झारखण्ड पुनर्स्थापन एवं पुनर्वास नीति & झारखण्ड औद्योगिक नीति

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झारखण्ड पुनर्स्थापन एवं पुनर्वास नीति & झारखण्ड औद्योगिक नीति

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प्रस्तावना

18 दिसम्बर को झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की प्रारंभिक परीक्षा हैं | इस परीक्षा में पेपर II में झारखण्ड राज्य से सम्बंधित प्रश्न पूछे जाएंगे जो अभ्यर्थी के लिए काफी महत्वपूर्ण हो गया है |इस लेख और आने वाले कुछ लेखों में हम झारखण्ड विशेष से सम्बंधित कुछ विषयों पर चर्चा करेंगे और उम्मीद करेंगे की इससे आपको झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की प्रारंभिक परीक्षा में कुछ सहायता मिलेगी | इस लेख में हम झारखण्ड पुनर्स्थापन एवं पुनर्वास नीति & झारखण्ड औद्योगिक नीति व कुछ अन्य प्रमुख नीतियों पर चर्चा करेंगे |

पुनर्स्थापन एवं पुनर्वास नीति 2008

  • राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग झारखण्ड के द्वारा बनाया गया |
  • प्रस्तावना

    औद्योगिक विकास ,उद्योगों व खानों की स्थापना के लिए काफी भूमि अर्जित की गई, जिससे बड़ी संख्या में स्थानीय लोग विस्थापित हुए और ये स्थानीय लोग अपनी भूमि ,वन , जल संसाधन ,सामुदायिक पहचान ,कला एवं जीविकोपार्जन को खो बैठे | स्थानीय लोगों के हितों की रक्षा के लिए सरकार के द्वारा पुनर्स्थापन एवं पुनर्वास नीति 2008 लाया गया |

    पुनर्स्थापन एवं पुनर्वास नीति 2008 के उद्देश्य

  • न्यूनतम विस्थापन करना और कम से कम विस्थापन के विकल्प को बढ़ावा देना |
  • प्रभावित व्यक्ति को पर्याप्त पुनर्वास पैकेज सुनिश्चित करना तथा पुनर्वास प्रक्रिया का तेज़ी से कार्यान्वयन सुनिश्चित करना |
  • प्रभावित व्यक्ति को बेहतर जीवन स्तर उपलब्ध कराने तथा सतत रूप से आय मुहैया कराने हेतु संयुक्त प्रयास करना |
  • पुनर्वास कार्यों को विकास योजनाओं तथा कार्यान्वयन प्रक्रिया के साथ एकीकृत करना |
  • जहाँ पर विस्थापन भूमि अर्जन के कारण होता है , वहां पर अर्जनकारी निकाय तथा प्रभावित परिवारों के बीच आपसी सहयोग के ज़रिए सौहाद्रपूर्ण सम्बन्ध स्थापित करना चाहिए |
  • समिति

    पुनर्स्थापन एवं पुनर्वास करने के लिए राज्य स्तर पर व जिला स्तर पर पुनर्स्थापन एवं पुनर्वास समिति बनाई गई है |इस समिति की कार्यों और इसकी बैठकों और उनसे सम्बंधित अन्य मामलों को विनियमित करने की प्रक्रिया का निर्धारण राज्य सरकार के द्वारा किया जाएगा |

    न्यायाधिकरण

  • पुनर्स्थापन एवं पुनर्वास नीति 2008 के अन्तर्गत शामिल मामलों में पैदा होने वाली शिकायतों का समयवद्ध रूप से निपटान करने के लिए राज्य सरकार द्वारा तीन सदस्यीय न्यायाधिकरण की नियुक्ति की जाएगी |
  • कोई भी व्यक्ति पुनर्वास लाभ मुहैया न करने के प्रति अपनी शिकायत न्यायाधिकरण के समक्ष प्रस्तुत कर सकता है |
  • न्यायाधिकरण ,पुनर्स्थापन एवं पुनर्वास समिति अथवा पुनर्स्थापन एवं पुनर्वास प्रशासक के निर्णय के विरुद्ध ऐसा निर्देश दे सकता है जिसे वह नीति के कार्यान्वयन के लिए उचित समझे |
  • निगरानी तंत्र
    1.राज्य स्तरीय पुनर्स्थापन एवं पुनर्वास परिषद्

