झारखंडी कला संस्कृति एवं साहित्य

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प्रस्तावना
झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की प्रारंभिक परीक्षा में मात्रा 8 दिन रह गए है आपने जो भी पढाई की है उसका एक बार रिविज़न कर ले | इसी क्रम में आज हम यहाँ पर झारखंडी कला संस्कृति व साहित्य पर चर्चा कर रहे है | और ये उम्मीद करते है की आपको परीक्षा में इससे कुछ सहायता मिलेगी |

चित्रकला
मुख्यतः तीन प्रकार की चित्रकला—

जादोपटिया चित्रकारी —

  • कपड़ा या कागज के छोटे छोटे टुकड़ो को जोड़कर बनाए जाने वाले पट्टियों पर की जाने वाली चित्रकारी |
  • मुख्यतः संथाल जनजाति में |
  • कोहबर चित्रकारी —

  • गुफा में विवाहित जोड़ा दिखाने के लिए |
  • सिकी देवी का विशेष चित्रण |
  • बिरहोर जनजाति में |
  • सोहराय चित्रकारी —

  • सोहराय पर्व से सम्बंधित , दिवाली के एक दिन बाद मनाया जाता है |
  • पशुओं को श्रद्धा अर्पित करने का पर्व |
  • देवता प्रजाति / पशुपति का विशेष चित्रण |
  • लोक गीत
    कुछ प्रमुख लोक गीत व उसके गाने के अवसर —

    इसके अलावा भी बहुत सरे झारखण्ड के लोक गीत है पर 1 नंबर के लिए उतना कौन रट्टा मारता है और भी बहुत सारी चीजे है पढ़ने के लिए लोक गीत के अलावा |

    झारखण्ड के नृत्य

    छऊ नृत्य

  • मुख्यतः सरायकेला , मयूरभंज व पुरुलिया जिले में |
  • इस नृत्य का विदेश में सर्वप्रथम प्रदर्शन 1938 में सरायकेला के राजकुमार सुधेन्दु नारायण सिंह ने करवाया था |
  • इस नृत्य में पौराणिक व ऐतिहासिक कथाओं के मंचन के लिए पात्र तरह तरह के मुखौटे धारण करते है और बिना संवाद के अभिनय के द्वारा अपने भाव को व्यक्त करते है |
  • जदुर नृत्य

  • यह नृत्य कोलोम सिंग बोंगा पर्व से सरहुल पर्व (फागुन से चैत तक) तक चलता है |यह स्त्री पुरुष का सामूहिक नृत्य है , जिसमे वे धीमी गति से लय ताल में नाचते हैं |
  • जपी/शिकार नृत्य

  • यह नृत्य सरहुल पर्व के बाद आरम्भ होता हैं व आषाढ़ी पर्व तक चलता हैं
  • करमा / लहुसा नृत्य –

  • यह नृत्य असाढ़ से सोहराय तक मनाया जाता हैं |यह एक सामूहिक नृत्य हैं | इसमें 8 पुरुष व 8 स्त्रियां भाग लेती हैं |
  • कुछ और प्रमुख नृत्य
    माघानृत्य — शीत ऋतु में
    पाइका नृत्य
    जतरा नृत्य – समूहित नृत्य

    झारखण्ड के प्रमुख लोक नाट्य

    झारखण्डी साहित्य एवं साहित्यकार
    झारखण्डी साहित्य को हम तीन भागों में बाँट कर समझने की कोशिश करेंगे —
    जनजातीय , सदानी और हिंदी साहित्य —
    जनजातीय भाषा
    जनजातीय साहित्य में हम निम्न भाषा / बोली के बारे में पढ़ेंगे —

    1.संथाली

  • यह संथाल जनजाति की भाषा है |
  • संथाली अपने भाषा को होड़ रोड़ कहते है |
  • इनका अपना व्यकरण है |
  • इनकी अपनी लिपि है जिसे ओलचिकी कहते है |इस लिपि का अविष्कार रघुनाथ मुर्मू द्वारा 1941 में किया गया |
  • 92 वे संविधान संसोधन के द्वारा संथाली भाषा को 8 वीं अनुसूची में स्थान दिया गया |
  • संथाली भाषा के प्रमुख रचनाकार है –

