प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान

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प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान

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  • November 28, 2016

प्रस्तावना
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने यूनिसेफ के सहयोग से मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, जो भारत की सदियों पुरानी चुनौती है में सुधार लाने के उद्देश्य के लिए एक बहुत ही महत्वपूर्ण योजना प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान का शुभारंभ किया है | इस अभियान के अन्तर्गत देश भर में गर्भवती महिलाओं की एक बड़ी संख्या को प्रसव पूर्व देखभाल प्रदान करने की योजना हैं |भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में जहाँ डॉक्टरों और स्वास्थ्य पेशेवरों का अभाव हैं बहुत सारे उच्च जोखिम गर्भावस्था की स्थिति का पता ही नही चल पाता हैं |

प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान
• प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान भारत सरकार की एक नई पहल है, जिसके तहत प्रत्येक माह की निश्चित नवीं तारीख को सभी गर्भवती महिलाओं को व्यापक और गुणवत्तायुक्त प्रसव पूर्व देखभाल प्रदान करना सुनिश्चित किया गया है।
• इस अभियान के तहत गर्भवती महिलाओं को सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर उनकी गर्भावस्था के दूसरी और तीसरी तिमाही की अवधि (गर्भावस्था के 4 महीने के बाद) के दौरान प्रसव पूर्व देखभाल सेवाओं का न्यूनतम पैकेज प्रदान किया जाएगा।
• इस कार्यक्रम की प्रमुख विशेषता यह हैं, कि प्रसव पूर्व जांच सेवाएं ओबीजीवाई विशेषज्ञों/चिकित्सा अधिकारियों द्वारा उपलब्ध करायी जाएगी।
• निजी क्षेत्र के विशेषज्ञों/चिकित्सकों को हर महीने की नवीं तारीख को उनके जिलों में सरकारी चिकित्सकों के प्रयासों के साथ स्वैच्छिक सेवाएं प्रदान करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा हैं।
• इस कार्यक्रम की शुरुआत इस आधार पर की गयी है, कि यदि भारत में हर एक गर्भवती महिला का चिकित्सा अधिकारी द्वारा परीक्षण एवं पीएमएसएमए के दौरान उचित तरीकें से कम से कम एक बार जांच की जाएँ तथा इस अभियान का उचित पालन किया जाएँ, तो यह अभियान हमारे देश में होने वाली मातृ मृत्यु की संख्या को कम करने में महत्वपूर्ण एवं निर्णायक भूमिका निभा सकता हैं।

पीएमएसएमए के उद्देश्य
प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान, प्रजनन मातृ नवजात शिशु एवं किशोर स्वास्थ्य (आरएमएनसीएच + A) रणनीति के तहत निदान तथा परामर्श सेवाओं सहित गुणवत्तायुक्त प्रसव पूर्व देखभाल की कवरेज़ (एएनसी) के लिये परिकल्पना की गयी है।
इस कार्यक्रम के निम्नलिखित उद्देश्य हैं:
• चिकित्सकों/विशेषज्ञों द्वारा दूसरी या तीसरी तिमाही की सभी गर्भवती महिलाओं को कम से कम एक प्रसव पूर्व जांच सुनिश्चित करना हैं।
• प्रसव पूर्व जाँच के दौरान देखभाल की गुणवत्ता सुधारना, जिसमें निम्नलिखित सेवाएं शामिल हैं:

  • सभी उपयुक्त नैदानिक सेवाएं।
  • उपयुक्त नैदानिक स्थितियों के लिए स्क्रीनिंग।
  • कोई भी नैदानिक स्थितियां जैसे कि रक्ताल्पता, गर्भावस्था प्रेरित उच्च रक्तचाप, गर्भावधि मधुमेह आदि का उचित प्रबंधन।
  • उचित परामर्श सेवाएं एवं सेवाओं का उचित प्रलेखन रखना।
  • उन गर्भवती महिलाओं को, जो किसी भी कारण से अपनी प्रसव पूर्व जाँच नहीं करा पायी, उन्हें अतिरिक्त अवसर प्रदान करना।
  • प्रसूति/चिकित्सा के इतिहास और मौजूदा नैदानिक स्थिति के आधार पर उच्च ज़ोखिम गर्भधारण की पहचान और लाइन-सूची करना।
  • हर गर्भवती महिला को विशेषत रूप से जिनकी पहचान किसी भी ज़ोखिम कारक या सहरुग्णता स्थिति में की गयी हैं, उनके लिए उचित जन्म योजना और जटिलता की तैयारी करना।
  • कुपोषण से पीड़ित महिलाओं में रोग का जल्दी पता लगाने, पर्याप्त और उचित प्रबंधन पर विशेष ज़ोर देना। किशोर और जल्दी गर्भधारण पर विशेष ध्यान देना, क्योंकि इन गर्भधारणों में अतिरिक्त एवं विशेष देखभाल की ज़रूरत होती है।
  • • सतत विकास लक्ष्यों के लिए मातृ मृत्यु दर का लक्ष्य 109 है ,जिसे भारत को अभी भी हासिल करना हैं |इस अभियान का एक उद्देश्य देश को शिशु मृत्यु दर / मातृ मृत्यु दर में सतत विकास लक्ष्यों को हासिल करने में मदद करना हैं |

