NPA को लेकर RBI के नए नियम

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NPA को लेकर RBI के नए नियम

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  • February 20, 2018

NPA को लेकर RBI के नए नियम

प्रस्तावना

    अनर्जक परिसंपत्तिया NPA क्या है? — NPA मेंबढ़ोत्तरी के कारण—NPA का प्रभाव —NPA को दूर करने के उपाए —Click here
    वाणिज्यिक बैंक कारोबार करते समय विभिन्न परिसंपत्तियों में निवेश करते हैं तथा व्यक्तियों और कम्पनियों को कर्ज़ देते हैं। जाहिर है, कुछ धनराशि एनपीए (नॉन परफॉर्मिग एसेट्स) हो जाती है। दूसरे शब्दों में कहें तो किन्हीं वजहों से बैंकों की पूँजी फँस जाती है जिसका समय पर भुगतान संभव नहीं हो पाता है। भारतीय रिज़र्व बैंक की मानें तो सितम्बर 2017 के अन्त तक देश में अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों (ACB) का सकल एनपीए उनके कुल कर्ज़ का 10.2 प्रतिशत हो गया है।

NPA के संबंध में RBI के नये नियम

NPA को लेकर RBI के नए नियम निम्नलिखित है —

  • बैंक अब किसी भी हालत में दबाव ग्रस्त कर्ज को एनपीए में डालने और वसूली के लिये इंसॉल्वेंसी एंड बैंक्रप्सी कोड (आइबीसी) के तहत कार्रवाई को टाल नहीं सकेंगे।
  • केंद्रीय बैंक (भारतीय रिज़र्व बैंक) ने इस संबंध में नए दिशानिर्देश जारी किये हैं।
  • सरकार ने अपने इस कदम को डिफॉल्टरों के लिये चेतावनी करार दिया है।
  • भारतीय रिज़र्व बैंक के नए ढाँचे का प्रस्ताव एनपीए मान्यता चक्र को तेज़ कर देगा, लेकिन डूबे हुए कर्ज़ के झमेले पर ध्यान देने की ज़रूरत है।
  • इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं है कि रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया अपने प्रस्तावित ढाँचे को सरल बनाने के लिये प्रयास कर रहा है, जिसकी वज़ह से डूबे कर्ज़ फिर से सामने आ रहे हैं। इस प्रक्रिया को पुनर्गठित करते हुए सभी पुरानी योजनाओं को रद्द कर दिया जाएगा।
  • दो साल पहले आरबीआई की पहली संपत्ति गुणवत्ता समीक्षा (AQR) के बाद, सरकारी बैंकों ने तेज़ गिरावट की सूचना दी थी और वित्तीय वर्ष 2016 में इस प्रणाली में 2.7 लाख करोड़ रुपए के डूबे कर्ज़ जोड़े गए थे। इससे लगा था कि सबसे बुरी स्थिति खत्म हो गई है, लेकिन डूबे ऋण बढ़ोतरी में कमी अस्थायी साबित हुई है – चालू वित्त वर्ष के पहले 9 महीनों में ही लगभग 1.7 लाख करोड़ एनपीए जोड़े गए थे।
  • जाहिर है, विभिन्न पुनर्गठन योजनाओं की आड़ में बैंकों द्वारा कार्पेट के तहत एनपीए का एक महत्त्वपूर्ण हिस्सा तेज़ी से निकल चुका था।
  • भारतीय रिज़र्व बैंक ने CDR, SDR, S4A या 5/25 के तहत बैंकों की बही में अपक्षय को खत्म करने के लिये सही कदम उठाए हैं और नए ढाँचे के तहत उन्हें स्थापित कर दिया है।
  • बैंकों को अब खाते पर प्रस्ताव प्रक्रिया शुरू करनी होगी जैसे ही यह संघ के भीतर किसी भी बैंक द्वारा SMA-0 (जिसमें भुगतान 1-30 दिनों से अतिदेय हैं) खाते के रूप में वर्गीकृत होता है।
  • रिजर्व बैंक ने फँसे कर्ज़ों के समाधान के लिये वर्तमान में चल रहे आधा दर्जन नियम खत्म कर दिये हैं।
  • अब किसी कर्ज़डिफॉल्ट के मामले में बैंकों को 180 दिन के भीतर उसका समाधान निकालना होगा। ऐसा नहीं होने की स्थिति में उस खाते को दिवालिया प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ाना होगा।
  • नए नियम के तहत 2,000 करोड़ रुपये या इससे ज्यादा के लोन डिफॉल्ट के मामलों में बैंक अधिकारियों को 180 दिन के भीतर समाधान की योजना तैयार करनी होगी। ऐसा नहीं होने पर उसे दिवालिया प्रक्रिया में ले जाना होगा।
  • नियम का पालन नहीं कर पाने वाले बैंकों को जुर्माना भी भरना पड़ेगा।

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CDS 19 june - 4 FEB 2018
NDA 22 APRIL 2018
UPSC PRE 2018 3 JUNE 2018
CAPF 12 AUG 2018
UPSC MAINS 2018 1 OCT 18(5 DAYS)


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