  • जे फिलिप्स ,इ जी मन्न ,पकसुले, कैम्पबेल , मैकफेल , डोमन साहू समीर , केवल सोरेन |
  • 2.मुण्डारी

  • मुण्डा जनजाति की भाषा का नाम मुण्डारी है | मुण्डारी भाषा के चार रूप मिलते है |
  • हसद मुण्डारी , तमड़िया मुण्डारी , केर मुण्डारी , नगुरी मुण्डारी |
  • मुण्डारी साहित्य के प्रमुख रचनाकार

  • जे सी व्हिटली , ए नॉट्रोट , एस जे डी स्मेट , फादर हॉफमैन , एस सी रॉय , W J आर्चर ,पी के मित्रा |
  • हो :

  • हो जनजाति की भाषा का नाम ‘हो’ ही है |इस भाषा की अपनी शब्दावली एवं उच्चारण पद्धति है |
  • ‘हो’ साहित्य के प्रमुख रचनाकार

  • भीमराव सुलंकी , सी एच बोम्बास , बोस , लियोनल बरो ,w g आर्चर,
  • कुडुख /उरांव

  • उरांव जनजाति की भाषा का नाम कुडुख या उरांव है |इस भाषा का लोक साहित्य बहुत संपन्न है |
  • प्रमुख रचनाकार

  • ओ फ्लैक्स , फड्रिनेंड होन ,ए ग्रीनर्ड |

  • खड़िया

  • खड़िया जनजाति की भाषा का नाम खड़िया है |
  • इसकी लिखित साहित्य विकासशील अवस्था में है |
  • प्रमुख रचनाकार

  • गगन चंद्र बनर्जी ,एस सी रॉय ,एच फ्लोर ,w C आर्चर
  • सदानी भाषा

    खोरठा

  • इसका सम्बन्ध प्राचीन खरोष्ठी लिपि से जोड़ा जाता है |
  • इसके अन्तर्गत रामगढ़िया ,देसवाली ,गोलवारी , खटहि आदि बोलियां आती है |
  • राजा – रजवाड़ो , राजकुमार- राजकुमारियां आदि की कथाएं खोरठा भाषा में मिलती है |
  • प्रमुख रचनाकार

  • भुनेश्वर दत्त शर्मा ,श्री निवास पानुरी आदि |
  • पंचपरगनिया

  • पंचपरगना क्षेत्र की प्रचलित भाषा है जिसके अन्तर्गत तमाड़ , बुंडू ,राहे, सोनाहातू एवं सिल्ली आते है |
  • प्रमुख रचनाकार

  • विनोदिया कवी , विनोद सिंह , गोरंगिया , सोबरन कवि , बरजू राम
  • कुरमाली या करमाली

  • मूलतः कुर्मी जाती की भाषा है |
  • इस लोक साहित्य समृद्ध है |
  • इसका लिखित साहित्य बहुत कम है |
  • रचनाकार

  • जगराम, बुध्धु महतो ,निरंजन महतो
  • नागपुरी

  • यह भाषा सदरी गँवारी के नाम से भी जानी जाती है |
  • यह संपर्क भाषा के रूप में पुरे झारखण्ड में प्रचलित है |
  • यह नागवंशी राजाओं की मातृभाषा है |
  • इसका अपना लिखित साहित्य है |
  • प्रमुख रचनाकार

  • व्हिटली , कोनराड , बुकाउट ,हेनरिक फ्लोर ,रघुनाथ नृपति , महाकवि घासीराम ,हुलास राम ,कंचन आदि
    1. Thanks alot mentors…… It ll b really helpful for all of us….. Thanks again. Nd plz if possible or do u have all jharkhand govt. Plan nd scheme plz help us regarding thst so…..

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