  • सदस्य– मुख्यमंत्री (अध्यक्ष) सम्बंधित विभाग के मंत्री ,सम्बंधित विभाग के सचिव,राष्ट्रीय स्तर के विशेषज्ञ|
  • कार्य – पुनर्स्थापन एवं पुनर्वास नीति 2008 के किर्यान्वयन के सम्बन्ध में परामर्श देना व समीक्षा करना |
  • राज्य स्तरीय पुनर्स्थापन एवं पुनर्वास परिषद् एक वर्ष में दो बैठके होगी |
  • 2.अनुश्रवण समिति

    पुनर्स्थापन एवं पुनर्वास योजनाओं के कार्यान्वयन की प्रगति की समीक्षा तथा निगरानी करने के लिए यह समिति बनाई गई है | सम्बंधित विभाग के सचिव इस विभाग के सदस्य होंगे |

    झारखण्ड औद्योगिक नीति

    प्रस्तावना

    झारखण्ड राज्य के सृजन के बाद झारखण्ड औद्योगिक नीति 2001 को उद्योग विभाग के द्वारा कार्यान्वित किया गया | उद्योग नीति 2001 का मूल उद्देश्य राज्य के औद्योगीकरण के लिए उपलब्ध संसाधनों को सुनियोजित और व्यवस्थित रूप से उपयोग करना था | इसका लक्ष्य प्राकृतिक संसाधनों का मूल्य वर्धन एवं मानव संसाधनों का प्रभावी तरीके से उपयोग कर राज्य के विकास के लिए अतिरिक्त्त रोजगार तथा संसाधन उपलब्ध कराना था |

    उपलब्धि
    इस नीति की अवधी के दौरान औद्योगीकरण के क्षेत्र में विकास को हासिल किया गया | इस अवधी के दौरान लगभग 28 हज़ार करोड़ रुपए के अनुमानित निवेश के साथ 26 मेगा उद्योग , 106 वृहत व माध्यम उद्योग एवं 18109 सूक्ष्म एवं लघु उद्योग स्थापित किए गए जिससे लगभग 63000 लोगों को इन उद्योगों में रोजगार मिला | जिसके परिणामस्वरूप लोगों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार के साथ साथ राजस्व संग्रह में भी योगदान मिला |

    झारखण्ड औद्योगिक नीति 2012

    उद्देश्य

  • झारखण्ड को निवेशकों के पसंदीदा निवेश स्थल में बदलना और राज्य के स्थायी औद्योगिक विकास को बढ़ावा देना |
  • बड़े उद्योगों और MSME के बीच सम्बन्ध की स्थापना करना |
  • प्रमुख औद्योगिक इलाकों में उद्योगों के विकास के लिए टिकाऊ उपभोक्ता वस्तुएं ,इंजीनियरिंग सामान आदि के विनिर्माण की गतिविधि को बढ़ावा देना |
  • राज्य में खनिज और अन्य प्राकृतिक संसाधनों के सरवोत्कृष्ट उपयोग को सुविधाजनक बनाना |
  • औद्योगिक विकास में अनुसूचित जाती अनुसूचित जनजाति और समाज के अन्य वंचित वर्गो की भागीदारी सुनिश्चित करना |
  • बागवानी पुष्पोत्पादन और खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों में राज्य के अनुकूल परिस्थिति का उपयोग करना |
  • उन्नत उत्पादन के लिए औद्योगिक इकाइयों के तकनिकी उन्नयन और सोध को बढ़ावा देना |
  • राज्य के रुग्ण औद्योगिक इकाइयों को पुनर्जीवित करना |
  • किसी क्षेत्र के पिछड़ेपन की वजह से सामाजिक – आर्थिक विकृतियों को रोकने के लिए संतुलित क्षेत्रीय विकास सुनिश्चित करना |
  • PPP मोड में औद्योगिक पार्क / समूह /औद्योगिक क्षेत्रों को विकसित करना |
  • मानव संसाधन विकास कार्यक्रम और अन्य कौसल विकास कार्यक्रम के तहत इंजीनियरिंग कॉलेजो /मेडिकल कॉलेजो / प्रबंधन संस्थानों में निजी निवेश को बढ़ावा देना |
  • रणनीति

  • औद्योगिक और सम्बद्ध सामाजिक बुनियादी ढांचे के विकास के लिए परिवेश तैयार करना और उसे सक्षम बनाना |
  • समयबद्ध अनुमतियों के लिए सिंगल विंडो सिस्टम का विकास और परिचालन करना |
  • राजकोषीय रियायत और लाभों का युक्तिकरण |
  • उद्यमशीलता विकास कार्यक्रम पर जोर देना
  • झारखण्ड की स्थानीयता (डोमेसाइल )नीति -2016

