सरोगेसी (विनियमन) विधेयक, 2016

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सरोगेसी (विनियमन) विधेयक, 2016

प्रस्तावना
केन्द्रीय कैबिनेट ने सरोगेसी नियमन विधेयक 2016 को मंजूरी दे दी है। इसके तहत भारतीय नागरिकों को सरोगेसी का अधिकार होगा, लेकिन यह अधिकार एनआरआई और ओसीआई होल्डर के पास नहीं होगा। सरोगेसी विधेयक इसलिए लाया गया है, क्योंकि भारत लोगों के सरोगेसी हब बन गया था और अनैतिक सरोगेसी की घटनाएं सामने आने लगी थी ।
सरोगेसी बिल के प्रमुख प्रावधान

  • केंद्र में नेशनल सरोगेसी बोर्ड, राज्य और केंद्र शासित प्रदेश स्तर तक स्टेट सरोगेसी बोर्ड का गठन किया जाएगा। बिल कमर्शियल सरोगेसी पर रोक लगाने और निःसंतान दंपती को नीतिपरक सरोगेसी की इजाजत देने के लिए लाया गया है।
  • सिंगल पैरंट्स, होमोसेक्सुअल कपल, लिव-इन में रहने वालों को सरोगेसी की इजाजत नहीं दी जाएगी।सरोगेसी के लिए दंपति को कम से कम दो साल शादीशुदा होना जरूरी है।
  • सरकार इस बिल के जरिए देश में सरोगेसी को रेग्यूलेट करने के लिए एक नया कानूनी ढांचा तैयार करना चाहती है। ड्राफ्ट बिल में एक बोर्ड के गठन का प्रस्ताव है जो क्लिनिक को रेग्यूलेट और जांच करेगी। ड्राफ्ट बिल में कमर्शियल सरोगेसी पर रोक लगाने का प्रावधान शामिल किया गया है। सिर्फ उन्हीं मामलों में सरोगेसी को मंजूरी दी जाएगी, जिसमें इनफर्टिलिटी को साबित किया जाएगा।
  • यह प्रस्तावित कानून जम्मू-कश्मीर राज्य को छोड़कर पूरे भारत पर लागू होगा।
  • केवल रिश्तेदार महिला ही सरोगेसी के जरिए मां बन सकेगी|
  • मानव भ्रूण और युग्मकों की खरीद-बिक्री सहित वाणिज्यिक सरोगेसी पर निषेध होगा, लेकिन कुछ खास उद्देश्यों के लिए निश्चित शर्तों के साथ जरूरतमंद बांझ दंपतियों के लिए नैतिक सरोगेसी की अनुमति दी जाएगी।
  • सरोगेट माता और सरोगेसी से उत्पन्न बच्चों के अधिकार भी सुरक्षित होंगे।
  • सरोगेसी क्या है?
    सरोगेसी एक महिला और एक दंपति के बीच का एक एग्रीमेंट है, जो अपना खुद का बच्चा चाहता है। सामान्य शब्दों में सरोगेसी का मतलब है कि बच्चे के जन्म तक एक महिला की ‘किराए की कोख’। आमतौर पर सरोगेसी की मदद तब ली जाती है जब किसी दंपति को बच्चे को जन्म् देने में कठिनाई आ रही हो। बार-बार गर्भपत हो रहा हो या फिर बार-बार आईवीएफ तकनीक फेल हो रही है, जो महिला किसी और दंपति के बच्चे को अपनी कोख से जन्मी देने को तैयार हो जाती है उसे ‘सरोगेट मदर’ कहा जाता है।

    सरोगेसी कुछ विशेष एजेंसी द्वारा उपलब्ध करवाई जाती है। इन एजेंजिस को आर्ट क्लीनिक कहा जाता है, जो कि इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च की गाइडलाइंस फॉलो करती है। सरोगेसी का एक एग्रीमेंट बनवाया जाता है, जिसे दो अजनबियों से हस्ताक्षर करवाएं जाते हैं जो कभी नहीं मिले। सरोगेट परिवार का सदस्य या दोस्त भी हो सकता है।
    सरोगेसी के लिए भारत पॉपुलर क्यों है ?
    भारत में किराए की कोख लेने का खर्चा यानी सरोगेसी का खर्चा अन्य देशों से कई गुना कम है और साथ ही भारत में ऐसी बहुत सी महिलाएं उपलब्ध हैं, जो सरोगेट मदर बनने को आसानी से तैयार हो जाती हैं। गर्भवती होने से लेकर डिलीवरी तक महिलाओं की अच्छी तरह से देखभाल तो होती ही है साथ ही उन्हें अच्छी खासी रकम भी दी जाती है।

    लॉ कमीशन के मुताबिक सरोगेसी को लेकर विदेशी दंपत्तियों के लिए भारत एक पसंदीदा देश बन चुका है। डिपार्टमेन्ट ऑफ हेल्थ रिसर्च को भेजे गए दो स्वतंत्र अध्ययनों के मुताबिक हर साल भारत में 2000 विदेशी बच्चों का जन्म होता है, जिनकी सरोगेट मां भारतीय होती हैं। देश भर में करीब 3,000 क्लीनिक विदेशी सरोगेसी सर्विस मुहैया करा रहे हैं।
    विधेयक के लाभ
    विधेयक ऐसे समय में आया है जब इस विषय के लिए एक कानून की बड़ी जरूरत है|यह विधेयक सरोगेसी के व्यावसायीकरण को रोकने पर केंद्रित है|यह सरोगेसी का प्रभावी विनियमन, वाणिज्यिक सरोगेसी की रोकथाम और जरूरतमंद बांझ दंपतियों के लिए नैतिक सरोगेसी की अनुमति सुनिश्चित करेगा।
    आलोचना

  • विधेयक एक महिला की प्रजनन अधिकारों पर सवाल उठता है।बिल एकल माता पिता ,समलैंगिकों को सरोगेट के माध्यम से पितृत्व से बंचित करता है |
  • बांझपन सरोगेसी शुरू करने के लिए अनिवार्य नहीं हो सकता है।यह नागरिकों के लिए विकल्प उपलब्ध की स्वतंत्रता का उल्लंघन हैं |
  • बिल देश और इसके साथ जुड़े लोगों में संपन्न चिकित्सा पर्यटन पर असर करने के लिए बाध्य है।
  • विधेयक कई अनुत्तरित सवाल छोड़ देती हैं जैसे किराए के माँ को स्वास्थ्य सुरक्षा सुनिश्चित करना आदि |
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    Exam Name Exam Date
    IBPS PO, 2017 7,8,13,14 OCTOBER
    UPSC MAINS 28 OCTOBER(5 DAYS)
    CDS 19 june - 4 FEB 2018
    NDA 22 APRIL 2018
    UPSC PRE 2018 3 JUNE 2018
    CAPF 12 AUG 2018
    UPSC MAINS 2018 1 OCT 18(5 DAYS)


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