GST

GST

BPSC MAINS SPECIAL (GST)

GST क्या है ?

    वस्तु एवं सेवा कर या जी एस टी एक व्यापक, बहु-स्तरीय, गंतव्य-आधारित अप्रत्यक्ष कर है, जो प्रत्येक मूल्य में जोड़ पर लगाया जाता है।

GST कैसे काम करेगी?

सख्त निर्देशों और प्रावधानों के बिना एक देशव्यापी कर सुधार काम नहीं कर सकता है। जीएसटी परिषद ने इस नए कर व्यवस्था को तीन श्रेणियों में विभाजित करके इसे लागू करने की एक विधि तैयार की है।
जीएसटी में 3 तरह के कर हैं :

  • सीजीएसटी: जहां केंद्र सरकार द्वारा राजस्व एकत्र किया जाएगा
  • एसजीएसटी: राज्य में बिक्री के लिए राज्य सरकारों द्वारा राजस्व एकत्र किया जाएगा
  • आईजीएसटी: जहां अंतरराज्यीय बिक्री के लिए केंद्र सरकार द्वारा राजस्व एकत्र किया जाएगा
  • ज्यादातर मामलों में, नए शासन के तहत कर संरचना निम्नानुसार होगी:

    GST में सम्मिलित कर

    GST क्यूँ ?

    टैक्स पर टैक्स की व्यवस्था समाप्त होगी (दोहरे कराधान की समस्या)

      अप्रत्यक्ष कर (Indirect Taxation System) व्यवस्था में कर-भार अंतिम उपभोक्ता को वहन करना पड़ता है, लेकिन कर का संग्रहण (Collection of Tax) व्यवसायियों द्वारा किया जाता है। व्यवसायी को ख़रीदे गए माल पर चुकाए गए कर की क्रेडिट (Input Credit) मिलती है जिसका उपयोग वह अपने कर के भुगतान में कर सकता है। इस व्यवस्था से कर केवल मूल्य संवर्धन (बिक्री – खरीद) या (Value Addition) पर ही लगता है। व्यवसायी उपभोक्ता से कर संग्रहित करता है और उसमें से अपनी इनपुट क्रेडिट (ख़रीदे गए माल पर चुकाए गए कर) को घटाकर बाकी कर सरकार को जमा करवाते है।
      लेकिन वर्तमान व्यवस्था में भारत में केंद्र सरकार द्वारा उत्पाद शुल्क(Excise Duty) व सेवा कर (Service Tax) और राज्य सरकार द्वारा बिक्री कर(VAT or Sales Tax) लगाया जाता है। इस कारण व्यवसायी को उत्पाद शुल्क और सेवा कर के भुगतान में बिक्री कर की इनपुट क्रेडिट (ख़रीदे गए माल पर चुकाए गए कर ) का उपयोग नहीं कर सकता और बिक्री कर के भुगतान में सेवा कर(सेवाओं पर चुकाए गए कर) और उत्पाद शुल्क (ख़रीदे गए माल पर लगे उत्पाद शुल्क) की क्रेडिट का उपयोग नहीं कर सकता। इस कारण वर्तमान व्यवस्था में टैक्स पर टैक्स लग जाता है, जिससे वस्तुओं और सेवाओं की कीमत बढ़ जाती है ।

    इसके अतिरिक्त GST के लाभ को यहाँ लिखे.

    GST के लाभ


    GST लागू करने में सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) का उपयोग ।

      देश में GST लागू करने के लिए केन्द्र और राज्य सरकारों ने मिलकर वस्तु और सेवा कर नेटवर्क (जीएसटीएन) बनाया है। यह लाभ रहति गैर-सरकारी कंपनी के रूप में पंजीकृत है ताकि केन्द्र तथा राज्य सरकारों टैक्स देने वाले लोगों और अन्य हितधारकों के लिए साझा सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) अवसंरचना उपलब्ध कराई जा सके। जीएसटीएन का मुख्य उद्देश्य करदाताओं को मानक और एक समान इंटरफेस प्रदान करना है और केन्द्र तथा राज्य/केन्द्रशासित सरकारों के साथ अवसंरचना और सेवा साझा करना है।
      जीएसटीएन साझा जीएसटी पोर्टल सहित व्यापक अत्याधुनिक आईटी अवसंरचना विकास का कार्य कर रही है। इससे पंजीकरण, रिटर्न तथा सभी करदाताओं को भुगतान और वैसे राज्यों के लिए बैंक एन्ड आईटी मॉड्यूल प्रदान करना है। इसमें रिटर्न प्रोसेसिंग, पंजीकरण, ऑडिट, एसेसमेंट, अपील शामिल हैं। जीएसटी के सफल प्रशासन के लिए सभी राज्य, लेखा-प्राधिकार, भारतीय रिजर्व बैंक तथा बैंक आईटी अवसंरचना तैयार कर रहे हैं।
      कागज रूप में रिटर्न नहीं भरे जा सकेंगे। सभी टैक्स भुगतान ऑनलाइन होंगे। एक-दूसरे से नहीं मिलने वाले रिटर्न ऑटो-जेनरेट होंगे और मानवीय हस्तक्षेप की कोई आवश्यकता नहीं होगी। अधिकतर रिटर्न सेल्फ एसेस होंगे।

    GST परिषद

      अनुच्छेद 279A के अंतर्गत राष्ट्रपति GST परिषद् का गठन करेंगे. GST परिषद के गठन में केंद्रीय वित्त मंत्री (जो परिषद के अध्यक्ष होंगे), राज्यमंत्री (राजस्व) और राज्य वित/कराधान मंत्री सम्मिलित होंगे.

