूरी अधिनियम 1948, बोनस भुगतान अधिनियम 1965 एवं समान पारिश्रमिक अधिनियम 1976 को प्रतिस्थापित कर मजदूरी से संबंधित कानूनों को समेकित करने का प्रयास करता है.
  • यह संहिता सरकारी प्रतिष्ठानों समेत किसी भी उद्योग, व्यापार, कारोबार, विनिर्माण या व्यवसाय पर लागू होगी.
  • मजदूरी के अंतर्गत वेतन भत्ता या मौद्रिक रूप में व्यक्त कोई भी अन्य घटक शामिल है. हालांकि इसमें कर्मचारियों को देय बोनस, कोई यात्रा भत्ता इत्यादि शामिल नहीं होंगे.
  • यह रेलवे, खान और तेल क्षेत्रों जैसे प्रतिष्ठानों के लिए मजदूरी से संबंधित निर्णय करने में केंद्रीय और राज्य क्षेत्र अधिकार में भेद करता है.
  • यह विधेयक किसी नियोक्ता द्वारा किए गए अपराधों जैसे देय मजदूरी से कम भुगतान करना या संहिता के किसी प्रावधान की अवहेलना करने पर अर्थ दंड का प्रावधान करता है.
  • विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों के लिए वैधानिक राष्ट्रीय न्यूनतम मजदूरी की अवधारणा शुरू की गई है. यह सुनिश्चित करेगी कि कोई भी राज्य सरकार इस विशेष क्षेत्र के लिए केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित ‘राष्ट्रीय न्यूनतम मजदूरी’ से कम ‘न्यूनतम मजदूरी’ नियत ना करें.
  • चेक , डिजिटल /इलेक्ट्रॉनिक प्रणाली के माध्यम से मजदूरी के भुगतान का प्रावधान किया गया है.
  • दावा करने वाले प्राधिकरण और न्यायिक फोरम के बीच अपीलीय प्राधिकरण का प्रावधान किया गया है.

मजदूरी संहिता विधेयक की आवश्यकता क्यों?

  • अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन रिपोर्ट 2010, में यह रेखांकित किया गया था कि एकीकृत मजदूरी कानून के अभाव में देश की आर्थिक संभावना, वांछित परिणाम प्रदान नहीं कर सकती.
  • श्रम कल्याण और सुधार, भारतीय संविधान की समवर्ती अनुसूची में निहित है. अब तक देश के विभिन्न क्षेत्रों में वैधानिक राष्ट्रीय न्यूनतम मजदूरी का अभाव था.
  • वर्तमान में, न्यूनतम मजदूरी अधिनियम के प्रावधान एवं मजदूरी भुगतान अधिनियम केवल अनुसूचित रोजगारों प्रतिष्ठानों तक ही सीमित है.

इस विधेयक का महत्व

  • यह इज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा देगा.
  • प्रस्तावित कानून का प्रयोजन एक ही नियोक्ता द्वारा मजदूरी से संबंधित मामलों में कर्मचारियों के बीच लिंग के आधार पर भेदभाव को समाप्त करना है.
  • यह श्रम कानून में स्पष्टता लाएगा एवं श्रमिकों के कल्याण एवं लाभों की मूल अवधारणा से समझौता किए बिना कानूनों की विविधता में कमी करेगा.
  • यह विधेयक कार्यशील वर्ग को अपने अधिकारों और उत्तर दायित्व से अवगत कराएगा और रोजगार के वृहत अवसरों हेतु विचार करने में सहायता करेगा.
  • प्रस्तावित कानून के प्रवर्तन में प्रौद्योगिकी के उपयोग से इसके प्रभावी प्रवर्तन के लिए पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित हो सकेगी.

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