विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (‘फेमा’) के संबंध में जारी अधिसूचना

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विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (‘फेमा’) के संबंध में जारी अधिसूचना

  • admin
  • November 11, 2017



प्रस्तावना

  • हाल ही में भारतीय रिज़र्व बैंक ने एक अधिसूचना जारी कर विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (‘फेमा’) (भारत के बाहर के किसी व्यक्ति द्वारा प्रतिभूति का आदान-प्रदान अथवा उसे जारी करना) में अब तक किये गए 93 संशोधनों को एक ही अधिसूचना के अंतर्गत लाकर विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम को सरल बना दिया है।
  • फेमा के मानदंडों को आसान बनाने से विदेशी निवेशकों के लिये देश में निवेश करना अपेक्षाकृत आसान हो जाएगा।

मुख्य बिंदु

  • यह अधिनियम वर्ष 1999 से प्रभाव में आया था। वर्ष 1999 से अब तक इसमें 93 संशोधन हो चुके हैं।
  • कोई भी व्यक्ति जो भारत में निवेश करना चाहता है, इस अधिसूचना के माध्यम से यह जानने में सक्षम होगा कि वह किस कंपनी में तथा कैसे निवेश कर सकता हैं।
  • जारी नई अधिसूचना के तहत विदेशी निवेशों पर बनाए गए निम्नलिखित दो नियमों को एक साथ जोड़ दिया गया है-
    • FEMA 20 : इसे भारतीय कंपनी में किये गए विदेशी निवेश अथवा पार्टनरशिप अथवा सीमित देयता भागीदारी के रुप में जाना जाता है।
    • FEMA 24 : किसी पार्टनरशिप फर्म में हुए निवेश को FEMA 24 कहा जाता है।

उद्देश्य
फेमा के मुख्य उद्देश्‍य हैं:

  • विदेशी व्यापार तथा भुगतानों को आसान बनाना
  • विदेशी मुद्रा बाजार का अनुरक्षण और संवर्धन करना।

फेमा क्या है?

  • आर्थिक सुधारों तथा उदारीकृत परिदृश्‍य के प्रकाश में फेरा को एक नए अधिनियम द्वारा प्रतिस्‍थापित किया गया था, इसी को विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) 1999 कहा जाता है।
  • यह अधिनियम भारत में निवासी किसी व्‍यक्ति के स्‍वामित्‍वाधीन या नियंत्रण में रहने वाली भारत के बाहर की सभी शाखाओं, कार्यालयों तथा प्राधिकरणों पर लागू होता है।
  • फेमा की शुरुआत एक निवेशक अनुकूल विधान के रूप में की गई थी परन्तु यह एक अर्थ में पूर्णतया सिविल विधान है क्योंकि इसके उल्‍लघंन में केवल मौद्रिक शास्तियों तथा अर्थदंड का भुगतान करना ही शामिल है।
  • इसके तहत किसी व्‍यक्ति को सिविल कारावास का दंड तभी दिया जा सकता है यदि वह नोटिस मिलने की तिथि से 90 दिन के भीतर निर्धारित अर्थदंड का भुगतान न करे परन्तु यह दंड भी उसे कारण बताओ नोटिस तथा वैयक्तिक सुनवाई की औपचारिकताओं के पश्‍चात् ही दिया जा सकता है।
  • फेमा को एक कठोर कानून (यानी फेरा) से उद्योग अनुकूल विधान अपनाने के लिये उपलब्ध कराई गई संक्रमण अवधि माना जा सकता है।
  • फेमा में केवल अधिकृत व्‍यक्तियों को ही विदेशी मुद्रा या विदेशी प्रतिभूति में लेनदेन करने की अनुमति दी गई है। अधिनियम के अंतर्गत, ऐसे अधिकृत व्‍यक्ति का अर्थ अधिकृत डीलर, मनी चेंजर, विदेशी बैंकिंग यूनिट या कोई अन्‍य व्‍यक्ति जिसे उसी समय रिजर्व बैंक द्वारा प्राधिकृत किया गया हो, से है।

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