    GST परिषद की भूमिका

      GST परिषद के गठन में केंद्रीय वित्त मंत्री (जो परिषद के अध्यक्ष होंगे), राज्यमंत्री (राजस्व) और राज्य वित/कराधान मंत्री सम्मिलित होंगे जो केंद्र और राज्यों को निम्न पर अपनी सिफारिशें करेंगे-
      1. केंद्र,राज्यों और स्थानीय निकायों द्वारा लगाये करों, उपकरों और अधिभारों पर जिन्हें GST के अंतर्गत सम्मिलित किया जा सकता है;
      2. वस्तुओं और सेवाओं पर जो GST के अधीन की जा सकती हैं या जिन्हें छूट दी जा सकती है;
      3. जिस तारीख को पेट्रोलियम कच्चे तेल, हाई स्पीड जल, मोटर स्प्रिट (आमतौर पर पेट्रोल के रूप में जाना जाता है), प्राकृतिक गैस और एविएशन टर्बाइन फ्यूल पर GST लगाया जाएगा;
      4. मॉडल GST कानून, करारोपण के सिद्धांत, IGST का संविभाजन और वे सिद्धांत जो आपूर्ति स्थल को निर्धारित करते हैं;
      5. कुल बिक्री की वह सीमारेखा जिसके नीचे वस्तुओं और सेवाओं को GST से छूट दी जा सकती है;
      6. वह दरें जिनमें GST बैंड सहित न्यूनतम तय दरें शामिल हैं;
      7. प्राकृतिक आपदा या आपदा के दौरान अतिरिक्त संसाधन जुटाने के लिए कोई विशेष दर या निर्धारित अवधि के लिए तय की गई दरें;
      8. उत्तर-पूर्वी राज्यों, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के संबंध में विशेष प्रावधान, तथा
      9. GST से संबंधित कोई अन्य मामला, जिसपर परिषद निर्णय ले सकती है

    GST परिषद के मार्गदर्शक

      GST परिषद की प्रक्रिया केंद्र और राज्यों के साथ-साथ राज्यों के बीच जी.एस.टी. के विभिन्न पहलुओं पर सामंजस्य बनाये रखना सुनिश्चित करेगी। संविधान (एक सी एकवां संशोधन) अधिनियम, 2016 में यह प्रावधान किया गया है कि GST परिषद, अपने विभिन्न कायों के निष्पादन में GST की सामंजस्य संरचना की जरूरत और वस्तुओं और सेवाओं के अनुकूल राष्ट्रीय बाजार के विकास के लिए निर्देशित की जायेगी।

    GST परिषद द्वारा लिए गए निर्णय

      संविधान का (एक सौ एकवां संशोधन) अधिनियम, 2016 प्रावधान करता है कि GST परिषद का प्रत्येक निर्णय बैठक में कम से कम कुल उपस्थित सदस्यों के 3/4 के बहुमत से मतदान करने के बाद लिया जाएगा। बैठक में कुल डाले गये मतों के 1/3 हिस्से का महत्व केंद्र सरकार के मतों का और बाकी सभी राज्य सरकारों का एक साथ मिलकर कुल डाले गये मतों का 2/3 हिस्से का महत्व होगा। GST परिषद के सदस्यों की कुल संख्या में से आधे के साथ बैठकों का कोरम गठित होगा ।

    GST व्यवस्था के अंर्तगत आयात पर कर

      वस्तुओं और सेवाओं के आयात को अंतर-राज्य आपूर्ति के रूप में माना जाएगा और देश में वस्तुओं और सेवाओं के आयात पर आई.जी.एस.टी. लगाया जाएगा। कर की घटना का गंतव्य सिद्धांत पालन करेंगे और एस.जी.एस.टी. के मामले में कर राजस्व उस उपभोग किया जा रहा है। वस्तुओं और सेवाओं के आयात पर पिछले चरण में भुगतान किया गया जी.एस.टी. कर पूरा और सारा (फुल एंड फाइनल) सेट-ऑफ (वापसी) पुनः प्राप्त हो जाएगा।

      GST के अंर्तगत निर्यात पर कर

        निर्यात को शून्य दर की आपूर्ति के रूप में माना जाएगा। वस्तुओं या सेवाओं के निर्यात पर कोई कर देय नहीं होगा, हालांकि इनपुट टैक्स क्रेडिट पर जमा सुविधा उपलब्ध रहेगी और उसे निर्यातकों को रिफण्ड कर दिया जाएगा।

      GST के बहार प्रमुख वस्तुएं


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    Exam Name Exam Date
    IBPS PO, 2017 7,8,13,14 OCTOBER
    UPSC MAINS 28 OCTOBER(5 DAYS)
    CDS 19 june - 4 FEB 2018
    NDA 22 APRIL 2018
    UPSC PRE 2018 3 JUNE 2018
    CAPF 12 AUG 2018
    UPSC MAINS 2018 1 OCT 18(5 DAYS)


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