कृषि के प्रकार Types of Agriculture

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कृषि के प्रकार Types of Agriculture



भारतीय कृषि को मुख्य रूप से तीन भागों में विभाजित किया गया है:

स्थानांतरण कृषि

  • कृषि की इस पद्धति के तहत किसान अपने परिवार की खाद्य आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए कृषि करता है। यदि अपने परिवार की आवश्यकताओं की पूर्ति के बाद खाद्यान्न बच जाता है, तो उसका उपयोग अन्य वस्तुओं के लेन-देन में किया जाता है।
  • स्थानांतरण कृषि में क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था लगभग स्थायी होती है और उसका आधार पूर्णतया ग्रामीण उत्पादन ही होता है।
  • इस प्रकार कृषि के लिए भूमि का निर्माण अधिकांशतः जंगलों में आग लगाकर किया जाता है। इस प्रकार की कृषि का चक्र चार से आठ वर्ष तक का होता है, कभी-कभी यह पांच से पन्द्रह वर्ष का भी होता है।
  • भारत के विभिन्न क्षेत्रों में स्थानांतरण कृषि को विविध नामों से पुकारा जाता है, यथा- असम में झूम, केरल में पोणम, आंध्र प्रदेश और ओडीशा में पोडू तथा मध्य प्रदेश में बीवर, मशान, पॅण्डा और बीरा।
  • इस प्रकार की कृषि मुख्यतः असम, नागालैंड, मेघालय, मणिपुर, त्रिपुरा, मिजोरम, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, ओडीशा आदि के वन क्षेत्र में की जाती है। इसके अंतर्गत शुष्क धान, गेहूं, मक्का, चोरे ज्वार, तम्बाकू और गन्ना मुख्यतः उत्पादित होते हैं।

स्थानबद्ध कृषि

  • कृषि की इस पद्धति के तहत किसी एक स्थायी और निश्चित निवास स्थान पर रहने वाला किसान और उसका परिवार मिल-जुलकर कृषि-कार्य करता है। इस प्रकार की कृषि में किसान फसलों में परिवर्तन करता है और वह भूमि तथा फसलों की अपेक्षाकृत अधिक देखरेख करता है।
  • भारत के अधिकांश कृषक कृषि की इसी पद्धति को अपनाते हैं और इसके लिए बैल और भैस जैसे पशु तथा हलों (लकड़ी अथवा लोहे का हल) का उपयोग करते हैं।

पूंजी आधारित कृषि

  • कृषि की यह पद्धति उन क्षेत्रों में अपनायी जा रही है, जहां कृषि के लिए पूर्णतया मशीनों की आवश्यकता होती है। इस पद्धति में पूंजी का अधिकाधिक व्यय होता है, यद्यपि कृषि से आय भी अधिक होती है। भारत में इस प्रकार की कृषि अभी बहुत ही न्यून क्षेत्रों में होती है। बागवानी कृषि के अंतर्गत ऐसे क्षेत्रों की खोज अभी जारी है।
  • फसल ऋतुएं

      भारत विविधताओं का देश है। यहां मौसम भी परिवर्तित होता रहता है और विविध ऋतुओं में विविध प्रकार की फसलें उत्पादित होती हैं। यहां मुख्य रूप से तीन प्रकार की फसली ऋतुएं होती हैं-

    खरीफ या वर्षा ऋतु की फसल

      दक्षिण-पश्चिमी मानसून के भारत में आने के समय के प्रारंभ होने पर मई से जुलाई तक बोयी जाती है और इसकी समाप्ति पर सितंबर से लेकर अक्टूबर-नवम्बर तक काटी जाती है। इस ऋतु की प्रमुख फसलें हैं- ज्वार, बाजरा, धान, तम्बाकू आदि।

    रबी या शीत ऋतु की फसल

    • रबी या शीत ऋतु की फसलें विविधतापूर्ण जलवायु में होती है। बीज के अंकुरण व प्रारंभिक वृद्धि के लिए ठण्डी जलवायु व अल्प प्रकाश काल की आवश्यकता होती है, जबकि पकने के लिए अधिक तापमान एवं दीर्घ प्रकाश काल की आवश्यकता होती है।
    • यह फसल शीत काल के प्रारंभिक दिनों में अक्टूबर से दिसंबर तक बोयी जाती है और फरवरी से अप्रैल तक तथा कहीं-कहीं मई तक काटी जाती हैं। इसकी प्रमुख फसलें हैं- गेहूं, जौ, मटर, चना, सरसों, आलू, बरसीम, मसूर, अरहर आदि।

    जायद

    • खरीफ और रबी फसलों के उत्पादन के अलावा पूरे वर्ष में कृत्रिम सिंचाई की व्यवस्था से कुछ क्षेत्रों में जायद फसलों की कृषि भी की जाती है। जायद फसल को दो श्रेणी में रखा जाता है- जायद खरीफ और जायद रबी।
    • जायद खरीफ फसल वर्षा ऋतु के अंतिम दिनों में अगस्त से सितंबर तक बोयी जाती है और फसलों की कटाई दिसंबर से जनवरी तक होती है। इसकी प्रमुख फसलें हैं- चावल, ज्वार, सरसों, तिलहन, कपास आदि।
    • जायद रबी फसलों का बीज फरवरी-मार्च महीने में बोया जाता है जबकि इनकी कटाई अप्रैल-मई महीने में की जाती है। इसकी प्रमुख फसलें हैं- खरबूजा, तरबूज, ककड़ी, ज्चार, मूंग, लोबिया, पत्तीदार सब्जियां आदि।

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    Exam Name Exam Date
    IBPS PO, 2017 7,8,13,14 OCTOBER
    UPSC MAINS 28 OCTOBER(5 DAYS)
    CDS 19 june - 4 FEB 2018
    NDA 22 APRIL 2018
    UPSC PRE 2018 3 JUNE 2018
    CAPF 12 AUG 2018
    UPSC MAINS 2018 1 OCT 18(5 DAYS)


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