    पीएमएसएमए की मुख्य विशेषताएं।
    • प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (पीएमएसएमए) देश में तीन करोड़ से अधिक गर्भवती महिलाओं को प्रसव पूर्व देखभाल की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए शुरू किया गया है।
    • इस अभियान के तहत लाभार्थियों को हर महीने की नवीं तारीख़ को प्रसव पूर्व देखभाल सेवाओं (जांच और दवाओं सहित) का न्यूनतम पैकेज प्रदान किया जाएगा। यदि किसी माह में नवीं तारीख को रविवार या राजकीय अवकाश होने की स्थिति में अगले कार्य दिवस पर यह दिवस आयोजित किया जाएगा।
    • इन सेवाओं को स्वास्थ्य सुविधा/आउटरीच पर नियमित एएनसी के अतिरिक्त प्रदान किया जाएगा।
    • इन सेवाओं को शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में निर्धारित सार्वजनिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी/सीएचसी,डीएच/शहरी स्वास्थ्य केंद्रों आदि) पर उपलब्ध कराया जाएगा।
    • जब कि इसका लक्ष्य सभी गर्भवती महिलाओं तक पहुंचना है, पर विशेष रूप से यह प्रयास होगा कि वे महिलाएं जिन्होंने एएनसी के लिए रजिस्टर नहीं किया है, तथा जिन्होंने रजिस्टर किया है, लेकिन एएनसी सेवाओं का लाभ नहीं उठाया है, एवं उच्च ज़ोखिम गर्भवती महिलाओं तक पहुंचें।
    • आवश्यक रूप से, ये सेवाएं ओबीजीवाई विशेषज्ञों/चिकित्सकों द्वारा उपलब्ध करायी जाएगी।
    • निजी क्षेत्र के ओबीजीवाई विशेषज्ञों/चिकित्सकों को, जहां सरकारी क्षेत्र के चिकित्सक उपलब्ध या पर्याप्त नहीं हैं, वहां सार्वजनिक स्वास्थ्य केंद्रों में स्वैच्छिक सेवाएं प्रदान करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
    • एकल खिड़की प्रणाली के सिद्धांतों का उपयोग करते हुए, यह सुनिश्चित किया गया है, कि पीएमएसएमए क्लीनिक में आने वाली सभी गर्भवती महिलाओं को जांच का न्यूनतम पैकेज (गर्भावस्था की दूसरी तिमाही के दौरान अल्ट्रासाउंड सहित) तथा दवाएं जैसे कि आइएफए सप्लीमेंट, कैल्शियम सप्लीमेंट आदि प्रदान की जाएगी।
    • गर्भवती महिलाओं को मातृ एवं बाल संरक्षण कार्ड तथा सुरक्षित मातृत्व पुस्तिकाएं दी जाएगी।

    चुनौतियां

  • सतत विकास लक्ष्यों के लिए मातृ मृत्यु दर का लक्ष्य 109 है ,जिसे भारत को अभी भी हासिल करना हैं |इस अभियान का एक उद्देश्य देश को शिशु मृत्यु दर / मातृ मृत्यु दर में सतत विकास लक्ष्यों को हासिल करने में मदद करना हैं |
  • ग्राम सभा सामाजिक संगठनों, नागरिक समाज की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है।सरकार की सबसे बड़ी चुनौती यह सुनिश्चित करना हैं कि लोक स्वास्थ्य केन्द्रों और सरकारी अस्पतालों में पर्याप्त कर्मचारी उपलब्ध हैं।
  • इस योजना की सफलता के लिए कुछ अधिक विज्ञापन और एक समर्थन प्रणाली कि आवश्यकता हैं |
  • ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष रूप से बुनियादी ढांचे और स्वास्थ्य पेशेवरों की कमी है।वर्तमान में प्रत्येक 2000 व्यक्ति पर 1 डॉक्टर उपलब्ध हैं, जबकि WHO का मानना हैं कि प्रत्येक 1000 व्यक्ति पर एक डॉक्टर होने चाहिए |
  • ग्रामीण क्षेत्रो में बिजली कि उपलब्धता सुनिश्चित करना भी एक महत्वपूर्ण चुनौती हैं | बिजली की आवश्यकता जांच के लिए पड़ती हैं |अस्पताल की जीर्ण स्थिति , मोबाइल एम्बुलेंस का अभाव भी एक बड़ी समस्या हैं |
  • भारत में बहुत सारी कामकाजी महिलाएं हैं जो काफी उम्र में गर्भधारण करती हैं जिससे उच्च जोखिम गर्भावस्था की चुनौती पैदा हो रही हैं |
  • ग्रामीण क्षेत्रों में जमीनी स्तर के संगठन बनाने के लिए और जमीनी स्तर के संगठनों के सक्रिय होने के लिए प्रोत्साहित करने की जरूरत हैं |ग्रामीण स्वास्थ्य विशेषज्ञों और भारत में बुनियादी सुविधाओं में 83% कमी नहीं है। गांवों में सामाजिक कार्यकर्ताओं प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।
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