नेशनल कमीशन फॉर सोशल एंड एजुकेशनली बैकवर्ड क्लासेस (NSEBC)

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केंद्र ने सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़ा वर्ग के लिए राष्ट्रीय आयोग को मंजूरी दी:

  • केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़ा वर्ग के लिए राष्ट्रीय आयोग (NSEBC) को एक संवैधानिक संस्था के रूप में स्थापित करने की मंजूरी दे दी है।
  • संस्था को संवैधानिक दर्जा देने वाला विधेयक संसद में पेश किया जाएगा। आयोग में एक अध्यक्ष, एक उपाध्यक्ष और तीन अन्य सदस्य होंगे
  • इस फैसले के बाद अब सामाजिक और शैक्षणिक तौर पर पिछड़े लोगों के हित में काम करने के लिए नेशनल कमीशन फॉर सोशल एंड एजुकेशनली बैकवर्ड क्लासेस (NSEBC) का गठन किया जाएगा।
  • इस फैसले से देश में ओबीसी कैटेगरी के लिए भी एससी-एसटी कमीशन की तर्ज पर NSEBC का गठन किया जाएगा। NSEBC एक संवैधानिक संस्था होगी और ओबीसी सूची में नई जाति का नाम जोड़ने अथवा हटाने के लिए संसद की मंजूरी जरूरी हो जाएगी।
  • NSEBC के गठन की कैबिनेट से मंजूरी के बाद अब केन्द्र सरकार संविधान में संशोधन प्रस्ताव लाएगी। फिलहाल ओबीसी सूची में जातियों को जोड़ने अथवा हटाने का काम सरकार के स्तर पर किया जाता है। गौरतलब है कि केन्द्र सरकार का यह फैसला जाट आरक्षण समेत देश में ओबीसी आरक्षण की अन्य मांगों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।
  • सामाजिक और आर्थिक तौर पर पिछड़े लोगों के लिए राष्ट्रीय कमीशन का गठन किया जाएगा। इसके लिए संविधान में संशोधन कर अनुच्छेद 338B जोड़ा जाएगा। संविधान के अनुच्छेद 341 और 342 में अनुच्छेद 342A को जोड़ते हुए प्रावधान किया जाएगा कि केन्द्र सरकार की ओबीसी सूची में जाति का नाम जोड़ने अथवा हटाने के लिए संसद की मंजूरी लेना आवश्यक होगा। संविधान के अनुच्छेद 366 में 26C प्रावधान को जोड़ते हुए देश में सामाजिक और आर्थिक तौर पर पिछड़े लोगों की परिभाषा दी जाएगी।
  • पहले से मौजूद नैशनल कमीशन फॉर बैकवर्ड क्लासेस एक्ट, 1993 कानून को रिपील किया जाएगा। इस एक्ट के तहत गठित ओबीसी कमीशन को भंग किया जाएगा। संविधान में संशोधन के जरिए नए आयोग नैशनल कमीशन फॉर सोशल एंड एजुकेश्नली बैकवर्ड क्लासेस (NSEBC) का गठन किया जाएगा।
  • यह कदम उन मांगों के बाद उठाया गया है, जिसमें कहा गया था कि अनुसूचित जाति के लिए राष्ट्रीय आयोग और अनुसूचित जनजाति के लिए राष्ट्रीय आयोग जिस तरह से शिकायतें सुनता है उसी तरह पिछड़ा वर्ग के लिए राष्ट्रीय आयोग को ओबीसी वर्ग की शिकायतें सुनने की अनुमति देने के लिए संवैधानिक दर्जा दिया जाए। नरेंद्र मोदी सरकार की कैबिनेट ने जो फैसला लिया है जिससे देश की तमाम जाति आधारित नौकरियों से लेकर बाकी कई सुविधाओं में फर्क पड़ना तय है।

क्या है NSEBC?

  • 1985 तक पिछड़ा वर्ग आयोग गृह मंत्रालय के अंतर्गत आता था लेकिन उसके बाद इस आयोग को सामाजिक एवं अधिकारिता मंत्रालय के अंतर्गत जोड़ दिया गया।
  • अभी राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग के आयोग के अध्यक्ष वी. एश्वरैया हैं। इस आयोग में एक अध्यक्ष के अलावा तीन सदस्य भी होते हैं।
  • नए नियम के अनुसार अब संसद की मंजूरी के बाद ही ओबीसी सूची में बदलाव किया जा सकेगा। अध्यक्ष और तीनों सदस्यों का कार्यकाल तीन साल का होता है।
  • आयोग के अध्यक्ष पूर्व जज होते हैं, वहीं सदस्य विभिन्न क्षेत्रों में काम किए वही लोग सदस्य बन सकते हैं। जो कि ओबीसी जाति से आते हों।

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