ब्रिटिश शासनकाल में बिहार में पाश्चात्य शिक्षा का विकास

  • Home
  • ब्रिटिश शासनकाल में बिहार में पाश्चात्य शिक्षा का विकास

ब्रिटिश शासनकाल में बिहार में पाश्चात्य शिक्षा का विकास

ब्रिटिश शासनकाल में बिहार में पाश्चात्य शिक्षा का विकास

भूमिका – शिक्षा के क्षेत्र में बिहार की विरासत गौरवशाली रही हैं. प्राचीन काल से ही शिक्षा में बिहार को एक विशिष्ट पहचान मिली हुई थी. आधुनिक काल में पाश्चात्य शिक्षा का विकास निर्णायक तरीके से हुआ. इस काल में 19 वीं सदी के दूसरे  दशक से बिहार में पाश्चात्य शिक्षा के क्षेत्र में प्रगति हुई और शिक्षा के तमाम केंद्र खुलते चले गए. पाश्चात्य शिक्षा का उद्देश्य अंग्रेजी भाषा में ज्ञान विज्ञान एवं साहित्य की शिक्षा प्रदान करना था.

पाश्चात्य शिक्षा का विकास- आधुनिक भारत के शिक्षा के क्षेत्र में 1835 एक महत्वपूर्ण वर्ष था. लॉर्ड विलियम बेंटिक ने घोषणा की कि शिक्षा के लिए जो कुछ भी कोश मंजूर हो उसे केवल अंग्रेजी शिक्षा के लिए ही खर्च करना सर्वोत्तम है. परिणामस्वरूप अंग्रेजी शिक्षा के लिए पूर्णिया, बिहारशरीफ, भागलपुर, पटना, आरा, छपरा आदि में जिला स्कूल स्थापित हुए. मुजफ्फरपुर जिला स्कूल 1845 में स्थापित हुआ.संथाल परगना के पाकुड़ का उच्च विद्यालय 1859 में स्थापित हुआ था.

1854 के चार्ल्स वुड डिस्पैच के अनुसार 1858 में कलकत्ता विश्वविद्यालय स्थापित हुआ.वुड डिस्पैच में व्यावसायिक शिक्षा के महत्व और तकनीकी विद्यालयों की स्थापना की आवश्यकता पर बल दिया गया था. 1863 में पटना कॉलेज की स्थापना हुई. 1917 में पटना विश्वविद्यालय की स्थापना की गई. पटना कॉलेज के कला विभाग के स्नातकोत्तर विभाग 1917 ई. में और भौतिकी तथा रसायन विज्ञान के विभाग 1919 ई. में खोले गए. विज्ञान संबंधित उच्च शिक्षा देने के लिए 1928 में एक स्वतंत्र विद्यालय की हैसियत से पटना साइंस कॉलेज स्थापित किया गया. 1925 में पटना मेडिकल कॉलेज की स्थापना की गई तथा 1947 में दरभंगा मेडिकल कॉलेज की स्थापना की गई.

सैडलर आयोग ने व्यावहारिक विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी डिप्लोमा एवं डिग्री की उपाधि का प्रबंध करने की बात की तथा व्यावसायिक कॉलेज खोलने की बात कही. पूसा में 1902 में कृषि संबंधी शोध एवं प्रयोग का केंद्र स्थापित किया गया. पशुधन के विकास के लिए पटना में पशु चिकित्सा कॉलेज की स्थापना की गई. खनिज संसाधनों के उचित दोहन के लिए 1926 में इंडियन स्कूल ऑफ माइंस, धनबाद की स्थापना की गई.

शिक्षा के प्रचार प्रसार में स्वयंसेवी संस्थाओं तथा प्रमुख व्यक्तियों ने अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. आर्य समाज, ब्रह्म समाज तथा ईसाई मिशनरियों का इस में महत्वपूर्ण योगदान रहा. आर्य समाज के द्वारा वैदिक शिक्षा के पुनरुत्थान के लिए डीएवी स्कूल की श्रृंखला स्थापित  की गयी. ब्रह्म समाज के तत्वाधान में पटना में राम मोहन रॉय सेमिनरी की स्थापना की गई.

मुसलमानों के बीच शिक्षा प्रसार के कई संगठन बने. इनकी प्रेरणा का स्रोत अलीगढ़ आंदोलन था जिसके नेता सर सैयद अहमद खान मुस्लिम समाज में जागृति का संचार कर रहे थे. मुजफ्फरपुर में ‘बिहार साइंटिफिक सोसायटी’ की स्थापना इमदाद अली खान के द्वारा की गई. पटना में मोहम्मडन एजुकेशन सोसाइटी का गठन हुआ.

महिला शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए कटक तथा बांकीपुर में कन्या विद्यालय (इंटरमीडिएट श्रेणी) खोले गए. और यह सिफारिश की गई कि प्रत्येक कमिश्नरी में कम से कम एक कन्या महाविद्यालय खोला जाए.

आलोचना

  • सरकार के द्वारा शिक्षा पर उठाए गए कदम सीमित  तथा अपर्याप्त थे.
  • शिक्षा केंद्र कुछ प्रमुख स्थानों पर थे तथा उनका फैलाव पूरे राज्य में नहीं हुआ था.
  • तकनीकी शिक्षा का विकास नगन्य था.
  • महिला शिक्षा में सुधार के लिए किए गए प्रयास अपर्याप्त तथा निराशाजनक थे.

COMMENTS (1 Comment)

Tinku kumar May 10, 2019

धन्यवाद सर

LEAVE A COMMENT

Search


Exam Name Exam Date
IBPS PO, 2017 7,8,13,14 OCTOBER
UPSC MAINS 28 OCTOBER(5 DAYS)
CDS 19 june - 4 FEB 2018
NDA 22 APRIL 2018
UPSC PRE 2018 3 JUNE 2018
CAPF 12 AUG 2018
UPSC MAINS 2018 1 OCT 18(5 DAYS)


Subscribe to Posts via Email

Enter your email address to subscribe to this blog and receive notifications of new posts by email.