भारतीय पुनर्वास परिषद् अधिनियम, Rehabilitation Council of India Act

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भारतीय पुनर्वास परिषद् अधिनियम, 1992 और संशोधन अधिनियम, 2000

  • भारतीय पुनर्वास परिषद् अधिनियम पेशेवर पुनर्वास कर्मियों के प्रशिक्षण के नियमन और मान्यता प्राप्त पुनर्वास योग्यताएं रखने वाले पेशेवर पुनर्वास कर्मियों का नामांकन करने के लिए एवं केंद्रीय पुनर्वास पंजिका के संधारण के लिए भारतीय पुनर्वास परिषद के गठन की व्यवस्था करता है।
  • अधिनियम यह सुनिश्चित करने का प्रयास करता है कि नि:शक्त व्यक्तियों का उपचार योग्य कार्मिकों द्वारा किया जाये और यह प्रत्यायन (एक्रीडीशन) तथा गुणवत्ता नियंत्रण सुविधा के रूप में कार्य करता है।
  • यह अधिनियम परिषद के गठन, सदस्यता और कार्यों का विस्तार से प्रतिपादन करता है। इस अधिनियम की एक सर्वाधिक महत्वपूर्ण विशेषता है – पेशेवर पुनर्वास कर्मियों के लिए विश्वविद्यालय या अन्य संस्था द्वारा प्रदान की गई योग्यताओं को मान्यता देना।
  • इस अधिनियम में पाठयक्रमों और विश्वविद्यालयों संस्थाओं के नामों के साथ मान्यता प्राप्त पुनर्वास योग्यताओं की विस्तृत सूची दी गई है। इसके साथ ही यह अधिनियम सरकार में या किसी संस्था में पद-ग्रहण की दृष्टि से और देश के किसी भी भाग में पेशेवर पुनर्वास कर्मियों के रूप में कार्य करने के मान्यता-प्राप्त योग्यताओं वाले पेशेवर पुनर्वास कर्मियों के अधिकारों को निर्धारित करता है।
  • अधिनियम के अनुसार पुनर्वास परिषद के मुख्य कार्य इस प्रकार हैं –

    • पुनर्वास योग्यता को मान्यता देने के लिए शिक्षा के न्यूनतम स्तर सुनिश्चित करना,
    • केंद्रीय पुनर्वास पंजिका में पेशेवर कर्मियों का पंजीकरण करना,
    • पेशेवर आचार संहिता के मानदंड निर्धारित करना और केंद्रीय पुनर्वास पंजिका से नामों को हटाना।
  • भारतीय पुनर्वास परिषद (संशोधन) अधिनियम, 2000 को पिछले अधिनियम में सुधार करने और उसके कार्यान्वयन कार्यतंत्र में सुधार हेतु लाया गया था।
  • इस अधिनियम में शामिल महत्वपूर्ण संशोधनों में पेशेवर पुनर्वास कर्मियों के अनुश्रवण और प्रशिक्षण के तथा पुनर्वास और विशेष शिक्षा में शोध के घटक निगरानी के द्वारा, इस परिषद के कार्य के दायरे का विस्तार करना शामिल है।
  • इसके अलावा इसमें नि:शक्त व्यक्ति (समान अवसर, अधिकारों का संरक्षण और पूर्ण भागीदारी) अधिनियम, 1995 में दी गई नि:शक्तता की परिभाषा को अपनाया गया है और यह उल्लेख किया गया है कि परिषद् का अध्यक्ष नि:शक्तता के क्षेत्र में अनुभव रखने वाला पेशेवर योग्यता वाला व्यक्ति होना चाहिए।
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