ब्रिटिश शासन के दौरान भारत में अकाल

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ब्रिटिश शासन के दौरान भारत में अकाल

  • admin
  • November 27, 2016

ब्रिटिश शासन के दौरान भारत में अकाल की क्या स्थिति थी और ब्रिटिश शासन के द्वारा इससे लड़ने के लिए कौन – कौन से कदम उठाए गए ?
प्रस्तावना
ब्रिटिश शासन के दौरान भारत में जीवन यापन का मुख्य साधन खेती ही था ,और यह मुख्यतः अनिश्चित वर्षा पर निर्भर था |1757 से 1947 के बीच भारत में 9 बड़े अकाल पड़े —

  • 1769 -70 में ,जिसमे बंगाल,बिहार एवं ओडिसा की एक तिहाई आबादी नष्ट हो गई |
  • 1837 -38 में ,जिसमे समस्त उत्तरी भारत अकालग्रस्त हुआ, जिसमे 8 लाख व्यक्ति मरे |
  • 1861 में पुनः उत्तरी भारत में अकाल पड़ा जिसमे भरी संख्या में जान मॉल की हानि हुई |
  • 1866 में ओडिशा में अकाल पड़ा जिसमे 10 लाख लोग मारे गए |
  • इसी तरह 1868 -69 में राजपुताना और बुंदेलखंड में ,1873 74 में बंगाल बिहार में , व 1876 में संपूर्ण भारत में अकाल पड़ा |
  • कैम्पबेल समिति
    1866 में ओडिसा अकाल के बाद सर जॉर्ज कैम्पबेल की अध्यक्षता में एक समिति नियुक्त की गई ,जिसकी रिपोर्ट में 1880 के राजकीय आयोग (रॉयल कमीशन ) की कुछ सिफारिशों को प्रत्याशित किया गया था |
    अकाल आयोग
    कुछ प्रमुख अकाल आयोग का वर्णन निम्नलिखित है —
    स्ट्रेची आयोग
    सन 1880 में वायसराय लार्ड लिटन द्वारा रिचर्ड स्ट्रेची की अध्यक्षता में एक आयोग नियुक्त किया गया जिसे प्रथम अकाल आयोग भी कहते है |इस आयोग की प्रमुख सिफारिशें निम्नलिखित थी —-

  • प्रतिवेदन में सर्वप्रथम यह मौलिक सिद्धान्त निर्धारित किया गया कि अकाल के समय पीड़ितों कि सहायता देना सरकार का कर्तव्य है |
  • सहायता व्यय का मुख्य भार अकाल पीड़ित क्षेत्र कि स्थानीय सरकार को उठाना चाहिए और केंद्रीय सरकार केवल स्थानीय श्रोतों में योगदान देने का काम करे |
  • सहायता का वितरण गैर सरकारी प्रतिनिधि संस्थाओं के माध्यम से हो |
  • प्रतिवेदन में सिफारिश की गई कि अकाल सहायता एवं बीमा कोष की स्थापना के लिए प्रतिवर्ष 1.5 करोड़ रुपए अलग कर दिया जाया करे जिससे अकाल के समय आवश्यकता पड़ने पर धन लिए जा सके | सरकार ने आयोग की सिफारिशें स्वीकार कर ली और 1883 में अकाल संहिता निश्चित की गई |

  • अकाल संहिता

    स्ट्रेची आयोग की सिफारिशों के आधार पर 1883 में अकाल संहिता तैयार की गई | इसमें साधारण अवस्था में बचाव और राहत कार्यों में आरम्भ होने की स्थिति में सुझाव दिए गए थे | इसमें अकाल ग्रस्त जिला घोसित करने से लेकर अन्य सभी अधिकारियों के कर्तव्यों की सूचि दी गई थी |

    लॉयल आयोग
    1897 में वायसराय लार्ड एल्गिन II ने सर जेम्स लॉयल की अध्यक्षता में इस आयोग की स्थापना की |सर जेम्स लॉयल पंजाब के उप गवर्नर थे | इस आयोग ने स्ट्रेची आयोग द्वारा निर्धारित सिद्धान्तों का समर्थन किया |
    मैकडोनाल्ड आयोग
    1900 में वायसराय लार्ड कर्जन ने सर एंटोनी मैकडोनाल्ड की अध्यक्षता में तृतीय अकाल आयोग की स्थापना की ,जिसने 1901 में अपनी रिपोर्ट दी ,जिसकी मुख्य बातें निम्नलिखित हैं–

  • इसने प्रथम आयोग के सिफारिशों का समर्थन किया और यह सिफारिश की कि सहायता कार्य वाले क्षेत्रों के लिए सहायता आयुक्त या दुर्भिक्ष आयुक्त की नियुक्ति की जाए तथा दूरस्थ क्षेत्रों में केंद्र की ओर से कार्य की व्यवस्था करने की अपेक्षा सार्वजनिक हिट के स्थानीय कार्यों में अकाल पीड़ितों को लगातार वस्त्र वितरण किया जाए |
  • अकाल सहायता कार्य में गैर सरकारी संस्थाओं का अधिकाधिक सहयोग लिया जाए ,कृषि बैंक खोले जाए ,खेती के विकसित तरीके अपनाए जाए और सिंचाई सुविधाओं का विकास किया जाए |


  • COMMENTS (1 Comment)

    Sanjay Ranu Singh Nov 27, 2016

    dhanyabad sir

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    Exam Name Exam Date
    IBPS PO, 2017 7,8,13,14 OCTOBER
    UPSC MAINS 28 OCTOBER(5 DAYS)
    CDS 19 june - 4 FEB 2018
    NDA 22 APRIL 2018
    UPSC PRE 2018 3 JUNE 2018
    CAPF 12 AUG 2018
    UPSC MAINS 2018 1 OCT 18(5 DAYS)


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