    मुख्य बिंदु

  • झारखण्ड की भौगोलिक सीमा में निवास करने वाले सभी व्यक्ति जिनका स्वयं या पुर्वज का नाम गत सर्वे या खतियान में दर्ज हो वो झारखण्ड के स्थानीय माने जाएंगे |
  • ऐसे निवासी जो भूमिहीन है प्रचलित भाषा ,संस्कृति ,परंपरा के आधार पर ग्राम सभा की तरफ से पहचान किए जाने पर स्थानीय कहलाएंगे |
  • झारखण्ड के ऐसे निवासी जो व्यापार , नियोजन या अन्य कारणों से झारखण्ड में पिछले 30 साल या उससे अधिक समय से निवास करते हो और अचल संपत्ति अर्जित किया हो ,ऐसे व्यक्ति के पति /पत्नी/संतान झारखण्ड के स्थानीय कहलाएंगे |
  • ऐसे व्यक्ति जिनका जन्म झारखण्ड में हुआ हो और जिन्होंने अपनी मैट्रिक स्तर की पूरी शिक्षा झारखण्ड में स्थित मान्यता प्राप्त संस्थान से की हो , वे स्थानीय कहलाएंगे |
  • झारखण्ड के किसी संवैधानिक या विधिक पदों पर नियुक्त व्यक्ति , भारत सरकार के पदाधिकारी या कर्मचारी जो झारखण्ड में कार्यरत हो या उनकी पति /पत्नी/संतान स्थानीय कहलाएंगे |
  • झारखण्ड ऊर्जा नीति 2011
    झारखण्ड ऊर्जा नीति 2011 का मुख्य उद्देश्य उपभक्ताओं की आवश्यकताओं की पूर्ति करना और विश्वसनीय ,गुणवत्तयुक्त व किफायती दर पर ऊर्जा की उपलब्धता को सुनिश्चित करना है | राज्य के सभी गांव एवं घरो का शीघ्र विधुतीकरण कर ऊर्जा की आपूर्ति को सुनिश्चित करना |

    झारखण्ड पर्यटन नीति 2015

    झारखण्ड पर्यटन नीति का मुख्य उद्देश्य राज्य में रोजगार के अवसरों का निर्माण करना ,राज्य की आय में वृद्धि व पर्यटकों की संख्या को बढ़ाना है

    झारखण्ड निर्यात नीति 2015
    मुख्य उद्देश्य शीघ्र एवं उच्च निर्यात को प्रोत्साहन देना एवं देश के कुल निर्यात में राज्य की भागीदारी को 2019 तक २% लाना है | एक प्रमुख उद्देश्य वैश्विक बाजार में स्थान बनाए रखना और निर्यात इकाइयों को नई तकनीको से लैस करना है |

    झारखण्ड खाद्य प्रसंस्करण नीति 2015
    झारखण्ड खाद्य प्रसंस्करण नीति 2015 का मुख्य लक्ष्य खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना के लिए मूलभूत सुविधाओं को उपलब्ध कराना , निवेश को प्रोत्साहित करना ,तकनिकी सहायता प्रदान करना ,अनुदान देना आदि है | कृषि और उसके सहयोगी क्षेत्रों का विकास करना है |

    झारखण्ड की स्टार्टअप पालिसी 2016 by Department of IT & e-gov

    मुख्य बिंदु

  • 1000 सीधी स्टार्टअप व 1500 वर्चुअली स्टार्टअप कार्यक्रम पर काम किया जाएगा |
  • राज्य में इक्यूवेशन सेंटर खोलने के लिए सूचना एवं प्रौद्योगिकी ने 250 करोड़ रुपए दिए है |इसके अलावा PPP के आधार पर भी पैसे की व्यवस्था की जाएगी
  • राज्य के 10 प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों को इंक्यूवेशन सेंटर खोलने के लिए 50-50 लाख रुपये का अनुदान दिया जायेगा। यह राशि प्रत्येक शिक्षण संस्थान को पांच वर्ष तक मिलेगी।
  • यह नीति 5 साल के लिए मान्य है |
  • COMMENTS (1 Comment)

    YADVENDRA Singh Dec 7, 2016

    Thank you sir .

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    Exam Name Exam Date
    IBPS PO, 2017 7,8,13,14 OCTOBER
    UPSC MAINS 28 OCTOBER(5 DAYS)
    CDS 19 june - 4 FEB 2018
    NDA 22 APRIL 2018
    UPSC PRE 2018 3 JUNE 2018
    CAPF 12 AUG 2018
    UPSC MAINS 2018 1 OCT 18(5 DAYS)


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